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नवरात्रि अखंड दीप प्रज्जवलन

नवरात्रि में वायुमंडल में देवी की शक्ति रूपी तरंगों का संचार होता है। दीप तेज का प्रतीक है। अत: दीप की ज्योति की ओर ये तरंगें आकर्षित होती हैं। दीप जलाने से इन तरंगों का वास्तु में निरंतर भ्रमण होता है तथा वास्तु में तेज की वृद्धि होती है। इससे श्रद्धालु सहज लाभान्वित होते हैं। अतएव, नवरात्रि में अखंड दीप प्रज्ज्वलित रखना महत्वपूर्ण है। यदि तेल के अभाव के कारण अथवा पवन के (हवा के) झोंके से दीप बुझ जाए, तो पुन: जलाएं तथा प्रायश्चित के रूप में देवी से प्रार्थना कर, उनका 108 अथवा 1000 बार नाम जप करें।

श्री दुर्गादेवी का जप
सर्व देवियों की निर्मित आदिशक्ति श्री दुर्गादेवी हैं। नवरात्रि में वायुमंडल में श्री दुर्गादेवी का तत्व नित्य की तुलना में 1000 गुना अधिक कार्यरत रहता है। देवी की आराधना तथा ‘श्री दुर्गा देव्यै नम:’ नाम जप अधिकाधिक एवं भावपूर्वक करने से, हमें इस काल में वर्धित देवी तत्व का लाभ भी सर्वाधिक होता है। ‘नाम जप से शक्ति एवं चैतन्य ग्रहण होने दें’ – ऐसी प्रार्थना देवी से समय-समय पर होने करें।

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