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भाजपा और कांग्रेस में कांटे की टक्कर

भाजपा के लिए एक सुकून की बात यह रही कि जहां उसे एनडीए में अपनी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के तेवरों से अंदेशा हो रहा था, वह आराम से सुलट गया।

देश की राजधानी दिल्ली में चुनावी महाभारत के लिए तलवारें भांज रहे राजनीतिक दलों ने अपनी छाती से चिपकाए हुए रणनीति के पत्ते अब खोलने शुरू कर दिए हैं। चुनावी घमासान को त्रिकोणीय आकार देने वाली अरविन्द केजरीवाल की ‘आप’ तो अभी उम्मीदवारों की तलाश कर रही है, लेकिन कांग्रेस को दिल्ली की सत्ता से बेदखल करने का ख्वाब देख रही भारतीय जनता पार्टी ने अपने पत्ते फेंट कर चुनिंदा सीटों को छोड़ कर शेष उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। दिल्ली के मतदाताओं को अब कांग्रेस के खेमे के उम्मीदवारों के नामों की इंतजार है, जो जल्दी ही सामने आने वाले हैं। कांग्रेस के नेता भी हर सीट पर पूरा गणित लगाने में लगे हैं और कांग्रेस की टिकट के दावेदार टिकट प्राप्त करने के लिए साम, दाम, भेद का पूरा जोर लगा रहे हैं किसी तरह से उन्हें टिकट मिल जाए तो वे दिल्ली विधान सभा में बैठने के सपने लें। राजधानी के दिलचस्प मुकाबलों में मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, भाजपा के पूर्व अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता और ‘आप’ की ओर से दिल्ली की गद्दी का दावा करने वाले अरविन्द केजरीवाल के बीच है। केजरीवाल पहले ही शीला दीक्षित के खिलाफ चुनाव लडऩे की घोषणा कर चुके हैं जबकि विजेन्द्र गुप्ता को भाजपा ने खड़ा किया है।

पिछले डेढ़ दशक से दिल्ली के मतदाताओं को मनाने में जुटी भारतीय जनता पार्टी ने डॉ. हर्षवर्धन को पार्टी की ओर से मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित करने के बाद इस सप्ताह 70सीटों वाली विधानसभा के लिए 62 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी। लेकिन इस पूरी कवायद में भाजपा के नेताओं के पसीने छूट गए। यहां तक कि भाजपा की केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक में बागियों के खतरों को भांपते हुए उस दिन किसी प्रकार की घोषणा करने से परहेज किया और उम्मीदवारों के नामों की सूची बनाने से पहले बागियों से निपटने के लिए उनकी सूची बनाई गई। माना जाता है कि भाजपा दिल्ली में पिछले तीन चुनावों में अपनों की बगावत के कारण ही हारती आ रही है। इसे कांग्रेस भी जानती है। इसलिए कांग्रेस ने भाजपा के बागियों पर नजरें टिकाई हुई हैं।

भाजपा के लिए एक सुकून की बात यह रही कि जहां उसे एनडीए में अपनी सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के तेवरों से अंदेशा हो रहा था, वह आराम से सुलट गया। इसके लिए भाजपा को हरशरण सिंह बल्ली जैसे वर्तमान विधायक के टिकट की बलि चढ़ानी पड़ी। बल्ली हरिनगर से काफी अंतर से जीतते रहे हैं, लेकिन इस बार दिल्ली में भाजपा के मजबूत गढ़ हरिनगर को अकाली दल के हवाले कर दिया गया है। हरिनगर में 1977 से ही भाजपा जीतती आ रही है, लेकिन इस बार इस पर अकाली दल अपना उम्मीदवार खड़ा करेगा। भाजपा ने अकाली दल को हरिनगर सहित चार सीटें दी हैं। इनमें अन्य तीन सीटें राजौरी गार्डन, शाहदरा और कालकाजी हैं। इन सीटों पर अकाली अपना दबदबा होने का दावा कर रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल राजौरी गार्डन से मनजिंदर सिंह सिरसा, हरिनगर से अवतार सिंह हित या ओंकार सिंह थापर, कालकाजी से हरमीत सिंह कालका और शाहदरा से जितेन्द्र सिंह शंटी को चुनाव मैदान में उतार सकती है।

चुनावों के लिए घोषित उम्मीदवारों की सूची में चौंकाने वाले वे नाम हैं जो कांग्रेस के बड़े नेताओं के खिलाफ मैदान में होंगे। ये उम्मीदवार मतदाताओं के लिए लगभग नए जैसे ही हैं। इतना ही नहीं पार्टी ने उम्मीदवारों की सूची में ऐसे 9प्रत्याशियों को शामिल किया है जो पिछली बार चुनाव हार गए थे। इनमें त्रिनगर सीट से नन्द किशोर गर्ग का ऐसा नाम है, जो दो बार चुनाव हार चुके हैं। छह पार्षदों को भी इस बार भाजपा चुनाव मैदान में उतार रही है। 20 सीटों पर नए नाम हैं। पिछली बार पार्टी ने टिकट बांटने की नीति में पार्षदों को टिकट न देने का निर्णय किया था, लेकिन इस बार 9उम्मीदवार भाजपा की ओर से चुनाव मैदान में होंगे। नए नामों में दिल्ली के दिवंगत मुख्यमंत्री साहिब सिंह वर्मा के बेटे प्रवेश वर्मा, दिल्ली की पूर्व मेयर आरती मेहरा, शिखा राय, रामवीर सिंह बिधुड़ी को लिया गया है। भाजपा की इस पहली सूची में एक वर्तमान विधायक किराड़ी से अनिल झा सहित तीन पूर्वांचलियों को शामिल किया गया है। दिल्ली सरकार के मंत्री राजकुमार चौहान के खिला मंगोलपुरी से रामकिशोर नरवालिया, हारून युसूफ के खिलाफ दो बार चुनाव हारे बल्लीमारान से मोती लाल सोढी को और उत्तम नगर से मुकेश शर्मा के खिलाव पार्टी उपाध्यक्ष पवन शर्मा को खड़ा किया गया है।

भाजपा के उम्मीदवारों की सूची आने के बाद कांग्रेस ने अपनी चुनावी रणनीति और टिकट बंटवारे पर पुनर्विचार शुरू कर दिया है। भाजपा का टिकट चाहने वाले प्रभावी नेताओं को अपनी ओर करने पर भी कांग्रेस विचार कर रही है। बैठकों का दौर लगातार जारी है। नारायण सामी की अध्यक्षता में कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमिटी की बैठक भी हो चुकी है। बैठक में सामी के अतिरिक्त मुख्यमंत्री शीला दीक्षित, पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष जयप्रकाश अग्रवाल, पार्टी में दिल्ली मामलों के प्रभारी डॉ. शकील अहमद भी शामिल थे। बैठक में उन 27 सीटों पर विचार किया गया जो अभी कांग्रेस के पास नहीं हैं और इनमें से 24 सीटों पर भाजपा का कब्जा है। इन्हीं सीटों को लेकर कांग्रेस नेता अपनी रणनीति को धार देने पर विचार कर रहे हैं। इस बैठक में पार्टी के ऐसे मौजूदा विधायकों के नामों पर भी विचार किया गया जिन के बारे में उनके इलाके के कांग्रेसी नेताओं और कार्यकर्ताओं के अनुकूल विचार नहीं हैं। इन विधायकों के खिलाफ उनके क्षेत्र के कांग्रेस के नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी और पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र भेजे थे।

 

श्रीकान्त शर्मा

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