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अब किसकी बारी?

यह संयोग है कि 1980 में अपनी स्थापना के बाद भाजपा ने पहली बार 200 सदस्यीय विधानसभा की सभी सीटों के लिए उम्मीदवार खड़े किए थे। इससे पहले जनता दल सहित अन्य दलों से हुए समझौते के कारण उसे सीटें छोडऩी पड़ती थी। लेकिन चुरू विधानसभा क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार के निधन के कारण वहां मतदान स्थगित करना पड़ा है। वहां 13 दिसम्बर को मतदान होगा।

चौदहवीं राजस्थान विधानसभा के गठन के लिए एक दिसंबर 2013 को मतदान होना है और फिर 8 दिसंबर को मतों की गणना होगी। सत्तारूढ़ कांग्रेस दल के स्टार प्रचारक मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रदेशाध्यक्ष वसुंधरा राजे के बीच सत्ता संघर्ष का यह तीसरा मुकाबला है। गणना के हिसाब से पहली बार 2003 के चुनाव में वसुंधरा ने गहलोत से सत्ता छीनी थी और गहलोत ने 1990 व 1993 में भाजपा के दिग्गज नेता पूर्व उपराष्ट्रपति स्वर्गीय भैरोसिंह शेखावत के नेतृत्व में गठित सरकार को करारी पराजय देकर 1998 में 156 सीटें रिकॉर्ड बहुमत से हासिल की थी। दूसरी बार 2008 के चुनाव में गहलोत ने स्पष्ट बहुमत के अभाव में बसपा से निर्वाचित 6 विधायकों तथा निर्दलियों के सहयोग से सरकार बनाई थी। अब 2013 में तीसरी बार वसुंधरा की बारी होनी चाहिए और अब तक के चुनावी सर्वे भी यही संकेत दे रहे हैं। इतना ही नहीं ज्योतिषी गणना में भी इसकी पुष्टि हो रही है। इसकी पुष्टि 8 दिसंबर को मतपत्र पेटियों के खुलने के बाद ही हो पाएगी।

यह भी संयोग है कि 1980 में अपनी स्थापना के बाद भाजपा ने पहली बार 200 सदस्यीय विधानसभा की सभी सीटों के लिए उम्मीदवार खड़े किए थे। इससे पहले जनता दल सहित अन्य दलों से हुए समझौते के कारण उसे सीटें छोडऩी पड़ती थी। लेकिन चुरू विधानसभा क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार के निधन के कारण वहां मतदान स्थगित करना पड़ा है। वहां 13 दिसम्बर को मतदान होगा। शेष 199 निर्वाचन क्षेत्रों में 2087 उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं। इनमें 167 महिलाएं तथा शेष 1920 पुरूष प्रत्याशी हैं। बेगु निर्वाचन क्षेत्र से राजपा की ममता बाई (55) एकमात्र किन्नर प्रत्याशी हैं। वह रावतभाटा नगरपालिका की चेयरमैन हैं। कांग्रेस तथा भाजपा ने सभी 199 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं, वहीं बसपा ने 194, सी.पी.एम. ने 38, सी.पी.आई. ने 22 और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने 16 सीटों पर अपने प्रत्याशी खड़े किए हैं। शेष 1419 उम्मीदवारों में निर्दलीय तथा अन्य दलों के प्रत्याशी सम्मिलित हैं। पी.ए. संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी (राजपा) पहली बार राजस्थान में चुनाव लड़ रही है। राजपा के प्रदेश अध्यक्ष का कार्यभार देख रहे सुनील भार्गव के अनुसार सी.पी.एम., सी.पी.आई. और जनता दल (यू) से समझौते तथा चुनावी रणनीति के तहत 133 प्रत्याशियों को चुनाव मैदान में उतारा गया है। जयपुर के आदर्श नगर में सर्वाधिक 32 तथा चुरू जिले के सुजानगढ़ निर्वाचन क्षेत्र में न्यूनतम तीन प्रत्याशी हैं। राज्य के 33 जिलों में से 26 जिलों के 65 विधानसभा क्षेत्रों में एक भी महिला उम्मीदवार नहीं है। इनमें मुख्यमंत्री गहलोत का निर्वाचन क्षेत्र सरदारपुरा भी शामिल है। भाजपा ने 26, कांग्रेस ने 24, राजपा ने 15, समाजवादी पार्टी ने 7 महिलाओं को चुनावी मैदान में उतारा है। पांच निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा तथा कांग्रेस की महिला प्रत्याशी आमने-सामने हैं। इनमें भाजपा की प्रदेश अध्यक्ष वसुंधरा राजे के सामने कांग्रेस की पूर्व विधायक मीनाक्षी चन्द्रावत (झालरापाटन) और भाजपा विधायक संजना आगरी के सामने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में आई.ए.एस. निरंजन आर्य की पत्नी संगीता आर्य हैं। भाजपा विधायक कमला कस्बां के मुकाबले कांग्रेस की अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी कृष्णा पूनिया (सादुलपुर) तथा राज्यमंत्री मंजू मेघवाल के सामने भाजपा की मंजू बाघमार (जायल) और कांग्रेस की शीला मीणा के सामने भाजपा की सुनीता मीणा एवं राजपा की पूर्व मंत्री एवं निर्दलीय विधायक गोलमा देवी (राजगढ़ लक्ष्मणगढ़) चुनाव में खड़ी हैं। नागौर जिले के जायल में दोनों महिला प्रत्याशी फिर आमने-सामने हैं।

