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सोनिया का राजनीति से संन्यास!

मशहूर होने का एक तरीका यह भी है कि विवाद खड़ा कर दो। एक पत्रकार की पुस्तक ’24 अकबर रोड’ की जब कहीं विशेष चर्चा नहीं हुई तो किसी समाचार पत्र की वेबसाइट ने इस किताब का उल्लेख करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के राजनीति से संन्यास लेने का ही मुद्दा खड़ा कर दिया। सोनिया गांधी के संन्यास लेने के बारे में कहीं कोई चर्चा नहीं है, लेकिन इस वेबसाइट ने सोनिया गांधी के 2016 में राजनीति से संन्यास लेने की बात शुरू कर दी। इस साइट के अनुसार पुस्तक कहती है कि जब सोनिया गांधी 70 साल की हो जाएंगी तो राहुल गांधी को बड़ी जिम्मेदारी देकर वह संन्यास ले लेंगी। इस अनुमान से कांग्रेसजनों में अभी से घबराहट फैल रही है। इस बात के समर्थन में इस साइट पर सोनिया गांधी के पिछले जन्मदिन 9 दिसंबर 2012 का जिक्र किया गया कि कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने जन्म दिवस के अवसर पर आयोजित पार्टी में शामिल वरिष्ठ नेताओं को 2016 में संन्यास लेने के अपने फैसले से अवगत कराया था, जिसे सुन कर सभी नेता सन्न रह गए थे। दिलचस्प बात तो यह है कि साइट पर यह नहीं बताया गया है कि घबराए नेताओं ने उनसे अपना निर्णय बदलने के लिए आग्रह किया या नहीं, लेकिन यह जरूर बताया गया कि नेताओं ने राहुल गांधी को कार्यभार लेने के लिए आग्रह करने को कहा। उसी के बाद पार्टी महासचिव राहुल गांधी को मनाने का प्रयास शुरू हुआ। इस प्रयास में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राहुल से मंत्रिमंडल में शामिल होने या पार्टी में नंबर दो का पद स्वीकार करने के लिए कहा था।
प्रधानमंत्री के राहुल से यह कहने पर कि महत्वपूर्ण पद लेने की उनकी अनिच्छा पार्टी और सरकार दोनों पर बुरा असर डालेगी, राहुल ने 19 जनवरी को जयपुर के चिंतन शिविर में उपाध्यक्ष पद स्वीकार किया था। यह तो समय ही बताएगा कि उस पुस्तक से इस साइट के ऐसा मुद्दा उठाने पर वह किताब कितनी चर्चित हो पाएगी, लेकिन कई नेताओं की इस मुद्दे पर यह प्रतिक्रिया जरूर है कि भारत में उम्र का राजनीति से संन्यास लेने का क्या संबंध है और सोनिया या राहुल को कौन रोकता है कि वह पार्टी और सरकार में क्या पद लें। पार्टी और सरकार, आज दोनों ही तो उनकी है।

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