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पीएम मोदी को 10 में से 7.5 अंक

पीएम मोदी को 10 में से 7.5 अंक

जहां तक भारत के केंद्रीय बजट का प्रश्न है तो वास्तविक मुद्दा यह नहीं कि क्या महंगा हुआ और क्या सस्ता। अधिकांश चीजें बाजार पर निर्भर हैं। वैसे भी राजस्व बढ़ाने की इच्छा सभी सरकारों में होती है जिससे कि वे विकास पर खर्च कर सकें और आय का समान वितरण सुनिश्चित कर सकें। ऐसे में, अगर बाहर खाना खाना, कार खरीदना या हवाई यात्रा का खर्च बढ़ता है, तो भी पीएम मोदी से प्रेरित वित्त मंत्री अरुण जेटली द्वारा पेश बजट के नंबर नहीं कटते। यही बात व्यक्तियों के लिए तय आयकर स्लैब को यथावत बनाए रखने और 0.5 प्रतिशत के कृषि कल्याण उपकर पर भी लागू होती है जिसका उद्देश्य कृषि को परिष्कृत करने के साथ ही खेती को बढ़ावा देना है।

जहाँ तक उन लोगों की बात है जो आयकर में और रियायतों की उम्मीद कर रहे थे, तो आपको यह जानकारी होनी चाहिए कि जहाँ फ्रांस और डेनमार्क में टैक्स-जीडीपी का अनुपात क्रमश: 45 और 48.6 प्रतिशत है, वहीं भारत के लिए वह बेहद मामूली 16.7 प्रतिशत है। भारतीयों द्वारा टैक्स चुकाकर किए जाने वाले योगदान से ही बुनियादी ढाँचे के विकास और बैंकिंग व अन्य सेक्टरों के पुनरजीवन की गति बनी हुई है।

ग्रामीण भारत की ओर रुख

वर्तमान परिस्थितियों में विचारधाराओं तथा राजनीतिक दलों के बीच राइट-लेफ्ट-सेंटर के विचारों की दूरियाँ मिट गई हैं। इसका ही परिणाम है कि न केवल भारत में, बल्कि पूरे विश्व में सभी का जोर शहरी अर्थव्यवस्था और मज़दूर-किसान समुदाय को सशक्त बनाने पर है। चाहे उन देशों पर समाजवादी, पूँजीवादी, कम्युनिस्ट या रुढि़वादी या उदार या लोकतांत्रिक अथवा रिपब्लिकन होने का तमगा क्यों न लगा हो। 2016 के केंद्रीय बजट का प्रत्यक्ष लाभार्थी किसान समुदाय है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था की बदहाली और फसलों के खराब होने तथा किसानों की खुदकुशी की लगातार बढ़ती घटनाओं को देखते हुए भी ऐसा करना अत्यंत आवश्यक हो गया था। यहाँ भी, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के लिए आवंटित 5,500 करोड़ रुपए की राशि से जहाँ मानसून के कमजोर रहने की स्थिति में सुरक्षा मिलेगी, वहीं प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और किसानों की ओर से चुकाए जाने वाले ऋण पर ब्याज में छूट के लिए 15,000 करोड़ रुपए के प्रावधान से खेती की लगातार बिगड़ती दशा को रोकने में मदद मिलेगी।

