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गांव की ओर चली मोदी सरकार

गांव की ओर चली मोदी सरकार

कश्ती चलाने वालों ने जब हार के दी पतवार हमें

लहर-लहर तूफान मिले और मौज-मौज मझधार हमें

फिर भी दिखाया है हमने और फिर ये दिखा देंगे सबको

इन हालात में आता है दरिया पार करना हमें

वित्तमंत्री अरुण जेटली ने शायराना अंदाज में उपरोक्त पंक्तियों के साथ पिछली सरकार की आर्थिक नीतियों पर तंज कसते हुए बजट भाषण पढऩा शुरू किया तो शायद ही किसी को वैश्विक अर्थव्यवस्था की सुस्ती के इस दौर में इतने साहसिक कदम की आशा रही होगी। पूरे बजट भाषण के सार में वह हर मोड़ पर इसी अंदाज में आये। आजादी के बाद से अब तक का शायद ही कोई ऐसा बजट रही हो जहां गांव में अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए इस तरह की कोशिश हुई हो। गांव, किसान, खेती, गरीब और मजदूर की जिंदगी को स्थाई बनाने की कोशिश हुई हो। विपक्ष ने ऐसे बजट की आशा भी नहीं की थी, और जब वित्त मंत्री बजट भाषण समाप्त करके सीट पर बैठे तो किसी के पास आलोचना के लिए शब्द तक नहीं थे।

उद्योग और कॉरपोरेट जगत, अमीर वर्ग की जेब से पैसा निकालकर सरकार ने गरीब, किसान, मजदूर की जेब में डालने की राह पकड़ी है। कॉरपोरेट जगत ने भी इसका स्वागत किया और इसी का नतीजा रहा कि बजट पेश करने के अगले दिन सेंसेक्स ने सात साल में पहली बार एक दिन के भीतर सात सौ से अधिक अंकों की छलांग लगाई। इसका सीधा सा अर्थ है कि मोदी की आर्थिक नीतियों की गाड़ी चल निकली है। सरकार ने मोदीनॉमिक्स को स्पष्ट करना शुरू किया। रेल बजट में भी यही हुआ। वहां भी विरोधियों के पास कहने के लिए कोई शब्द नहीं हैं। केद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, पीयूष गोयल, निर्मला सीतारमण, प्रकाश जावड़ेकर, राधामोहन सिंह समेत सभी ने इसे आशा की किरण बताया। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसे ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया का बजट करार दिया है।

इस बड़ी घोषणा में सरकार का पूरा अर्थशास्त्र छिपा है। मौजूदा स्थिति यह है कि गांवों, किसानों, गरीबों, मजदूरों पर ढंग से ध्यान न देना हमारी अर्थव्यवस्था की सबसे बड़ी खामी रही। जिससे गांवों से लोग पलायन कर रहे हैं। कृषि कार्य दोयम दर्जे का माना जा रहा है और गांव में वही रहना चाहते हैं, जिनके पास बड़ी मजबूरियां हों या आय के दूसरे साधन हों। जबकि, भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जिस साल मानसून दगा दे जाता है, उस वित्तीय वर्ष में न केवल अर्थव्यवस्था लडख़ड़ाती है, बल्कि अगले वित्तीय वर्ष पर इसका सीधा असर पड़ता है। गांव और किसान समृद्ध होगा तो गांव में जीवन की गुणवत्ता बढ़ेगी। सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य सुविधाओं से गांव में चमक आएगी। इसके लिए ग्रामीण विकास के मद में 87,765 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसमें से 2000 करोड़ रुपये गरीब परिवार के रसोईघर की दशा सुधारने के लिए आवंटित है। 27,000 करोड़ प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना को 65,000 हजार नई बस्तियों को मुख्य सड़कों से जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है। इससे शहरों की तरफ पलायन रुकेगा। कृषि आधार मजबूत होने पर शहरों का बोझ घटेगा तथा अर्थव्यवस्था को भारी सहयोग मिलेगा।

 


