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महिलाओं के लिए जरूरी स्वास्थ्य सूत्र

महिलाओं के लिए जरूरी स्वास्थ्य सूत्र

एक स्वास्थ महिला ही पति, बच्चों एवं घर-परिवार की सही ढंग से देखभाल कर सकती है, इसलिए जरूरी है कि वह स्वयं को सबसे पहले सेहतमंद और स्वस्थ रखने की कोशिश करें, तभी अपने घर को बेहतर बना सकती है। प्रस्तुत लेख में महिलाओं की दिनचर्या पर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट कर रहे हैं चिकित्सकगण:

महिलाओं के जीवन में रंगों का बहुत महत्व है, उन्हें जहां लाल, पीले, हरे, नीले आदि रंगों से भरे फल व सब्जियां अपने किचन में रखने चाहिए, वहीं जंक फूड, फास्ड फूड, चॉकलेट, मैदे के बिस्कुट से पूरी तरह बचना चाहिए। वह जितनी ज्यादा रंग-बिरंगी फल-सब्जियां खाएंगी, प्रतिरोधक क्षमता उतनी ही बढ़ेगी। फल एवं सब्जियों में एंटी-ऑक्सीडेंट मिलता है, जो निरोगी रखता है और खूबसूरती को भी बढ़ाता है।

डॉक्टरों का मानना है कि महिलाओं के सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए माहवारी का नियमित और सामान्य होना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इनका पूरा स्वास्थ्य माहवारी पर टिका होता है। अचानक माहवारी का बंद होना, कम आना या अधिक रक्तस्त्राव होना अस्वस्थता का सूचक है। यदि यह शिकायत है तो फौरन सजग होकर डॉक्टर से मिलें। इसके पीछे संभवत: खून की कमी, सिस्ट, डायबिटीज, थायरॉयड, फाइब्रॉयड या तनाव जैसी प्रॉब्लम हो सकती हैं, जो सेहत के लिए ठीक नहीं, उपचार द्वारा इसे नियमित और नॉर्मल करना जरूरी है।

अधिकांश महिलाएं मां न बन पाने की पीड़ा से परेशान रहती हैं। इसके पीछे भी माहवारी का ठीक से न होना एक कारण हो सकता है, यदि माहवारी नॉर्मल है तो आपको मां बनने से कोई नहीं रोक सकता।

देखने में आता है कि इन दिनों महिलाएं घरेलू कार्यों में दिनभर लगी रहने के बावजूद मोटापे की शिकार हो रही हैं और अधिकांश वसा उनके पेट पर ही जमा होता है। उन्हें टहलने व कुछ योग-व्यायाम आदि की सलाह दी जाए, तो तुरंत कहती हैं कि दिनभर घर के कामों में दौड़ती तो रहती हूं, पर घरेलू कार्यों को निपटाने के लिए लगातार दौड़भाग करना अपनी जगह है, लेकिन इससे भी आवश्यक है दिनचर्या को व्यवस्थित करना। वस्तुत: हमारी अव्यवस्थित दिनचर्या ही मोटापे का कारण है, फिर भी पेट को पतला करने के लिए व्यायाम व कपालभाति, भ्रस्किा आदि प्राणायाम कम- से-कम 15 से 30 मिनट अवश्य करें और इसके साथ ही शरीर को चुस्त-दुरूस्त रखने वाले आयुर्वेदिक रसायन लेना भी जरूरी है। इसके अतिरिक्त घरेलू कार्यों को मनोयोग पूर्वक करने से भी भरपूर लाभ मिलता है।

22-05-2016

आहार क्रम में एक समय भोजन में वसा दो ग्राम, फाइबर चार ग्राम से अधिक न लें। अंकुरित भोजन एवं इसके साथ दूसरे भी पौष्टिक भोज्य पदार्थ लें। मीठी चीजें बहुत ही कम खायें, क्योंकि ये केवल कैलौरी बढ़ाती हंै, इनसे पौष्टिक तत्व नहीं मिलते। अधिक पानी पीना आंतों व दांतों दोनों के लिए उत्तम है। अम्ल तत्वों को नष्ट करने की पानी में अपूर्व क्षमता होती है। अत: पेट, मुंह और दांतों के उत्तम स्वास्थ्य के लिए भोजन या कोई भी चीज खाने के बाद पानी से पांच-छ: बार कुल्ला अवश्य करें। साथ ही भोजन के 40 मिनट बाद से क्रमश: जल लेते रहे।