अगले पाँच वर्षों में किसानों की आमदनी दोगुनी करने के साथ ही, मई 2018 तक सारे भारतीय गाँवों के विद्युतीकरण का भी प्रस्ताव है। साथ ही, ग्रामीण इलाकों की सड़कों और किफायती आवासी योजना पर भी खर्च का प्रावधान है। ग्रामीण भारत की कमजोर दशा को देखते हुए इन सारे उपायों की आवश्यकता थी। मनरेगा में आवंटन को 11 प्रतिशत बढ़ा दिया गया है। जानकारों के मुताबिक यह एक आदर्श स्थिति है, हालाँकि, फर्जी मजदूरों और कार्यान्वयन के स्तर पर भारी भ्रष्टाचार की खबरों को हमेशा की तरह इस बार भी अनदेखा कर दिया गया है। यह बात परेशान करती है कि वार्षिक वित्तीय लेखा-जोखा को देखते हुए इस पर कोई भी चिंता ज़ाहिर नहीं की गई है। इसकी बजाए सरकार को मनरेगा में पहले जितना ही आवंटन करना चाहिए था और इस राशि के बचे हिस्से को योजना के कार्यान्वयन को चुस्त-दुरुस्त बनाने पर खर्च करना चाहिए था। इसके लिए तकनीक के समावेश के साथ ही योजना के अंतर्गत अदा की जाने वाली मजदूरी और जोड़े गए नए लाभार्थियों की सूचना तत्काल दर्ज करने की व्यवस्था करनी चाहिए थी।

राजकोषीय घाटा और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पुनरुद्धार

राजकोषीय घाटे को 3.5 प्रतिशत करने का लक्ष्य स्वागत योग्य है, वह भी तब जबकि मुद्रा, इक्विटी और बॉन्ड बाज़ार पर इसका प्रभाव पड़ता है। विशेष रूप से तब भी जब आगामी नीति समीक्षा में केंद्रीय बैंक की ओर से दरों में कटौती इस कदम का प्रत्यक्ष परिणाम होगी। बैंक और विशेष रूप से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक अर्थव्यवस्था की रीढ़ होते हैं। सरकार को यह लग रहा है कि रीढ़ की यह हड्डी बढ़ते एनपीए के साथ कमज़ोर पड़ रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के पुनपंजीकरण के लिए 25,000 करोड़ रुपए का आवंटन एक स्वागत योग्य कदम है, हालाँकि इसका पता इस घोषणा से पहले ही चल गया था, लेकिन बढ़ती बुरी परिसंपत्तियों के बीच क्या यह राशि पर्याप्त है, यह प्रश्न बना है लेकिन इसे कोई उठा नहीं रहा है। काले धन पर आम माफी के कार्यक्रम पर इस लिहाज से सहमत हुआ जा सकता है कि इससे काला धन छिपाए बैठे लोग अपनी संपत्ति घोषित करेंगे और उन पर 45 प्रतिशत टैक्स अदा करेंगे, जिससे सरकार को सामाजिक क्षेत्र पर खर्च बढ़ाने में सहूलियत होगी। लेकिन इतनी ऊँची दर क्या काला धन वालों को लुभाएगी, इस पर भी संदेह है। इसके लिए 35 से 40 प्रतिशत की दर उचित होती।

सामाजिक खर्च

सरकार को जिन क्षेत्रों में पूरे नंबर मिलते हैं उनमें शामिल हैं राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में बीपीएल परिवारों के लिए 1 लाख रुपए का प्रावधान जिसमें बुजुर्गों के लिए 30,000 रुपए का अतिरिक्त कवर है (भारत के बदहाल स्वास्थ्य क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए), प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के अंतर्गत 3000 औषधि स्टोर का प्रावधान (अस्वस्थ गरीब को नया जीवन देने के लिए) तथा पीपीपी के ज़रिए राष्ट्रीय डायलिसिस सेवा कार्यक्रम (लाखों लोगों की आवश्यकता को देखते हुए)। किंतु सामाजिक क्षेत्र और ग्रामीण योजनाओं पर किए जाने वाले तमाम खर्च से देश को समावेशी विकास और सबके लिए सम्मानजनक जीवन के लक्ष्य तक पहुँचाया जा सकता है? इसका उत्तर इस बजट में है जहाँ शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता और शोध पर आवश्यक बल दिया गया है।

