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मोदी की हुंकार में दबे धमाके

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा अपनी ताकत दिखाने के लिए इस तरह की रैली आयोजित करते हैं’ कहकर इसके प्रभाव को खारिज करने की कोशिश की। लेकिन नीतीश कुमार की भाव-भंगिमा कुछ और ही कह रही थी। पसीने की बूंदे और माथे पर चिंता की गहरी रेखाएं वे सारी बातें बयान कर रही थीं, जो वह कहना नहीं चाह रहे थे।

पटना के गांधी मैदान में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की बहुप्रचारित हुंकार रैली ने 27 अक्टूबर को तब इतिहास रच दिया, जब सीरियल बम ब्लास्ट से गूंज रहे मैदान में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी ने मैदान छोडऩे से इंकार करने वाली भीड़ को संबोधित करते हुए बम के धमाकों को अपनी आवाज से दबा दिया। एक के बाद एक बम मिलता रहा, लेकिन यह मोदी का करिश्मा ही था कि भगदड़ होने के बजाय भीड़ मोदी को तल्लीनता से सुनती रही। इस तरह बम धमाके कर भगदड़ मचाने वालों का घृणित उद्देश्य तार-तार हो गया। इस आतंकवादी हमले में 6 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए, जो एक के बाद एक राजनीतिक धमाकों की वजह बनी।

बिहार में भाजपा की इतनी बड़ी रैली पहली बार हुई थी, जो महीनों की तैयारी और प्रचार का परिणाम था। यह पहली ऐसी रैली थी, जिसमें श्रृंखलाबद्ध विस्फोटों के बावजूद मैदान में जुटे लोगों ने अदम्य साहस, धैर्य और संयम का परिचय देते हुए शांति बनाए रखी। राज्य भाजपा के नेताओं ने बुद्धिमत्ता का प्रदर्शन करते हुए, इन विस्फोटों को दीपावली के पटाखों की आवाज और टायर फटने की आवाज बताकर लोगों का ध्यान अपनी तरफ आकृष्ट रखा।
नीतीश कुमार के गढ़ में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीवार नरेन्द्र मोदी की पहली मेगा रैली को सफल बनाने के लिए भाजपा ने एड़ी-चोटी का जोर लगा दिया था। यह अपने आप में अभूतपूर्व तैयारी थी। पटना में ऐसी रैली आज तक किसी दूसरे राजनीतिक दल ने नहीं की है। राज्य के विभिन्न हिस्सों से कुल 11 ट्रेनें, 3,000 से ज्यादा बसें और हजारों निजी गाडिय़ों के माध्यम से लाखों लोग पटना के गांधी मैदान में पहुंचे। मंच के पीछे बड़ी एलईडी स्क्रीन के साथ-साथ दिल्ली से स्टील फ्रेमयुक्त दर्जनों स्क्रीन पूरे मैदान में लगाए गए थे, जो म्युजिक सिस्टम से तकनीकी रूप से जुड़े थे।

पूरा पटना शहर बैनर, पोस्टर, होर्डिंग और स्वागत द्वारों से अटा पड़ा था। नमो नाम के साथ भाजपा नेताओं के बड़े-बड़े आदमकद कट-आउट लगे थे। उन नेताओं में पार्टी से भी बड़े बन चुके नरेन्द्र मोदी की नजरों में आने की एक ललक थी। हर जगह नमो टी-स्टॉल, नमो टी-शर्ट, नमो सीडी, नमो जलेबी से लेकर स्टेशन, बस अड्डा, पूजा, हवन आदि तक, हर जगह नमो के जाप से रैली को ऐतिहासिक बनाने की कवायद चलती रही। रैली की पूर्व संध्या को ही पटना का गांधी मैदान केसरिया और भाजपा के झंडे से पूरी तरह ढंक गया था।

