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सजो सजना के लिए

सजना संवरना भारतीय महिलाओं की ही नहीं, बल्कि विश्व के किसी भी कोने में रहने वाली महिला की कमजोरी होती है। आकर्षक लगने की हार्दिक इच्छा महिलाओं का आभूषणों के प्रति प्रेम बढ़ाती है। इसलिए आभूषण महिलाओं के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गए हैं। ‘आजकल बाजार में कई तरह की ज्वेलेरी (आभूषण) उपलब्ध हैं, परंतु पारंपरिक डिजाइनों की डिमांड ज्यादा है। डायमंड ज्वेलरी के अलावा पर्ल, कीमती जड़ाऊ नग, पोल्की और कुंदन ज्वेलरी भी बहुत लोकप्रिय हैं’, विख्यात पी.पी. ज्वेलर्स के एक विशेषज्ञ का यह कहना है।

पर्ल (मोती)
गहनों में पर्ल का मूल्य चमक, रंग, आकार आदि उसकी कई विशेषताओं के आधार पर निर्धारित किया जाता है। एक मशहूर जौहरी के अनुसार पर्ल की चमक उसकी गुणवत्ता का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, परंतु बड़े पर्ल ज्यादा लोकप्रिय और मूल्यवान माने जाते हैं। पर्ल मुख्य रूप से आठ प्रकार के आकार में उपलब्ध हैं : इनमें राउंड, सेमी-राउंड, बटन, ड्रॉप, ओवल, पेयर, बारोक और सर्किल्ड शामिल हैं। राउंड पर्ल अपने नायाब आकार के कारण बहुत मूल्यवान होते हैं। सेमी-राउंड पर्ल हार के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। बटन पर्ल पेंडेंट के लिए उपयोग किए जाते हैं। ड्रॉप, पेयर और बारोक का इस्तेमाल इयररिंग, पेंडेंट, नेकलेस आदि में किया जाता है। पर्ल ज्वेलरी इस सीजन का लेटेस्ट ट्रेंड है।

जड़ाऊ
‘जड़ाऊ आभूषण’ गहनों की शैली में सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक माना जाता है। ‘जड़ाऊ आभूषण’ को ‘उत्कीर्ण आभूषण’ भी कहा जाता है। वह अपने आप में ही अद्वितीय है। इसे ‘अनकट स्टोन्स’ और ‘डायमंड’ से बनाया जाता है। अपने शानदार और विस्तृत काम के कारण इसके साथ अन्य हार पहनने की जरूरत नहीं होती। जड़ाऊ में ‘तीन तार-जड़ाऊ’ को अधिक पसंद किया जाता है। ‘तीन तार-जड़ाऊ’ सेट हर प्रकार के शरीर पर जंचता है। इसे भारत में लाने का श्रेय मुगलों को दिया जाता है। मुगल काल के बाद से राजस्थान और गुजरात के कारीगरों ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया।

पोल्की
‘पोल्की-गहने’ अनकट डायमंड से बनाया जाता है। इसे इसके मूल आकार को ही आकर्षक रुप देकर बनाया जाता है। इसे आकर्षक बनाने के लिए इसका रूपान्तरण नहीं किया जाता। इस प्रकार के गहने सुंदर डिजाइन में मिलते हैं। ‘पोल्की आभूषण’ विभिन्न शैली जैसे फ्लोरल एवं जियोमेट्रिक डिजाइनों में उपलब्ध होती है। भारत में पन्ना, माणिक आदि में भी पोल्की उपलब्ध है। इनकी खासियत यह है की इन्हें अलग-अलग टुकड़ों का मिश्रण करके सबके साथ मैच कर पहना जा सकता है। रत्न अपने रंग में समान होते हैं, परंतु कट प्रत्येक टुकड़े को अधिक आकर्षक बनाता है।

कुंदन
कुंदन भारतीय आभूषणों का सबसे प्राचीन रूप है। ये कई प्रकार के होते हैं, लेकिन कुंदन मीनाकारी और कुंदन केसरी मुख्यरूप से अधिक लोकप्रिय हैं। राजस्थानी कला से प्रेरित होकर, कुंदन मीनाकारी जड़ी पत्थरों के साथ भिन्न रंगों के एनेमेल से बनाया जाता है। एक टुकड़े में नियमित रूप से चोकर और एक साधारण हार को जोड़ कर कुंदन मीनाकारी डिजाइन से उसे शानदार बनाया जा सकता है। कुंदन केसरी भारतीय रत्न आभूषण का एक पारंपरिक रूप है। आमतौर पर बारीक काम वाले हार के पत्थर और इसकी माउंट के बीच सोने की पन्नी को शामिल कर इसका सेट बनाया जाता है। यह विधि राजस्थान और गुजरात के शाही घरानों से शुरु हुई है। बीकानेरी या जयपुरी आभूषणों के रूप में मीणा कुंदन लोकप्रिय है। राजस्थान का जयपुर शहर कुंदन के लिए मशहूर केंद्र माना जाता है।

 

दिब्याश्री सतपथी

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