ब्रेकिंग न्यूज़ 

मीडिया के माध्यम से सियासी खेल

आंध्र प्रदेश में नेताओं और उद्योगपतियों द्वारा संचालित कई समाचार चैनलों की बाढ़ आ गयी है। वर्तमान में 20 से ज्यादा समाचार चैनल तेलगू में प्रसारित होते हैं। बड़ी लागत और स्थापित होने में लंबे समय की मांग के कारण ‘नो प्रॉफिट-नो लॉस’ की स्थिति आने में काफी लंबा वक्त लग जाता है। इसके बावजूद राजनेता से लेकर व्यवसायी तक मीडिया उद्योग में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित करना चाह रहे हैं।

आंध्र प्रदेश एक ऐसा राज्य है, जहां न्यूज चैनलों की भरमार है और कई चैनल शुरूआत की बाट देख रहे हैं। राजनेता और औद्योगिक समूह अपने पेशे में राजनीतिक लाभ लेने के लिए टीवी समाचार चैनलों में अपनी हिस्सेदारी और प्रबंधन में हाथ अजमा रहे हैं। औद्योगिक घराने न्यूज चैनलों में निवेश को सत्ता के साथ नजदीकी बढ़ाने के लिए जनसंपर्क के रूप में देखते हैं।

आम चुनाव नजदीक आने के साथ ही पिछले एक साल से विभिन्न राजनीतिक दल और नेता टीवी चैनलों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने में लग गए हैं। कई राजनेताओं की मीडिया समूहों में हिस्सेदारी है। इसकी शुरूआत वाई.एस.आर. कांग्रेस पार्टी के प्रमुख और कडप्पा से सांसद वाई.एस. जगनमोहन रेड्डी से हुआ। उस वक्त आंध्र प्रदेश में जगनमोहन रेड्डी के पिता डॉ. वाई.एस. राजशेखर रेड्डी की सरकार थी। जगनमोहन ने 2008 में ‘साक्षी’ नाम से अपना समाचार चैनल की शुरूआत की थी।

2005 में सत्ता में आने के बाद राजशेखर ने यह महसूस किया कि ज्यादातर मीडिया समूह उनके खिलाफ हैं। उस वक्त ज्यादातर समाचार चैनल विपक्षी नेता और तेलगुदेशम पार्टी के प्रमुख चंद्रबाबु नायडू का समर्थन कर रहे थे और राजशेखर रेड्डी सरकार के खिलाफ कार्यक्रम प्रस्तुत करते थे। राजशेखर ने यह महसूस किया कि लोगों से संपर्क के लिए अपना कोई माध्यम होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने भारी निवेश और आधुनिक उपकरणों के साथ ‘साक्षी’ नाम से दैनिक समाचार पत्र निकालना शुरू किया। बाद में इसी नाम से उन्होंने समाचार चैनल की भी शुरूआत की। तब से लेकर आज तक ‘साक्षी’ वाई.एस.आर. परिवार और उनके राजनीतिक आकांक्षाओं का मुख-पत्र बना हुआ है। तब तक चंद्रबाबु नायडू के पास अपना समाचार चैनल या समाचार-पत्र नहीं हुआ करता था, लेकिन उन्हें अपने पक्ष में मीडिया प्रबंधन में दक्षता हासिल थी। दूसरा विकल्प उपलब्ध करा कर साक्षी चैनल ने तमाम परिदृश्य को बदल डाला।

अपने समाचार चैनल का मालिक बनना, नेताओं के लिए सत्ता के गलियारों में अपनी पकड़ मजबूत बनाने और खुद को बढ़ावा के लिए के रूप में एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा। आज कई नेताओं ने विभिन्न समाचार चैनलों में अपनी हिस्सेदारी सुनिश्चित कर ली है। हालांकि घटते राजस्व, दर्शकों की संख्या में लगातार होती कमी और परिचालन लागत में वृद्धि आदि कई कारक इस तरह के प्रस्ताव में कमी के कारण भी हैं। अब महत्वाकांक्षी नेताओं को समाचार चैनल बाजार की मार ने असहज महसूस करने पर विवश कर दिया है।