स्कूल छोडऩे के प्रमाण पत्रों, कॉलेज की डिग्रियों और माक्र्सशीटों के डिजिटल डिपॉजिटरी से उच्च शिक्षा तथा नौकरियों में आवेदनों की प्रक्रिया में सुधार आएगा। पोंजी स्कीमों से निवेशकों की रक्षा करने के लिए कानून, वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुँचने वाली सब्सिडी में किसी भी चोरी को रोकने के लिए ‘आधारÓ को कानूनी दर्जा देने तथा ब्रेल पेपर और सैनिटरी पैड को सस्ता करने के कदमों से आम भारतीयों का जीवन बेहतर होगा। नई बीजेपी सरकार की खास योजना, स्वच्छ भारत अभियान को 9,000 करोड़ रुपए दिए गए हैं। हालाँकि, अनेक राज्यों से वास्तव में बने शौचालयों की तुलना में कागजों पर बने शौचालयों को लेकर आ रही खबरों के बाद इस पर

सवाल उठेंगे। इससे यह भी पता चलता है कि कई बार बजट में किए गए वादे बस वादे ही रह जाते हैं।

चिंता के कुछ क्षेत्र

अब कुछ बातों को लेकर चिंता होती है जब इस प्रकार के बयान आते हैं कि सरकार एक स्थिर और उम्मीद के मुताबिक कराधान व्यवस्था के प्रति वचनबद्ध है, जबकि वोडाफोन को लंबित रेट्रोस्पेक्टिव टैक्स विवाद पर रिमाइंडर भेज दिया जाता है, हालाँकि यह विचाराधीन है। इससे यह शंका पैदा होती है कि नीति निर्माता विदेशी निवेशकों को स्थिर माहौल देने के प्रति गंभीर हैं भी या नहीं। विवादित कर को लेकर नई विवाद समाधान योजना पर और स्पष्टता आवश्यक है जिसके तहत 10 लाख रुपए तक की विवादित राशि पर कोई भी जुर्मान ना लगाने और 10 लाख रूपए से अधिक की रकम पर 25 प्रतिशत का न्यूनतम जुर्माना लगाने के प्रावधान हैं। इसके साथ ही, न्यायाधिकरणों और अदालतों पर मामलों के बढ़ते बोझ, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष कर से जुड़े तमाम लंबित मामलों को कम करने पर फैसला भी इसी योजना के अंतर्गत किया जाना चाहिए।

रेल बजट हो या आम बजट, किसी भी बजट की वास्तविक सफलता उसके कार्यान्वयन, चुने हुए क्षेत्रों तथा समूहों को समयबद्ध आवंटन और पैसे के भुगतान पर निर्भर करती है। वित्त मंत्री की ओर से जिस सनसेट क्लॉज की परिकल्पना की गई है, वह सरकारी योजना के समापन की तिथि को निश्चित करेगी। देश के किसी भी बजट में यह नई पहल पहली बार की गई है। देश के किसी भी बजट में शामिल किया जाने वाला यह अनोखा प्रावधान है। निश्चित रूप से, इस सरकार की सफलता सिर्फ बजट में किए गए आवंटनों से नहीं बल्कि वास्तविक रूप से प्राप्त आँकड़ों के आधार पर आँकी जाएगी। हाँ, ग्रामीण भारत के कार्यक्रमों और सामाजिक योजनाओं के लिए किए जाने वाले आवंटनों की सराहना की जाएगी, लेकिन प्रभावी कार्यान्वयन के लिए इस सरकार को हटकर सोचना होगा। किसानों और गरीबों से जुड़े कार्यक्रमों की सफलता पर निगरानी के साथ ही अत्यावश्यक क्षेत्रों में खर्च पर सुझाव देने के लिए आयोगों और वैधानिक एजेंसियों के गठन से सरकार को इस मोर्चे पर कामयाबी मिल सकती है। सरकारी रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के किसान औसत रूप से हर महीने 1700 रुपए कमाते हैं। पाँच वर्ष बाद इसका दोगुना भी एक मामूली रकम होगी। इस लिहाज से नीति निर्माताओं को अभी बहुत कुछ सोचना पड़ेगा।