सत्तारूढ़ कांग्रेस तथा प्रतिपक्ष भाजपा को नामांकन से पहले संभावित प्रत्याशियों के बगावती तेवरों से जूझना पड़ा। विधानसभा में और बाहर अपनी साफगोई के लिए चर्चित सार्वजनिक निर्माण मंत्री भरतसिंह के पिता जुझारसिंह 1952 में गठित पहली विधानसभा के एकमात्र जीवित सदस्य हंै। उन्होंने एक दैनिक समाचार पत्र में छपे इंटरव्यू में कहा है कि कांग्रेस देश की सबसे पुरानी और बड़ी पार्टी है, लेकिन टिकट वितरण में पारदर्शिता बरतने में चूक जाती है। अनुभव और काबिलियत को पूरी तरह परखा नहीं जाता। नामांकन के दौरान तथा नाम वापसी के आखिरी क्षणों तक की मनुहार के बावजूद लगभग 69 निर्वाचन क्षेत्रों में बागी उम्मीदवार चुनावी समीकरण बिगाडऩे के लिए मैदान में मौजूद हैं। इनमें भाजपा को 34 तथा कांग्रेस को 29 सीटों पर बगावत झेलनी पड़ रही है, जबकि आधा दर्जन निर्वाचन क्षेत्रों में दोनों दलों के बागी उम्मीदवारों ने ताल ठोक रखी है। यह भी हकीकत है कि जातीय समीकरणों, चुनावी गणित तथा स्थानीय मुद्दों को लेकर कांग्रेस, भाजपा ने बागी प्रत्याशियों को अपने नाम वापस लेने के लिए अधिक दबाव नहीं बनाया।

फिर भी राजनीतिक दिखावे के लिए कांग्रेस ने 17 और भाजपा ने 16 बागी प्रत्याशियों को 6 साल के लिए पार्टी से निष्कासित करने का फरमान जारी किया है। कांग्रेस से निष्कासित किए जाने वालों में पूर्व मंत्री हरेन्द्र मिर्धा, राजेन्द्र चौधरी, रतनलाल ताम्बी, लक्ष्मणसिंह रावत, अब्दुल अजीज, चिकित्सा राज्यमंत्री डॉ. राजकुमार शर्मा, विधायक रीटा चौधरी, पूर्व विधायक विष्णु मोदी, दुर्गा प्रसाद अग्रवाल आदि शामिल हैं। इनमें पूर्व मंत्री राजेन्द्र चौधरी ने कांग्रेस से त्यागपत्र देने की घोषणा की थी। विधानसभा की पहली महिला अध्यक्ष सुमित्रा सिंह, पूर्व मंत्री माणकचंद सुराणा, पूर्व विधायक राजकुमारी शर्मा, जगन्नाथ वर्मा, देवी शंकर भूतड़ा तथा रणधीर सिंह भिण्डर इत्यादि को भाजपा ने निष्कासित किया है। नौ बार विधायक रह चुकी सुमित्रा सिंह की पिछले चुनाव में मंडावा में जमानत जब्त हो गई थी, अब वह बागी प्रत्याशी के रूप में झुन्झूनू से चुनाव लड़ रही हैं।

