ब्रेकिंग न्यूज़ 

प्रकाश जावड़ेकर जरा सूरत की जहरीली हवा तो देखो!

प्रकाश जावड़ेकर  जरा सूरत की जहरीली हवा तो देखो!

सूरत के गावियर-मगदल्ला इलाकों में पिछले कई साल से धड़ल्ले से कोयला डिपो चलाये जा रहे हैं। यहां कोयला डिपो कई कंपनियों के हैं लेकिन, ऐसा माना जाता है कि दो कंपनियां सूर्या कोल एवं भाटिया इंटरनेशनल अपने मुनाफे के चक्कर में गुजरात पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (जीपीसीबी) के तमाम नियम-कानूनों को ताक पर रखकर कोयला डिपो चला रही हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन कंपनियों के लिये अपने मुनाफे से बढ़कर कुछ नहीं है। ये दोनों कंपनियां मुनाफा कमाने के लिये यहां के ग्रामीणों के स्वास्थ्य को दांव पर लगाने से भी नहीं चूक रही हैं। कोयला डिपो से जहरीली गैसें निकलती हैं जो गावियर-मगदल्ला इलाकों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य के लिये हानिकार सिद्ध हो रही हैं। बावजूद इसके, जीपीसीबी के अधिकारियों की मिलीभगत से मगदल्ला में मौजूद कोयले के डिपो खुलेआम चल रहे हैं।

गौरतलब है कि ग्रामीणों ने इन कोयला डिपों के खिलाफ कई बार जीपीसीबी में शिकायत भी दर्ज करवाई, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हुई। इस कारण ग्रामीणों में भारी आक्रोश नजर आ रहा है। मगदल्ला ग्रामीण निवासियों के घरों के आस-पास मौजूद कोयला डिपो के कारण ग्रामीण निवासियों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर देखने को मिल रहे हैं जिसके चलते ग्रामीणों का स्वास्थ्य दिन-ब-दिन गिरता जा रहा है। बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं के कारण ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। यहां रहने वाले लोगों को तमाम तरह के स्वास्थ्य विकारों जैसे -कैंसर, श्वास, दमा जैसे गंभीर रोगों से जूझना पड़ रहा है।

यह जानते हुए कि मगदल्ला के निवासी लगातार असाध्य एवं जानलेवा रोगों की चपेट में आते जा रहे हैं, ऐसी खबर है कि सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से सूर्या कोल एवं भाटिया इंटरनेशनल के कोयला डिपो लगातार चल ही रहे हैं। लोगों की बार-बार आ रही शिकायतों के बावजूद जीपीसीबी के नकारा अधिकारियों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है। इससे सूर्या कोल एवं भाटिया इंटरनेशनल के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं। परिणामस्वरूप, जीपीसीबी के नियमों को ताक पर रख खुलेआम कोयले का काला कारोबार कर रही कंपनियां दिन दूनी रात चौगुनी रफ्तार से बढ़ती जा रही हैं।

लोगों की अगर मानी जाए मगदल्ला टीपी नंबर 31 में सूर्या कोल एवं भाटिया इंटरनेशनल के गोदाम बना दिये गये हैं। ये गोदाम प्रदूषण एवं पर्यावरण के लिये खुली चुनौती हैं। जब कोयले को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने के लिये ट्रकों में लोड किया जाता है तो उससे कोयले के छोटे-छोटे टुकड़े और बुरादे उड़ते हैं जिसकी वजह से यहां के लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। फिर भी सरकार चुप्पी साधे बैठी है।

सूर्या कोल एवं भाटिया इंटरनेशनल के खिलाफ ग्रामीणों ने जीपीसीबी के अधिकारियों को लिखित में भी शिकायत दर्ज करवाई थी, बावजूद इसके जीपीसीबी के अधिकारियों ने इस ओर कोई ठोस कदम नहीं उठाये हैं। इसकी वजह से ग्रामीणों के सब्र का बांध टूटता जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वक्त रहते जीपीसीबी के अधिकारियों ने सूर्या कोल एवं भाटिया इंटरनेशनल के खिलाफ कोई उचित कार्रवाई नहीं की तो प्रधानमंत्री और पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर के पास तक गुहार लगाई जायेगी।

सूरत से महेन्द्र राउत

otz stielмунтян возрождение киев

Leave a Reply

Your email address will not be published.