लोकप्रिय तेलगू समाचार चैनल ‘जी 24 घंटालू’ के बंद होने की घोषणा इस रूझान को प्रदर्शित करता है। प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष और परिवहन मंत्री बोस्टा सत्यनारायण ने अपना हाथ जलाने के बाद, टेलिविजन बाजार की कठोर वास्तविकताओं से सीख ले ली। कहा जाता है कि पिछले एक साल के दौरान बोस्टा ने 5 करोड़ रूपए का नुकसान झेला है। साल भर पहले जी टेलिविजन नेटवर्क ने अपना चैनल बोस्टा परिवार को पट्टे पर दिया था, लेकिन कुछ सप्ताह पहले जी नेटवर्क ने बोस्टा के साथ अपने अनुबंध को खत्म कर लिया। चैनल को बंद करने से पहले जी समूह ने अपने कर्मचारियों को तीन महीने का वेतन देकर अपना पेरॉल वापस ले लिया। बंद होने के कुछ दिन पहले से ही चैनल ने अपना प्रसारण पूरी तरह बंद कर दिया था, जबकि तकनीकि रूप से यह प्रसारण के लिए अभी भी मान्य है।

सूत्रों के अनुसार, पिछले साल बोस्टा ने जी समूह के साथ तब अनुबंध किया, जब हानि के कारण ‘जी 24 घंटालू’ चैनल के बंद होने की योजना बन रही थी। उन्होंने मुख्यमंत्री बनने की अपनी महत्वकांक्षा के कारण मीडिया व्यवसाय में कदम रखा था। अनुबंध के अनुसार, बोस्टा को पट्टे की तिथि से 18 महीने के अंदर चैनल को उस स्थिति पर लाना था, जहां लागत शून्य हो जाए। उसके बाद चैनल में बोस्टा की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत तय की गई थी। तब तक बोस्टा को चैनल में विज्ञापन से राजस्व के बाद, जी समूह के खाते में होने वाली हानियों को वहन करना था।

अनुबंध की अवधि खत्म हाती रही, लेकिन चैनल ‘ब्रेक-इवेन प्वॉइंट’ तक नहीं पहुंच पाया। सूत्रों की मानें तो बोस्टा हर महीने 40 लाख रूपए की हानि सहते आ रहे हैं। बोस्टा ने सोचा कि चैनल उनकी राजनीतिक यात्रा में सहयोगी होगा, लेकिन अपनी बेटी की शाही शादी सहित कई कार्यक्रमों का प्रसारण कराने के बावजूद उन्हें कुछ खास राजनीतिक फायदा नहीं हुआ। सूत्रों के अनुसार – ‘बोस्टा के विरोधियों और अधिकारियों की छवि मलिन करने के कारण जी समूह को काफी बदनामी झेलनी पड़ी। पिछले एक साल में पेश किए गए कार्यक्रमों के कारण जी समूह के प्रबंधन मंडल को बेशर्म पत्रकारिता करने के नाम पर कई शिकायतें मिली। अनुबंध को समाप्त करने की यही मुख्य वजह बनी।’

पिछले कुछ सालों में आंध्र प्रदेश में नेताओं और उद्योगपतियों द्वारा संचालित कई समाचार चैनलों की बाढ़ आ गयी है। वर्तमान में 20 से ज्यादा समाचार चैनल तेलगू में प्रसारित होते हैं। बड़ी लागत और स्थापित होने में लंबे समय की मांग के कारण ‘नो प्रॉफिट-नो लॉस’ की स्थिति आने में काफी लंबा वक्त लग जाता है। जबकि नेताओं ने अपना मीडिया समूह खोलने का रास्ता इसलिए अपनाया, क्योंकि उन्हें लगता है कि 2014 के चुनावों के लिए प्रचार और अभियानों में वे खुद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके पीछे अपना व्यवसाय स्थापित करना भी एक कारण हो सकता है।

वर्तमान में ‘ईटीवी-2’, ‘एबीएन आंध्र ज्योति’ और ‘महा टीवी’ जैसे चैनल प्रत्यक्ष रूप से चंद्रबाबु नायडू के लिए गुणगान कर रहे हैं। उनके नजदीकी रिश्तेदार एन. श्रीनिवास द्वारा शुरू किया गया, अपेक्षाकृत कम लोकप्रिय एक अन्य चैनल ‘स्टूडियो एन’ को चंद्रबाबु नायडू के बेटे लोकेश संचालित कर रहे थे। फिलहाल श्रीनिवास राव के दामाद और फिल्म अभिनेता जूनियर एन.टी.आर. और लोकेश के बीच अहं के टकराव के कारण चैनल नायडू के खिलाफ खबरें दिखा रहा है। वर्तमान में चैनल वाई. एस. जगनमोहन रेड्डी का समर्थन कर रहा है। इसके पीछे श्रीनिवास राव की राजनीतिक महत्वकांक्षा बताई जा रही है। श्रीनिवास आने वाले चुनाव में वाई.एस.आर. कांग्रेस से टिकट पाना चाहते हैं। ‘आई न्यूज’ और ‘ए टीवी’ में हिस्सेदारी के जरिए मुख्यमंत्री एन. किरण कुमार रेड्डी ने भी मीडिया व्यवसाय में कदम रख दिया है। ये चैनल मुख्यमंत्री के उपलब्धियों को लगातार प्रसारित कर रहे है। अपने चैनल ‘साक्षी’ के अलावा, कहा जा रहा है कि जगनमोहन रेड्डी की ‘एनडीटीवी’ और ‘आई न्यूज’ सहित तीन अन्य चैनलों में भी हिस्सेदारी है।