यह राजनीति का कमाल और चुनावी गणित का सवाल है कि जो जीता वही सिकंदर। इस मामले में कांग्रेस और भाजपा में होड़ लगी हुई है। कांग्रेस ने वर्ष 2008 के चुनाव में 35 बागियों को पार्टी से निकाला था और अब उनमें से करीब 22 को टिकट थमा दिया। इससे पहले 2003 में निष्कासित 32 में से 19 को तथा 1998 में 37 में से 26 को फिर प्रत्याशी बनाया गया। इसी तरह भाजपा ने निकाले गए 27 में से 15 लोगों को अपना उम्मीदवार बनाने से गुरेज नहीं किया। अलबत्ता पिछले दो चुनावों की तुलना मे यह संख्या कम है। पिछले चुनाव में भाजपा को जिन प्रत्याशियों के कारण पराजय का सामना करना पड़ा, इस बार सत्ता पाने की लालसा में वह उनके शरणागत होने को मजबूर हो गई। इसी तरह पिछले चुनाव के भाजपा के बागियों को कांग्रेस ने गले लगाने में झिझक महसूस नहीं की।

रिश्ते-नाते हुए दरकिनार
पहले की तरह इस चुनाव में रिश्ते नाते धरे रह गए हैं। सत्ता की दौड़ में वह एक दूसरे का सामना करने में जुट गए हैं। पिछले चुनाव की तरह बीकानेर पश्चिम में पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. बी.डी. कल्ला को रिश्ते में अपने जीजा भाजपा विधायक गोपालकृष्ण जोशी से मुकाबला करना पड़ रहा है। खेतड़ी में चचेरे भाई दाताराम गुर्जर तथा धर्मपाल गुर्जर आमने-सामने हैं। भाजपा ने अब धर्मपाल के स्थान पर दाताराम पर दांव खेला, तो वह निर्दलीय रूप में मैदान में आ डटे। कुम्भलगढ़ में तो पिता पुत्र आमने-सामने आ गए हैं। बसपा ने पिता धीरज सिंह को टिकट थमाया, तो बेटा नरेन्द्र सिंह बतौर निर्दलीय प्रत्याशी मैदान में आ जमे। दो सगे भाई कांग्रेस भाजपा से अलग-अलग सीटों पर चुनाव लड़ रहे हैं। पूर्व विधायक आत्माराम के बेटे और राज्यमंत्री विनोद कुमार चौधरी हनुमानगढ़ से कांग्रेस तथा कृष्ण कड़वा संगरिया से भाजपा टिकट पर चुनाव मैदान में हैं। भाजपा ने हाड़ौती अंचल में दो चचेरे भाईयों, हीरालाल नागर (सांगोद) तथा नगेन्द्र नागर को खानपुर क्षेत्र से उम्मीदवार बनाया है। दो दम्पत्ति भी चुनाव मैदान में हैं। पूर्व मंत्री और निर्दलीय विधायक गोलमा देवी, राजपा प्रत्याशी के तौर पर अपने पुराने क्षेत्र महुआ के अलावा (राजगढ़ लक्ष्मणगढ़-सु.) से चुनाव लड़ रही हैं, तो उनके सांसद पति डॉ. किरोड़ीलाल मीणा भी दो निर्वाचन क्षेत्रों से चुनाव मैदान में हैं। मीणा एक बार फिर सवाईमाधोपुर से खड़े हुए हैं, जहां पिछले चुनाव में पराजित हो गए थे।

