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इस्लामी आतंकवाद की चपेट में तमिलनाडु

इस्लामी आतंकवाद की चपेट में तमिलनाडु

तमिलनाडु इस्लामी आतंकवाद की आग में झुलस रहा है। पूरे तमिलनाडु में इस्लामी आतंकवाद और जिहादी गतिविधियां लगातार बढ़ती ही जा रही हैं। लेकिन अल्पसंख्यक वोट बैंक की राजनीति में लिप्त द्रविड़ पार्टियां और अन्य छद्म धर्मनिरपेक्ष दल जानबूझ कर इस्लामी आतंकवाद और जिहादी गतिविधियों पर अपनी आंखें मूंदे बैठे हैं। द्रमुक (डीएमके), अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) सरकार और पुलिस बल लगातार बढ़ती जिहादी गतिविधियों और इस्लामी आतंकवाद को देख कर भी अनदेखा करती रही, जिसका परिणाम यह हुआ कि पिछले कुछ वर्षों में इस्लामी आतंकवाद और जिहादी गतिविधियों का अनुपात पहले से कहीं ज्यादा चिंताजनक हो गया।

तमिलनाडु में इस्लामी आतंकवाद और जिहादी गतिविधियों के कारण बिगड़ते हालातों पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबंधित संगठन हिंदू मुन्नानी ने सक्रिय होते हुए एक डॉक्यूमेंट्री तैयार की, जिसका नाम ”तमिलनाडु इन दा ग्रिप ऑफ इस्लामÓÓ दिया गया। इसमे 2006 से लेकर अब तक हुए इस्लामी आतंकवाद और जिहादी गतिविधियों का विवरण हैं। इस डॉक्यूमेंट्री में लगभग ऐसी 300 घटनाएं हैं, जो 21 राज्यों में घटित हुई हैं।

यह डॉक्यूमेंट्री एक संग्रह है जिसमें जिहादियों के द्वारा मासूमों की हत्या और आक्रमण की घटनाओं समेत कई अन्य राष्ट्रविरोधी, आसामाजिक और हिंदू विरोधी घटनाएं शामिल हैं। जैसे कि मंदिरों का विनाश, लव जिहाद के माध्यम से हिंदू लड़कियों के साथ धोखा करना, महिलाओं के खिलाफ अपराध, हिंदुओं के द्वारा चलाए जा रहे व्यापार, त्योहारों और धार्मिक जुलूस में बाधा डालना, गोहत्या, राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान, पाकिस्तान समर्थक अभियानों में शामिल होना, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी संगठनों के एजेंडे को बढ़ावा देना, हथियारों की तस्करी, नकली मुद्रा रैकेट में शामिल होना, विदेशी नागरिकों की घुसपैठ में मदद करना, पुलिस थानों और पुलिस कर्मियों पर हमले जैसी और भी तमाम घटनाएं शमिल हैं इस डॉक्यूमेंट्री में। ये डॉक्यूमेंट्री 21 फरवरी 2016 को चेन्नई में एक कार्यक्रम के दौरान रिलीज की गई, जिसमें हिंदू मुन्नानी के संस्थापक रामागोपालन, भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केन्द्रीय मंत्री सुब्रमनियम स्वामी, भाजपा के राष्ट्रीय सचिव एच. राजा, ” रूट इन कश्मीर” संगठन के सह-संस्थापक सुशील पंडित शामिल हुए थे। डॉक्यूमेंट्री की पहली डीवडी सुब्रमनियम स्वामी को सौंपी गई। कार्यक्रम में सुशील पंडित ने कहा ”कश्मीर और तमिलनाडु की तुलना नहीं की जा सकती” कश्मीर में 500 साल तक लगातार विदेशी शासन रहा जिसकी वजह से कश्मीर में हिंदू अति अल्पसंख्यक समुदाय में ही बचे। शाह मीर राजवंश, चक राजवंश, मुगलों और पठानों के अधीन रहने के बाद 1890 में महाराजा रंजीत सिंह ने मुस्लमानों को हराने के बाद कश्मीर को मुक्त कराया। 1947 तक हमने स्वतंत्रता के माहौल में सांस ली, लेकिन भारत की आजादी के बाद कश्मीर एक बार फिर मुस्लिम शासन के अधीन हो गया, जब जवाहरलाल नेहरू कश्मीर पर शासन करने के लिए शेख अब्दुल्ला को लाये। 1947 के बाद से कश्मीरी हिंदुओं को सामाजिक उत्पीडऩ सहना पड़ा उनके पास सरकारी और प्राईवेट क्षेत्र में नौकरी के अवसर न के बराबर थे, व्यवसायिक शिक्षा के क्षेत्र में अवसर उपलब्ध नहीं थे, बेहतर आर्थिक और सामाजिक अवसर पाने के लिए उन्हें कश्मीर से पलायन होने के लिए मजबूर होना पड़ा। कश्मीर से बाहर जाने के बाद उन्होंने जो जीवन जिया उसके बाद उन्होंने कभी भी वापस आना पसंद नहीं किया। नब्बे के दशक के शुरूआत में कश्मीर का माहौल हिंदुओं के लिए काफी गंभीर और प्रतिकूल हो गया,जिसकी वजह से बड़ी तादात में हिंदुओं को वहां से कूच करना पड़ा। पिछले 600 सालों में ऐसा 7वीं बार हुआ था। वर्तमान में सिर्फ 600 परिवार ही हैं जो कश्मीर में रह रहे हैं ,क्योंकि कश्मीर से बाहर उनके रहने  की या रोजगार के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।