सरकार का अर्थशास्त्र


  • 2022 तक किसानों की आय दोगुनी होगी
  • कृषि कल्याण अधिभार 0.5 लगाया
  • मनरेगा के तहत 38,500 करोड़ रुपये खर्च होंगे
  • तालाबों को पुनर्जीवित किया जाएगा
  • किसानों को कर्ज चुकाने में सहायता के लिए 15,000 करोड़ रुपये
  • पीएम फसल बीमा के लिए 5,500 करोड़ रुपये
  • किसान कल्याण के लिए 35,984 रुपये
  • 5 लाख हेक्टेयर जमीन सिंचित क्षेत्र में आएगी
  • पांच साल में सिंचाई पर 86,500 करोड़ रूपये खर्च होंगे
  • नाबार्ड में 20,000 करोड़ रुपये का सिंचाई फंड बनेगा
  • जल संसाधन के इस्तेमाल के लिए 6000 करोड़ रुपये
  • मार्च 2017 तक सभी को मृदा स्वास्थ्य कार्ड, थोक कृषि बाजारों के लिए एकीकृत मार्केटिंग प्लेटफार्म
  • पांच लाख तालाब और कुओं का निर्माण होगा
  • 12 राज्यों में किसानों के लिए ई-पोर्टल, 97 लाख एग्रीस्टोरेज क्षमता विकसित होगी, ताकि अनाज की बर्बादी न हो
  • सरकार 2.21 लाख करोड़ रूपये इंफ्रास्ट्रकचर, 23 लाख करोड़ रूपये गांव, किसान और कृषि पर निवेश करेगी।


19-03-2016कई बजट का गवाह रहा हूं, लेकिन यह वास्तव में सर्वश्रेष्ठ बजट है। इसमें रेलवे, हाईवे आदि पर इंफ्रास्ट्रक्चर की रफ्तार बढ़ाने तथा आधुनिकीकरण पर ध्यान दिया गया है। जबकि यह बजट वैश्विक आर्थिक सुस्ती के दौर में आया है।

लालकृष्ण आडवाणी, बीजेपी नेता



19-03-2016गांवों की सड़क से लेकर हाईवे तक के लिए बजट में पूरा ध्यान दिया गया है। पहली बार सड़कों के विकास के लिए एक लाख करोड़ रूपये का आवंटन दिया गया है। इससे आधारभूत संरचना क्षेत्र में काफी तेजी आयेगी।

नितिन गडकरी, केन्द्रीय भूतल परिवहन और जहाजरानी मंत्री



19-03-2016रक्षा और शिक्षा के क्षेत्र में फोकस नहीं देखा है, लेकिन बजट अच्छा है। हालांकि मैं अर्थशास्त्र नहीं हूंं। इसलिए इसपर यशवंत सिन्हा की राय से ही इत्तेफाक रखूंगा। जो यशवंत जी कहें वही सही।

शत्रुघ्न सिन्हा, भाजपा सांसद



chidambaram_1381744eमोदी सरकार के पास कोई नया आईडिया नहीं है। इसने पिछले दो बार के बजट की तरह एक अवसर और खो दिया है। बजट-में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कोई करिश्मा नहीं किया है। सभी योजनाएं यूपीए सरकार के समय की हैं। सरकार उसी को आगे बढ़ा रही है।

