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नशे के आगोश में पंजाब

नशे के आगोश में पंजाब

By चंडीगढ़ से प्रिया यादव

राज्य के दो-तिहाई से अधिक घरों में कम से कम एक व्यक्ति नशे का आदी है।पंजाब की गतिशीलता एक मिथक भर है।उनमें से बहुत से लोग अपनी नशे की लत को पूरा करने के लिए खून बेच रहे हैं, यहां तक सड़कों पर खड़े होकर भीख मांग रहे हैं। पूरा पंजाब नशे की चपेट में है, जो युवाओं की नैतिकता, शारीरिक क्षमता और उनके चरित्र को नुकसान पहुंचा रहा है। हम लोग अपनी युवा नस्ल को खोने के खतरे से जुझ रहे हैं।’’

समस्याएं समय के अनुपात में बढ़ती जाती हैं और चुनावों के दौरान वह राजनीतिक मुद्दा बन जाती हैं। मादक पदार्थों के सेवन में वृद्धि राजनीतिक दलों का मुख्य चुनावी मुद्दा बन चुका है। पंजाब के युवाओं में नशीले पदार्थों की बढ़ती लत ने स्वास्थ्य अधिकारियों की नींद हराम कर दी है। इससे राज्य का भविष्य अंधकार के गर्त में समाता नजर आ रहा है।

नशे की बढ़ती प्रवृत्ति के विरोध में कांग्रेस और शिरोमणि अकाली दल द्वारा किए गए हाई वोल्टेज ड्रामे के बीच एक महत्वपूर्ण बात पर ध्यान नहीं दिया गया, वह है कि राज्य में ड्रग की समस्या कितनी बड़ी है? विडंबना यह है कि जो समस्या राष्ट्रीय चिंता का मामला बन गया है, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी इस पर अपनी चिंता जता चुके हैं, उसकी स्थिति और क्रूरता की थाह लेने के लिए पंजाब के स्वास्थ्य विभाग द्वारा आधिकारिक रूप से अभी तक कोई व्यापक सर्वे नहीं कराया गया है।

समाजिक सुरक्षा, महिला एवं बाल विकास विभाग के सचिव हरजीत सिंह द्वारा पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के सामने सौंपे गए कागजात से ही इस मामले की गंभीरता सामने आई। एफिडेविट में हरजीत सिंह ने कहा है – ”राज्य के दो-तिहाई से अधिक घरों में कम से कम एक व्यक्ति नशे का आदी है। पंजाब की गतिशीलता एक मिथक भर है। उनमें से बहुत से लोग नशे की अपनी लत को पूरी करने के लिए खून बेच रहे हैं, यहां तक सड़कों पर खड़े होकर भीख मांग रहे हैं। पूरा पंजाब नशे की चपेट में है, जो युवाओं की नैतिकता, शारीरिक क्षमता और उनके चरित्र को नुकसान पहुंचा रहा है। हम लोग अपनी युवा नस्ल को खोने के खतरे से जुझ रहे हैं।’’

अन्य राज्यों की अपेक्षा पंजाब के नशे में डूबने के प्रमुख कारणों में उसकी रणनीतिक स्थिति है। पंजाब और पाकिस्तान के बीच 553 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो पूरे भारत में नशे की तस्करी का प्रमुख केन्द्र है। ड्रग तस्करी का एक स्थापित मार्ग है, जो अफगानिस्तान से होकर पाकिस्तान के जरिए पंजाब की सीमा पर आता है और भारत में प्रवेश करते हुए दिल्ली के माध्यम से पूरे देश में पहुंचता है।

यह सिर्फ शराब का ही मसला नहीं है, जो युवाओं को बर्बाद कर रहा है। अकेले पंजाब में शराब की 33 करोड़ बोतलों की सलाना खपत होती है, जोकि पूरे देश में सबसे अधिक है। शराब की दुकानें सुबह सबसे पहले खुलती हैं और सबसे अंत में बंद होती हैं। आप ग्रोसरी या दवा 24*7 नहीं पा सकते, लेकिन शराब की बोतल ले सकते हैं। विडंबना यह है कि प्रदेश के युवा सरकार के लिए दुधारू गाय की तरह हैं। आबकारी विभाग प्रदेश को सबसे अधिक राजस्व देने वाला विभाग है। आज से तीन साल पहले तक आबकारी विभाग का कुल सालाना राजस्व 3500  करोड़ रूपए था, जिसे 2015 तक 5,000 करोड़ रूपए तक लाने का लक्ष्य रखा गया है।

शराब के खिलाफ शांत क्रांति गांवों के परिदृश्य को बदल रही है। पंजाब पंचायती राज ऐक्ट का सेक्शन 40 कहता है कि पंचायत अपने गांव के समीप स्थित शराब की दुकान को बंद कर सकता है। संगरूर के 43 और पाटियाला के 26 गांवों सहित विभिन्न जिलों के 140 गांवों के लोगों ने संबंधित अधिकारियों को अपने गांव की शराब की दुकानों को बंद कराने के लिए आवेदन दिया है। संगरूर के विभिन्न इलाकों की महिलाओं ने, जो अपने शराबी पतियों की हिंसा की शिकार बनती हैं, शराब की दुकानों पर हमला किया।