सुशील पंडित ने आगे कहा, ”तमिलनाडु में क्या हो रहा है? आक्रामक अल्पसंख्यक समुदाय जिनका तमिलनाडु में सिर्फ 6 प्रतिशत है, वह यहां पर स्थित हिंदू समुदाय को डराते-धमकाते हैं। इसलिए कश्मीर के साथ तमिलनाडु की तुलना करना ठीक नहीं है, स्वतंत्रता के वक्त कश्मीर घाटी की जनसंख्या 25-30 लाख  के बीच रही होगी और भारत की आबादी 30 करोड़, लेकिन फिर भी वह लोग आराम से आपना जीवन यापन कर थे। आज बंगाल में 25 प्रतिशत से कम मुस्लिम हैं और बिहार में 24 प्रतिशत से कम, यहां तक कि अम्बुर में भी 16 प्रतिशत से कम हैं, लेकिन फिर भी इन राज्यों के मुस्लिम बहुल इलाकों में रहने वाले हिंदुओं को मुस्लिमों द्वारा अपने घर और संपत्तियां बेच कर जाने के लिए मजबूर किया जा रहा है। इन सब का कारण ये है कि यहां रहने वाले मुस्लिमों को शादी-ब्याह पर, अंतिम संस्कार पर जुलूस निकालने की अनुमति है, खास मौकों पर मुस्लिम वाद्ययंत्र बजाने की और खास मौकों पर उनके रिवाज के मुताबिक परिधान पहनने की अनुमति है। इन स्थानों पर संविधान का अनुच्छेद  370 लागू नहीं होता। इसके लिए आप किसी को भी जिम्मेदार या दोषी नहीं ठहरा सकते। इन क्षेत्रों में हिंदू अल्पसंख्यक हैं अत: यह व्यक्ति की मानसिकता ही है जिसे दोषी ठहराया जा सकता है। सब कुछ मानसिकता पर निर्भर करता है न कि बहुसंख्यक या संविधान या संविधान के लेख या देश के कानून पर। हमारी मानसिकता ऐसी हो गई है इसलिए लोगों को मौका मिल रहा हम पर दबाव बनाने का या हमे मजबूर करने का।”

अपने भाषण को समाप्त करते हुए ,सुशील पंडित ने कहा, ”मुझे बस इतना कहना है कि जो डॉक्यूमेंट्री और दस्तावेजीकरण हमने किया है वह हमारे लिए काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। हमारे पास हिंदुओं के मंदिरों, घरों और संपत्तियों के विनाश के भी दस्तावेज हैं। हमारे पास इन सभी घटनाओं के दस्तावेज मौजूद हैं। इन दस्तावेजों में जो सच्चाई है वो हमें आगे बढऩे की प्रेरण देती है।”

