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वाकई बड़े असर वाले सुधार

वाकई बड़े असर वाले सुधार

मोदी सरकार ने पिछले हफ्ते पेट्रोलियम और हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में जान फूंकने के लिए कई पहल शुरू करके एक नया अध्याय जोड़ दिया है। केंद्रीय कैबिनेट और आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने हाइड्रोकार्बन एक्सप्लोरेशन ऐंड लाइसेंसिंग पॉलिसी (हेल्प) को मंजूरी दे दी है। तेल और गैस के उत्खनन के लिए मौजूदा नीति न्यू एक्सप्लोरेशन लाइसेंसिंग पॉलिसी (नेल्प) 18 साल से अस्तित्व में है। इन वर्षों में कई तरह की समस्याएं और मुद्दे उभरे हैं। फिलहाल अलग-अलग हाइड्रोकार्बन के लिए अलग-अलग नीतियां और लाइसेंस के नियम-कायदे हैं। पारंपरिक तेल तथा गैस, कोयला आधारित मिथेन, शेल तेल व गैस और गैस हाइड्रेट सबके लिए अलग-अलग नीतिगत व्यवस्थाएं हैं। विभिन्न हाइड्रोकार्बन के उत्खनन के लिए क्षेत्र आवंटन के खातिर विभिन्न वित्तीय इकाइयां भी हैं। हालांकि, व्यवहार में ठेका भले एक का हो पर वहां एक से अधिक खनिज संसाधन उपलब्ध होते हैं। लेकिन नई नीति ‘हेल्प’ से घरेलू इस्तेमाल वाले तेल और गैस का उत्पादन बढ़ेगा, इस क्षेत्र में पर्याप्त निवेश आएगा और काफी रोजगार पैदा होगा। इस नीति से पारदर्शिता भी बढ़ेगी और प्रशासकीय विवेकाधिकार का मामला भी घटेगा। एकल लाइसेंस की नीति से एक ही लाइसेंस के तहत पारंपरिक के साथ-साथ सीबीएम, शेल गैस/तेल, टाइट गैस और गैस हाइड्रेट का उत्खनन एक ही लाइसेंस से किया जा सकेगा।

खुला क्षेत्र नीति की अवधारणा से तेल व गैस उत्खनन कंपनियां आवंटित इलाकों में ब्लॉक का चयन कर सकेंगी। उत्पादन में साझेदारी की मौजूदा वित्तीय व्यवस्था निवेश और लागत के आधार पर उत्पादन के भुगतान की पेचीदी प्रणाली पर आधारित है। इसकी जगह साझेदारी की आसान व्यवस्था लाई जाएगी। पहले के ठेके मुनाफे में साझेदारी की ऐसी प्रणाली पर आधारित हैं जिसमें लागत की भरपाई के बाद सरकार और ठेकेदार के बीच मुनाफे में साझेदारी का प्रचलन है। मुनाफे में साझेदारी की प्रणाली में सरकार के लिए निजी कंपनियों के लागत की जांच-परख जरूरी हो जाती है और इससे कई तरह के विवाद उभरते हैं और बेमतलब देरी होती है। नई व्यवस्था में सरकार लागत के बारे में कुछ नहीं सोचेगी और तेल, गैस वगैरह की बिक्री से होने वाली कुल कमाई में हिस्सा लेगी। यह सरकार की ‘कारोबार के लिए सहूलियत’ देने की नीति के अनुरूप है। और तो और, समुद्र तल में उत्खनन और उत्पादन की ऊंची लागत और जोखिम के मद्देनजर इन इलाकों के लिए नेल्प के तहत रॉयल्टी की दरों को घटा दिया गया है, ताकि उत्खनन और उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।

