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भारतीयों के लिए सिरदर्द बनते जाली अप्रवासी विवाह

भारतीयों के लिए सिरदर्द बनते जाली अप्रवासी विवाह

भारत के युवक और युवतियों का विदेशों में बसे भारतीयों के साथ विवाह काफी लंबे समय से सामाजिक, आर्थिक और कानूनी विवादों का विषय रहा है। विशेष रूप से जब कोई अप्रवासी भारतीय अमेरिका या यूरोप के किसी अन्य विकसित देश में रह रहा हो, तो ऐसे लोगों के साथ मिलकर गैर-कानूनी गतिविधियों का मार्ग ढूंढ़ते-ढूंढ़ते अक्सर लोग विवाह जैसे पवित्र बंधन का प्रयोग भी ऐसे कार्यों के लिए करने लगते हैं। जिसके कारण अक्सर विवाह बंधन में फंसने वाला अंजान साथी अपराधिक मानसिकता का शिकार हो जाता है। अक्सर लड़कियां ही ऐसे चक्रव्यूह में फंसती हुई देखी गई हैं। ऐसी घटनाओं के कई सामाजिक दुष्प्रभाव भी देखने को मिलते हैं।

अपराधिक मानसिकता वाले अप्रवासी भारतीयों को दो प्रकार की श्रेणियों में बांटा जा सकता है। प्रथम, वे अप्रवासी भारतीय जो पत्नी की तलाश में भारत आते हैं, परन्तु उनका उद्देश्य धनी माता-पिता की बेटियों को विवाह के जाल में फंसाकर दहेज के रूप में तरह-तरह से धन की मांग करते रहना होता है। दूसरे प्रकार के ऐसे विवाह हैं, जिनमें भारतीय पक्ष विदेश जाकर बसने के लोभ में वीजा बनवाने की प्रक्रिया को सुनिश्चित करने के लिए विदेशी भारतीयों से विवाह करते हैं।

अधिकतर समस्याएं प्रथम प्रकार के षड्यंत्रकारी विवाहों में देखने को मिलती है, जब विदेश में बसा कोई पुरुष भारत आकर सामाजिक और आर्थिक रूप से सम्पन्न परिवारों की लड़कियों के साथ विवाह का आयोजन करता है। वह भारतीय परिवार को इस बात का पूरा सब्जबाग दिखाता है कि विदेश में उनकी बेटी को बहुत अच्छे स्तर का जीवन प्राप्त होगा और यहां भारत में भी उनके परिवार को उच्च सामाजिक प्रतिष्ठा प्राप्त होगी। इस प्रकार के प्रलोभन में भारतीय परिवार सरलता से फंस जाते हैं। इतना ही नहीं वे ऐसे विवाहों पर अपार धन भी व्यय करते हैं। खर्चीले विवाह के अतिरिक्त भारी दहेज भी दिया जाता है, परन्तु वास्तविकता विवाह के बाद सामने आती है। अक्सर लड़की को वीजा बनने में देरी के बहाने यहीं छोड़ दिया जाता है। अप्रवासी भारतीय पुरुष जानबूझ कर उसके माता-पिता को प्रतीक्षा की कुछ अवधि बिताने के लिए मजबूर करता है, जिससे वह उनसे और अधिक धन वसूल कर सके। किसी प्रकार जब नव-विवाहित युवती प्रतीक्षा की घडिय़ां पूरी करके विदेश पहुंचती है तो उसके लिए असहनीय दृश्य प्रस्तुत होते हैं। अपने पति के आपराधिक चाल-चलन तथा अनैतिक संबंधों को देखकर उस लड़की के पास घुट-घुटकर विदेशी भूमि पर अपने दिन काटने के सिवाय और कोई दूसरा उपाय नहीं बचता। यदि वह इस सारी दुविधा को अपने माता-पिता से सांझा करती भी है, तो भारत में बैठे उसके माता-पिता उसकी सहायता भी नहीं कर पाते। इन परिस्थितियों में पति उसके माता-पिता को भावनात्मक रूप से और अधिक ब्लैकमेल करना प्रारम्भ कर देता है। वह उनसे लगातार इस बात के लिए धन वसूली करता रहता है, कि उनकी बेटी विदेश में सुखी रह सके या केवल जिंदा ही रह सके। ऐसी लड़कियों को विदेश में एक प्रकार से परित्यक्ता का जीवन जीना पड़ता है। विदेश में ऐसी लड़कियों को ना कोई सहयोग करने वाला होता है और न ही विदेशी कानून भारत की तरह असहाय पत्नियों को कोई विशेष सहारा देने वाले होते हैं। ऐसे वैवाहिक विवाद भारत के अनेकों प्रांतों विशेष रूप से पंजाब, हरियाणा, आन्ध्र प्रदेश, तमिलनाडू, केरल तथा गुजरात आदि में देखने-सुनने को मिलते हैं।

