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पूर्ण बहुमत से बनाएंगे हम सरकार:हर्ष वर्धन

भाजपा ने काफी जद्दोजहद के बाद आखिर दिल्ली के मुख्यमंत्री पद के लिए पूर्व अध्यक्ष डॉ. हर्षवर्धन को अपना उम्मीदवार घोषित कर ही दिया। कमान संभालने के बाद उदय इंडिया के संपादक दीपक कुमार रथ से आगामी चुनावों से जुड़े अनेक विषयों पर डॉ. हर्ष वर्धन ने बड़ी बेबाकी से बात की। यहां प्रस्तुत हैं उस बातचीत के महत्वपूर्ण अंश:
पार्टी ने आपको जो नया दायित्व दिया है, उस पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
मैं एक स्वयंसेवक हूं। राजनीति में एक स्वयंसेवक के रूप में 20 साल पहले काम करना शुरू किया था। पार्टी ने आज तक मुझे जो भी जिम्मेदारी सौंपी है, मैंने हमेशा उसे बेहतर तरीके से निभाने की कोशिश की है और इस जिम्मेदारी को भी मैं बेहतर ढंग से निभाने की कोशिश करूंगा। यह जिम्मेदारी पार्टी ने तय की है। मैंने आज तक किसी भी जिम्मेदारी की कोई इच्छा नहीं की है। मुझे अपनी पार्टी पर गर्व है। केवल भाजपा ही ऐसी पार्टी है जिसमें एक साधारण कार्यकर्ता को भी बड़े से बड़े दायित्व के लिए के लिए योग्य माना जा सकता है। इस नाते मुझे गर्व की अनुभूति भी हो रही है और मैं विश्वासपूर्वक कह सकता हूं कि जो विश्वास पार्टी ने मुझ पर जताया है, उस पर मैं खरा उतरूंगा। सभी देवदुर्लभ कार्यकर्ताओं को लेकर हम 15 वर्षों से राज करने वाली इस भ्रष्ट और निकम्मी सरकार से दिल्ली के लोगों को आजादी दिलाएंगे। 2013 के अंत में दिल्ली में सुशासन देने वाली एक पारदर्शी और ईमानदार सरकार की स्थापना करेंगे और उसके कुछ ही महीनों बाद, नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में दुनिया की भ्रष्टतम सरकार से देश को आजाद कराएंगे। नरेन्द्र मोदी एक महान नेता हैं। वह कर्मठ हैं, योग्य हैं और उन्होंने अपनी ईमानदारी और कार्य-प्रणाली से सारी दुनिया में भारत का और भाजपा का नाम रौशन किया है। प्रधानमंत्री के रूप में उनके नेतृत्व में भारत विश्व गुरू के स्थान पर आगे बढऩे की दिशा में फिर प्रयास करेगा।

क्या आपको नहीं लगता कि पार्टी ने जो आज किया, उसे और पहले किया जाना चाहिए था, ताकि आपको भी और अधिक वक्त मिल जाता …?

दिल्ली में आप कोई भी फैसला करिए, दो घंटे में बच्चे-बच्चे को पता लग जाता है। इसलिए इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि फैसला दो हफ्ते पहले किया या दो हफ्ते बाद। मुझे नहीं लगता कि इससे कोई खास फर्क पडऩे वाला है। भाजपा में कार्यकर्ता पार्टी के लिए काम करते हैं, पार्टी के विचार और नीति के लिए काम करते हैं, ए है या बी है या कौन किस पद पर है, इसके लिए काम नहीं करते। हमारी पार्टी के कार्यकर्ता पहले से काम कर रहे हैं। उन्होंने सारी तैयारी पहले से ही की हुई है। एक-एक किले को अभेद्य किला बनाया हुआ है। वे जनविरोधी नीतियों के खिलाफ संघर्ष भी कर रहे थे और अपने संगठन को भी मजबूत कर रहे थे। मुझे पूरा विश्वास है कि तथाकथित देरी, जिसे आप देरी कह रहे हैं, उसके बावजूद भी हम किसी कीमत पर किसी से पीछे नहीं रहेंगे।