यहां यह जिक्र करना गैर-मुनासिब नहीं है कि आज देश में कुल आयात का सबसे बड़ा हिस्सा तेल और गैस का ही है। देश में तेल का उत्पादन स्थिर है और गैस का उत्पादन घट गया है। इसलिए घरेलू उत्पादन को बढ़ाने के लिए सुविचारित नीतियों की दरकार है। इस पृष्ठभूमि में ‘हेल्प’ से तेल और गैस क्षेत्र में प्रगति तेज होगी।

इसके अलावा छोटे और मध्यम आकार के तेल-गैस क्षेत्रों उत्पादन साझेदारी करार (पीसीएस) के विस्तार की नीति भी अपनाई गई है। करार की विस्तारित अवधि में पेट्रोलियम मुनाफे में सरकार की हिस्सेदारी छोटे और मध्यम दोनों आकार के क्षेत्रों के लिए पीसीएस के सामान्य प्रावधानों की तुलना में 10 फीसदी अधिक होगी। इस तरह यह हर साल के निवेश और लागत के आधार पर तय होगा। कई क्षेत्रों में करार की अवधि में उत्पादन नहीं हो पाता है। इसके अलावा कई क्षेत्र जहां अतिरिक्त हाइड्रोकार्बन के उत्खनन के लिए अधिक लागत वाली परियोजनाओं का इस्तेमाल करना पड़ता है, भुगतान की अवधि करार की अवधि से आगे निकल जाती है। इसलिए अतिरिक्त उत्खनन के लिए एक पारदर्शी नीति की जरूरत है, ताकि ठेकेदार अतिरिक्त निवेश करने को उत्साहित हो।

इसलिए उम्मीद यही की जा रही थी कि अतिरिक्त तेल-गैस उत्खनन के लिए ठेकेदारों को समय से योजना बनाने के लिए निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाने की कोशिश शुरू होगी। पीसीएस विस्तार की नीति से हाइड्रोकार्बन का उत्पादन संबंधित अवधि के बाद भी बढ़ जाएगा। विस्तारित अवधि के दौरान 15.7 एमएमटी तेल और 20.6 एमएमटी तेल के बराबर गैस का अतिरिक्त उत्पादन हो सकेगा। इन क्षेत्रों में लगभग 8.25 अरब डॉलर (करीब 53,000 करोड़ रु.) का तेल-गैस होने का अनुमान है। इससे 3-4 अरब डॉलर के अतिरिक्त निवेश की भी जरूरत होगी। इस वजह से ठेकों के विस्तार से इन क्षेत्रों में नए निवेश के आने की गुंजाइश है और इससे जुड़े रोजगार भी बढ़ेंगे।

इसके अलावा आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने प्रधानमंत्री उज्जवल योजना को भी मंजूरी दी। यह योजना बीपीएल घरों की महिलाओं को मुफ्त रसोई गैस कनेक्शन देने की है। इसके तहत बीपीएल परिवारों को पांच करोड़ रसोई गैस कनेक्शन देने के लिए 8,000 करोड़ रु. का प्रावधान किया गया है। इस योजना में हर कनेक्शन के लिए 1600 रु. की वित्तीय मदद मुहैया कराई जाएगी। देश के इतिहास में पहली बार पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय ऐसी कल्याणकारी योजना चला रहा है जिससे करोड़ों गरीब परिवारों को लाभ मिलेगा। बीपीएल परिवारों को रसोई गैस कनेक्शन देने से देश में इसका समान वितरण हो सकेगा। इससे महिलाओं की सेहत सुधरेगी। इससे रसोई बनाने की तकलीफें और समय घटेगा और रसोई गैस आपूर्ति में ग्रामीण युवकों को रोजगार भी मिलेगा। इसलिए यह कहना गैर-वाजिब नहीं है कि ये बड़े सुधार हैं और उम्मीद यही की जानी चाहिए कि इनके अमल में कोई लेट-लतीफी या रुकावट आड़े न आए, ताकि अर्थव्यवस्था को बुलंदी पर ले जाया जा सके।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

 

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