इसी तरह सीपीआई (एम) ने भी अपना न्यूज चैनल ’10 टीवी’ की शुरूआत की है। जबकि सीपीआई अपना न्यूज चैनल ‘टीवी 99’ को लॉन्च करने की तैयारी में है। पूर्व केन्द्रीय मंत्री जी. वेंकटस्वामी के बेटे और तेलंगाना कांग्रेस के सांसद जी. वेंकटनंद एक अन्य तेलगू समाचार चैनल ‘वी 6’ चलाते हैं। जबकि तेलंगाना राष्ट्र समिति का अपना समाचार चैनल ‘टी न्यूज’ प्रसारित होता है। कहा जाता है कि ‘राज न्यूज’ में भाजपा की भी हिस्सेदारी है।

इमेज हॉस्पीटल और एग्री गोल्ड जैसे व्यसायिक घरानों ने भी अपने व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए अपने-अपने समाचार चैनलों की शुरूआत की है। तुलसी सीड्स का भी अपना समाचार चैनल है। औद्योगिक घरानों ने अपने व्यवसायिक हितों को साधने के लिए चैनलों की शुरूआत की या फिर हिस्सेदारी ली, ताकि इनका इस्तेमाल जनसंपर्क के रूप में किया जा सके। यह आम तथ्य है कि हर राजनीतिक दल का अपना समाचार चैनल है, जो उस पार्टी की बात करता है। कहा जाता है कि आंध्र प्रदेश में नेता बनने के लिए अपना समाचार चैनल होना जरूरी है। यह सब पिछले कुछ सालों से हो रहा है।

अभी हाल ही में मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी की निकटता वाले समाचार चैनल ने अपने यहां विशेष समाचार बुलेटिन चलाकर सनसनी फैला दी कि मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी की जगह कृषि मंत्री कन्ना लक्ष्मीनारायण को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। चैनल ने यह भी कहा कि किरण कुमार रेड्डी को इसलिए बाहर किया जाएगा, क्योंकि उन्होंने आंध्र प्रदेश की एकता को बनाए रखने की बात कही है, जो कि राज्य के बंटवारा करने के पार्टी हाईकमान के फैसले के विरुद्ध है।

यह ब्रेकिंग न्यूज उस समय प्रसारित किया गया, जब पार्टी सुप्रीमो सोनिया गांधी के बुलावे पर कन्ना लक्ष्मीनारायण अपने क्षेत्र गुंटूर में प्रस्तावित आधिकारिक कार्यक्रम को निरस्त कर दिल्ली चले गए। इस मुलाकात ने कई तरह के अटकलों को जन्म दिया, जिसमें यह भी शामिल था कि सोनिया गांधी ने लक्ष्मीनारायण से मुख्यमंत्री पद के लिए या सीमांध्र क्षेत्र के प्रमुख के रूप में कमान संभालने के लिए तैयार रहने को कहा है। कहा जा रहा है कि तेलंगाना मुद्दे पर किरण कुमार रेड्डी द्वारा पार्टी के फैसले के विरुद्ध जाने के कारण ऐसा निर्णय लिया गया। दूसरी तरफ कन्ना लक्ष्मीनारायण ने पार्टी नेतृत्व से यह वादा किया कि वे पार्टी हाईकमान के राजनीतिक एजेंडे को लागू करेंगे।

कन्ना लक्ष्मीनारायण अटकलों के इस बाजार को गर्म रहने देने के लिए कुछ दिनों तक शांत रहे, लेकिन बाद में इन अटकलों पर विराम लगाते हुए कहा कि उन्हें सोनिया गांधी की तरफ से कोई बुलावा नहीं आया था, बल्कि वे अपनी स्वेच्छा से दिल्ली गए थे। कन्ना ने इस अटकल का खंडन किया कि उन्हें मुख्यमंत्री पद के लिए तैयार रहने को कहा गया है। लेकिन राज्य में पार्टी का नेतृत्व करने की बात को वे टाल गए। यह पूरा मामला दिखाता है कि किस तरह नेता अपनी राजनीतिक महत्वकांक्षा को साधने के लिए टीवी चैनलों का इस्तेमाल कर रहे हैं।

 

हैदराबाद से चौधरी नरेन्द्र

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