दूसरे प्रकार के विवाह में अक्सर भारतीय पक्ष विदेशों में अपने लिए वैवाहिक संबंध की तलाश करता है, जिससे वह उस देश का स्थाई वीजा प्राप्त कर सके। विदेशों में बसे कई लोग तो ऐसे आपराधिक गुटों का संचालन करते हैं जिसमें भारतीय युवक को किसी भी देश में ले जाने के लिए वहां की किसी युवती से उसका विवाह होना दिखा दिया जाता है। ऐसे कार्यों में बिचौलिये गुट अपार धनराशियां वसूल करते हैं। हाल ही में भारत के स्थानीय समाचार पत्रों में ऐसे नकली विवाहों के आयोजनों पर विस्तृत रिपोर्ट भी प्रकाशित हुई थी। होशियारपुर, लुधियाना तथा जालंधर के कुछ स्थानीय समाचार पत्रों में तो विदेशों में विवाह के नाम से विशेष वैवाहिक विज्ञापन भी प्रकाशित किये गये। ऐसे विवाहों में केवल कोर्ट विवाह प्रक्रिया का ही सहारा लिया गया जिससे वीजा मिलने में सरलता हो सके। इस प्रकार की हरकतों को देखकर इंग्लैण्ड दूतावास ने तो कुछ समय के लिए वैवाहिक वीजा देने पर प्रतिबंध ही लगा दिया था।

लंबी अवधि की विदेशी दासतां ने भारतीय समाज को आर्थिक तथा सामाजिक रूप से आज भी विदेशी संस्कृति का गुलाम बनाकर रखा हुआ है। पंजाब के अन्दर तो विदेशों में जाकर अधिक धन कमाने की मानसिकता व्यापक रूप से देखी जा सकती है। दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में भी यह दौड़ बढ़ती जा रही है। इस दौड़ के कारण लोग किसी भी हद तक जाते हुए देखे जा सकते हैं। इन कार्यों में अपार धनराशि खर्च करना लोग ऐसा समझते हैं, जैसे किसी नये व्यापार में निवेश करना।

विदेशों में जाकर बसने की प्रक्रिया में शामिल आपराधिक मार्ग को देखते हुए अब केन्द्र सरकार के अप्रवासी विभाग तथा राष्ट्रीय महिला आयोग ने गांव के स्तर पर भी लोगों में इन षड्यंत्रों से सचेत रहने का प्रचार प्रारम्भ कर दिया है। महिला आयोग की वेबसाइट पर भारतीय महिलाओं के लिए विशेष सुझाव भी लिखे गये हैं। पुरुषों को भी यह स्मरण रखना चाहिए कि जाली अप्रवासी विवाह प्रक्रिया के माध्यम से वे विदेश पहुंचने के बजाय जेल भी पहुंच सकते हैं। लेकिन इस सामाजिक बुराई को रोकने के लिए इतना पर्याप्त नहीं है।