शेखावाटी आंचल के मंडावा निर्वाचन क्षेत्र पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। यहां मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी है। कांग्रेस ने पूर्व मंत्री और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष स्वर्गीय रामनारायण चौधरी की पुत्री विधायक रीटा चौधरी का टिकट काटकर अपने प्रदेश अध्यक्ष डॉ. चन्द्रभान को चुनाव लड़ाने की ठानी है। कांग्रेस के दिग्गज जाट नेता केन्द्रीय मंत्री शीशराम ओला भी उनके हिमायती बनकर उभरे हैं, जिन्होंने रीटा चौधरी को बगावत के लिए मजबूर कर दिया। डॉ. चन्द्रभान 1990 में मण्डावा से लोकदल के टिकट पर जीते थे, जिसके चुनाव चिह्न बिसाऊ में अब भी दीवारों पर अंकित हैं। वह शेखावत सरकार में मंत्री रहे। फिर कांग्रेस से जुड़कर दो चुनाव हार चुके हैं। भाजपा ने जाट बाहुल्य इस क्षेत्र में मुस्लिम प्रत्याशी खड़ाकर चुनाव को रोमांचक बना दिया है। डॉ. चन्द्रभान जाट को मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी भी करते रहे है। कांग्रेसी क्षेत्रों में उन्हें चक्रव्यूह में फंसाने की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। स्वयं चन्द्रभान लोगों से अपील कर रहे हैं कि उनकी 33 साल की राजनीतिक तपस्या पर पानी मत फेरना। अपने चुनाव प्रचार में डॉ. चन्द्रभान यह कहने से नहीं चूकते हैं कि पिछले चुनाव में अपने दावे के बावजूद उन्होंने मंडावा से रीटा चौधरी को टिकट देने के पार्टी के निर्णय को शिरोधार्य किया है। अब रीटा चौधरी को पार्टी के निर्णय का सम्मान करना चाहिए।

एक रोचक मुकाबला सवाई माधोपुर में होना है। कांग्रेस भाजपा ने राजनीतिक वारिस के रूप में दो नए चेहरों को चुनावी मैदान में उतारा है। पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री दिवंगत डॉ. अबरार अहमद के शहजादे दानिश अबरार कांग्रेस से तथा जयपुर में नरेंद्र मोदी की रैली में शामिल हुर्इं जयपुर के पूर्व राजपरिवार की दीया कुमारी भाजपा से चुनाव लड़ रही है। उनकी दादी राजमाता गायत्री देवी जयपुर से स्वतंत्र पार्टी प्रत्याशी के रूप में तीन बार लोकसभा के लिए चुनी गई थीं, जबकि पिता ब्रिगेडियर भवानी सिंह भाजपा के गिरधारीलाल भार्गव के मुकाबले लोकसभा चुनाव हार गए थे। राजपा के दिग्गज डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने नामांकन दाखिल कर त्रिकोणात्मक संघर्ष के हालात पैदा कर दिए है। वह यहां से पिछला चुनाव हार चुके हैं। नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को दीया कुमारी सहित सवाई माधोपुर जिले के भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन मे चुनावी सभा को सम्बोधित किया। मोदी ने डीग कुम्हेर निर्वाचन क्षेत्र में भी चुनावी सभा की। यहां कांग्रेस से पूर्व भरतपुर रियासत के पूर्व सांसद विश्वेन्द्र सिंह का भाजपा विधायक डॉ. दिगम्बर सिंह से पुन: कड़ा मुकाबला है।