देर रात को सोने और सुबह उठने के बीच भी संतुलन आवश्यक है, अन्यथा कमर दर्द से लेकर अनेक समस्याएं आ खड़ी होती हैं और स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। आप अपने सोने का टाइम निश्चित करें, जल्दी सोयें और 8 से 9 घंटे सोने की कोशिश करें। पर्याप्त नींद लेने से आंखों को आराम मिलता है और आंखों के आसपास स्याह घेरे नहीं पड़ते, पाचन तंत्र भी व्यवस्थित रहता है।

आंखों की देखभाल पर भी जोर दें। धूप में निकलने से पहले आंखों पर धूप का चश्मा पहनें, क्योंकि सूर्य की पराबैंगनी किरणें आंखों पर बुरा असर डालती हैं। खुले अंगों पर सनस्क्रीन लोशन लगाकर धूप में निकलें।

यदि नित्य पैदल चलती हैं और आत्मविश्वासी हैं, तो मोटे होने पर भी आपकी सेहत पर कोई गलत प्रभाव नहीं पडऩे वाला। हां, वजन घटाना अच्छी बात है, पर ध्यान रखें कि एक दिन में आहार 1200 से कम कैलोरी न लें। इससे कम लेने पर चपापचय क्रिया प्रभावित हो सकत है।

22-05-2016

महिलाओं को अपने सामान्य स्वास्थ्य के बारे में भी जानकारी जरूरी है, इसलिए उन्हे हर महीने अपना सीबीपी (Complete Blood Picture) और यदि मोटापा है तो थायराइड की जांच करवानी चाहिए। इससे अपना स्वास्थ्य चार्ट बनाने में मदद मिलेगी और सही ध्यान रख पायेंगी। महिलाओं को खाना भी हमेशा नहाने के बाद ही बनाना चाहिए, क्योंकि नहाने के बाद हमारे शरीर में सकारात्मक ऊर्जा आ जाती है, हम तरोताजा फील करते हैं। इससे खाना बनाने का मन भी करता है और खाना स्वादिष्ट और सेहतमंद बनता है, अनेक महिलाओं पर किये गये प्रयोग से यह तथ्य निकल कर सामने आया है है। महिलाओं को समय-समय पर या किसी खास प्रोग्राम (Occasion) पर बाहर जाना चाहिए, इससे उनका दिमाग हमेशा एक्टिव रहता है और कुछ न कुछ नया करने का उत्साह बना रहता है। यही नहीं, महिलाएं अपनी बातें अपनी समस्याएं छिपाएं नहीं, उन्हें अपने पति व अपने डॉक्टर से खुलकर बताएं जिससे चिकित्सा में मदद मिल सके, और आप जल्दी स्वस्थ्य हों।

आमतौर पर महिलाएं भोजन करने के तुरंत बाद काम में लग जाती हैं, ऐसा न करें। भोजन करने के बाद थोड़ी देर आराम करें या बायीं करवट लेट जाएं। इससे पाचन क्रिया ढंग से होती है और आहार शरीर में लगता है, पर 40-45 वर्ष की आयु के बाद जितने कम भोजन में आपका काम चल सकता है, उतना ही भोजन लें।

22-05-2016

भोजन को सजाकर परोसना, खाने के स्थान का साफ -सुथरा होना, हाथ-मुंह धोकर खुले कपड़े पहन कर प्रसन्नतापूर्वक भोजन करना ये सब आमाशयिक रस को पैदा करने और भोजन को पचाने में पूरी मदद करते हैं। इस नियम का खुद पालन करें और बच्चों को भी इसके लिए प्रोत्साहित करें।

भागदौड़ वाली लाइफ के कारण अधिकांश महिलाएं किचन में बहुत कम समय बिताती हैं, जिससे खाना स्वादिष्ट और पौष्टिक नहीं बन पाता, इसका ध्यान रखें। भोजन देखने और सूंघने में प्रिय और खाने में स्वादिष्ट होता है, तो जल्दी पच जाता है और शरीर एवं मन का पोषण भी करता है। इसी प्रकार नित्य योग-व्यायाम, प्राणायाम का अभ्यास करें।

उपयुक्तकुछ ऐसे सूत्र हैं जिन्हें महिलाएं अपनी दिनचर्या से सम्मिलित करके स्वस्थ्य  जीवन जी सकती हैं।

  (साभार: योग संदेश)

डॉ. मनोरमा एवं डॉ.आर.के. भट्नागर, पतंजलि आयुर्वेद चिकित्सालय

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