डॉ. स्वामी ने कहा, ”बहुत से लोगों ने ट्विटर के माध्यम से मुझसे अनुरोध किया कि इस प्रसंग को पूरे राष्ट्र में फैलाया जाना चाहिए, इन घटनाओं की सच्चाई हर व्यक्ति तक पहुंच सके इसके लिए मैं इसे अंग्रेजी में बोलूंगा और इस विषय की चर्चा में आने वाले विधानसभा चुनाव में तमिल में भी करूगां।”

डॉ. स्वामी ने आगे कहा, ”जिहादी इस्लामिक आक्रामकताओं ने हमेशा भारत के विरोधियों का समर्थन किया। 1946 में तमिलनाडु में हुए आम चुनाव के वक्त निर्वाचन क्षेत्र को मुस्लिम आरक्षित कर दिया गया, मुस्लमानों ने पाकिस्तान के समर्थन में नारे लगाये और उन सभी को जीत भी हांसिल हुई। भारत के विभाजन के बाद कुछ मुस्लिम संगठन जो जिहाद में विश्वास रखते थे उन्होंने अपनी सुरक्षा के मद्देनजर कंाग्रेस पार्टी के साथ संधि कर ली, कांग्रेस पार्टी ने भी अल्पसंख्यक वोट बैक को ध्यान में रखते हुए इस संधि को स्वीकार कर लिया। जब सत्ता में द्रमुक (डीएमके) आई तो इन जिहादी संगठनों ने कांग्रेस को छोड़ कर द्रमुक की तरफ हाथ बढ़ा दिया। तब से लेकर अब तक ये संगठन कभी द्रमुक (डीएमके) तो कभी अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) के साथ वैकल्पिक तौर पर गठबंधन करते रहते हैं। जिहादी संगठनों का इस तरह एक पार्टी से संधि के बाद दूसरे से संधि की रणनीति बिल्कुल स्पष्ट है।” डॉ. स्वामी ने कहा, ”हमारी परंपरा रही है कि हमने हमेशा भारत के बाहर से आने वालों को शरण और संरक्षण दिया है। हमने पारसियों और यहूदियों को संरक्षण दिया। विभाजन के बाद जो मुस्लिम भारत में रह गये उन्हें भी वहीं अधिकार और संरक्षण मिला जो हिंदुओं के लिए थे। जैसे हमे पारसियों और यहूदियों के यहां रहने और उनके अपने धर्म का अनुसरण करने में कोई आपत्ति नहीं थी वैसे ही मुस्लिमों के यहां रहने और उनके आपने धर्म को मानने पर हमें कोई आपत्ति नहीं थी। आज हम मुस्लिमों को स्वीकार करने के लिए तैयार है, लेकिन इस वैज्ञानिक सत्य के आधार पर कि एक भारतीय मुस्लिम और हिंदू का डीएनए एक जैसा ही है। अत: मुस्लिमों को यह स्वीकार करना चाहिए कि उनके पूर्वज हिंदू ही थे। लेकिन, मुस्लिम कट्टरपंथियों को लगता है कि उनका संबंध अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से हैं। इसलिए वह आईएसआईएस जैसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठन की ओर लगातार आकर्षित हो रहे हैं। आईएसआईएस का मानना है कि इस्लाम के इतिहास में भारत एक अधूरा अध्याय है। आखिर आईएसआईएस ऐसा क्यों कहता है? क्योंकि मुस्लिमों ने फारस, मेसोपोटामिया, बैबलॉन और इजिप्ट जैसे देशों पर कब्जा करके उन्हें पूरी तरह से इस्लामिक राष्ट्रों में परिवर्तित कर दिया, लेकिन भारत पर अपना एकाधिकार कर पाने में वह सफल नहीं हो सके।

