ब्रेकिंग न्यूज़ 

रुद्राभिषेक

‘अलंकारप्रियो विष्णु:, अभिषेकप्रिय: शिव:’ – भगवान विष्णु जहां अलंकार प्रिय हैं, वहीं भगवान शिव को अभिषेक बहुत पसंद है। शिव मंदिरों में तांबे या पीतल का एक बर्तन रहता है, जिसमें नीचे छेद होता है। वह शिवलिंग के ऊपर लटकाया जाता है, जिससे पानी की धार दिन-रात शिवलिंग पर अनवरत गिरती रहती है। शिवलिंग का अभिषेक जल, दूध, घी, दही, शहद, नारियल पानी, पंचामृत आदि से करते हैं। अभिषेक के साथ-साथ मंत्र और स्त्रोत पाठ किया जाता है। ऐसे अभिषेक से भगवान आशुतोष तुरंत संतुष्ट हो जाते हैं।

अभिषेक शिव-पूजा का एक अभिन्न अंग है। इसके बिना शिव आराधना अधूरी है। अभिषेक के दौरान विशेष लय और सुर के साथ रुद्रपाठ, पुरुषसूक्त पाठ, महामृत्युंजय जप आदि किए जाते हैं। सोमवार भगवान शिव का विशेष महत्वपूर्ण दिन है और प्रदोष का दिन बहुत पवित्र माना जाता है। इन दिनों में भक्त भगवान शिव की विशेष आराधना करते हैं।

जब तुम भाव और श्रद्धा के साथ करते हो, तो तुम्हारा मन एकाग्र होता है। तुम्हारा हृदय भगवान की छवि और उनसे संबंधित दिव्य विचारों से भर जाता है। तुम अपने शरीर को भूलकर आस-पास के वातावरण से बेखबर हो जाते हो। अहं धीरे-धीरे खत्म हो जाता है। जब विस्मरण का भाव आता है, तब तुम आनंद से भर जाते हो और अंदर स्वर्गीय आनंद एवं साक्षात् भगवान शिव की अनुभूति होती है। अभिषेक तुम्हें स्वास्थ्य, संपदा, खुशहाली और समृद्धि प्रदान करता है। लाइलाज बीमारी भी अभिषेक के द्वारा ठीक हो जाती है। यदि तुम किसी बीमार व्यक्ति के लिए रुद्र-पाठ के साथ अभिषेक करते हो तो वह बीमारी से जरूर मुक्त हो जाता है।

सबसे श्रेष्ठ और उत्तम अभिषेक है शुद्ध प्रेम के जल को हृदय-कमल में स्थित आत्मलिंग पर चढ़ाना। भिन्न-भिन्न उपचारों से बाह्य अभिषेक भगवान शिव के प्रति समर्पण और श्रद्धा के विकास में मदद करता है। अंत में शुद्ध प्रेम का प्रवाह आंतरिक अभिषेक की ओर ले जाता है।

 

स्वामी निखिलानंद सरस्वती

translate wholeTopodin.com

Leave a Reply

Your email address will not be published.