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चुनावी घमासान की गर्मी जोरों पर

दिल्ली में राजनीतिक खींचतान और कशमकश के बावजूद भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड ने दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष विजय गोयल के मुकाबले डॉ. हर्षवर्धन को विधानसभा चुनाव की जंग जीतने के लिए मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित कर दिया है। लेकिन इसके साथ ही राजस्थान को लेकर फिर सवालिया निशान उठ खड़े हुए हैं?
पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित हो चुका है। मध्यप्रदेश और छतीसगढ़ में भाजपा सरकार है, इसलिए स्वाभाविक रूप से चुनावी सफलता मिलने पर वर्तमान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह तथा डॉ. रमनसिंह ही सत्ता की बागडोर सम्भालेंगे। मिजोरम में भाजपा सत्ता की दौड़ में नहीं है। दिल्ली और राजस्थान में कांग्रेस सत्तारूढ़ है, लिहाजा वहां भावी मुख्यमंत्री की दावेदारी को लेकर भाजपा में ऊहापोह में हालात बनते बिगड़ते रहे हैं। दिल्ली के लिए तो पार्टी में प्रदेश अध्यक्ष से इतर डॉ. हर्षवर्धन को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बना दिया है। अब सवाल राजस्थान का रह गया है कि क्या यहां भी इसी नीति का अनुसरण किया जाएगा। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह सहित पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी भी श्रीमती वसुन्धरा राजे को राजस्थान का भावी मुख्यमंत्री कहने से नहीं चूके हैं। स्वयं वसुन्धरा समर्थकों ने प्रतिपक्ष नेता की जगह प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पद का कार्यभार सम्भालने के साथ उन्हें मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित कराने के लिए लम्बी मुहिम भी चलाई थी। मामला ठंडा पडऩे और अब चुनाव कार्यक्रम घोषित होने तथा दिल्ली में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा के बाद अब राजस्थान में यह सवाल सुगबुगाने लगा है। भाजपा संसदीय बोर्ड की अगली बैठक और इस बारे में घोषणा होने तक भाजपा सहित राजनीतिक क्षेत्रों में उत्सुकता बनी रहेगी।
  1. पिछले विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता की दौड़ से वंचित करने में अहम भूमिका निभाने वाले बागी नेता डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने जयपुर में 24 अक्टूबर को अमरूदों के बाग की अपेक्षा मानसरोवर इलाके में विशाल विजय संकल्प रैली का आयोजन कर अपनी राजनीतिक ताकत तथा व्यापक जनाधार का दम खम दिखा दिया है। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष पी.ए. संगमा की पार्टी नेशनल पीपुल्स पार्टी (राजपा) की इस रैली में मीणा ने कांग्रेस शासन के साथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भाजपा अध्यक्ष वसुन्धरा राजे को सीधे निशाने पर लिया। उनका सीधा आरोप था कि दोनों भ्रष्टाचार में लिप्त रहे हैं और परस्पर दोषारोपण तथा जांच पड़ताल की बहानेबाजी के साथ बारी-बारी से सत्ता की लूट में पीछे नहीं हैं। लेकिन राजपा ने अब जनता के समक्ष सशक्त विकल्प खड़ा कर उन्हें सत्ता से वंचित करने का खतरा पैदा कर दिया है।

    भाजपा के कद्दावर नेता रहे पूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय भैरोंसिंह शेखावत के आशीर्वाद से राजनीति में सक्रिय हुए किरोड़ी लाल ने भावुक होकर कहा कि उनकी 36 साल की राजनीतिक तपस्या को वसुन्धरा ने भंग कर दिया है। पिछले चुनाव में मीणा अपनी पत्नी गोलमा देवी सहित निर्दलीय विधायकों को जिताने में सफल रहे और सबसे बड़े दल के रूप में कांग्रेस को समर्थन देकर सत्तारूढ़ करवाया। गोलमा देवी गहलोत मंत्रिमंडल में मंत्री भी रही और बाद में त्याग पत्र देकर राजपा की प्रदेश अध्यक्ष के रूप में कमान संभाली। विधानसभा से त्यागपत्र देकर खुद मीणा लोकसभा सदस्य बने और तब से अपनी राजनीतिक जमीन को पुख्ता करने में जुटे हुए है। उन्होंने हेलीकॉप्टर से राज्यभर में और विशेषकर आदिवासी जनजाति बहुल इलाकों में सघन दौरा किया। हर जोर जुल्म तथा अन्याय के खिलाफ धरना, प्रदर्शन व आंदोलन में जनसमूह का नेतृत्व किया। हेलीकॉप्टर के खर्चे को लेकर आरोपों के बारे में मीणा ने रैली में फिर सफाई देते हुए कहा कि समर्थकों द्वारा एकत्रित पांच करोड़ की राशि से वह राजनीतिक यात्राएं कर रहे हैं। यदि उनके पास भ्रष्टाचार का एक भी पैसा मिल जाए तो वह राजनीति छोड़ देंगे। भावी मुख्यमंत्री बताए जाने पर किरोड़ी ने कहा कि वह संतरी बनकर जनता की सेवा करेंगे। किसान का बेटा ही मुख्यमंत्री बनेगा। भ्रष्टाचार पर गरजते हुए किरोड़ी ने ”कांग्रेस भाजपा के नेताओं ने सत्ता में रहकर जो खाया है, वह उनकी नाक से निकाल लूंगा’’ कहकर शेखावत के प्रसिद्ध जुमले की याद दिला दी। मीणा ने जनता से वायदे करते हुए गुर्जरों सहित अन्य पिछड़ा वर्ग को पांच फीसदी आरक्षण देने, आदिवासी बच्चों को नौकरी में विशेष आरक्षण, किसानों के लिए अलग से कृषि बजट तथा मुफ्त पानी बिजली, दूध के लिए श्वेत क्रांति, पूर्ण शराबबंदी, शिक्षा का बजट पन्द्रह फीसदी किए जाने का संकल्प व्यक्त किया।