24-04-2016

स्वामी ने कहा, ”वेल्लोर जिले में मेल्विशरम पंचायत स्थित है जिसे मुस्लिम बहुलता के कारण बहुत सी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जब मैंने विश्व हिंदू परिषद के नेता श्री वेदांतम के साथ यहां का दौरा किया तो पता चला कि यहां के हिंदुओं का जीवन कैसा है। यहां रहने वाले हिंदुओं को किसी भी तरह की सुविधाएं देने से इंकार कर दिया जाता है, ताकि उन्हें मुस्लिम बनने के लिए मजबूर किया जा सके। हिंदुओं की ऐसी हालत देख कर मैने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और हिंदुओं के हित में आदेश पारित करवाया। हिंदुओं के ऐसे बिगड़े हालात सिर्फ मेल्विशरम पंचायत में ही देखने को नहीं मिले, बल्कि पूरे तमिलनाडु में ऐसी 40 पंचायते हैं जहां हिन्दू, मुस्लिम बहुलता का शिकार हैं। जबकि इन पंचायती क्षेत्रों में मुस्लिम सिर्फ 4 या 5 प्रतिशत ही हैं, फिर भी ये शोषित करने वाले बहुसंख्यक समुदायों में से हैं।

डॉ. स्वामी ने डॉक्यूमेंट्री के एक दृश्य के विषय में बताते हुआ कहा कि,”मैंने इस डॉक्यूमेंट्री में एक दृश्य देखा जिसमें एक मुस्लिम नेता पुलिस बल को धमकाते हुए कह रहा था कि यहां उनके 50 लाख मुस्लिम युवा हैं और पुलिस बल केवल 20,000, लेकिन उन्हें समझना चाहिए कि हिन्दुओं की संख्या 200 करोड़ है। हम मुस्लिमों के साथ के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्हें यह मानना होगा कि वह हिन्दुओं के परिवार का ही हिस्सा रहे हैं यानी उनके पूर्वज हिन्दू ही थे। ये सोचनीय विषय है कि इस चुनौती का सामना कैसे किया जाये? इसका सीधा जवाब है कि इस समस्या का सामना एकजुट होकर ही किया जा सकता है। इस वक्त तमिलनाडु इस तरह की बहुत सी समस्याओं का सामना कर रहा है। तमिलनाडु में आईएसआईएस का समर्थन बढ़ता ही जा रहा है। जिहादियों को सहयोग करने में तमिलनाडु का दूसरा स्थान है। राज्य में ये  प्रचलित स्थिति है कि यहां पर जिहादी जो भी करना चाहे कर सकते हैं। बहुत से हिन्दू कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई, लेकिन तमिलनाडु सरकार ने इस पर कोई कार्यवाई नहीं की। पुलिस ने मुझसे शिकायत की कि उन्हें सरकार की तरफ से मुस्लिम कट्टरवादियों के खिलाफ किसी भी तरह की कार्यवाही करने की अनुमति नहीं है। यदि वहां पर मौजूद हिन्दुओं को शासन व्यवस्था की ओर से ही सुरक्षा नहीं मिल रही है जो कि कानून और व्यवस्था के लिए जिम्मेदार हैं तो हिन्दुओं के लिए किस तरह की सुरक्षा व्यवस्था हैं? मुख्यमंत्री जयललिता को आगे आ कर हिन्दुओं के लिए कानून और व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए। और अगर वह इसकी समझ नहीं रखतीं तो उन्हें केन्द्र से सलाह लेनी चाहिए। केन्द्र सरकार के पास जिहादी संगठनों की पूरी की पूरी सूची है, जो तमिलनाडु सरकार का मार्गदर्शन करेगी।”

