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आज की आवश्यकता सार्वभौमिक शिक्षा

मनुष्य को विचारवान बनाने की श्रेष्ठ अवस्था बचपन है। इसलिए संसार के प्रत्येक बालक को विश्व एकता एवं विश्व शांति की शिक्षा बचपन से अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए। मानव इतिहास में वह क्षण आ गया है जब शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम बनकर विश्व भर में हो रही उथल-पुथल का समाधान विश्व एकता तथा विश्व शांति की शिक्षा द्वारा प्रस्तुत करना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र संघ के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान ने कहा था, ‘मानव इतिहास में 20वीं सदी सबसे खूनी तथा हिंसा की सदी रही है।’ इस सदी में मानव जाति के समूल विनाश की हद तक जाकर प्रथम तथा द्वितीय विश्व युद्ध लड़े गए। जर्मनी तथा फ्रांस के बीच विवाद ही प्रथम तथा द्वितीय विश्वयुद्ध का कारण बना। 20वीं सदी में अन्य राष्ट्रों के बीच भी अनेक युद्ध हुए। जापान के हिरोशिमा तथा नागासाकी में अमेरिका द्वारा गिराए गए परमाणु बम का महाविनाश, प्रथम तथा द्वितीय खाड़ी युद्ध, दक्षिण कोरिया तथा उत्तरी कोरिया के बीच युद्ध, इजराइल-फिलीपीन्स के बीच युद्ध, ईरान-इराक के बीच युद्ध हुआ। भारत-पाकिस्तान के बीच तीन बार युद्ध हुए। भारत-चीन के बीच युद्ध हुआ। 20वीं सदी में हुए इन सभी युद्धों में करोड़ों लोग मारे गए। युद्धों में अपार धनराशि व्यय हो रही है। आज हर देश दूसरे देश से अपनी सुरक्षा के नाम पर अपना रक्षा बजट प्रतिवर्ष बढ़ा रहा है। गरीब देश भी शस्त्रों की होड़ में शामिल हैं। मानव जाति को मिलकर अब सोचना चाहिए कि आखिर इन युद्धों से हमें मिलता क्या है? इन युद्धों से सबसे ज्यादा नुकसान छोटे-छोटे बच्चों एवं महिलाओं को होता है।

20वीं सदी में विश्व भर में युद्धों की विनाश लीला संकुचित राष्ट्रीयता के कारण हुई है, जिसके लिए सबसे अधिक दोषी हमारी शिक्षा है। विश्व के सभी देशों के स्कूल अपने-अपने देश के बच्चों को अपने देश से प्रेम करने की शिक्षा तो देते हैं लेकिन सारे विश्व से प्रेम करना नहीं सिखाते हैं। यदि विश्व सुरक्षित रहेगा तभी इसके देश सुरक्षित रहेंगे। विश्व के बदलते हुए परिदृश्य को देखने से ज्ञात होता है कि 21वीं सदी की शिक्षा का स्वरूप 20वीं सदी की शिक्षा से भिन्न होना चाहिए। 21वीं सदी की शिक्षा उद्देश्यपूर्ण होनी चाहिए जिससे सारी मानव जाति से प्रेम करने वाले विश्व नागरिक विकसित हों। इसलिए 21वीं सदी की शिक्षा का उद्देश्य प्रत्येक बालक के दृष्टिकोण को संकुचित राष्ट्रीयता से विकसित करके विश्वव्यापी बनाना होना चाहिए।