    गौरतलब है कि मीणा की पत्नी गोलमा देवी अनपढ़ हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी के चुनाव चिन्ह ‘किताब’ का उल्लेख करते हुए कहा कि शिक्षा के बल पर डॉक्टर, इंजीनियर, कलेक्टर बनते हैं। वह खुद अंगूठा छाप रही हैं, लेकिन जनता ने उन्हे बोलना सिखा दिया है। गोलमा ने अपने रोचक भाषण से तालियां बटोरी। संगमा की सांसद बेटी अगाथा संगमा रैली की विशाल भीड़ देख गदगद हो गईं और कहा कि उनके संसदीय क्षेत्र की आबादी यहां सिमट कर आ गई है। वसुन्धरा की कार्यशैली से नाराज प्रदेश भाजपा के पूर्व कोषाध्यक्ष और प्रवक्ता सुनील भार्गव भी किरोड़ी लाल मीणा के साथ जुड़ चुके हैं और उन्हें पार्टी का कार्यवाहक अध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा विधायक दल के उपनेता घनश्याम तिवाड़ी का वसुन्धरा से 36 का रिश्ता जग-जाहिर है। उन्होने सुराज संकल्प यात्रा से भी दूरी बनाए रखी थी और उससे पहले देव दर्शन यात्रा का आगाज कर अपना रास्ता चुन लिया था। इन दिनों वह जयपुर से निकल कर प्रदेश के दौरे पर हैं। जोधपुर में ब्राह्मण समुदाय से रूबरू होते समय तिवाड़ी के समक्ष एक सवाल उठा – ”आप वसुन्धरा राजे से नाराज हैं या भाजपा से?’’ तिवाड़ी का तपाक से जवाब था – ”भाजपा से नाराज नहीं हूं।’’ फिर किससे नाराज हैं? इस पर उन्होंने एक शेर सुना दिया- ”हम मर मिटे जिसके लिए ये हाल है उसका, ईंटें चुरा ले गए मेरी मजार से।’’ वह पार्टी कार्यकर्ताओं से पार्टी और संगठन को मजबूत बनाने पर बल दे रहे हैं। तिवाड़ी के इस तेवर के चलते वसुन्धरा द्वारा घोषित पन्द्रह सदस्यीय प्रदेश चुनाव समिति में उन्हें शामिल नहीं किया गया। अलबता ब्राह्मण समुदाय से जुड़े तीन नेताओं को स्थान मिला है।

    भाजपा की सुराज संकल्प यात्रा के समापन पर जयपुर में भाजपा के हीरो नरेन्द्र मोदी की विशाल रैली के जवाब में कांग्रेस ने मेवाड़ संभाग के सलूम्बर में पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की रैली आयोजित की। जनजाति आदिवासी बहुल इस अंचल में अंधविश्वास की जड़ें मजबूत रही हैं और इसी के चलते सलूम्बर में रैली हुई, क्योंकि इस सीट पर जीतने वाले विधायक के दल की सरकार बनती आई है। वैसे भी यह राजनीतिक अवधारणा है कि जयपुर में सत्ता का सफर मेवाड़ से होकर जाता है। गत चुनाव में भाजपा इस संभाग में बुुरी तरह पिछड़ गई, इसलिए पार्टी ने अनुसूचित जनजाति मोर्चा सम्मेलन के रूप में 26 अक्टूबर को उदयपुर के गांधी ग्राउंड में नरेन्द्र मोदी की रैली आयोजित कर मेवाड़ में कमल खिलाने की जुगत की है। प्रदेश अध्यक्ष वसुन्धरा राजे प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया वाहन रैली के साथ मैदान में पहुंचीं। कटारिया ने कांग्रेस राज में मेवाड़ अंचल की घोर उपेक्षा का आरोप लगाया और दावा किया कि मेवाड़ अपना हक लेकर रहेगा। वसुन्धरा राजे ने मोदी को इस सदी का विकास पुरूष तथा भावी प्रधानमंत्री बताया। उन्होंने अपने राज तथा कांग्रेस के शासन में मेवाड़ क्षेत्र के विकास की तुलनात्मक तस्वीर पेश की और चुनाव घोषणा पत्र के संदर्भ में महाराणा प्रताप आदिवासियों के धर्मगुरू गोविन्द गुरू के नाम पर योजनाएं चलाने, लघु सीमांत आदिवासी किसानों के कर्जे माफ करने का संकेत दिया।