मारवाड़ के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को सरदारपुरा में राजपूत समाज के नेता भाजपा प्रत्याशी शंभू सिंह खेतासर के मुकाबले चुनावी चौका लगाना है। पिछले तीन चुनावों में विजय के बावजूद गहलोत की जीत के अंतर में कमी आ रही है। गहलोत ने अपने खिलाफ राजपूत प्रत्याशी खड़ा किए जाने की काट में सांसद गोपाल सिंह शेखावत तथा पूर्व विधायक जुगल काबरा को प्रदेश कांग्रेस का कार्यकारी अध्यक्ष बनवा कर समझ-बूझ भरी राजनीतिक चाल चली है। राजपूत कार्ड खेलने के साथ गहलोत ने टिकट के दावेदार जुगल काबरा की नाराजगी दूर करने की कौशिश की है। वैसे भी सीमावर्ती जिलों बाड़मेर और जैसलमेर में राजपूत समुदाय की अनदेखी कांग्रेस को भारी पड़ रही है। उधर गहलोत से असंतुष्ट मारवाड़ के जाट नेता चुनावी समीकरणों को प्रभावित करने में कोई कसर नहीं रखेंगे। इसी तरह भाजपा को ओबीसी की अनदेखी का खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। नागौर क्षेत्र में कभी जाट समाज के दिग्गज नेता स्वर्गीय नाथूराम मिर्धा, रामनिवास मिर्धा और परसराम मदेरणा का दबदबा था। नाथूराम मिर्धा के वारिस राजनीति में आगे नही बढ़ पाए, लेकिन उनकी परम्परा को उनकी पोती ज्योति मिर्धा ने सांसद के रूप में बनाए रखा है। कांग्रेस ने रामनिवास मिर्धा के पुत्र हरेन्द्र मिर्धा का टिकट काटकर उन्हें नागौर से बागी के रूप में चुनाव लडऩे को बाध्य कर दिया है। गहलोत की पिछली सरकार में मंत्री रहे हरेन्द्र को भाजपा कांग्रेस के मुस्लिम प्रत्याशी से मुकाबला करना पड़ रहा है। वयोवृद्ध परसराम मदेरणा के पुत्र महिपाल, भंवरी देवी हत्याकांड में जेल में हैं, इसलिए उनकी पत्नी लीलावती मदेरणा को ओसिया से कांग्रेस प्रत्याशी बनाया गया है।

मेवाड़ अंचल में प्रतिपक्ष के नेता गुलाबचंद कटारिया उदयपुर में कांग्रेस के ब्राह्मण प्रत्याशी दिनेश श्रीमाली से मुकाबला कर रहे हैं, वहीं टिकट वितरण को लेकर नाराजगी भी उन्हें झेलनी पड़ रही है। रणवीर सिंह मिण्डर का टिकट कटने पर वह बागी होकर चुनाव लड़ रहे हैं। राजपा के डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने जनजातीय बहुल इस इलाकों में अपना जनाधार बढ़ाकर भाजपा के लिए मुश्किलें पैदा कर दी है। हाड़ौती अंचल में चार जिलों – कोटा, बूंदी, बांरा और झालावाड़ में भाजपा को कांग्रेस के साथ-साथ बागियों से भी उलझना पड़ रहा है। स्वयं वसुंधरा के गृह जिले झालावाड़ में तीन सीटों पर खुली बगावत है। इस अंचल के 10 निर्वाचन क्षेत्रों में सीधा और 6 सीटों पर त्रिकोणीय संघर्ष होना है। पूर्वी राजस्थान के चार जिलों – धौलपुर, करौली, सवाई माधोपुर और भरतपुर के साथ दौसा में डॉ. किरोड़ीलाल मीणा की राजपा ने भाजपा तथा कांग्रेस को परेशानी में डाल दिया है। जयपुर संभाग में भाजपा कांग्रेस बराबरी की टक्कर पर है। शेखावाटी इलाके में 21 सीटों पर जातीय समीकरण चुनाव नतीजों को प्रभावित करेंगे, वहीं लगभग आधी सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी दलीय उम्मीदवारों के मुकाबले भारी दिख रहे हैं।

महिलाओं को टिकट देने में कांग्रेस आगे
महिलाओं को चुनाव लड़ाने के साथ भाजपा ने युवाओं को टिकट देने में कांग्रेस से बढ़त ली है। चुनाव मैदान में भाजपा ने 50 तथा कांग्रेस ने 46 प्रत्याशियों को उतारा है। आयु के हिसाब से 25 से 45 वर्ष की आयु के वर्ग में भाजपा के 50 तथा कांग्रेस के 46 प्रत्याशी और 46 से 69 वर्ष की आयु वर्ग में क्रमश: 137 एवं 136 और 70 से 84 वर्ष के आयु वर्ग में भाजपा के 13 एवं कांग्रेस के 18 प्रत्याशी हैं। सबसे युवा कांग्रेस के गिरिराज सिंह (25) खंडेला से तथा भाजपा के ललित मीणा (26) किशनगंज से और अमृता सोलंकी (27) जालौर से चुनाव मैदान में हैं। पूर्व मंत्री स्वर्गीय रामसिंह विश्नोई की पत्नी अमरी देवी ने 78वें साल में चुनावी राजनीति में प्रवेश किया है। उनके पुत्र कांग्रेस विधायक मलखान सिंह भंवरी देवी हत्याकांड में जेल में बंद है।