मनुष्य को विचारवान बनाने की श्रेष्ठ अवस्था बचपन है। इसलिए संसार के प्रत्येक बालक को विश्व एकता एवं विश्व शांति की शिक्षा बचपन से अनिवार्य रूप से दी जानी चाहिए। मानव इतिहास में वह क्षण आ गया है जब शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन लाने का सशक्त माध्यम बनकर विश्व भर में हो रही उथल-पुथल का समाधान विश्व एकता तथा विश्व शांति की शिक्षा द्वारा प्रस्तुत करना चाहिए। नोबेल पुरस्कार विजेता महान अर्थशास्त्री जान टिनबेरजेन के ये विचार बरबस हमारा ध्यान आकर्षित करते हैं कि ‘राष्ट्रीय सरकारें विश्व के समक्ष उपस्थित संकटों का हल अधिक समय तक नहीं कर पाएंगी। इन समस्याओं के समाधान के लिए विश्व सरकार की आवश्यकता है।’ महात्मा गांधी ने कहा था कि यदि हम विश्व से युद्धों को समाप्त करना चाहते हैं तो इसकी शुरुआत हमें बच्चों से करनी पड़ेगी। चूंकि युद्ध के विचार मानव मस्तिष्क में पैदा होते हैं। इसलिए हमें मानव मस्तिष्क में ही शांति के विचार डालने होंगे।

विश्व एकता की शिक्षा सबसे बड़ी आवश्यकता
यदि विश्व के सभी लोग अपने आपसी मतभेदों को एक-एक करके कम करें तथा एकता तथा शांति के आदर्शों के अंतर्गत एकताबद्ध हो जाएं तो विश्वव्यापी आतंकवाद ही नहीं वरन अशिक्षा, गरीबी, भुखमरी तथा पर्यावरण संबंधी समस्याओं का समाधान हो सकता है। गिनीज बुक ऑफ वल्र्ड रिकॉर्ड और यूनेस्को शांति शिक्षा पुरस्कार से सम्मानित सिटी मोन्टेसरी स्कूल ने अपना नैतिक उत्तरदायित्व समझते हुए विश्व के दो अरब बच्चों तथा आगे आने वाली पीढिय़ों के सुरक्षित भविष्य के लिए विगत 54 वर्षों से प्रयासरत है। सिटी मोन्टेसरी स्कूल का मानना है कि विश्व एकता तथा विश्व शांति की शिक्षा ही इस युग की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

समाधान युद्ध नहीं वरन परामर्श
राष्ट्रीयता तथा संप्रभुता आदि के नाम पर विश्व अलग-अलग टुकड़ों में बंट गया है। दूसरे राष्ट्र को जीतने तथा अपने को सुरक्षित बनाने के प्रयास में राष्ट्रों के बीच परमाणु शस्त्रों की होड़ बढ़ गई है। इसलिए विश्व के सभी राष्ट्रों का उत्तरदायित्व है कि वे विश्वव्यापी समस्याओं तथा राष्ट्रों के बीच आपसी मतभेदों का समाधान शांतिपूर्ण परामर्श से निकाले। जब तक विश्व में एकता और शांति का वातावरण नहीं निर्मित होगा, विश्व के दो अरब चालीस करोड़ बच्चों और आने वाली पीढिय़ों का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।

हर बच्चे को मिले संपूर्ण विकास की शिक्षा
सिटी मोन्टेसरी स्कूल एक आधुनिक विद्यालय का उत्तरदायित्व निभाते हुए बालक की भौतिक, सामाजिक और आध्यात्मिक तीनों वास्तविकताओं के लिए संतुलित विकास कर रहा है। यदि एक बालक को भौतिक, सामाजिक तथा आध्यात्मिक तीनों प्रकार की शिक्षाओं का संतुलित ज्ञान मिल जाए तो वह संसार का सबसे शक्तिशाली व्यक्ति अर्थात ‘टोटल क्वालिटी पर्सन’ बन सकता है। आज उद्देश्यपूर्ण शिक्षा द्वारा सारी दुनिया को बदलने के लिए प्रत्येक बालक को ‘टोटल क्वालिटी पर्सन’ के रूप में विकसित करना आवश्यक है।

