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राहुल गांधी चिंतन करें, चिंता नहीं

राहुल गांधी चिंतन करें, चिंता नहीं

By राजीव रंजन तिवारी

भारतीय राजनीति की प्रकृति है कि यहां कुछ भी स्थायी नहीं होता। यानी हर वक्त अनिश्चितता कायम रहती है। इसी को ध्यान में रखकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी को हताश-निराश और चिंतित होने के बजाय इस बात के लिए चिंतन करना चाहिए कि पार्टी में किस तरह से जान फूंका जा सकता है। मीडिया में खबरें आ रही हैं कि राहुल गांधी पार्टी के ही कुछ नेताओं से नाराज होकर छुट्टी पर चले गए हैं। यह समीचिन नहीं लग रहा है, क्योंकि एकाध बार चुनाव हार जाने से यह मान लेना कि अब पार्टी पुन: जीवित नहीं हो सकती, गलतफहमी है। गैर कांग्रेसी नेता और कांग्रेस में भी राहुल के विरोधी कुछ लोग तरह-तरह की बातें कर चुटकी ले रहे हैं, जो ठीक नहीं है। यदि राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से छुट्टी लेकर हफ्ते भर के लिए आराम फरमाने चले गए हैं तो इसमें कौन सी बुरी बात है। इन बातों को भी मीडिया में खबर बनाना गले से नहीं उतर रहा है। रहा सवाल संसद के बजट सत्र में हिस्सा लेने की तो पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी संसद में मौजूद रह रही हैं। वह पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। इस स्थिति में गैर कांग्रेसियों द्वारा राहुल गांधी को कोसना समझ से परे है। छुट्टी से लौटने के बाद राहुल गांधी को आक्रामक ढंग से केन्द्र की एनडीए सरकार पर हमला बोलना चाहिए, क्योंकि देश की जनता को इस लोकप्रिय मोदी सरकार की हकीकत की जानकारी धीरे-धीरे होने लगी है।

गौरतलब है कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने चिंतन-मनन करने के लिए सोनिया गांधी से छुट्टी मांगी है। वे कहीं बाहर गए हैं। ये छुट्टी राहुल ने तब मांगी है जब संसद का बजट सत्र शुरू हुआ और अण्णा हजारे एनडीए सरकार के भूमि अधिग्रहण बिल के खिलाफ रामलीला मैदान में धरने पर बैठे। यह वही मुद्दा है जिस पर राहुल गांधी उत्तर प्रदेश के भट्टा पारसौल में प्रर्दशन कर चुके हैं। भला राहुल को इसी वक्त छुट्टी की जरूरत क्यों पड़ी? क्या कांग्रेस में सब कुछ ठीक-ठाक नहीं है, क्योंकि भला राहुल गांधी को सोनिया से छुट्टी क्यों मांगनी पड़ी? कांग्रेस गांधी की अपनी पार्टी है, इसलिए राहुल बिना मांगे छुट्टी पर चले जाते तो भी कोई चूं नहीं कर सकता था। अब सबसे बड़ा सवाल है कि क्या राहुल नाराज होकर छुट्टी पर गए हैं? क्या पार्टी में राहुल को उतनी छूट नहीं मिल रही है जैसा वो चाहते हैं? टिकट बंटवारे में राहुल की ना सुनना और हार के बाद उन पर ठीकरा फोडऩा, राज्यों के नेताओं को ज्यादा ताकत देना जैसे कुछ मुद्दे हैं जिस पर राहुल पार्टी में अकेले पड़ जाते हैं। क्या कांग्रेस दफ्तर में बैठने वाले सभी बड़े नेता उनके खिलाफ षड्यंत्र करते हैं? क्या राहुल गांधी राज्यों में कांग्रेसी नेताओं के गुटबाजी से परेशान हैं? हर हार के बाद कांग्रेस दफ्तर के बाहर प्रियंका लाओ कांग्रेस बचाओ के पोस्टर से राहुल आहत हो जाते हैं? इस तरह के कई बड़े सवाल हैं, जो इस समय मुंह बाए खड़े हैं, जिसका जवाब कांग्रेसियों को ही देना होगा। इस सबके बावजूद इस तरह की बातों से हताश-निराश होने के बजाय पार्टी को सकारात्मक रणनीति बनानी चाहिए।