    उदयपुर की रैली में नरेन्द्र मोदी पूरी लय में थे। उन्होंने अपने विशिष्ट अंदाज में विशाल जनसमूह से जीवंत संवाद किया और अपने हर मुद्दे पर उनसे हामी भरवायी। मेवाड़ की धरती से उमड़े मानव सागर को प्रणाम करते हुए मोदी ने महाराणा प्रताप तथा रणबांकुरे भील पंूजा जी का कृतज्ञता से स्मरण किया। उन्होंने भगवान श्रीराम के चौदह वर्ष के वनवास में वनवासियों आदिवासियों के सहयोग का भी उल्लेख किया। सोलहवीं शताब्दी के प्रमुख संत माव जी महाराज और उनके ”चौपड़ा’’ बांचने की परम्परा का मोदी ने बांगड़ भाषा में जिक्र किया और कहा कि उन्होंने चार सौ साल पहले कह दिया था कि भारत में नए युग का उदय इसी क्षेत्र से होगा। मोदी ने कहा कि अंग्रेजों के खिलाफ इसी धरती से बिगुल फूंका गया था और अब चुनाव कार्यक्रम की घोषणा के बाद राजस्थान में उनकी इस पहली रैली से नए समाज का निर्माण भी मेवाड़ से होगा।

    मोदी ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा कि शहजादे साम्प्रदायिकता और युवकों के आई.एस.आई. से रिश्तों का भी जिक्र कर रहे हैं। इस सम्बन्ध में की गई जांच पड़ताल से उन्हें पता लगा कि विधानसभा चुनाव के टिकट की जुगाड़ में लगे राजस्थान के एक पुलिस अधिकारी ने यह कथा सुनाई और शहजादे ने इसे जग-जाहिर कर दिया। लेकिन राजस्थान में भरतपुर जिले में गोपालगढ़ की घटना की जानकारी के लिए शहजादे गहलोत सरकार को बिना बताए चुपचाप पहुंचे। मोटर साइकिल तथा उसके चालक को लेकर भी सवालिया निशान उठे। गहलोत सरकार पर सीधे निशाना साधते हुए मोदी ने कहा कि मानवाधिकार आयोग, अल्पसंख्यक आयोग, उच्चतम न्यायालय, राजस्थान उच्च न्यायालय सरकार की कार्यशैली को लेकर गंभीर टिप्पणियां कर चुके हैं। राज्यपाल भी आदिवासियों के कल्याण में सरकार की विफलता को अभिव्यक्त कर चुकी हैं। इस राज में बहन बेटियों की इज्जत भी सुरक्षित नहीं है। देश में परिवर्तन की आंधी चलने का उल्लेख करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार को चुनाव से पहले अपने कामकाज का हिसाब देना होगा। उन्होंने वाजपेयी और मनमोहन सरकार के समय जरूरी जिंसो के भावों की तुलना करते हुए कहा कि सरकार सौ दिन में महंगाई पर काबू पाने में विफल रही है। महंगाई की मार से गरीबों के घर में चूल्हा जलना मुश्किल हो गया है। गरीब का बच्चा आंसू पीकर सोता है। प्याज के दामों में अप्रत्याशित वृद्धि का जिक्र करते हुए मोदी ने कहा कि महाराष्ट्र कर्नाटक और आन्ध्र प्रदेश में सर्वाधिक प्याज का उत्पादन होता है। इस बार उत्पादन में करीब 5 प्रतिशत की कमी हुई, लेकिन उसके दाम पन्द्रह सौ फीसदी तक बढ़ गए। इन तीनों राज्यों में कांग्रेस की सरकार है और जमाखोरी से प्याज की यह हालत हुई है, लेकिन सरकार कोयले में रस ले रही है और सोने पर कब्जा करने में लगी है।

    सीबीआई के काम काज और कार्यशैली पर टिप्पणी करते हुए मोदी ने कहा कि कोयला घोटाले में एक जिम्मेदार पूर्व अधिकारी द्वारा प्रधानमंत्री पर लगाए गए आरोप के बावजूद सीबीआई को सांप सूंघ गया है। यदि विरोधी पक्ष के नेताओं पर इस तरह के आरोप लगते तो सीबीआई उन्हें जेल में डाल देती। उन्होंने कहा कि जब कांग्रेस को यह लग गया कि राजस्थान में वह सत्ता में नहीं लौटेगी, तो सीबीआई ने प्रतिपक्ष के नेता गुलाब चन्द कटारिया को घेरने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि वह प्रमाणिकता से कह रहे हैं कि सीबीआई का अब वसुन्धरा राजे तक जाने का इरादा है।

    (उदय इंडिया ब्यूरो, जयपुर)

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