पार्टी में जो लोग आप से नाराज हैं, उन्हें आप कैसे मनाएंगे?
पहली बात तो यह है कि पार्टी में कहीं नाराजगी नहीं है। कुछ लोगों के बारे में यह मीडिया का बनाया हुआ नजरिया है। जिनके बारे में यह नजरिया बनाया गया है, उन लोगों से मेरा बहुत ही आत्मीय संबंध है। हम सभी साथ मिलकर पार्टी के लिए मेहनत कर रहे हैं। अपनी आत्मा, हृदय और मन, यह सारा कुछ हम लोग पार्टी की विजय के लिए इस चुनाव में लगाने वाले हैं और इसमें सफलता दिलाने के लिए हमारे पास देवदुर्लभ कार्यकर्ताओं की सामूहिक शक्ति है। दिल्ली की जनता का आशीर्वाद है और अपने राष्ट्रीय नेताओं का मार्गदर्शन है और भगवान की कृपा भी।

दिल्ली में टिकट का बंटवारा आप किस आधार पर करेंगे? आपके उम्मीदवार रहेंगे या उनके?
उम्मीदवार उनके या हमारे नहीं होते भाजपा में। सभी उम्मीदवार भाजपा के ही होते हैं। केवल योग्य उम्मीदवारों का चयन होगा। जो सबसे ज्यादा योग्य होगा, जिसमें चुनाव जीतने की क्षमता होगी और पार्टी की विचारधारा के प्रति जिसकी पूर्ण प्रतिबद्धता होगी, वही इन चुनावों में पार्टी का उम्मीदवार बनेगा।

मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार होने के नाते, अंतिम फैसला तो आप ही लेंगे….?
नहीं, ऐसा नहीं होता है। हमारी पार्टी में कोई मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार या प्रदेश अध्यक्ष होने से फाईनल ऑथॉरिटी नहीं हो जाता है। हमारे यहां चुनाव समिति होती है, सामूहिक नेतृत्व होता है, सामूहिक फैसला होता है और हमारे सारे कार्यकर्ता मिलकर इसका फैसला लेेते हैं। श्री नीतिन गडकरी के मार्गदर्शन में चुनाव समिति अंतिम फैसला करेगी। दिल्ली के फैसले को हम केन्द्रीय चुनाव समिति के पास ले जाएंगे। केन्द्रीय चुनाव समिति में सभी वरिष्ठ अधिकारी, राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह के मार्गदर्शन में इस संबंध में फैसला लेंगे, जो सबको मान्य होगा।

टिकट बंटवारे में किस बात पर जोर रहेगा? जातिगत आधार …
हमारा फोकस सबसे ज्यादा व्यक्ति की ईमानदारी, गंभीरता, विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता और उसके साथ-साथ जीतने की क्षमता और योग्यता होगी। यही हमारा प्रमुख पैरामीटर होगा।

क्या वर्तमान विधायक का भी टिकट कट सकता है?
अभी हम लोगों ने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है कि किसी वर्तमान विधायक का टिकट काटा जाए। इसके बारे में जब चर्चा होगी, तब इस विषय पर भी चर्चा होगी। मुझे इतना जरूर लगता है कि हमारे वर्तमान विधायकों ने बहुत मेहनत और ईमानदारी से पिछले पांच वर्षों में जनता की नि:स्वार्थ भाव से सेवा की है।

चुनाव प्रचार में भाजपा का प्रमुख मुद्दे क्या रहेंगे?
हमारा पहला प्रमुख मुद्दा तो वर्तमान सरकार की हर मोर्चे पर विफलता है। दिल्ली में भ्रष्टाचार, महंगाई, बिजली, पानी, सड़क, परिवहन, स्वास्थ्य, शिक्षा, झुग्गी-झोपड़ी या अधिकृत कॉलोनी, यमुना आदि बहुत सारे जुड़े हुए विषय हैं। देश की राजधानी में बढ़ता प्रदूषण भी इन मुद्दों में शामिल है। इन सारे विषयों पर सरकार पूरी तरह विफल रही है। यह तो एक चर्चा का विषय रहेगा ही, लेकिन उससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण है कि हम क्या करना चाहते हैं। हम पारदर्शिता बढ़ाकर भ्रष्टाचार को समाप्त करने के लिए कटिबद्ध हैं। हम दिल्ली में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर दृढ़संकल्प हैं। दिल्ली में हर घर को एक सोलर पॉवर हाउस बनाने की हमारी योजना है। हम दिल्ली में इस्रायल और इंग्लैंड की तरह यूनिवर्सल हेल्थ इंश्योरेंस की योजना लागू करने का सपना देख रहे हैं। ऐसे ही शिक्षा में गुणात्मक सुधार करना भी हमारी प्राथमिकता रहेगी। बच्चों के लिए स्कूल, नए कॉलेज, इंजिनियरिंग कॉलेज, कॉलेज के सीटों में वृद्धि आदि सुधार के विषय हैं। नौजवानों के लिए दिल्ली में ही नौकरी की व्यवस्था करानी है, ताकि उन्हें चेन्नई और बंगलुरू जाकर नौकरी ढूढने की जरूरत न पड़े। इससे मां-बाप और बच्चों में अलगाव नहीं होगा। इसी तरह यमुना की सफाई भी एक बड़ा मुद्दा है। दिल्ली के अस्पतालों में जाने वाले लोगों को विश्वस्तरीय न भी हो तो कम से कम एक अच्छे निजी अस्पताल जैसी सुविधा तो मिलनी ही चाहिए। ऐसी बीमारियां, जिन्हें पूरी तरह समाप्त किया जा सकता है, उनके लिए अभियान चलाने पर अपना ध्यान केन्द्रित करेंगे।

