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मोदी जी की गुगली

मोदी जी की गुगली

अपुन के पीएम का भी कोई जवाब नहीं। संसद में मंत्रियों का दांव चित होते देखकर उन्होंने सोनिया से मिलने की इच्छा जता दी। बताते हैं कांग्रेस अध्यक्ष ने भी इसमें कोई नखरा नहीं दिखाया। कुछ देर चली बातचीत में मोदी जी ने चाहे जो जादू किया हो, लेकिन सुना है कि संसद के चलने और जीएसटी के लिए कांग्रेस मान गई है। अब कोई कैसे बताए कि भाई कुछ भी हो, मोदी जी बड़े खिलाड़ी तो हैं ही।



राहुल बाबा का कमाल


19-03-2016

कांग्रेसी राहुल बाबा के कमाल से खुश हैं। कुछ वरिष्ठों को मजा भी आ रहा है, लेकिन फुसफुसा कर रह जा रहे हैं। हो भी क्यों न। राहुल बाबा जहां वरिष्ठों को किनारे रखकर कांग्रेस को युवा बनाने में लगे हैं, वहीं कहीं बिल्ली भी म्याऊं करती है तो आंख मीजते हुए बिना मुंह धोए पहुंच जाते हैं। उनकी इसी आदत ने जेएनयू प्रकरण में कांग्रेस को मुसीबत में डाल दिया है। वरिष्ठों को इससे दो फायदे हैं। पहला तो यह कि बबुआ अब संभलकर कूद-फांद करेगा, दूसरे लीपापोती करने के लिए उनकी (वरिष्ठों की) पूछ बढ़ेगी। जय हो राहुल बाबा!



टोटका चल गया


19-03-2016

जब से स्मृति ईरानी ने नया टोटका आजमाया है, न केवल विरोधी कम हुए हैं बल्कि धाक भी जमने लगी है। लोकसभा में जिस अंदाज में उन्होंने विपक्ष की हवा निकाली है, उससे भाजपाई भी दंग हैं। इतना ही नहीं, मार्च-अप्रैल में वह अपने मंत्रालय की कुछ बड़ी घोषणाएं भी करने वाली हैं। नई शिक्षा नीति भी सरकार को मिल जाएगी और इसको लेकर भी स्मृति को जौहर दिखाना है। बताते हैं किसी ज्योतिषी के सुझाव से यह कमाल हो रहा है।



जज साहब दुल्हन ढूंढनी है


19-03-2016

जेल में बंद एक कैदी की विपदा पर जज साहब भी पसीज गए। दिल्ली के कैदी अनिल कुमार ने उच्च न्यायालय में गुहार लगाई। उसने पैरोल पर रिहाई की अर्जी दी और जज साहब मान गए। अदालत का हुक्म सिर माथे पर। कैदी की विपदा भी अनूठी थी। उसने अदालत को बताया कि उसे अपने लिए दुल्हन ढूंढ़ऩी है। लंबी सजा का कैदी है, लिहाजा अदालत ने पांच हजार के मुचलके और एक जमानती की शर्त पर चार सप्ताह का पैरोल दे दिया।



हक्के-बक्के जोशी जी


19-03-2016

जब से 251 रु. में देश को स्मार्ट फोन दिलाने की आधारशिला रखकर जोशी जी आये हैं, हक्के-बक्के से हैं। कभी किसी की बोलती बंद करने वाले भाजपा मार्गदर्शक मंडल के नेता जोशीजी अब रोज 251 रु. से जुड़ी खबर खोज रहे हैं। उन्हें गुस्सा भी आ रहा है कि आखिर जिस तरह से सूचना देकर मनोहर पर्रीकर को रोका गया, वैसे उन्हें क्यों नहीं बताया गया। खैर! चाहे जो हो लेकिन जोशी जी एक बार को मजाक तो बन ही गये हैं।



मैं तो ढाई साल


19-03-2016

उत्तर प्रदेश के प्रदेश कांग्रेस प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री गदगद हैं। मिस्त्री भाई की खुशी का राज भी ढाई साल तक प्रदेश का प्रभार बचाये रखना है। इससे भी ज्यादा खुशी इसकी है कि इसके लिए कांग्रेस और दूसरे दलों के नेता बधाई दे रहे हैं। अब मिस्त्री से कौन कहे कि डुबाओगे तो बधाई मिलेगी ही। यही क्या कम है कि ढाई साल में बिजली के खम्भों पर चढ़कर कोई पोस्टर नहीं फाड़ा।



यही तो खेल है


19-03-2016

भाइयों को यह समझ में नहीं आ रहा कि जब जेएनयू राष्ट्रद्रोह प्रकरण में सारा खेल गृह मंत्री राजनाथ ने शुरू किया तो खत्म स्मृति ईरानी ने क्यों किया। जबकि राजनाथ सदन में उठने वाले सवालों का जवाब देने को तैयार थे। लेकिन बताते हैं ईशारा कहीं से हुआ, स्मृति का होमवर्क किसी ने तैयार किया और अपने अंदाज में वह निखरकर आ गई। आखिर राजनीति में यही तो खेल हैं।



मोदी जी मुस्कराए


19-03-2016

पीएम आजकल एक प्रकरण से थोड़ा प्रसन्न भाव में हैं। इसरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में अचानक मोड़ आ गया है। पूर्व गृह सचिव जीके पिल्लई ने 2009 में उसे लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी न बताने के लिए हलफनामे में बदलाव का ठीकरा राजनैतिक नेतृत्व पर फोड़ दिया है। तत्कालीन गृह मंत्री पी.चिदंबरम ने भी आनन-फानन टीवी चैनल पर जिम्मेदारी अपने सिर पर ओढ़ ली है। यह स्टैंड यूपीए की सरकार में ही बदला। शिवराज पाटील गृह मंत्री थे तो इशरत लश्कर आतंकियों के गिरोह की सदस्य थी और चिदंबरम आए तो मामला बदल गया। ऐसे में जांच तो बनती है। फिर, मोदी सरकार जांच आयोग गठित कर दे तो क्या बुरा है।



बदरूद्दीन ब्रांड


19-03-2016

कांग्रेस बदरूद्दीन अजमल ब्रांड को लेकर परेशान हैं। पहले तो लग रहा था परफ्यूम किंग उनका साथ देंगे। नहीं भी दिया तो तीन-चार दहाई सीटों पर लड़ेंगे। अब खबर लगी है अजमल असम गण परिषद को भी साधने में लगे हैं। ताकि एक मोर्चा बन सके। कुछ लोग इसे भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की सह पाए साबिर अली का कमाल मान रहे हैं तो कुछ भाई लोगों को अजमल ब्रांड परफ्यूम की खुशबू ही नहीं समझ में आ रही ।


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