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जन-मुद्दों की मशाल उठाए मोदी

‘भारत माता की जय’ का उद्घोष मोदी की विजय शंखनाद रैली का पहला वाक्य है। फिलहाल उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित कुल नौ रैली-स्थलों में कानपुर को सबसे पहले चुना गया। कानपुर में ही जनसंघ का पहला वार्षिक अधिवेशन हुआ था, जिस के कारण, कानपुर भाजपा के लिए ऐतिहासिक जगह रही है। भाजपा इसीलिए कानपुर को पार्टी के लिए शुभ भी मानती है। यह भी एक वजह रही है कि कानपुर की इस रैली में मंच-निर्माण में वास्तुकला का विशेष ध्यान रखा गया। देश को आठ प्रधानमंत्री देने वाला उत्तर प्रदेश राज्य, हर राजनीतिक दल की निगाह में खास इसलिए है, क्योंकि यहां लोकसभा की सबसे ज्यादा 80 सीटें हैं। कांग्रेस-सपा-बसपा मुक्त उत्तर प्रदेश बनाने के अह्वान के साथ ही उत्तर प्रदेश में अब तक मोदी की चार (कानपुर, झांसी, बहराईच और आगरा में) विजय शंखनाद रैलियां हो चुकी हैं। अन्य पांच रैलियां फर्रुखाबाद, फतेहपुर, कन्नौज, अकबरपुर और इटावा में प्रस्तावित हैं। मोदी की रैलियों के लिए उन्हीं जगहों को चुना गया है, जहां की सीटें या तो कांग्रेस के पास हैं या जिन पर उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ समाजवादी पार्टी का कब्जा है। इसे भाजपा की एक बेहतरीन रणनीति कही जा सकती है कि मोदीमय देश में कांग्रेस और सपा मुक्त भारत और उत्तर प्रदेश बनाने के लिए उन्हीं के आधार वाली जगहों को चुना गया है।

उत्तर प्रदेश में अब तक हुई चार रैलियों में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह और नरेन्द्र मोदी सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने विजय शंखनाद रैली को सफल बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी है। आम लोगों की जन-भावनाओं के अनुसार राजनाथ सिंह की रणनीति अब तक सफल रही है। नरेन्द्र मोदी और राजनाथ सिंह ने कांग्रेस की विभाजनकारी वोट बैंक की राजनीति, महंगाई, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, गरीबी, बेरोजगारी, विकास जैसे मुद्दों के लिए सपा और बसपा को कठघरे में खड़ा किया। एक तरफ जहां कांग्रेस और सपा, व्यक्तिगत रूप से मोदी को घेरने में लगी रही, वहीं मोदी देश की एकता और अखंडता, विकास, गरीबी-उन्मूलन और रोजगार जैसे भावनात्मक मुद्दों को सामने रख कर जनसभा में जुटी लाखों लागों की भीड़ को आकर्षित करने में सफल रही। शायद यही वजह है कि मोदी की रैलियों में उम्मीद से बढ़कर लोगों का हुजूम जुटा।

21 नवंबर को जब नरेन्द्र मोदी आगरा के कोठी मीना बाजार मैदान में विजय शंखनाद रैली को संबोधित कर रहे थे, उसी समय वहां से 200 किलोमीटर दूर बरेली में सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव भी एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। एक तरफ मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव बरेली में मोदी को घेरने की कोशिश कर रहे थे, तो दूसरी तरफ मोदी आगरा की रैली में स्थानीय मुद्दों की अनदेखी की बात कर रहे थे। मोदी ने कहा कि आज पर्यटन उद्योग 3 ट्रिलियन डॉलर का हो गया है, लेकिन दिल्ली में बैठी सरकार को इससे कोई मतलब नहीं है। आगरा एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है, लेकिन यहां एक हवाई अड्डा तक नहीं है। इसके लिए मोदी ने राज्य सरकार के साथ-साथ केन्द्र सरकार को भी जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार के मुखिया के छोटे से गांव में हवाई अड्डा बन सकता है, लेकिन आगरा में क्यों नहीं। उन्होंने इसी प्रकार के स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरते हुए कहा कि यमुना के किनारे बसे होने के बावजूद आगरा में पेयजल की भारी समस्या है। मोदी ने कहा कि सपा और बसपा, कांग्रेस की राह पर चलते हुए राज्य में वोटबैंक के लिए जाति और धर्म की राजनीति कर रही हैं। सपा और बसपा, कांग्रेस की टीम ‘बी’ है। राज्य में बिजली की समस्या की तरफ ध्यान दिलाते हुए कहा कि सरकार में शामिल लोगों के यहां 24 घंटे बिजली रहती है, लेकिन आम जनता को बिजली के लिए तरसना पड़ता है।