ग्रामीण विकास से सुधरेगी तस्वीर


19-03-2016बजट 2016 मुख्य रूप से भारतीय अर्थव्यवस्था के दो महत्वपूर्ण क्षेत्रों-कृषि और ग्रामीण विकास को ध्यान में रखकर पेश किया गया है। बजट 2016 में आवश्यक क्षेत्रों को दुर्लभ संसाधन और धन का आवंटन किया गया है जो इन क्षेत्रों के लिए आशाओं भरा है। जब विश्व की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है और कोई भी देश बेहतर प्रदर्शन कर पाने में सक्षम नहीं है, उस वक्त चीन की अर्थव्यवस्था दुनिया भर में अपनी क्षमताओं का डंका पीट रही है। ऐसे में 2016 के बजट ने भारतीय अर्थव्यवस्था का कायाकल्प करने का एक बेहतर मौका दिया है। वित्तीय अनुशासन के पथ पर चलते हुए वित्त मंत्री वित्त वर्ष 2016 में 3.9 प्रतिशत और अगले साल के लिये 3.5 प्रतिशत का राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को प्राप्त करने की कोशिश में हैं। सरकार ने कृषि और गैर-कृषि क्षेत्रों में अपने हस्तक्षेप को नई दिशा देते हुए वर्ष 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करने का फैसला किया है। 2015-2016 में कृषि ऋण का लक्ष्य 9 लाख करोड़ रखा गया था, लेकिन 2016-2017 के बजट में कृषि क्षेत्र के विकास को ध्यान में रखते हुए 35,984 करोड़ के आवंटन को रेखांकित किया गया है।

नाबार्ड के तहत सिंचाई के बुनियादी ढांचे की स्थापना के लिए 20,000 करोड़ रुपये और प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 5,500 करोड़ रुपये के फंड को शामिल किया गया है। यह एक समग्र बीमा योजना है जिसमें किसना को मामूली प्रीमियम का भुगतान करना पड़ेगा। सरकार ने आने वाले 3 साल की अवधि में 5 लाख एकड़ भूमि में जैविक खेती का लक्ष्य निर्धारित किया है। दालों की कीमतों मं अचानक वृद्धि की समस्या से निपटने के लिये सरकार ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दालों की खरीद के लिए एक बफर स्टॉक के सृजन की मंजूरी दी है। भारत के विभिन्न भागों में बार-बार सूखे की समस्या, मौसम और जलवायु परिवर्तन की अनियमितता जैसी समस्याओं से निपटने के लिए बजट में तालाबों, कुओं जैसे संसाधनों को बढ़ाने पर और साथ ही मिश्रित खाद बनाने के संसाधनों पर बजट में खासा ध्यान दिया गया है। सरकार ने कृषि क्षेत्र के लिए सभी कर योग्य सेवाओं पर कृषि कल्याण उपकर लगाने का फैसला लिया है।

   इसके बाद सबसे अधिक ध्यान ग्रामीण विकास पर दिया गया। बजट 2016-17 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 19,000 करोड़ का आवंटन किया गया। 2018 तक प्रत्येक गांव में 100 प्रतिशत विद्युतीकरण के लिए 8,500 करोड़ रु. का आवंटन किया गया। ग्रामीण विकास के लिए 87,000 करोड़ रु. का और मनरेगा योजना के लिए 38,500 करोड़ रु. का आवंटन सुनिश्चित किया गया। वित्तीय वर्ष 2016-17 में लगभग 2.87 लाख करोड़ रु. का प्रस्ताव ग्रामीण निकायों के लिए अनुदान के रूप में प्रस्तावित किया गया है। 2016 के बजट में अगर कृषि और ग्रामीण विकास पर अधिक ध्यान दिया गया है तो इसका यह मतलब कतई नहीं है कि दूसरे क्षेत्रों को उपेक्षित किया गया है। बजट में बुनियादी ढांचे के विकास को ध्यान में रखते हुए सड़क और रेल क्षेत्र के लिए 2.21 लाख करोड़ रु. का आवंटन किया गया है। देश भर में लगभग 160 ठप्प पड़े हवाई अड्डों को 50-100 करोड़ रु. की लागत से विकास किया जाएगा। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के लिए 19,000 करोड़ रु. के आवंटन के साथ इस योजना के तहत कुल 97,000 करोड़ रु. का आवंटन किया गया है। सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों की 10,000 किलोमीटर के विकास और अगले वित्त वर्ष में राज्य राजमार्गों के 50,000 किलोमीटर के उन्नयन का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।