आगे उन्होंने कहा कि ”अगर बहुसंख्यक समुदाय में एकजुटता होती तो मुस्लिमों का व्यवहार भी हमारे साथ उचित होता, लेकिन अगर जातीवाद के आधार पर और पैसों के लिए वोट दिये जाते रहे जैसा कि तमिलनाडु में हुआ तो ऐसा ही होता रहेगा। मुस्लिम यहां के लोगों को और पुलिस बल को धमकाते रहेंगे और हम कुछ नहीं कर सकेंगे। इसलिए उनके स्वयं के हितों के लिए किये जाने वाले कार्यों के लिए उन्हें दोष देने की बजाए हमें दूसरे रास्ते तलाशने चाहिए और अपनी एकजुटता को सुनिश्चित करना चाहिए। हम एकजुट होकर ही राजनीतिक पार्टियों को मजबूर कर सकते है कि वो हिन्दू हित में भी सोचे। हम एकजुट होकर ही मुस्लिम आतंक को चुनौती दे सकते हैं। हमारा संविधान बहुत मजबूत हैं हम इसके माध्यम से वह सब पा सकते हैं जिसकी आज हमें जरूरत है। हम कानून व्यवस्था को उचित तरीके से सुनिश्चित करने के लिए तमिलनाडु सरकार को चुनौती दे सकते हैं और उन्हें यह एहसास करवा सकते हैं कि जब तक वह हिंसा और आतंकवादियों के साथ मिली रहेगी हम चुप नहीं बैठेंगे। हिन्दुओं को अब जागना होगा, उन्हें इस राष्ट्र की संस्कृति और परंपरा की दृढता के साथ रक्षा करनी होगी। हमारा धर्म और संस्कृति इस राष्ट्र की मुख्य धारा है। यहां दूसरे देशों के मुकाबले अल्पसंख्यकों को अधिक सम्मान और अधिकार प्राप्त हैं, लेकिन अब हिन्दू समाज और हिन्दू संस्कृति इस बात को सुनिश्चित करेगी की ऐसे लोगों को बर्दाशत किया जायेगा या नहीं। जो भी हिन्दुओं के हितों पर घात करेगा उसके लिए हम युद्ध छेडऩे के लिए भी तैयार हैं। हम मजबूत हिन्दुत्व चाहते हैं और यही वजह है कि मैं इस डॉक्यूमेंट्री रिलीज के अवसर पर यहां उपस्थित हुआ  हूं।

अपने सक्षिप्त संबोधन मे रामागोपालन ने कहा, ”लोगों के बीच ये एक गलत धारणा है कि तमिलनाडु शांति के बहुत निकट है और हिन्दु यहां पर पूरी तरह से सुरक्षित हैं। यहां तक कि हिन्दू भी यही सोचते हैं लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है। मैं एक वर्ष में चार बार राज्य का दौरा करता हूं, मुझे पता है कि राज्य में क्या हो रहा है। मैं राज्य के जिस भी क्षेत्र में पहुंचता हूं वहां के लोगों से और समुदाय के नेताओं से नियमित रूप से मिलता-जुलता रहता हूं, मुझे उनसे तमाम तरह की जानकारियां हांसिल होती रहती हैं। मैंने दूसरे स्रोतों से भी बहुत सी जानकारियां हांसिल की हैं। यह प्रोजेक्ट इस तरह के लोगों के द्वारा प्रदान की  गई जानकारियों के द्वारा ही पूरा की गई है। इसलिए मैं तमिलनाडु के लोगों से अपिल करूंगा की वह इस डॉक्यूमेंट्री को जरूर देखें और सच को जाने। इसके बाद जो हकीकत उनके सामने आयेगी वह उनके लिए और उनकी सुरक्षा के नजरिये से बहुत सहायक सिद्ध होगी साथ ही राज्य में शांति और सद्भाव भी बढ़ेगा।

डॉक्यूमेंट्री रिलीज समारोह वेबकास्ट के माध्यम से लाइव आयोजित किया गया और साथ ही डॉक्यूमेंट्री को यूट्यूब पर भी अपलोड किया गया। डॉक्यूमेंट्री रिलीज के दो दिनों के भीतर ही इसके ट्विटर पर भी 50 लाख से ज्यादा लोग जुड़ गये। मुस्लिम संगठनों ने इस डॉक्यूमेंट्री पर प्रतिबंध लगाने के लिए पूरे राज्य में कई जगह शिकायत दर्ज करवाई हैै और साक्षात्करियों (जिहाद के शिकार) की गिरफ्तारी की मांग की जिन्होंने इस तरह की तमाम घटनाओं के विषय में गहन जानकारियां दीं। लेकिन ये कहना उचित होगा कि  उन्होंने डॉक्यूमेंट्री के विषय पर अलग से कोई शिकायत नहीं दर्ज करवाई है।

