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अब दांत भी वाईफाई

वैज्ञानिक मनुष्य के दांतों के बीच एक ऐसा नकली दांत लगाने की सोच रहे हैं जो ब्ल्यूटूथ या वाईफाई ट्रांसमीटर की तरह काम करेगा। यह दांत मुंह की सारी हलचल का डेटा, किसी कंप्यूटर या स्मार्टफोन को प्रेषित कर देगा। इस उपकरण की मदद से डॉक्टर लोगों के व्यवहार और उनके खानपान की आदतों के बारे में सूचनाएं एकत्र कर सकेंगे। मसलन, उन्हें यह जानकारी मिल सकती है कि मोटापे से पीडि़त व्यक्ति कितनी बार खाता है। इस उपकरण की मदद से मरीज की सांस लेने की प्रक्रिया पर निगरानी रखी जा सकती है। इस दांत के प्रयोग से उन लोगों की मदद की भी जा सकती है, जिन्हें बोलने में कठिनाई होती है या जो स्पीच संबंधी विकारों से पीडि़त हैं।

नेशनल ताइवान यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर वैज्ञानिक हाओ-हुआ छू का कहना है कि मनुष्य का मुंह एक ऐसा अंग है जिसका निरंतर इस्तेमाल होता है। रोजमर्रा के कई महत्वपूर्ण कार्य मुंह द्वारा किए जाते हैं, जिनमें खाना, पीना, सांस लेना, बोलना और खांसना शामिल है। मुंह एक ऐसी खिड़की है, जिससे मनुष्य के स्वास्थ्य में झांका जा सकता है। मुंह में फिट किये जाने वाले संवेदी उपकरण डाक्टरों की कई तरह से मदद कर सकते हैं। नए उपकरण का प्रोटोटाइप फिलहाल वायरलैस नहीं है। अभी इसे पतले तारों के जरिये कंप्यूटर से जोड़ा जाता है। इस विशेष दांत को साफ करने और चार्ज करने के लिए बाहर निकालना जरुरी है।

परीक्षणों के दौरान रिसर्चरों ने हिफाजत के तौर पर दांत में एक अतिरिक्त तार लगाया, ताकि उसे धारण करने वाला व्यक्ति गलती से उसे निगल न बैठे। दांत का प्रयोग करने वाले लोगों से चबाने, खांसने, पीने और बोलने को कहा गया, ताकि यह पता लग सके कि डेटा एकत्र करने में यह उपकरण कितना सटीक और कारगर है। रिसर्चरों ने पता लगाया कि यह उपकरण 93 प्रतिशत की शुद्धता के साथ मुंह की विभिन्न गतिविधियों का वर्गीकरण करने में कामयाब रहा। रिसर्चरों का कहना है कि इस उपकरण में प्रत्येक व्यक्ति के हिसाब से कुछ फेरबदल करने पड़ेंगे, क्योंकि चबाते और बोलते वक्त हर व्यक्ति के मुंह में अलग-अलग ढंग से हलचल होती है।

एक और जहां ताइवान के वैज्ञानिक वाई-फाई दांत बनाने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं चीनी वैज्ञानिक असली दांत उगाने की कोशिश कर रहे हैं। गुआंगजू के बायोमेडिसिन इंस्टीट्यूट के वैज्ञानिकों ने चूहे की स्टेम कोशिकाओं से दांत उगाने का तरीका खोज लिया है, लेकिन इन स्टेम कोशिकाओं के स्रोत के बारे में सुन कर हर कोई नाक-मुंह सिकोड़ सकता है। उन्होंने दांत उगाने के लिए मूत्र में मौजूद स्टेम कोशिकाओं का इस्तेमाल किया है। ‘सेल रिजनरेशन’ पत्रिका में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक चीनी रिसर्चरों ने शरीर से मूत्र में पहुंचने वाली कोशिकाओं से ऐसी स्टेम कोशिकाएं तैयार कीं जो शुरूआती दांत बनाने में सक्षम थीं। उन्होंने इन कोशिकाओं को चूहों के गुर्दों में प्रत्यारोपित कर दिया। तीन हफ्ते के बाद ये स्टेम कोशिकाएं दांत जैसी संरचनाओं के रूप में विकसित होने लगीं, जिनमें पल्प और इनेमल जैसी चीजें मौजूद थीं।

दांत उगाने के लिए मूत्र की स्टेम कोशिकाएं का इसेमाल एक अजीबोगरीब तरीका है लेकिन टिशू इंजीनियरिंग के जरिए दूसरे दांत निर्मित करने के लिए चीनी वैज्ञानिकों की रिसर्च एकमात्र प्रयास नहीं है। ‘जर्नल ऑफ डेंटल रिसर्च’ के मुताबिक ब्रिटेन में हाल ही में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि मनुष्य का दांत उगाने के लिए मनुष्य के मसूड़ों की कोशिकाओं और चूहे की भ्रूण कोशिकाओं के मिश्रण का प्रयोग किया जा सकता है।
बहरहाल, चीनी विधि की कुछ सीमाएं भी हैं। नई संरचनाओं की मजबूती मानव दांत की तुलना में सिर्फ एक-तिहाई है और सफलता की दर सिर्फ 30 प्रतिशत है। रिसर्चरों को उम्मीद है कि चूहों की कोशिकाओं के बजाय मानव कोशिकाओं के इस्तेमाल से इन खामियों को दूर किया जा सकेगा। उनका यह भी मानना है कि यदि मरीज की खुद की कोशिकाओं का प्रयोग होता है तो शरीर द्वारा उन्हें अस्वीकार किए जाने का खतरा कम हो जाएगा। लेकिन दूसरे वैज्ञानिक स्टेम कोशिकाओं निर्मित करने के लिए चीनी वैज्ञानिकों द्वारा चुने गए स्रोत से सहमत नहीं हैं। लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज के रिसर्चर क्रिस मेसन का कहना है कि यह बहुत ही बदतर स्रोत है। सबसे पहले तो मूत्र में बहुत कम कोशिकाएं होती हैं और उन्हें स्टेम कोशिकाओं में बदलने की दर बहुत कम है। और फिर मूत्र में मौजूद बैक्टीरिया से प्रदूषण का जोखिम भी बढ़ जाएगा।

मुकुल व्यास

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