अब यह महसूस किया जा रहा है कि अप्रवासी विवाहों में शामिल इस आपराधिक मार्ग से भोले-भाले लोगों को राहत दिलाने के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। प्रतिवर्ष कई हजारों की संख्या में ऐसे जाली विवाह सरकार की सूचना में आ रहे हैं। पीडि़त पक्ष इन षड्यंत्रों में फंसने के बाद न्याय की मांग करते हुए जगह-जगह ठोकर खाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। इस संबंध में निश्चय ही सख्त कानून बनाये जाने चाहिए। इस आवश्यकता को महसूस करते हुए मैंने हाल ही में राज्यसभा की याचिका समिति के समक्ष एक विस्तृत याचिका प्रस्तुत करते हुए यह प्रार्थना की है कि अप्रवासी विवाहों के विरुद्ध जागरूकता बढ़ाने के लिए और अधिक प्रचार किया जाना चाहिए। भारत की सरकार विदेशों के साथ कुछ विशेष प्रकार के समझौते करे जिनमें ऐसे अपराधी षड्यंत्रों में शामिल पक्षों को कानून के दायरे में लाने का प्रबंध किया जा सके। ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, हॉगकॉग, जर्मनी, कुबैत, मॉरिशस, नीदरलैंड, सउदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, स्पेन, इंग्लैण्ड, अमेरिका आदि सहित 38 देशों के साथ इस संबंध में भारत के समझौते हो चुके हैं। भारत के अन्दर भी ऐसे विवाहों को लेकर सख्त कानूनों की आवश्यकता है। ऐसे विवाहों से पूर्व अप्रवासी पक्ष के पूर्ण तथ्यों का प्रमाण विदेशों से प्राप्त किया जाना चाहिए, उनके पासपोर्ट और वीजा आदि का भी गंभीरता से निरीक्षण किया जाये। अप्रवासी पक्ष के इन सभी दस्तावेजों की फोटो कॉपियां करवाकर सुरक्षित रखनी चाहिए। इसके अतिरिक्त भारत में विवाह के पंजीकरण के समय यह अनिवार्य किया जाना चाहिए, कि अप्रवासी भारतीय अपनी वैवाहिक योग्यता का प्रमाण पत्र अपने प्रवास वाले देश की सरकार अथवा भारतीय दूतावास से प्रमाणित करवाकर प्रस्तुत करे। जिसमें उसके किसी पूर्व विवाह, तलाक अथवा लिव-इन-रिलेशन के साथ-साथ उसकी आय के स्रोतों आदि की भी प्रमाण सहित जानकारी शामिल हो।

भारतीय पीडि़त पक्ष को इस सारी प्रक्रिया में नि:शुल्क कानूनी सहायता दी जानी चाहिए। इस प्रकार के मामलों में वकीलों को भी अधिक मेहनत करनी पड़ती है। कानूनी प्रक्रिया में भी अप्रवासी भारतीय कई प्रकार के षड्यंत्र रचकर भारत की कानूनी प्रक्रिया को धोखा देने का प्रयास करते रहते हैं। भारत की अदालतों के नोटिस और वारंट इत्यादि अप्रवासी भारतीयों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी भारत के कानून मंत्रालय और गृह मंत्रालय की होती है। इसके अतिरिक्त विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी है कि विदेश के भारतीय दूतावास के माध्यम से अप्रवासी भारतीय की हर प्रकार की सूचना उपलब्ध कराये। भारत सरकार को अप्रवासी भारतीयों के साथ जुड़े इन मंत्रालयों के संबन्धित अधिकारियों को भी अत्यधिक संवेदनशील बनाना पड़ेगा। यदि कोई अप्रवासी भारतीय अपनी पत्नी के साथ इस प्रकार के षड्यन्त्र करता है तो भारतीय अदालतों में ऐसे व्यक्ति के विरुद्ध अपराधिक मुकदमें प्रारम्भ करने के साथ-साथ उसका विदेश का वीजा निरस्त कराने की प्रार्थना भी विदेश मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिए। अक्सर अप्रवासी भारतीय विदेशी कानूनों का सहारा लेते हुए वहां की अदालतों में मुकदमें करके बिना भारतीय पक्ष की उपस्थिति के तलाक के अन्तिम निर्णय भी प्राप्त कर लेते हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने नीरजा सराफ बनाम जयन्त सराफ मामले में यह स्पष्ट निर्णय दिया है कि भारत सरकार इस प्रकार का कानून पारित करे कि भारत में सम्पन्न हुए किसी भी विवाह पर तलाक का आदेश कोई विदेशी अदालत नहीं दे सकती। ऐसे कानून में यह प्रावधान भी जोडऩे चाहिए कि भारतीय पत्नी का अपने पति की भारत और विदेशों में स्थिति सभी संपत्तियों में अधिकार घोषित किया जाये तथा भारत की अदालतों द्वारा दिये गये आदेशों का क्रियान्वयन विदेशों में भी सरलता पूर्वक सम्भव होना चाहिए।

मेरा निश्चित मत है कि यदि इस याचिका की प्रार्थना के अनुरूप सरकार यह विशेष उपाय करती है तो जाली अप्रवासी विवाहों पर कुछ रोकथाम अवश्य ही लग सकेगी और पीडि़त पक्ष की पीड़ा को कम करने में भी सहयोग प्राप्त होगा।

अविनाश राय खन्ना

(लेखक राज्यसभा सदस्य व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, भाजपा, हैं)

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