24-04-2016तमिलनाडु मुस्लिम मुनेत्र कजगम (टीएमएमके) के अध्यक्ष जवाहिरूल्लाह जो पहले सिमी से संबंध रखता था उसने एक बयान में कहा कि हिंदुत्व समूहों ने सांप्रदायिक शांति के नाम पर एक विडियो के जरिये धमकी जारी की है। उसने कहा कि भाजपा और संघ परिवार नफरत की राजनीति में लिप्त हैं, ताकि वह हिन्दू और मुस्लिम के बीच अशांति को भड़का सकें। उसने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि वह इस डॉक्यूमेंट्री के विषय में सीधे तौर पर हस्तक्षेप करते हुए कार्रवार्ई करें।

मुस्लिम संगठनों के द्वारा दबाव बनाने पर दिनदुक्कल क्षेत्र की पुलिस ने डॉक्यूमेंट्री में बयान देने के मामले में अनुच्छेद 153 (ए), 153 (बी) और 505 के तहत 5 हिन्दुओं के खिलाफ मामला भी दर्ज किया। मक्कल काची के एक हिंदू राजगोपल को गिरफ्तार भी किया गया। सोलैराजन को मुस्लिम संगठन के कुछ लोग उठा कर ले गये उसके साथ मार-पीट की और फिर पुलिस को सौंप दिया। इस घटना के बाद सैकड़ों हिंदुओं ने विरोध जताया सोलैराजन ने भी इसकी शिकायत पुलिस को दर्ज करवाई जिसके आधार पर पुलिस ने 3 मुस्लिम कट्टरपंथियों को गिरफ्तार भी किया। सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (एसडीपीआई) जो कि कट्टरपंथी राजनीतिक पार्टी है उसने भी रामनाथपुरम जिले के कुछ लोगों को डॉक्यूमेंट्री में बयान देने पर धमकाया। राज्य सरकार ने भी इस मामले में हस्तक्षेप किया और डॉक्यूमेंट्री को यूट्यूब और फेसबुक से हटाने की व्यवस्था की। हालांकि राज्य सरकार किसी भी आधिकारिक बयान के साथ सामने नहीं आई। इस पूरी घटना के दौरान मीडिया वहां मौजूद रहा लेकिन उसने भी इस मामले पर रिपोर्टिग करने पर और डॉक्यूमेंट्री के विषय को प्रसारित करने से परहेज किया। डॉक्यूमेंट्री के रिलीज होने के बाद पुलिस महानिदेशक तुरंत ही मुस्लिम नेताओं से मिले, जबकि वह 7 मार्च 2016 को हिन्दू मुन्नानी के वकीलों से मिल चुके थे जिसमें हिंदू मुन्नानी के वकीलों ने डॉक्यूमेट्री में दिखाई गई घटनाओं के आधार पर मुस्लिम कट्टरवादियों के खिलाफ कार्रवाई करने का अनुरोध किया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि केवल विशिष्ट शिकायतों पर ही कार्रवाई करेगी सामान्य शिकायतों पर नहीं। विधानसभा चुनाव निकट हैं लेकिन, सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर बिल्कुल ध्यान नहीं दे रही है। मुस्लिम कट्टरपंथी संगठन ने भी महात्मा गांधी की हत्या के लिए सावरकर और गोडसे को दोषी ठहराते हुए और 2002 के गुजरात दंगों के कुछ दृश्यों को मीडिया से इक्ट्ठा करके एक ट्रेलर प्रसारित किया है। मुस्लिम संगठनों ने इस छोटे से ट्रेलर को प्रसारित करते हुए यह संदेश दिया है कि वह जल्द ही  हिन्दु मुन्नानी के द्वारा जारी किये गये विडियों के जबाव में एक डॉक्यूमेंट्री जारी करेंगे।

हकीकत तो यह है कि हिन्दू मुन्नानी के द्वारा तैयार की गई यह डॉक्यूमेंट्री तमिलनाडु में फैले मुस्लिम कट्टरपंथियों के अब तक के इतिहास की पोल खोलती है, जिससे इन संगठनों की तमिलनाडु में अब तक की पकड़ कमजोर पड़ सकती है। इस तरह की डॉक्यूमेंट्री पहली बार ही बनाई गई है जो अपने आप में ही बहुत खास है। इससे मुस्लिम संगठनों के साथ-साथ तमिलनाडु सरकार, तमिलनाडु की अन्य राजनीतिक पार्टियों समेत मीडिया घराने भी हैरान हैं।

चेन्नई से बी. आर. हरन

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