दिल्ली में शीला दीक्षित की सरकार ने अवैध कॉलोनियों को अधिकृत करने की मुहिम शुरू की थी, लेकिन वह भी पूरी नहीं हुई है। इस मामले में भाजपा की क्या नीति रहेगी?
हमारा मानना है कि इन कॉलोनी में रहने वाले लोगों का जीवन-स्तर बेहतर करने की आवश्यकता है। वे लोग नारकीय जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनकी कॉलोनियां अधिकृत करने की जरूरत है।

अगर भाजपा की सरकार आती है तो क्या आप इन कॉलोनी को नियमित करेंगे?
हां। अगर हमारी सरकार सत्ता में आती है तो हम इन कॉलोनियों को जरूर नियमित करेंगे। उनका जीवन स्तर भी बेहतर करेंगे। वहां उनके लिए स्वास्थ्य, शिक्षा की व्यवस्था के लिए काम करेंगे। हम सिर्फ खोखले नारे नहीं देंगे। 2008 में टेम्पोरेरी रेगुलराईजेशन सर्टिफिकेट बांट दिए गए और झूठे नारे लगा दिए गए कि इतनी कॉलोनियां हमने पास कर दीं, जबकि वहां कोई रजिस्ट्री नहीं होती, कुछ नहीं होता। हम कोशिश करेंगे कि हम दिल्ली में लाखों मकान बनवाएं, ताकि झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लोगों के लिए छत उपलब्ध हो। सरकारी कर्मचारी, दूसरे कर्मचारी, जो अभी भी मकानों और फ्लैटों से वंचित हैं, उनके लिए बेहतर सुविधा हो, यह हम सुनिश्चित करेंगे।

बिजली के बढ़ते दामों को भाजपा ने मुद्दा बनाया था। उसके लिए भाजपा की क्या नीति है?
हम व्यापक पैमाने पर बिजली कंपनियों का ऑडिट कराएंगे। नई कंपनियों को प्रतियोगिता में लाने की कोशिश करेंगे। इसके साथ-साथ हम हर घर के अंदर सोलर ऊर्जा को बढ़ावा देंगे, ताकि लोग आत्म-निर्भर हो सकें। हम इसके लिए उन्हें सब्सिडी उपलब्ध कराएंगे। सब्सिडी भारत सरकार से दिलाएंगे, इन सारे कामों पर हम विशेष रूप से फोकस करेंगे। बिजली बिल को कम करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण प्रयास होगा।

कांग्रेस के शासनकाल में प्याज 80 रूपए किलो बिक रहा है। इसके अलावा आवश्यक खाद्य पदार्थों की कीमतें भी आसमान छू रही हैं। क्या गारंटी है कि आपकी सरकार में इनके दाम कम होंगे?
जहां तक काम की बात है, हम लोग बड़े सिस्टमेटिक और साइंटिफिक तरीके से काम करेंगे। मॉडर्न आइडिया इस्तेमाल करेंगे। मॉडर्न विजन का इस्तेमाल करेंगे। मॉडर्न तकनीक इस्तेमाल करेंगे और ई-गवर्नेंस को इंप्रूव करेंगे। सरकार में जमाखोरों के बीच के नेक्सस को तोड़ेंगे। हम फूड प्राइस कमीशन बनाएंगे, जिनमें कोई नौकरशाह नहीं होगा, न ही कोई राजनीतिक दखलअंदाजी होगी। इसमें देश भर से कृषि क्षेत्र या उससे संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएगा। वे मुख्यमंत्री को रिपोर्ट करेंगे। समय-समय पर मॉनिटरिंग करेंगे। इनको मंडियों से, खुदरा बाजार से लगातार रिपोर्ट मिलेंगी। उसके आधार पर समय से रणनीति बनेगी। किसी भी चीज की कमी की कोई आशंका होगी, उसका ईलाज पहले खोजा जाएगा।

