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दोनों तरफ प्रतिष्ठा बचाने की जंग

कांग्रेस अपनी सत्ता बरकरार रखने और भाजपा पिछली हार का बदला लेने के लिए जातिगत समीकरणों के साथ जिताऊ उम्मीदवारों की सूची तैयार करने तथा संभावित प्रतिद्वंद्वियों के मद्देनजर सूची में कांट-छांट करने में दिन-रात एक किए हुए हैं। दोनों तरफ टिकटार्थियों का मेला जुटा हुआ है।
राजस्थान में नई विधानसभा के गठन के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के साथ ही सभी राजनीतिक दलों के टिकटार्थी अपनी पार्टी आलाकमान के खुल जा सिम-सिम पिटारे का अपलक इंतजार कर रहे हैं। उधर, प्रमुख दल प्रत्याशी चयन की कवायद में माथा-पच्ची के बावजूद सत्ता संग्राम के इस खेल में अभी किसी नतीजे पर नहीं पहुंच पाए हैं। कांग्रेस अपनी सत्ता बरकरार रखने और भाजपा पिछली हार का बदला लेने के लिए जातिगत समीकरणों के साथ जिताऊ उम्मीदवारों की सूची तैयार करने तथा संभावित प्रतिद्वंद्वियों के मद्देनजर सूची में कांट-छांट के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं।

कांग्रेस ने दिल्ली में अजय माकन की अध्यक्षता में 7 व 8 अक्टूबर को स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में करीब 75 विधानसभा क्षेत्रों के प्रत्याशियों के बारे में चर्चा का एक दौर पूरा कर लिया है। अगली बैठक 15 व 16 अक्टूबर को होनी है। पार्टी हाईकमान की मुहर लगने के बाद ही प्रत्याशियों की सूची जारी किए जाने की संभावना है। कांग्रेस के अंदरूनी सूत्रों का यह दावा है कि लगभग 70 प्रत्याशियों के नाम फाइनल हो चुके हैं। कांग्रेस सरकार के गठन में सहायक बसपा एवं निर्दलीय विधायकों को पार्टी टिकट देने पर भी सिर फुटौव्वल हो रही है। भाजपा फिलहाल जयपुर में ही प्रत्याशियों के चयन हेतु मंथन कर रही है। प्रदेश अध्यक्ष वसुन्धरा राजे ने वरिष्ठ सहयोगियों के साथ सवाई माधोपुर में संघ के सरकार्यवाह भैय्या जी जोशी से विधानसभा चुनाव तथा प्रत्याशियों और चुनावी रणनीति के बारे में विचार-विमर्श किया है। भाजपा नेतृत्व को पूरी उम्मीद है कि इस बार सत्ता की नांव पर चढऩे में उसे संघ का पूरा आशीर्वाद एवं समर्थन मिलेगा। यह भी गौरतलब है कि 1980 में अपनी स्थापना के बाद से भाजपा राज्य में पहली बार सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों में चुनाव लड़ेगी। अब तक के चुनावों में हर बार पार्टी को अपने सहयोगी दलों के लिए सीटें छोडऩी पड़ती थीं। इस बार यहां गठबंधन वाले दलों की भूमिका नहीं है।

पिछले चुनाव में भाजपा को सत्ता से दूर रखने में सफल हुए बागी नेता सांसद डॉ. किरोड़ी लाल मीणा नेशनल पीपुल्स पार्टी (राजपा) के बैनर के साथ तीसरे मोर्चे से जुड़े दलों के सशक्त गठबंधन की कोशिश में लगे हंै। अपने प्रभाव वाले क्षेत्र में संभावित प्रत्याशियों के नाम उजागर करने के बावजूद मीणा भाजपा कांग्रेस के प्रत्याशियों की सूची जारी होने के बाद अपने मोहरे फिट करने की रणनीति में जुटे हंै। इस कवायद में भाजपा छोड़कर राजपा में शामिल हुए पूर्व प्रदेश कोषाध्यक्ष एवं प्रवक्ता सुनील भार्गव ने भी पार्टी की कमान संभाल ली है।

इस बीच भाजपा ने गहलोत सरकार में हुए घोटालों तथा भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर ब्लैक पेपर जारी किया है। भाजपा इस बारे में राष्ट्रपति को भी अवगत करा चुकी है। पार्टी के राष्ट्रीय सचिव किरीट सोमैया इन मुद्दों को उठाते रहे हैं और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान ने ब्लैक पेपर को झूठ का पुलिंदा कहते हुए इसे खारिज कर दिया है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कांग्रेस भाजपा में आरोप-प्रत्यारोप के बीच लोकायुक्त ने पिछली वसुंधरा सरकार पर लगाए आरोपों से संबंधित फाइलों की जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। गहलोत सरकार ने इसके लिए आयोग बनाया था, जिसे अदालत ने गलत माना था।

4 अक्टूबर की शाम चुनाव कार्यक्रम की घोषणा तथा आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले गहलोत सरकार ने पिछले माह से अपनी उपलब्धियों के विज्ञापनों की बाढ़-सी ला दी। एक विज्ञापन में बेहतर वित्तीय प्रबंधन के दावे और इससे संबंधित खबरों को लेकर वित्तीय मामलों के विषेषज्ञ प्रो. लक्ष्मी नारायण नाथूरामका ने सवालिया निशान खड़े कर दिए है। उनका कहना है कि सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) की तुलना में उधार का प्रतिशत 3 प्रतिशत से नीचे होना एक सुखद संकेत है, लेकिन बिजली कंपनियों के उधार और कुल उधार पर 25 करोड़ रुपए रोजाना का ब्याज खर्च सरकार की पोल खोलता है। पेट्रोल से हो रही आय (पिछले 5 वर्षों में 16 हजार करोड़ रुपए) और केंद्र सरकार से मिल रही सहायता ने सरकार को संभाल रखा है। राज्य वित्त आयोग के सदस्य भाजपा विधायक राजपाल सिंह शेखावत का दावा है कि सारी उधार राशि जीएसडीपी के तीन प्रतिशत से हर हाल में ज्यादा है और सरकार ने केंद्र सरकार के एफआरबीएम एक्ट का उल्लंघन किया है।

गहलोत सरकार अपने विकास सफर तथा आम लोगों को सीधे लाभ पहुंचाने वाले फैसलों को चुनावी मुद्दा बनाएगी, वहीं भाजपा गहलोत सरकार पर भ्रष्टाचार तथा घोटालों एवं कथित दुष्कर्म के आरोपों में घिरे मंत्रियों पर फोकस करेगी। भाजपा के बागी डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सत्ता के खेल में भाजपा-कांग्रेस की मिलीभगत से राज्य को छुटकारा दिलाकर स्वच्छ प्रशासन देने का वायदा कर रहे हैं। आरक्षण का मुद्दा भी गरमा रहा है। गुर्जर, राजपूत तथा ब्राह्मण समुदाय इसके लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। वैश्य समाज अपनी हैसियत के अनुरूप सभी दलों से टिकट की दावेदारी पर बल दे रहे हैं। बहरहाल, चुनावी चौपड़ पर उम्मीदवारों के खुलासे से इस खेल का रंग जमेगा और इसका श्रीगणेश 5 नवंबर को नामांकन पत्र भरे जाने से होगा।

 

गुलाब बत्रा

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