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अधरं मधुरं…

अधरं मधुरं…

By उपाली अपराजिता रथ

हम जिस खुशी के पीछे भाग कर अपना पूरा जीवन बीता देते हैं वह हमारे खुद के हाथ में है, यह हमें ज्ञात ही नहीं होता। हमारा सुख-दुख हमेशा हमारी प्रवृत्ति के ऊपर निर्भर करता है। हमारा दूसरों के प्रति किया गया व्यवहार ही हमारे सुख-दुख का निर्णय करता है। हम दूसरों के प्रति कितना अच्छा प्रदर्शन करते हैं, वही चीज प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हमारी जिंदगी में फलित होती है। हमारी प्रवृत्ति हमारे वचन के माध्यम से सामने आती है। हमारे जीवन में हमारे मुंह से निकलने वाला छोटा-सा शब्द भी बहुत महत्व रखता है। हम अगर दिन की शुरूआत दो मीठे शब्द सुनकर करें तो हम बहुत स्फूर्ति महसूस करते हैं।

हमारे मुंह से निकलने वाले शब्दों के लिए हमें कोई शुल्क नहीं देना पड़ता है। वह इतना फायदेमंद होता है, जिसकी कोई तुलना नहीं की जा सकती है। हम जब दूसरों के लिए कुछ अच्छा करने की सोचते हैं अथवा हम कोई समाजसेवा करने का प्रयास करते हैं तो हमें शुरूआत अपनी बोली से करनी चाहिए।

सबद समहारे बोलिए, सबद के हाथ ना पांव
एक सबद औषधि करे ओक शब्द करे धाव’
कभी-कभी जहां कोई औषधि काम नहीं कर पाती वहां दो मीठे शब्द काम कर जाते हैं। मनुष्य अपने जीवन में जितने भी बड़े काम कर ले उसके अंदर हमेशा एक बच्चा छुपा रहता है और वह बच्चा हमेशा प्यार भरी बातों को ढूंढता रहता है। मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्ति जिसे चिकित्सा से ठीक नहीं किया जा सकता, उसे थोड़ी सी मीठी बातों से स्वस्थ बनाया जा सकता है। यह चिकित्सा जगत में प्रमाणित हो चुका है। इतना ही नहीं कभी-कभी बड़े-से-बड़े मामले को दो मीठे शब्द बोल कर सुलझाया जा सकता है। कटु शब्द हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं, इसलिए कहा गया है –

मधुर वचन औषधि
कटु वचन है तोर
स्रबण द्वारा संचय
सारा सकल सरीर’
बचपन में एक कहानी सुनी थी, जिसका तात्पर्य यह था कि सांप का डसा हुआ भी जी जाता है, किंतु जीभ का डसा हुआ इंसान बुरी तरह से तड़प-तड़प कर मर जाता है। हम अपने अंदर की परेशानी को खुद से अलग करने के लिए दूसरों के लिए कटु वचन प्रयोग कर लेते हैं। असलियत में उससे परेशानी दूर नहीं होती। जहां एक क्षण के लिए हम खुशी महसूस कर लेते हैं, लेकिन पूरी तरह मन उससे खुश नहीं हो पाता। हमारे कड़वे वचन मुसीबत को और भी बढ़ा देते हैं। हमरे वचन हमारे चारों तरफ एक वलय बना देता है।

हम अपने मधुर वचनों के द्वारा न केवल दूसरों को खुशी देते हैं, बल्कि अपने आपको भी खुश रखने का प्रयास करते हैं। इसलिए हमारे वचनों पर हमेशा हमारा नियंत्रण होना चाहिए। जाने-अनजाने में हमारे मुंह से निकलने वाले कटु वचन भी दूसरों को दुख पहुंचाते हैं। आज-कल की पीढ़ी में शालीनता की कमी नजर आ रही है। मधुर वचन बोलना एक अभ्यास है। हम नित्य जीवन में और अपने परिवार के अंदर ही अच्छे से बोलने का अभ्यास सीखना चाहिए, ताकि हम बाहर हर व्यक्ति से अच्छे से बोलकर जीवन को सुखमय बना सकें।

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