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स्वच्छ विचार ही नई दिशा देते हैं

स्वच्छ विचार ही नई दिशा देते हैं

इस आधुनिक युग में हर प्राणी तनाव से भरा है। इस तनावपूर्ण जीवन से मुक्ती पाने के लिए हम अनेक प्रयास करते हैं, फिर भी हम नाकाम रहते हैं, कुछ क्षण तक हम अपने आप को बदलने का प्रयास करते हैं, किंतु फिर भी ”जस्य पूर्व तथा परं’’ फिर से तनाव, दुख और चिंता को अपने दिमाग में भर लेते हैं। मानो इन सभी चीजों से जुड़े रहना हमारी आदत बन गई है। इससे खुद भी चिंता में डूबे रहते हैं और अपने आस-पास के प्रत्येक व्यक्ति को भी हम अपना दुख सुना-सुना कर व्यथित कर देते हैं। हमारा इस तरह का स्वभाव न केवल एक अशांति का वातावरण पैदा करता है, बल्कि हमारी नकारात्मक सोच हमारी जिंदगी को नकारात्मक बना देती है। हमारे जीवन से दुख और दुर्दशा कभी भी दूर नहीं हो पाते। अगर हम अपने जीवन को मधुर नहीं बना सकते तो सरल तो बना ही सकते हैं। चिंता से मुक्ती पाने के तथा सुखी रहने के अनेक उपाय जान कर भी हमारे नाकाम होने का कारण क्या है? उस कारण का जानना वाकई हमारे लिए बहुत जरूरी है। उपाय तभी कार्य करता है, जब हम उस पर अमल करें और हम तभी सफल होंगे जब हम उसी चीज को बार-बार करें या उसे हमारी आदत बना लें। किसी भी चीज के अभ्यास के बिना हमारा सफल होना मुश्किल है। एक सफल व्यक्ति के अंदर कुछ सद् आचरणों का अभ्यास अत्यंत आवश्यक है।

हमें बचपन में अनेक अच्छी आदतों से अवगत कराया जाता है। जैसे- सच बोलना, उचित समय पर उचित कार्य करना, नियमित कुछ समय भगवान की प्रार्थना करना, कुछ समय शांत चित्त रहकर ध्यान करना ऐसा ही बहुत कुछ। हम अपने विद्यार्थी अवस्था में इन सभी बातों का पालन कर लेते थे। लेकिन, जैसे-जैसे बड़े होते जाते हैं, हम धीरे-धीरे अपने आपको उन सभी चीजों से समय की कमी का बहाना बना कर दूर कर लेते हैं। जबकि ऐसा करके हम खुद के जीवन को ही गलत रास्ते पर ले जाते हैं।

कुछ अच्छी आदतों को अपने जीवन का हिस्सा बना लेना चाहिए। जैसे अध्यात्मिक ग्रंथों को सुनने से, कुछ क्षण ध्यान करने से, प्रात: ईश्वर की प्रार्थना आदि से हमारे जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आ सकते हैं। हम सभी इस बात को जानते है कि हमारे धर्म ग्रंथ ज्ञान से भरे पड़े हैं जो हमे सही दिशा दिखा सकते हैं। गीता में श्रीकृष्ण अर्जुन को जो दिव्य ज्ञान प्रदान करते हैं वह समग्र मानव जाती का मार्गदर्शक बन सकता है। रामायण का हर चरित्र अपने आप में हम सभी के लिए उदाहरण है, बस जरूरत है तो इन सभी चीजों को अपने जीवन से जोडऩे की। क्योंकि जैसे-जैसे हम इन्हें अपने जीवन से जोडऩा शुरू करते हैं वैसे-वैसे हमारे जीवन मे सुधार आता जाता है। लेकिन बिना अभ्यास के ये संभव नहीं। थोड़ा सा भी हो, नियमित कुछ ग्रंथों के अध्ययन का अभ्यास हमारे जीवन को सुंदर बना सकता है।

कुछ सदाचार को अपना कर शांत रहना अथवा दिन में कुछ क्षण निकाल कर ध्यान में बैठना हमारे जीवन को नई दिशा दे सकता है। हमे सभी चीजों से हटकर कुछ क्षण शांत बैठकर अपने भीतर की यात्रा करनी चाहिए। अकेले बैठकर ध्यान करने से केवल दिमाग तनाव से मुक्त नहीं होता है, बल्कि पूरा शरीर स्फूर्तिवान हो जाता है। जब हम ध्यान करना शुरू करते हैं तो मन में इतनी शांति आ जाती है कि किसी भी परिस्थिती में हम विचलित नहीं होते, बल्कि हर समस्या का समाधान हम आसानी से निकाल लेते हैं। जैसे स्थिर पानी में हम अपने प्रतिबिंब को आसानी से देख सकते हैं। ठीक उसी तरह एक शांत और स्थिर मन में हर चीज को स्वच्छता से महसूस कर सकते हैं। जब हम हर चीज को स्वच्छ रूप से देख सकेंगे उसे समझने में हमे दुविधा नहीं होगी। इस तरह जब हम जीवन को ठीक से समझने लगेंगे तो हमारा मन इधर-उधर नहीं भटकेगा और हम अपने जीवन को सही दिशा दे सकेंगे।          

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