छोटे और मध्यम उद्योग अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं अत: सकल घरेलू उत्पाद का 8 प्रतिशत, उत्पादन क्षेत्र का 45 प्रतिशत, निर्यात का 40 प्रतिशत का योगदान है। इन क्षेत्रों के लिए वित्त मंत्री ने 1 लाख करोड़ रु. का और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के तहत फरवारी 2016 से 2.5 करोड़ रु. ऋण लेने वालों को मंजूर किया गया था उसी के लिए 1.80 लाख करोड़ रु. के आवंटन का प्रस्ताव भी किया गया है।

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, महिलाओं को उद्यमियों के रूप में परिवर्तित करने के लिए सरकार ने अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति वर्गों और महिलाओं को ‘स्टैंड अप इंडियाÓ योजना के तहत 500 करोड़ रु. का आवंटन किया है, क्योंकि सरकार ”नौकरी चाहने वालों से नौकरी देने वालों के रूप में ‘’ इन्हें देखने की कल्पना करती है। बजट काफी प्रगतिशील लगता है। जब यह देखने को मिलता है कि जिस तरह से अधुनिक तकनीकों का प्रयोग वित्तीय सेवाओं के अलावा विभिन्न सेवाओं के लिए करने का प्रवधान बजट में है उससे तो यह बजट प्रगतिशील नजर आता है।

‘आधार’ कार्यक्रम को एक वैधानिक स्थिति देते हुए वित्त मंत्री ने एक कानून लाने की बात की है जिसके द्वारा सभी सरकारी सुविधाओं का फायदा उनको मिले जो उसके हकदार हैं। इसके साथ ही उन्होंने कुछ जिलों में किसान उर्वरक सब्सिडी के पायलट कार्यक्रम के तहत प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) को भी शुरू करने की बात की है। कुल मिलाकर यह बजट आम आदमी का बजट रहा। बजट में उत्पादक क्षेत्रों को पुनर्जीवित करने का लक्ष्य भी रखा गया है जो बाजार में विकास के लिए नई मांग पैदा करेगा।

मुरलीधर राव

(लेखक भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव हैं)


अंतिम निर्णय

सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों तथा ओआरओपी के कारण सरकारी खजाने पर बढ़ते बोझ को देखते हुए सरकार को नए सरकारी कर्मचारियों के लिए पहले तीन वर्षों में भविष्य निधि में अंशदान की घोषणा को टाल देना चाहिए था। भविष्य निधि में अप्रैल 2016 के बाद किए गए अंशदानों की निकासी पर टैक्स लगाए जाने को भी वेतनभोगी वर्ग पचा नहीं पा रहा है। इसके साथ ही, जहाँ मोटे अमीरों पर लगने वाले सरचार्ज को 12 प्रतिशत से बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया है, जो ठीक लगता है, वहीं जहाँ लाभांश की कुल राशि प्रति वर्ष 10 लाख रुपए से अधिक है, वहाँ प्राप्तकर्ता पर 10 प्रतिशत का अतिरिक्त कर लगाए जाने से यह सवाल उठता है कि क्या सिर्फ उन्हीं लोगों को विकास और सब्सिडी का बोझ उठाना पड़ेगा जो भारत के कॉरपोरेट विकास में निवेश कर रहे हैं।