भारतीय संविधान में है समाधान
दुनिया भर में अपने वर्चस्व के लिए देशों के बीच युद्धों की बढ़ती हुई आशंका के कारण आज संसार के लगभग दो अरब तथा चालीस करोड़ बच्चों का भविष्य सुरक्षित नहीं है। विश्व को सुरक्षित युद्धों से नहीं वरन प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कानून से बनाया जा सकता है। प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने वाली विश्व संसद तथा विश्व सरकार का गठन अति शीघ्र होना चाहिए। इस दिशा में हमारे विद्यालय द्वारा प्रतिवर्ष भारतीय संविधान के अनुच्छेद 51 पर विश्व के मुख्य न्यायाधीशों का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन विगत 13 वर्षों से प्रतिवर्ष आयोजित किया जा रहा है। वल्र्ड जुडीशियरी मानव जाति के सुरक्षित भविष्य की अंतिम आशा है। हमारे विद्यालय के 47,000 बच्चों की ओर से की जा रही विश्व के दो अरब तथा चालीस करोड़ बच्चों के सुरक्षित भविष्य की अपील को वल्र्ड जुडीशियरी का भारी समर्थन मिल रहा है। हमारा विश्वास है कि जगतगुरु भारत अपनी उदार संस्कृति, प्राचीन सभ्यता तथा अनूठे संविधान के अनुच्छेद 51 के आधार पर पूरे विश्व में शांति स्थापित करेगा।

हम अपने विद्यालय में विश्व के विभिन्न देशों के छात्रों को प्रतिवर्ष विभिन्न विषयों की अंतरराष्ट्रीय स्तर की 31 शैक्षिक प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने के लिए आमंत्रित करते हैं तथा हमारे विद्यालय के सर्वाधिक छात्र वर्ष भर दूसरे देशों में आयोजित शैक्षिक कार्यक्रमों में शामिल होते हैं। बच्चों की ‘वल्र्ड पार्लियामेंट’ का आयोजन हम अपने प्रत्येक शैक्षिक कार्यक्रम के प्रारंभ में करते हैं। बच्चों की इस वल्र्ड पार्लियामेंट में विभिन्न देशों के प्रतिनिधि बने बच्चे विश्व की समस्याओं तथा समाधान पर चर्चा करते हैं। प्रत्येक वल्र्ड पार्लियामेंट का एजेंडा अलग-अलग होता है। इनमें बच्चों को यह संकल्प कराया जा रहा है कि एक दिन दुनिया एक करूंगा, धरती स्वर्ग बनाऊंगा, विश्व शान्ति का सपना सच कर दिखलाऊंगा।

वसुधैव कुटुंब की परिकल्पना साकार होगी
विक्टर ह्यूगो ने कहा है कि ‘विश्व की सारी सैन्य शक्ति से अधिक शक्तिशाली वह विचार है जिसका समय आ गया है।’ इसलिए बच्चों को बाल्यावस्था से विद्यालय, परिवार तथा समाज के द्वारा यह विचार देना चाहिए कि ईश्वर एक है, सभी धर्म एक हैं तथा संपूर्ण मानवजाति एक है, सभी प्रकार के पूर्वाग्रह दूर हों, व्यक्ति स्वयं सत्य की खोज करे, एक सहायक विश्व भाषा हो, नारी तथा पुरुष समान हैं, विश्व की शिक्षा का स्वरूप एक हो, विज्ञान तथा धर्म में सामंजस्य हो, विश्व की एक अर्थव्यवस्था हो, एक प्रभावशाली विश्व न्यायालय का गठन हो, प्रभावी अंतरराष्ट्रीय कानून बनाने वाली विश्व संसद हो, विश्व की एक राजनीतिक व्यवस्था हो, एक भाषा, एक मुद्रा हो। विश्व सरकार बने तथा संस्कृतियों की विविधता की रक्षा हो। इस प्रकार एक न्यायपूर्ण विश्व व्यवस्था बनाकर निकट भविष्य में सारी वसुधा को कुटुंब बनाने की परिकल्पना साकार होगी।

 

डॉ. जगदीश गांधी

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