दिल्ली में ‘नमो फैक्टर’ कितना काम करेगा और उसका क्या असर होगा?
नरेन्द्र मोदी जी आज देश के महान नेता बन चुके हैं। आज वह बहुत पॉपुलर हो चुके हैं। बच्चा-बच्चा उनकी इज्जत करता है। महिला, बुजुर्ग, नौजवान सब उनसे बहुत प्रभावित हैं। सारी दुनिया में उनका नाम है। सारे देश में अगर उनके नाम पर इतना उत्साह है तो दिल्ली में भी उतना ही उत्साह है। दिल्ली चुनाव में भी उनका असर होगा।

नरेन्द्र मोदी दिल्ली में एक बहुत बड़ी रैली कर चुके हैं। उसके बाद भाजपा को दिल्ली में कितनी सीटें आने की उम्मीद है?
सीट आने का गणित तो कोई नहीं कर सकता। कोई नहीं बता सकता कि कितनी सीटें आएंगी, लेकिन हम भारी सफलता प्राप्त करेंगे। हम दो-तिहाई बहुमत लेकर आएंगे।

अगर भाजपा जीतती है तो एक मुख्यमंत्री के रूप में दिल्ली के लिए आपके क्या सपने हैं?
मेरा सपना है कि दिल्ली को हम एक ऐसी राजधानी बनाएं, जिस पर दिल्लीवासियों को गर्व हो। देश को गर्व हो। दिल्ली की जो साख लुट गई है, खो गई है, उस साख को वापस लौटाना है। दिल्ली, दिल्लीवासियों को लौटाने का सपना है। एक पारदर्शी, ईमानदार सरकार दिल्ली में देने का सपना है, जो पिपुल-फ्रेंडली हो। लोगों को, विशेषज्ञों को लेकर दिल्ली की बेहतरी के लिए काम करेंगे।

दिल्ली में तो दिल्ली के लोग कम रह गए हैं और बाहरी लोग ज्यादा आ गए हैं…?
यह बाहरी और दिल्ली के लोगों का कोई विषय नहीं है। दिल्ली में रहने वाले सारे लोग देश के ही निवासी हैं। इसलिए यह कोई दिल्ली और बाहरी व्यक्ति का मामला नहीं है। हम लोग भारतवासी हैं, सब के हितों की रक्षा करने का काम करना है और वही हम लोग करेंगे।

पार्टी अध्यक्ष विजय गोयल भी मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनना चाहते थे। उनके साथ किन शर्तों पर समझौता हुआ है? आगे उनकी क्या भूमिका होगी?
मुझे न तो ऐसी कोई जानकारी है और न ही मुझे लगता है कि वह किसी समझौते के तहत तैयार हुए हैं। वह हमारी पार्टी के बहुत जुझारू नेता हैं। उनके साथ हमारे बहुत अच्छे संबंध हैं और पार्टी के कर्मठ कार्यकर्ता और सिपाही होने के नाते उन्होंने भी बड़ी शालीनता से पार्टी के इस निर्णय को स्वीकार किया है। हम सभी नेतृत्व के फैसले को स्वीकार करते हैं। इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं।

फिर भी… सरकार बनने के बाद उनकी क्या भूमिका होगी?
उनका भूमिका वही रहेगी, जो एक राज्य के अध्यक्ष की भूमिका होती है। वह पूरी मेहनत के साथ काम कर रहे हैं। अब आगे देखते हैं कि पार्टी किसको और क्या जिम्मेदारी देती है, यह तो पार्टी के वरिष्ठ नेता तय करेंगे।

‘आप’ के अरविंद केजरीवाल भाजपा के लिए कितना खतरा हैं?
यह हमारे लिए कोई प्रश्न नहीं है। हमारे लिए आज सिर्फ प्रश्न यही है कि हम कैसे दिल्ली के लोगों के लिए बेहतर कर सकते हैं। उनकी बेहतरी के लिए क्या-क्या करना है, यही हमारे दिमाग में है।

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