इसके पहले 19 अक्टूबर 2013 को कानपुर में आयोजित विजय शंखनाद रैली में लोगों की भावनाओं को देखते हुए मोदी ने कहा कि आज केन्द्र सरकार की नीतियों के कारण लोगों में जबरदस्त गुस्सा है। उन्होंने पिछले 60 सालों से लोगों को भुलावे में रखने का कांग्रेस पर आरोप लगाया। रैली में पहुंची भारी भीड़ से उन्होंने पूछा – क्या आप चाहते हैं कि आपके बच्चे भी वही जिंदगी जिएं, जो आप जी रहे हैं? अगर नहीं, तो भारत को कांग्रेस मुक्त बनाना होगा। कांग्रेस चुनाव के समय वादा करती है, लेकिन बाद में भूल जाती है। उन्होंने कांग्रेस हाईकमान पर अंगुली उठाते हुए पूछा कि बढ़ती कीमतों पर सोनिया गांधी और शहजादे (राहुल गांधी) ने कभी कुछ कहा? अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री महंगाई के मुद्दे पर कभी नहीं बोले? मोदी ने सपा और बसपा को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि कांग्रेस को बचाने वाली सपा और बसपा भी इसके लिए उतनी ही दोषी है। कानून-व्यवस्था पर अंगुली उठाते हुए मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो चुकी है, जिसकी वजह से प्रदेश में पिछले एक साल में हजारों बेगुनाह लोगों ने अपनी जानें गंवाईं हैं।

प्रदेश में किसानों की स्थिति की ओर इशारा करते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस के नेता कहते हैं, गरीबी नाम की कोई चीज नहीं होती, यह ‘स्टेट ऑफ माइंड’ है। इसी सोच के कारण गरीब किसान, कांग्रेस के लिए मजाक बनकर रह गए हैं। यह सरकार न गरीबों के लिए हितकर है, और न ही अमीरों के लिए। मोदी ने वोटबैंक की राजनीति पर आघात करते हुए कहा कि कांग्रेस जब भी कठिनाई महसूस करती है, वोटबैंक की राजनीति करने लगती है। कांग्रेस नेता कहते हैं, 12 रूपए में पेट भरा जा सकता है। उन्होंने सभा में उपस्थित लोगों से पूछा – क्या आप 12 रूपए में पेट भर सकते हैं, अगर नहीं तो गरीबों के साथ मजाक क्यों?

सीमा पर सैनिकों के सिर काटे जाने की घटना पर प्रधानमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए मोदी ने कहा कि सीमा पर सैनिकों के सिर काटे जाते हैं, फिर भी प्रधानमंत्री खामोश रहते हैं। उन्होंने रक्षामंत्री और सेना के अलग-अलग बयान को एक ऐसा मुद्दा बताया, जो इसके पहले आज तक नहीं हुआ। कांग्रेस को विघटनकारी मानसिकता वाली पार्टी बताते हुए कहा कि लोगों को बंटने का काम उसके डीएनए में शामिल है। कांग्रेस जाति और धर्म के नाम पर लोगों को बांटने में विश्वास करती है।

25 अक्टूबर को झांसी के जीआईसी मैदान में हुई रैली में मोदी ने कहा कि मुझे देश का प्रधानमंत्री नहीं, चौकीदार बनाइए। एक चौकीदार के रूप में मैं देश की सेवा करुंगा। उन्होंने कहा कि भाजपा जैसी पार्टी ही एक गरीब परिवार में जन्मे और रेलवे स्टेशन पर चाय बेचने वाले व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बना सकती है। राहुल गांधी के विवादास्पद बयान पर मोदी ने अंगुली उठाते हुए पूछा कि राहुल गांधी को किस हैसियत से खुफिया सूचनाएं उपलब्ध कराई जाती हैं? देश यह जानना चाहता है कि जिस व्यक्ति ने गोपनीयता की शपथ नहीं ली, उसे गोपनीय जानकारी किस आधार पर दी जा रही है? वह सिर्फ एक सांसद हैं। मध्य प्रदेश के इंदौर में एक सभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा था कि मुजफ्फरनगर हिंसा के शिकार मुस्लिम युवकों से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई संपर्क में है। इस बयान पर राहुल गांधी की देश भर में तीखी आलोचना हुई थी।