यह रैली भाजपा के लिए कई राजनीतिक संभावनाओं से युक्त थी। इसमें पार्टी कार्यकर्ता मनवांछित फल पाने के लिए पूरी तरह प्रयासरत थे। बिहार में लोकसभा की 40 सीटें हैं। पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश को मिलाकर कुल 120 सीटें हैं, जो संसद का रास्ता तय करती हैं। हालांकि सपा, बसपा और कांग्रेस के कारण उत्तर प्रदेश का रास्ता आसान नहीं है, लेकिन बिहार का रास्ता भाजपा के लिए अपेक्षाकृत आसान है। लालू को जेल, नीतीश के प्रति लोगों में गुस्सा और कांग्रेस की नजरअंदाजी के कारण, नमो असर के तहत भाजपा राज्य में ज्यादा से ज्यादा सीटें हासिल करना चाहती है। जिस तरह भाजपा ने अपने संसाधनों और मानव-शक्ति को रैली को सफल बनाने के लिए इस्तेमाल किया, जद(यू) और राजद के लिए यह भी एक ईष्र्या का कारण है।

हुंकार रैली का मकसद राज्य में भाजपा के लिए चुनावी अभियान की शुरूआत माना जा सकता है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने ‘चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों द्वारा अपनी ताकत दिखाने के लिए इस तरह की रैली आयोजित करते हैं’ कहकर इसके प्रभाव को खारिज करने की कोशिश की। लेकिन नीतीश कुमार की भाव-भंगिमा कुछ और ही कह रही थी। पसीने की बूंदे और माथे पर चिंता की गहरी रेखाएं वे सारी बातें बयान कर रही थीं, जो वह कहना नहीं चाह रहे थे। 28-29 अक्टूबर को राजगीर में आयोजित पार्टी के चिंतन शिविर में रैली के संबंध में वह कुछ भी बोलने से बचते रहे।

27 अक्टूबर को रैली में शामिल होने के लिए हर तरफ से आने वाले लोगों के हाथों में भाजपा का झंडा, माथे पर भगवा पट्टी और होठों पर नमो मंत्र था। दिनचर्या पूरी तरह प्रभावित थी और पुलिसकर्मी भीड़ को सभास्थल, गांधी मैदान की तरफ गाइड करते नजर आए। इस भीड़ को नियंत्रित करने के लिए सड़कों पर बड़े पैमाने पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी।

लेकिन, सुबह 9.30 बजे पटना जंक्शन के प्लेटफॉर्म नंबर 10 के शौचालय में पहला विस्फोट हुआ। यात्रियों में दहशत फैल गई। लोगों ने एक नौजवान को वहां से भागते हुए देखा। ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने उसे पकड़ लिया। बाद में जांच एजेंसियों ने उसे इकलौते आरोपी के रूप में पहचान की। यह शख्स इंडियन मुजाहिदीन का संचालक इम्तियाज अंसारी था। जब पुलिसकर्मियों ने शौचालय के अंदर जाकर देखा तो खून से सना हुआ एक व्यक्ति दर्द से कराह रहा था। बैट्री लगाने के दौरान बम अचानक फट गया था। यह शख्स इम्तियाज का सहयोगी ऐनुल उर्फ तारिक था। दोनों रांची के धुर्वा थाना के सिटीयो के रहने वाले हैं। ऐनुल को रांची के अस्पताल में भर्ती करा दिया गया। इम्तियाज से इस आतंकी प्लॉट की सारी सच्चाई का खुलासा हुआ। यह एक आतंकवादी घटना थी। दो-दो लोगों वाले इंडियन मुजाहिद्दीन के तीन समूहों द्वारा रैली में धमाके किए गए। इनका उद्देश्य धमाके कर रैली में भगदड़ मचाना था, ताकि भगदड़ में अधिक से अधिक लोग मारे जाएं।

