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आइए, रामराज्य पुन: साकार करें!

प्रजा के जीवन को सुखी-समाधानी एवं वैभवसंपन्न बनाने वाले; अपराध, भ्रष्टाचार, रोग आदि रहित; प्राकृतिक आपदा से मुक्त…ऐसा एक ही राज्य है और वह है रामराज्य!

रामराज्य की प्रजा धर्माचरिणी थी; इसीलिए वह प्रभु श्रीराम जैसे सात्त्विक राज्यकर्ता से धन्य हुई और आदर्श रामराज्य (ईश्वरीय राज्य) भोग पाई। पहले समान रामराज्य, वर्तमान कलियुग में भी संभव है!

राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रगीत का सम्मान करें!

• राष्ट्रध्वज को किसी उंचे स्थान पर फहराएं।
• प्लास्टिक के राष्ट्रध्वजों का उपयोग न करें।
• ध्यान रखें कि राष्ट्रध्वज नीचे अथवा कूड़े में न गिरे।
• राष्ट्रध्वज का उपयोग शोभा की वस्तु के रूप में अथवा पताका एवं खिलौने के रूप में न करें।
• जिन वस्त्रों पर राष्ट्रध्वज छपा हुआ है, ऐसे वस्त्र न पहनें तथा अपने मुख अथवा शरीर पर ध्वज चित्रित न कराएं।
• राष्ट्रगीत के समय बातें न करें, ‘सावधन’ मुद्रा में खडे रहें। राष्ट्र-प्रतीकों का सम्मान करें, राष्ट्राभिमान बढ़ाएं।
देवालयों को सामूहिक उपासना का केंद्र बनाएं!
• अपने निकट के देवालय में प्रतिदिन आरती, प्रार्थना, व्यक्तिगत एवं सामूहिक नाम जप, सत्संग आदि के लिए एकत्रित हों!
• देवालयों में ‘धर्मशिक्षा’ एवं बाल-संस्कार वर्ग आरंभ करें!
• संस्कृत पाठ, योगासन जैसे सांस्कृतिक पोषण करनेवाले उपक्रम देवालयों में आरंभ करने हेतु योगदान दें!
• सप्ताह मे एक बार देवालयों की सामूहिक स्वच्छता करें!

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