07-02-2015

लोगों के लिए शराब एक पारंपरिक बुराई बन चुकी है। युवाओं को बर्बाद करने के लिए ड्रग्स की नई और आधुनिक किस्में राज्य में लगातार पहुंच रही हैं। एक अनुमान के अनुसार, राज्य के 66 प्रतिशत युवा मेडिकल या सिंथेटिक ड्रग्स ले रहे हैं। राज्य में नशा मुक्ति में लगे एक डॉक्टर के अनुसार, नशा मुक्ति केन्द्र में आने वाले हर 10 में से 2 लोगों की उम्र 16 साल से नीचे है।

अमृतसर, तरन तारण और गुरूदासपुर जिलों के युवा सबसे अधिक नसों में लेने वाले ड्रग्स का इस्तेमाल करते हैं। हर छायादार गली और परित्यक्त जगह पर युवाओं को नीडल साझा करते हुए देखा जा सकता है, जो एड्स जैसी घातक बीमारियों की एक बड़ी वजह है।

पंजाब में आंकड़े बताते हैं कि हर तीन कॉलेज स्टूडेंट में एक ड्रग्स का आदी है। लगभग हर तीसरा परिवार नशे का आदी है। स्मैक, हेरोइन और सिंथेटिक ड्रग्स सहित दवा दुकानों पर मिलने वाले इंजेक्शन और कैप्सूल  यहां हर तरफ उपलब्ध हैं और उसका इस्तेमाल भी किया जाता है। तरन-तारण के सरकारी स्कूल में पढ़ाने वाली अध्यापिका रक्षीन्दर कौर कहती हैं – ”सात साल जैसे छोटे बच्चे नशे का शिकार बन चुके हैं। तरन-तारण, अमृतसर और गुरूदासपुर जैसे सीमावर्ती क्षेत्र के स्कूल नशे के आदी लोगों की मीटिंग का महत्वपूर्ण स्थान है, जहां बड़े पैमाने पर विद्यार्थी अफीम, स्मैक और इंजेक्शन का प्रयोग करते हैं।’’

राजनीतिक दल इन मुद्दों का सिर्फ दोहन कर फायदा उठाते हैं। पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान मतदान से एक सप्ताह पहले चुनाव आयोग के अधिकारियों ने लगभग 3 लाख कैप्सूल के अलावा एविल इंजेक्शन की 2,000 शिशियां और रेकोडेक्स कफ सिरप की 3,000 शिशियां बरामद की थी। इस दौरान 136 किलोग्राम हेरोइन, 14,823 किलोग्राम पोस्त (अफीम से बनने वाला), 76.2 किलोग्राम अफीम, 47 किलोग्राम गांजा और बड़े पैमाने पर अवैध शराब भी जब्त की गईं थीं।

जेलों में बंद लगभग 30 प्रतिशत अपराधियों को नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉफिक सब्सटांसेज ऐक्ट में गिरफ्तार किया गया है। डीजीपी ने माना है कि वे जेलों में ड्रग्स के प्रवाह को रोक नहीं सकते, जिसके कारण राजनीतिक तूफान भी उठा था। पूर्व डीजीपी शशिकांत का कहना है – ”एडिशनल डाईरेक्टर जनरल ऑफ पुलिस के रूप में मैंने एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें वर्तमान मंत्री और विधायकों की सूची थी जो इस अवैध व्यवसाय से लाभांवित होते हैं।’’

ड्रग डीलरों द्वारा कई बार खुलासा किया जा चुका है कि इस व्यवसाय में शीर्ष राजनेता शामिल हैं। एक साल पहले ड्रग्स तस्करी के संदेह में गिरफ्तार डीएसपी जगदीश भोला ने खुलासा किया था – ”राज्य में ड्रग्स तस्करी में मैं एक छोटा मोहरा हूं। इसके असली कर्ताधर्ता राजनेता हैं।’’ भोला सिंथेटिक्स ड्रग्स तस्करी का मुख्य आरोपी माना जाता है, जिसने पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान इसकी आपूर्ति की थी। उसके खुलासे के आधार पर पुलिस ने अकाली दल के स्थानीय कोषाध्यक्ष मनिंदर सिंह औलख को गिरफ्तार किया था। यहां तक कि इस मामले में हाईप्रोफाइल कैबिनेट मंत्री और राज्य के उप मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के साले बिक्रमजीत सिंह मजीठिया से सरकार की विभिन्न एजेंसियोंने पूछताछ की। जब राज्य के लोगों में नशे का जहर भरने में राजनेता ही आगे हैं, ऐसे में यहां के युवाओं का भविष्य संवारने की बात कौन करे?

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