सुरक्षा में बुरी तरह विफल और पुराने उपकरणों से लैस पटना पुलिस कुछ करती, इससे पहले ही 11.40 बजे गांधी मैदान में दूसरा धमाका हुआ। यह सिलसिला यहीं नहीं रूका, मैदान में 12.45 बजे तक श्रृंखलाबद्ध धमाके होते रहे। उस समय बिहार भाजपा के नेता मंच पर मौजूद थे। उन्हें समझ में आ गया था कि ये साधारण विस्फोट नहीं हैं। फिर भी लोगों में दहशत फैलने और भगदड़ होने से रोकने के लिए इसे दीवाली में होने वाले पटाखों की आवाज होने की घोषणा करते रहे। ये सारे बम टाईमर और तार से बंधे, कम तीव्रता वाले इंप्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस थे, जिन्हें रैली स्थल के विभिन्न हिस्सों में लगाया गया था। इसी कारण लोग इसे आतंकवादी हमले के रूप में नहीं समझ पाए और मैदान में डटे रहे। घायलों को तुरंत अस्पताल भेजा गया। हर धमाके के बाद स्थिति नॉर्मल होती जा रही थी।
उसी दौरान पटना हवाई अड्डे पर पहुंचे नरेन्द्र मोदी को खुफिया अधिकारियों ने श्रृंखलाबद्ध धमाकों की सूचना दी। मैदान में खतरा बरकरार रहने के कारण अधिकारियों ने मोदी को रैली में शामिल न होने की सलाह दी। अगवानी के लिए पहुंचे पार्टी के दो नेताओं, राजीव प्रताप रूडी और शाहनवाज हुसैन की तरफ मोदी मुखातिब हुए और यह कहते हुए रैली में जाने का निर्णय लिया कि जनता उन्हें सुनने के लिए आई है।
मोदी मंच पर पहुंचे और अपनी आक्रामक शैली में अपार भीड़ को संबोधित करने लगे। अपने एक घंटे के भाषण में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर प्रहार करते हुए मोदी ने उन्हें अवसरवादी, पाखंडी और पीठ में छुरा घोंपने वाला बताया। मोदी ने देश में गरीबी, बेरोजगारी, महंगाई और सांप्रदायिकता फैलाने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार बताया। राहुल गांधी को शहजादा कहने पर रोष व्यक्त करने वाले कांग्रेस के नेताओं पर प्रहार करते हुए कहा – ‘जब तक वंशवाद की राजनीति होगी, तब तक मैं शहजादा कहता रहूंगा। अपने नेता के बारे में शहजादा सुनकर कांग्रेसियों को बुरा लग रहा है, तो देश को कांग्रेस की वंशवादी राजनीति बुरी लग रही है।’ मोदी ने जेल में बंद राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को गुजरात के द्वारका का यदुवंशी बताया। नरेन्द्र मोदी ने कहा – ‘इस राज्य के यदुवंशियों के साथ हमारा विशेष रिश्ता है और मैं आपका ध्यान रखने के लिए भगवान कृष्ण की विशेष कृपा का पात्र हूं।’ 2014 के लोकसभा चुनाव में 12 प्रतिशत यादव वोट को हासिल करने के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि तीन महीने पहले उनके नेता लालू प्रसाद यादव की दुर्घटना पर फोन किया था। हालांकि उन्होंने लालू के शासनकाल को जंगलराज भी कहा। लालू की अनुपस्थिति में पार्टी प्रमुख बनीं राबड़ी देवी ने मोदी के बातों से असहमति जताते हुए कहा – ‘अब याद आएं हैं लालूजी और यदुवंशी?’