अपनी दादी इंदिरा गांधी की हत्या से उपजे गुस्से वाली राहुल गांधी के बयान पर मोदी ने पूछा कि क्या उसी गुस्से के कारण एक हजार सिखों की हत्या कर दी गई? उस हिंसा में शामिल किसी भी कांग्रेसी नेता के खिलाफ ट्रायल नहीं हुआ। मोदी ने कांग्रेस के 60 सालों के बदले भाजपा के लिए सिर्फ 60 महीने की मांग की। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर मोदी ने कहा कि सपा और बसपा जैसी पार्टियां वादों को निभाना नहीं जानती हैं, लेकिन अपना पेट भरना जानती हैं। जब तक राज्य से कांग्रेस, सपा और बसपा को हटाएंगे नहीं, तब तक यहां विकास संभव नहीं है।

पटना में मोदी की रैली में हुए धमाके और छह लोगों की मौत के बाद 8 नवंबर को बहराईच में मंच पर पहुंचते ही मोदी ने कहा कि ‘भारत माता की जय’ इतनी जोर से बोलो की मुजाहिदीनों में भय पैदा हो जाए। मतलब परस्ती की राजनीति पर कांग्रेस को आड़े हाथ लेते हुए मोदी ने कहा कि कांग्रेस अपना गढ़ बचाने के लिए सीबीआई का इस्तेमाल करती है। कांग्रेस पर आतंकवादी संगठन इंडियन मुजाहिदीन को खुली छूट देने का भी आरोप लगाया।

किसानों की समस्याओं को सामने रखते हुए मोदी ने कहा कि किसानों को बचाकर हम उनकी उत्पादकता को बचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि गुजरात में दशहरा के बाद चीनी मिलें काम करना शुरू कर देती हैं, लेकिन यहां दीवाली बीतने के बाद मिलें चालू होने का प्रयास कर रही हैं। मध्य प्रदेश भाजपा सरकार का उदाहरण देते हुए मोदी ने कहा कि राज्य में पिछले 50 सालों में जितनी सड़कें बनीं, उससे ज्यादा भाजपा सरकार ने सिर्फ 10 सालों में बनाई हैं। ममता बनर्जी का उदाहरण देते हुए मोदी ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल के लिए दिल्ली से लड़ती हैं, लेकिन सपा और बसपा दिल्ली को बचाती हैं।

प्रदेश में बढ़ते अपराध पर मोदी ने कहा कि अपराधियों को पार्टी में शामिल करने के लिए बसपा और सपा में प्रतियोगिता हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य के युवा मुख्यमंत्री ने उन्हें पत्र लिखकर शेर मांगा था। उन्होंने कहा – मुझे आश्चर्य हुआ कि उन्होंने गीर की गाय क्यों नहीं मांगी, बिजली और अमूल जैसे प्रोजेक्ट के विषय में जानकारी क्यों नहीं मांगी? गुजरात में 24 घंटे बिजली उपलब्ध कराने पर उन्होंने खुद को गर्वान्वित भी महसूस किया। विपक्षी दलों द्वारा गुजरात के पहले से ही विकसित होने का दावा करने वाले बयान पर मोदी ने कहा कि जब वह मुख्यमंत्री बनें, वहां बिजली और पेयजल की भारी किल्लत थी। उन्होंने दोनों की उपलब्धता सुनिश्चित की। राहुल गांधी के सत्ता को जहर बताने वाले बयान पर चुटकी लेते हुए मोदी ने कहा कि सत्ता को जहर बताने वाले, यूपीए की हार को देखते हुए बेचैन हैं। उन्होंने प्रदेश की जनता से आह्वान किया कि उत्तर प्रदेश हिंदुस्तान का भाग्य विधाता बन सकता है। यहां के लोग चाहेंगे तो देश को राजनीतिक स्थिरता मिल सकती है।

सुधीर गहलोत

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