पी चिदंबरम, पूर्व वित्त मंत्री


 बढ़ेगी मांग, चलेगी गाड़ी

रूस, चीन, जापान, यूरोप जैसे देशों की अर्थव्यवस्था में सुस्ती है। ब्राजील में ग्रोथ रेट निगेटिव में है। रूस का भी यही हाल है। चीन और दक्षिण अफ्रीका की रफ्तार सुस्त पड़ गई है, लेकिन भारत 7.6 प्रतिशत की दर से वृद्धि दर की राह पर है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कमोडिटी प्राइस धराशायी है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मांग बेहद सुस्त है। यही हाल देश के भीतर भी है। मांग सुस्त है, रोजमर्रा की चीजें छोड़ दें तो मांग नदारद है। इसके चलते बाजार में पहले से तैयार माल डंप है। डिमांड न होने के कारण सप्लाई लाइन ठप्प है। इससे उद्योग, कल कारखाने तथा उत्पादन की ईकाइयों में भी सुस्ती छायी है। ऐसे में हर तरफ बस एक ही जरूरत महसूस की जा रही है कि हर क्षेत्र में मांग बढ़ेगी। मांग बढ़ेगी तो उत्पादन बढ़ेगा। उत्पादन बढ़ेगा तो रोजगार बढ़ेगा। रोजगार बढ़ेगा तो लोगों के हाथ में पैसा आएगा। यह पैसा बाजार में दैनिक वस्तुओं की मांग में खर्च होगा और तरलता बढऩे पर गाड़ी चल निकलेगी। यह तभी होगा जब गांव से सड़क तेजी से शहर तक आएगी। गांव बढ़ेगा तो शहर का बाजार बढ़ेगा। शहर का बाजार महानगरों में रौनक लाएगा। इसका असर पर्यटन, आटोमोबाइल, समेत सभी क्षेत्रों में दिखेगा और भारतीय अर्थव्यवस्था कुलांचे भरेगी।

मध्य वर्ग को परोक्ष लाभ

बजट 2016-17 में मध्यवर्ग को सीधे तौर पर लाभ नहीं दिया गया, लेकिन परोक्ष रुप में उसे सहूलियतें दी गई हैं। 50 लाख तक का मकान और उस पर 35 लाख तक का लोन लेने वालों को ऋण पर 50 हजार रुपये की छूट दी गई है। पांच लाख रुपये तक की आमदनी वाले लोगों को आयकर में 3,000 रुपये तक का लाभ, किराये के मकान में रहने वाले घर विहीन लोगों को, जिन्हें एचआरए नहीं मिलता उनके लिए किराये में छूट की सीमा को 24 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार वार्षिक किया गया है।

कालाधन घोषित करें

बजट में व्यवस्था है कि 30 प्रतिशत की दर से कर, 7.5 प्रतिशत की दर से दंड और 7.5 प्रतिशत की दर से अधिभार(कुल 45 प्रति.) देकर कालेधन को वैध बनाया जा सकता है। इस अदायगी के बाद अपनी संपत्ति को घोषित करने वाले के खिलाफ सरकार कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करेगी। गौरतलब है कि कालेधन के ही मुद्दे पर भ्रष्टाचार के साथ-साथ यह भी अहम मुद्दा था।

कराधान प्रणाली में सुधार

आम बजट में सरकार ने कराधान प्रणाली को तर्कसंगत बनाने की पहल शुरू कर दी है। हालांकि आयकरदाताओं को कोई खास राहत नहीं मिली है। उन्हें परोक्ष रूप से फायदा पहुंचाने की कोशिश की गई है। 2.50 रुपये तक की सालाना आय वालों को कोई कर नहीं देना होगा, 2.5-5 लाख रुपये तक की आय वाले 10.30 प्रतिशत कर का भुगतान करेंगे। 5-10 लाख वाले लोगों के लिए 20.60 प्रतिशत तो एक करोड़ रुपये या इससे अधिक का भुगतान करने वालों को 35.54 प्रतिशत की दर से कर चुकाना होगा। कॉरपोरेट टैक्स में भी एक प्रतिशत की राहत दी है। उच्च आयवर्ग वाले लोगों को 15 प्रतिशत सरचार्ज देना होगा। अभी तक उन्हें 12 प्रतिशत अधिभार देना होता था।

ईपीएफ पर भी लगेगा कर

सरकार की यह घोषणा भारतीय मजदूर संघ को भी हजम नहीं हो रही है। केन्द्र सरकार ने बजट में प्रावधान किया है कि कर्मचारी 40 प्रतिशत तक कर्मचारी भविष्यनिधि का पैसा निकाल सकते हैं, लेकिन अगले 60 प्रतिशत के हिस्से पर उन्हें कर का भुगतान करना होगा। अर्थात टैक्स काटकर पैसे का भुगतान होगा। इसको लेकर सभी राजनीतिक दलों ने भी सरकार की आलोचना की है।

रंजना

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