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वाकई विराट बल्लेबाज

वाकई विराट बल्लेबाज

विराट कोहली जैसे ”महान बल्लेबाज’’ को पाकर हमारा मन गर्व और खुशी से झूम उठता है। विराट ने शांत चित्त से एकदम सटीक बल्लेबाजी के जरिए टी-20 विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 52 गेंदों पर 82 रन की अनोखी पारी खेली। हमारी सलामी जोड़ी इस मैच में भी नाकाम रही थी। इससे विराट के कंधों पर दायित्व आ गया और उन्होंने इसे बखूबी अंजाम दिया। हालांकि एक वक्त धड़कने बढऩे लगी थीं जब गेंदें घटती जा रही थीं और उनकी तुलना में रन अधिक बनाने थे। लेकिन, विराट के बल्ले ने धमक दिखानी शुरू की तो ऑस्ट्रेलिया पस्त हो गया। इस तरह विराट ने एक मुश्किल छड़ में फिर चट्टान की तरह खड़े होकर अपने 82 रनों की बदौलत भारत को जीत दिला दी।

गौरतलब है कि टी-20 के कुल 42 मैचों में 39 में विराट ने अपने बल्ले का करिश्मा दिखाया है। इनमें उन्होंने 15 मैचों में अद्र्धशतक या उससे अधिक रन ठोके हैं और 12 में भारत को जीत मिली है। इस तरह उनके विजयी पारी का औसत 80 प्रतिशत बैठता है।

कोहली के बल्ले से निकलने वाले शानदार शॉट देखते ही बनते हैं। इससे एक बार फिर साबित होता है कि बल्लेबाजी करने में दुनिया में उनका कोई सानी नहीं है। दरअसल उनकी पारियों को तो ”ब्रांड कोहली’’ के तमगे से नवाजा जाना चाहिए। इससे यह भी पता चलता है कि वे भारत को जिताने के मकसद से खेलते हैं और बड़ी अदा से उसे अंजाम तक पहुंचाते हैं। कोहली भारतीय टीम के लिए खेल के हर फॉर्मेट में एक डायनामों की तरह हैं।

वे भारत के हर युवा की आकांक्षाओं के प्रतीक हैं जो क्रिकेट स्टार बनने का ख्वाब देखते हैं। मैदान में जैसे वे विरोधी टीम की घेराबंदी को तार-तार करके बेमानी बना देते हैं, जैसे फिल्डरों के बीच से गेंद सीमा पार भेज देते हैं, उससे किसी भी टीम का क्षेत्रारक्षण बेमानी हो जाता है। मैदान में जहां भी थोड़ी-सी जगह दिखती है, उनके बल्ले से निकली गेंद उसी गलियारे से फुदकती हुई निकल जाती है।

वे सही मायने में लिटिल मास्टर सुनील गवास्कर और मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंडुलकर के चेले हैं। लेकिन, कुछ हलकों में अब एक बहस शुरू हो गई है। कुछ कहते हैं कि विराट कोहली दूसरे सचिन तेंडुलकर बनते जा रहे हैं तो कुछ कहते हैं कि विराट सचिन के कीर्तिमान से आगे निकल जाएंगे। इसलिए आईए जरा आंकड़ों में इन खिलाडिय़ों को देख लिया जाए। अभी तक कोहली ने 41 टेस्ट और 171 एकदिवसीय में खेला है। सचिन 41 टेस्ट में 54.22 के औसत से 2911 रन बना चुके हैं और 10 शतक जड़ चुके हैं, जबकि कोहली इतने ही मैचों में 44.3 के औसत से 2994 रन बना चुके हैं और 11 शतक जड़ चुके हैं। 171 एकदिवसीय मैच में सचिन ने 38.85 के औसत से 5828 रन बनाए हैं और 12 शतक ठोंके हैं जबकि, कोहली इतने ही एकदिवसीय मैचों में 51.51 के औसत से 7212 रन बना चुके हैं और 25 शतक जड़ चुके हैं। वैसे, आंकड़े चाहे जो भी कहें, दो महान खिलाडिय़ों की इस तरह तुलना जायज नहीं कहलाएगी। इसमें कोई दो राय नहीं कि कोहली लाजवाब हैं।

दूसरे खिलाडिय़ों की बल्लेबाजी अटकती रहती है लेकिन घोनी-कोहली की जोड़ी तो अपराजेय है और विरोधी टीम के छक्के छुड़ा देती है। भारतीय टीम के कप्तान और उप-कप्तान के नाते दोनों की बल्लेबाजी, विकेट चटकाने की रणनीति लाजवाब है। फिर विराट कोहली तो हमेशा जैसे सधे हुए शॉट लगाते हैं, वे गलती से भी उल्टे-पुलटे शॉट नहीं लगाते।

इस पृष्ठभूमि में यह सवाल बनता है कि बीसीसीआई सिर्फ धोनी ओर कोहली को ही भुगतान करती है? दूसरों के बारे में क्या ख्याल है? क्या वे मुफ्त में खेल रहे हैं? हालत तो यह है कि दुनिया के आला बल्लेबाजों से भरी टीम लगभग सभी, खासकर महत्वपूर्ण मैचों में कोहली के कंधों पर उसी तरह आश्रित हो जाती है जैसे वेस्ट इंडीज क्रिस गेल की तूफानी बल्लेबाजी पर निर्भर रहती है। अगर कोहली आउट हो जाते हैं, जैसा कि बांग्लादेश के साथ मैच मे हुआ तो क्या होगा? गेल, ख्वाजा, शर्जिल और दूसरी टीमों में ऐसे ही बल्लेबाज बाएं हाथ के बल्लेबाज हैं। हमारे यहां भी धवन, रैना और युवराज टी-20 के इस सीजन में अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाए हैं। अगर ऐसा ही जारी रहा तो टीम जल्दी ही अपनी चमक खो देगी। देश में क्रिकेट ही नहीं, किसी खेल में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। उन्हें बस सही मौके और प्रशिक्षण की दरकार है। इसलिए हमें ऐसे तंत्र की जरूरत है जो छुपी प्रतिभाओं को खोजकर बाहर निकाल लाए जैसा कि विकसित देशों में होता है।

अंत में, फिर कोहली पर लौटते हैं। कोई दो राय नहीं कि कोहली आज की तारीख में सबसे महान बल्लेबाज हैं। सो, कोहली को सलाम, जो अकेले ही मुश्किल मौकों पर भी दुश्मन के छक्के छुड़ाने का माद्दा रखते हैं। करो या मरो वाले हालात के मैच में उन्होंने यादगार प्रदर्शन किया।

दीपक कुमार रथ

दीपक कुमार रथ

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