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कुल मिलाकर, 2016 के केंद्रीय बजट में सबके लिए कुछ न कुछ है, विशेष रूप से तंगी झेल रहे ग्रामीण और कृषि क्षेत्र के लिए, पहली बार उद्यम की शुरुआत करने वालों के लिए, जिनसे रजिस्ट्रेशन टैक्स में छूट का वादा किया गया है। वहीं छोटे कारोबारियों को टैक्स में रियायत दी गई है, और वेतनभोगी वर्ग को एचआरए में बढ़ी हुई छूट मिली है। बेशक, एक बार बुनियादी ढाँचा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बना दिया जाता है, तो अर्थव्यवस्था के अन्य क्षेत्रों और समूहों में चौतरफा तरक्की तथा आमदनी में बढोतरी दिखाई देगी।


बजट की बड़ी घोषणाएं


किराए पर रहने वालों के लिए टैक्स कटौती की सीमा 24 से बढ़ाकर 60 हजार

सस्ते आवास को बढ़ावा

छोटे करदाताओं को राहत

डाकघरों में एटीएम सेवा शुरू होगी

फूड प्रोसेसिंग में 100 प्रतिशत विदेशी निवेश

विनिवेश विभाग का नाम दीपम रखा जायेगा।

सस्ता

मोबाइल, डेस्कटॉप, लैपटॉप, टैबलेट।

डायलिसिस इक्विपमेंट्स सस्ते।

दिव्यांगों (हैंडिकैप्ड लोगों) की मदद से जुड़े इक्विपमेंट्स।

महंगा

स्ङ्कह्य पर ४त्न सेस लगेगा, 10 लाख रुपए से ज्यादा की गाडिय़ों पर 1 पर्सेंट का एक्स्ट्रा सरचार्ज।

छोटी कारों पर टैक्स 1 पर्सेंट और डीजल कारों पर 2.5 पर्सेंट टैक्स बढ़ाया गया है।

बीड़ी छोड़कर सिगरेट, सिगार जैसे सभी तंबाकू उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी 10 से बढ़ाकर 15 पर्सेंट किया गया।

गोल्ड ज्वैलरी, रेडीमेड-ब्रांडेड कपड़े, हीरा, रत्न, कोयला ।

मोबाइल बिल, होटल में खाना, बीमा पॉलिसी, हवाई सफर, रेल टिकट।

सिनेमा और केबल महंगा, ब्यूटी पार्लर का बिल।



इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाने के लिए ऐलान


PAGE 10-15_Page_210 हजार कि.मी में नए हाईवे बनेंगे, इसके लिए 97 हजार करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

50 हजार कि.मी में नए स्टेट हाईवे बनाए जाएंगे।

160 एयरपोट्र्स को डेवलप कर मॉडर्न किया जाएगा।

बुनियादी ढांचे के लिए 2 लाख करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

राज्य हाईवे को नेशनल हाईवे के तौर पर डेवलप करने के लिये दो तरह के अलॉटमेंट किए गए हैं।



शिक्षा एवं रोजगार क्षेत्र के लिए

हायर एजुकेशन के लिए एक हजार करोड़ रुपए,15 हजार मल्टी स्किल सेंटर ‘हेफा खोले जाएंगे।

