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”होमियोपैथी में लगभग सभी बिमारियों का इलाज है’’

”होमियोपैथी में लगभग सभी बिमारियों का इलाज है’’

होमियोपैथी का नाम सुनते ही मीठी सफेद गोलियों की छोटी बोतलें ध्यान में आती है। इन छोटी गोलियों से हर तरह की बिमारियों के इलाज का दावा करते है दिल्ली के सी.आर. पार्क में अपनी क्लिनिक चलने वाले डॉ.कल्याण बनर्जी। उनसे इन्हीं सब मुद्दों पर उदय इंडिया के लिए डॉ. विजय खैरा ने बातचीत की। प्रस्तुत है प्रमुख अंश:-

आप कब होमियोपैथी के क्षेत्र में आये और क्या यह एक पारिवारिक परंपरा है या आपने खुद शुरूआत की ?

मैंने 1973 में कोलकाता और 1977 में दिल्ली से होमियोपैथी क्लिनिक चलाने का काम शुरू किया था। हां एक तरह से कहा जाए तो यह एक पारिवारिक परंपरा है। मेरे दादा जी जो कि एक एलोपैथिक डॉक्टर थे, वह भी बाद में होमियोपैथी की तरफ मुड़ गए। मेरे परिवार के अन्य लोग भी डॉक्टर ही हैं। लगभग 4 पीढिय़ों से हमारे यहां सारे डॉक्टर ही हैं।

होमियोपैथी का नाम आते ही सिर्फ बंगाल ही जेहन में आता है। इसका कोई खास कारण?

दरअसल क्या है की बंगाली लोग ज्यादा अनुशासित और धैर्यवान होते हैं, जो की होमियोपैथी में सबसे जरुरी चीज है। इसलिए बंगाल में इस पद्यति का ज्यादा चलन है।

हमने सुना है कि आप लोगों का मुफ्त इलाज भी करते है?

1977 से लेकर आज तक हमारी शाम की जो पाली होती है वो एकदम नि:शुल्क होती है, फिर चाहे उसमे कोई भी आये। गरीब-से-गरीब और आमीर-से-आमीर, हम सभी का मुफ्त इलाज करते हैं। कुछ लोग जो खर्च भी अफोर्ड नहीं कर पाते उनके लिए यहां मुफ्त दवा की भी व्यवस्था है।

ज्यादातर किन बिमारियों के मरीज आपके पास आते हैं?

ज्यादातर तो डाईबेटिज से जुड़ी समस्यों के मरीज आते है। उसके बाद पेट की बिमारियों, किडनी सम्बंधित, न्यूरोपैथी की समस्याएं, लीवर फेलियर जैसी बीमारियों के लिए भी लोग आते हैं।

ऐसी भयंकर बीमारियों के लिए लोग एलोपैथी पर ज्यादा भरोसा करते हैं, क्या होमियोपैथी में भी इन बिमारियों का  इलाज है?

लगभग सभी बिमारियों का इलाज होमियोपैथी में है, लेकिन हां जरूरी है लोगों का सही समय पर डॉक्टर के पास पहुंचना। मरज बढ़ जाने के बाद पहुंचेंगे तो कैसे इलाज हो पाएगा। होमियोपैथी में सबसे जरुरी है धैर्य रखना। होमियोपैथी में समय लगता है, लेकिन यह बीमारी को जड़ से निकलता है।

होमियोपैथी सालों पहले हुए रिसर्च से ही चल रहा है या फिर कुछ नया रिसर्च भी है इस क्षेत्र में ?

होमियोपैथी एक एविडेंस बेस्ड पद्धति है तो इसमें लगातार नए शोध होते ही रहते हैं। यह पद्धति पूरी तरह से वैज्ञानिक पद्धति है और अब नए खुलते होमियोपैथी कॉलेजों से भी इसके प्रचार-प्रसार पर फर्क पड़ेगा। लोगों के लिए आपका कोई संदेश लोगों को किसी भी दूसरी पद्धति को अपनाने से पहले एक बार होमियोपैथी का सहारा लेना चाहिए, क्योंकि अन्य पद्धतियों की तुलना में होमियोपैथी एक नॉन टॉक्सिक पद्धति है। इसमें ड्रग ओवरडोज जैसी समस्याएं नहीं आती।

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