निर्वाचन विभाग की लाख कोशिशों के बावजूद पिछले 5 वर्षो में करीब साढ़े 16 लाख युवा मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़े जा चुके हैं, फिर भी लाखों ऐसे मतदाता अभी नहीं जुड़ पाए हैं। चूरू जिले के रतनगढ़ में 18 से 19 आयु वर्ग के सर्वाधिक 85 हजार से अधिक मतदाताओं के नाम जुड़े हैं। करीब तीन दर्जन निर्वाचन क्षेत्रों में इनकी संख्या 10 हजार से अधिक तथा शेष में इससे भी कम हैं। स्वाभाविक रूप से युवा मतदाताओं की पसंद चुनावी हार-जीत का एक बड़ा कारण बनेगी। कई जिलों के दौरे तथा प्राप्त सूचनाओं से उदय इंडिया को यह जानकारी मिली है कि शहरी क्षेत्रों के साथ अब गांवों में भी भाजपा नेता नरेंद्र मोदी के प्रति युवाओं का रूझान बढ़ रहा है।

सियासी तस्वीर
प्रदेश की सियासी तस्वीर पर नजर डालें तो कांग्रेस के 22 तथा भाजपा के 20 दिग्गजों की आपस में सीधी टक्कर है। करीब पांच दर्जन निर्वाचन क्षेत्रों में त्रिकोणात्मक संघर्ष और एक दर्जन से अधिक क्षेत्रों में चतुष्कोणीय मुकाबले की स्थिति बनी है। विशेषकर भाजपा कांग्रेस के प्रत्याशियों की सम्पत्ति हथियार और वाहन रखने के साथ उनकी उम्र को लेकर मीडिया में चटपटी खबरें चर्चा का विषय बन गई हैं। जमीदारा पार्टी के अध्यक्ष बीडी अग्रवाल की पत्नी विमला जिंदल (56) हनुमानगढ़ के संगरिया से चुनाव लड़ रही हैं और उनकी सम्पत्ति 2,762 करोड़ रूपए है। कांग्रेस ने 509 सूत्रीय चुनावी घोषणा पत्र जारी किया है। भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष वसुंधरा राजे ने उदयपुर में नरेंद्र मोदी की रैली में घोषणा पत्र के विभिन्न बिन्दुओं की जानकारी दी थी। राजपा जयपुर रैली में 24 अक्टूबर को ही अपना घोषणा पत्र जारी किया था। इस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सुनील भार्गव ने कांग्रेस के घोषणा पत्र पर अपनी प्रतिक्रिया में भ्रष्टाचार से मुक्त करने सम्बन्धी घोषणा पर आश्चर्य जताते हुए कहा है कि लगता है कि इससे पहले कांग्रेस ने भ्रष्टाचार की छूट दी हुई थी।

कांग्रेस तथा भाजपा के स्टार प्रचारकों ने राजस्थान में चुनाव प्रचार में हिस्सेदारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत तथा भाजपा प्रदेशाध्यक्ष वसुंधरा राजे ताबड़-तोड़ चुनाव प्रचार में आरोप-प्रत्यारोपों में उलझे हुए हैं। गहलोत बार-बार यही दोहरा रहे हैं कि विपक्ष झूठे आरोप लगाकर जनता को भ्रमित कर रहा है। उनका दावा है कि सरकार की जनहित और कल्याणकारी योजनाओं तथा पार्टी के चुनाव घोषणा पत्र को लागू किए जाने से जनता पुन: कांग्रेस को सत्ता सौंपेगी। वहीं वसुन्धरा राजे का आरोप है कि बढ़ती हुई महंगाई, भ्रष्टाचार तथा मंत्रियों के कारनामों से आम जनता में रोष व्याप्त है। इससे परेशान मतदाता बदलाव लाने के इच्छुक हैं। इसीलिए वह भाजपा को आशा भरी नजरों से भी देख रहा है।

 

गुलाब बत्रा

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