एससी-एसटी एजुकेशन हब बनाए जाएंगे।

स्कूल-कॉलेज में डिजिटल सर्टिफिकेट दिए जाएंगे।

62 नवोदय स्कू ल खुलेंगे, 20 यूनिवर्सिटीज को वल्र्ड क्लास बनाया जाएगा।

मजदूरों के लिए काम के घंटे और छुट्टी का दिन भी तय किया जाएगा।



हेल्थ सेक्टर के लिये खास

स्टैंड अप स्कीम के तहत 500 करोड़ रुपए अलॉट।

सस्ती दवाओं के लिए 3 हजार नई दुकानें खुलेंगी।

गरीबों को एक लाख रुपए का स्वास्थ्य बीमा।



ग्रामीण इलाकों के लिए

डेयरी उद्योग के लिए 4 नई योजनाएं लाई जाएंगी।

खेती के लिए कुल कर्ज 9 लाख करोड़ रुपए होगा।

मनरेगा के लिए 38 हजार 500 करोड़ रुपए अलॉट किए गए।

2.87 लाख करोड़ रुपए ग्रामीण पंचायतों को दिए जाएंगे।

गांव में बिजली के लिए 8500 करोड़ रूपये रखे जाएंगे।

ग्रामीण भारत के लिए नई डिजिटल साक्षरता स्कीम।



खेती के लिए क्या

मनरेगा के तहत 5 लाख नए कुएं बनाये जायेंगे सिंचाई के लिए।

3 साल में 5 लाख एकड़ में जैविक खेती करने का टारगेट।

कचरे से खाद बनाने की नेशनल लेवल की स्कीम लाने की योजना।

दालों की कीमतें काबू रखने और उत्पादन बढ़ाने के लिए 500 करोड़ रुपए का बजट।

सिंचाई के लिए 20 हजार करोड़ रुपए,15 हजार करोड़ रूपये की किसानों को लोन में मदद।

पीएम सड़क योजना के लिये 19 हजार करोड़ रुपए ।

मंडी कानून में बदलाव, ताकि किसानों को पूरा फायदा मिल सके।

गरीबों और किसानों के लिए हेल्थ कवर स्कीम लाएंगे।

2022 तक किसानों की कमाई दोगुनी करने की कोशिश।


बजट 2016 हमारे गांवों, किसानों, महिलाओं और समाज के वंचित वर्गों के जीवन में एक गुणात्मक परिवर्तन

सुनिश्चित करेगा। -नरेन्द्र मोदी, प्रधानमंत्री

बजट 2016-17 ने सरकार के आर्थिक आधार को मजबूत करने और हमारे देश के बुनियादी ढांचे के नेटवर्क को और अधिक बढ़ानेे का अवसर दिया है। -राजनाथ सिंह, केन्द्रीय गृहमंत्री

19-03-2016

यह बजट प्रधानमंत्री श्री मोदी जी द्वारा गरीब और ग्रामीण भारत को देश के विकास की मुख्यधारा में लाने के अभियान को और मजबूती देगा। -अमित शाह, राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा

वित्त मंत्री ने बजट में वो सारी बातें रखी हैं जिनकी आज के वक्त में जरूरत थी। हर क्षेत्र के लिए कुछ न कुछ है। ग्रामीण क्षेत्र और कॉर्पोरेट के लिए भी है। जो बहुत अमीर हैं उनसे थोड़ा लेकर गरीबों के लिए दिया गया है। ये अच्छी बात है। – यशवंत सिन्हा, पूर्व वित्त मंत्री

मैं समझता हूं कि आज के परिप्रेक्ष्य में इतना ट्रांसफॉर्र्मेंशनल बजट पेश किया है कि वो देश को नए आयाम पर ले जाएगा। देश की पूरी 125 करोड़ जनता की मांग को ध्यान में रखते हुए वित्त मंत्री ने बजट पेश किया है। वित्त मंत्री मेरी तरफ उदार रहे हैं कि 2018 तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य दिया है। मैं उम्मीद करता हूं कि 2018 के पहले हर गांव तक और 2019 तक हर घर तक बिजली पहुंच जाएगी।

-पीयूष गोयल, केन्द्रीय बिजली मंत्री

बजट 2016 का जोर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार उपलब्ध कराने, शिक्षा को मजबूत करने और कौशल विकास पर है। -धर्मेन्द्र प्रधान,केन्द्रीय पेट्रोलियम मंत्री

यह वास्तव में आम जनता का बजट है। बजट में आम जनता की सभी प्रमुख प्राथमिकताओं को शामिल किया गया है। -रमन सिंह, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

सतही तौर पर सही, अपने तीसरे बजट में कम से कम मोदी सरकार को किसानों, ग्रामीण क्षेत्र और सोशल सेक्टर की याद तो आई। -नीतिश कुमार, मुख्यमंत्री, बिहार

सुनील गुप्ता

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक और चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं।)

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