रैली शाम 3 बजे खत्म हुई। जनता से सुरक्षित घर पहुंचने की अपील कर मोदी गुजरात के लिए प्रस्थान कर गए। लेकिन बिहार में भाजपा नेताओं ने रैली में सुरक्षा मानकों को नजरअंदाज करने के लिए नीतीश कुमार को कठघरे में खड़ा कर दिया। बिहार के वरिष्ठ भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने नीतीश कुमार द्वारा जान-बूझ कर सुरक्षा में ढिलाई बरतने का आरोप लगाया है, ताकि नरेन्द्र मोदी को निशाना बनाया जा सके। सुशील मोदी का कहना है कि नीतीश कुमार राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी की बजाय नरेन्द्र मोदी के राजनीतिक दुश्मन की तरह व्यवहार कर रहे हैं। उन्होंने राज्य सरकार पर सुरक्षा खामियों के लिए कई आरोप लगाए। दिल्ली में पार्टी के नेता अरुण जेटली ने भी वही आरोप लगाया। सुरक्षा में लापरवाही बरतने के लिए पूर्व गृह सचिव राजकुमार सिंह ने बिहार के पुलिस महानिदेशक अभयानंद को बर्खास्त करने की बात कही। बिहार के पूर्व पुलिस महानिदेशक डी. पी. ओझा ने भी सुरक्षा खामियों पर उंगली उठाई।

लेकिन, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और पुलिस महानिदेशक अभयानंद, दोनों का कहना है कि नरेन्द्र मोदी का दौरा और रैली के लिए सारे सुरक्षा मानकों का ध्यान रखा गया। डीजीपी अभयानंद का कहना है कि आतंकवादी हमले को लेकर खुफिया विभाग की तरफ से कोई सूचना नहीं थी और जो हम कर सकते थे, वह सब कुछ किया। इसके तुरंत बाद ही इंटेलिजेंस ब्यूरो की राज्य इकाई ने चार दिन पहले राज्य प्रशासन को लिखा गया एक पत्र जारी किया, जिसमें रैली में हमले के बारे में सचेत किया गया था। लेकिन राज्य के पुलिस प्रमुख इसे ‘विशिष्ट’ न होने का बहाना बनाकर नजरअंदाज करने का आरोप स्वीकार करने से इंकार कर दिया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पार्टी के चिंतन शिविर के नाम पर कुछ कहने से बचते रहे।

इसी बीच एनआईए और एनएसजी का जांच दल पटना पहुंचा और जांच के दौरान यह खुलासा किया कि इस ब्लास्ट का मास्टरमाइंड कोई और नहीं, बल्कि बिहार के समस्तीपुर का रहने वाला तहसीन अख्तर ही है। तहसीन के ऊपर 10 लाख रूपए का ईनाम घोषित है और हैदराबाद, पुणे, मुंबई, वाराणसी और बोधगया ब्लास्ट में वांछित है। यासीन भटकल की गिरफ्तारी के बाद, तहसीन को इंडियन मुजाहिद्दीन के दरभंगा मॉड्यूल का प्रमुख बनाया गया है। गिरफ्तार आतंकी इम्तियाज अंसारी के रांची स्थित घर पर छापा मारकर पुलिस ने ओसामा बिन लादेन की जीवनी, 5 लाख रूपए नकद सहित कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए। पुलिस के अनुसार, पटना रैली में धमाके करने वाले सभी छह आतंकवादियों को 5-5 लाख रूपए एडवांस में दिए गए थे।

जांच जारी है, लेकिन धमाके का मास्टरमाइंड तहसीन अख्तर सहित चार आतंकी अब भी पकड़ से बाहर हैं। शायद वे कहीं बैठ कर अगले धमाके की तैयारी कर रहे हैं। चुनावी मौसम में अपनी बढ़त बनाने के लिए ब्लास्ट पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी है। भाजपा ने हमले में मारे गए सभी छह लोगों को शहीद बताते हुए, उनके अस्थि-कलश लेकर राज्य के सभी 38 जिलों में यात्रा करने की घोषणा की है। इसके अलावा भाजपा ने सभी मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रूपए देने की भी घोषणा की है। राज्य सरकार इसकी घोषणा पहले ही कर चुकी है। बिहार भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मंगल पांडेय का कहना है – ”वे हमारे लिए शहीद हैं और 5 नवंबर को गंगा में विसर्जित करने से पहले, उनकी अस्थि-कलश को राज्य के सभी 38 जिलों में ले जाए जाएंगे।’’ बम और राजनीति बिहार में एक के बाद एक के हाथों में पहुंचती जा रही है।

 

पटना से देवयानी तिवारी

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