कुछ कांग्रेसियों की मानें तो यदि राहुल नाराज हो कर गए हैं तो फिर उन्होंने अच्छा किया है। इस मुद्दे पर कांग्रेस पूरी तरह से बंटी हुई है। एक गुट जो राहुल के साथ है वह इसे आम चिंतन के पहले आत्म-चिंतन बता रहा है। दूसरा गुट मजे ले रहा है। पार्टी के कुछ नेता दबी जुबान में राहुल का विरोध करते हैं तो चिंदबरम के बेटे मीडिया में बयान दे देते हैं। कांग्रेस को अपने आप को फिर से साबित करना है, वरना लोगों के पास आम आदमी पार्टी का विकल्प है। अब दिक्कत है कि राहुल ये सब करेंगे कैसे, क्योंकि कहा जा रहा है कि अप्रैल में उन्हें कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया जा रहा है? इस मौके से पहले राहुल का आत्म-चिंतन पर जाना, अकेले में सोचना किस ओर इशारा करता है? दरअसल, अमेठी से लोकसभा सांसद राहुल गांधी बजट सत्र के पहले दिन लोकसभा नहीं पहुंचे, जहां संसद के बजट सत्र के दरम्यान दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण के साथ शुरू किया। राहुल को छुट्टी देने के बारे में पूछने पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि उन्हें कुछ हफ्ते की छुट्टी दी गई है। उन्हें कुछ समय की जरूरत है। यह पूछने पर कि क्या हाल की घटनाओं और पार्टी के आगामी कदम के बारे में विचार के लिए उन्हें समय दिया गया है, जैसा कि मीडिया को बताया गया है, तो सोनिया ने कहा, कारण आपको बता दिया गया है। सत्तारूढ़ बीजेपी और शिवसेना ने राहुल और कांग्रेस पर तंज कसा। वहीं कांग्रेस नेताओं ने उम्मीद जताई कि एक हफ्ते की छुट्टी उनके लिए ठीक है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक राहुल ने सोनिया गांधी से हालिया घटनाओं और पार्टी की भविष्य की कार्रवाई पर चिंतन करने के लिए कुछ समय दिए जाने की अपील की थी। सूत्रों के अनुसार, राहुल गांधी का मानना है कि आगामी सत्र में पार्टी जो दिशा अपनाएगी, वह इसके भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी और वह इसके लिए तैयारी करना चाहते हैं। शायद यही वजह है कि राहुल गांधी को समय दिया गया है, जिसके बाद वह लौटेंगे और कांग्रेस पार्टी के मामलों में सक्रिय भागीदारी निभाएंगे। भूमि अध्यादेश के खिलाफ दो-दिवसीय विरोध प्रदर्शन करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने कहा था कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी इस आंदोलन में शामिल हो सकते हैं, लेकिन उन्हें आम लोगों के साथ बैठना होगा, लेकिन राहुल इस आंदोलन का हिस्सा नहीं बन पाए। चुनावों में कांग्रेस पार्टी का प्रदर्शन काफी खराब रहा है, जिसकी शुरूआत पिछले वर्ष लोकसभा चुनाव से हुई थी और इसका सिलसिला हालिया दिल्ली विधानसभा चुनाव तक जारी रहा। अखिल भारतीय कांग्रेस समिति का सत्र अप्रैल में संभावित है और मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि राहुल गांधी को इस मौके पर पार्टी प्रमुख बनाया जा सकता है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के छुट्टी के बारे में जाने को लेकर सूत्रों के हवाले से खबर है कि वो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से नाराज होकर छुट्टी पर गए हैं। राहुल इस बात से नाराज बताए जा रहे हैं कि पार्टी में उनके विचारों और रणनीति को कई बड़े नेता तवज्जो नहीं दे रहे। इसे एक तरह से राहुल का संदेश बताया जा रहा है कि या तो बड़े नेता उनकी बात मानें या किनारे हो जाएं। राहुल गांधी कांग्रेस के उपाध्यक्ष हैं। एक जिम्मेदार पद पर होने के नाते अक्सर कार्यकर्ताओं की निगाहें उनमें नेतृत्व तलाशती हैं। लेकिन ऐसे मौकों पर अपने कार्यकर्ताओं से दूर हो जाना कई गंभीर सवाल खड़े करता है। वो कितने दिन तक पार्टी की गतिविधियों से दूर रहेंगे और कहां होंगे, कोई बताने को तैयार नहीं, लेकिन विरोधियों ने उनका घेराव शुरु कर दिया है। संसद के बेहद अहम बजट सत्र से ‘गायब’ रहने पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी बीजेपी के निशाने पर हैं। बीजेपी ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि पिछले एक दशक में संसद में उसके नेताओं के इसी रवैये के कारण ही आज वह 44 सीटों पर सिमट गई है। भाजपा के कई नेताओं से जब राहुल गांधी के संसद से गैर-हाजिर रहने को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने कहा यह कांग्रेस को देखना है कि वह क्या करना चाहती है। अच्छा होता अगर दोनों सदनों के सभी सदस्य सदन में मौजूद रहते। सभी दलों के नेताओं को बजट सत्र के शुरुआत में सदन में मौजूद रहना चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एम. वीरप्पा मोइली ने कहा कि सोनिया और राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस एक मजबूत विपक्ष की तरह अपना काम जारी रखेगी। कांग्रेस के मुताबिक राहुल गांधी ने हाल के चुनावों में पार्टी को मिली करारी हार की वजहों पर आत्मचिंतन और पार्टी की भविष्य की योजनाओं पर विचार करने के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से छुट्टी ली है।

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