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स्टार्ट-अप इम्पैक्ट गुरू नये दौर की नयी सोच

स्टार्ट-अप इम्पैक्ट गुरू  नये दौर की नयी सोच

स्टार्ट-अप इंडिया-भारत के युवाओं के उज्ज्वल भविष्य की एक नई सुबह की आहट है। बिजनेस के नए आईडियाज तलाशना और दुनिया में भारत के व्यापार को नई पहचान देना ही स्टार्ट-अप की ओर पहला कदम है। ये स्टार्ट-अप ही टेक्नोलॉजी और बड़े निवेश के आईडियाज को बड़े स्तर पर ला सकते हैं। भारत में पिछले पांच वर्षों में कई बेहतरीन स्टार्ट-अप्स शुरू हुए हैं, जिन्होंने बाजार का रुख ही बदलकर रख दिया है। स्टार्टअप विभिन्न क्षेत्रों में उभर रहे हैं। व्यापार की नवीन दिशाओं को उद्घघाटित करने के साथ-साथ भारत की छवि को दुनिया में उभारने की दृष्टि से इन नयी प्रतिभाओं ने ऐसी संभावनाओं को जन्म दिया है, जिनसे भारत दुनिया की एक महाशक्ति के रूप में पहचान पाने लगा है।

जीवन में बड़े लक्ष्य निर्धारित करना और उन्हें पाने के लिये अथक परिश्रम करना यही स्टार्ट-अप है। संभावनाओं से भरे इन स्टार्ट-अप ने अपनी उपलब्धियां सबको दिखाई और यही कारण है कि वे वास्तविक सफल लोग माने जाते हैं। इन्होंने विज्ञान एवं तकनीक की कई सौगातें दी हैं, जीने का नया तरीका दिया है, सोच को बदला है और जीवन को सुगम बनाने की कोशिश की है। ऐसी ही एक आधुनिक सौगात दी है पीयूष जैन ने क्राउडफंडिग के माध्यम से। इम्पैक्ट गुरू एक गैर-लाभकारी सामाजिक विषयों से जुड़ा मंच है जिसके सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी जैन ने सन् 2014 में इसे स्थापित किया।

हाल ही में सिंगापुर के प्रमुख निवेश मंच फंडनेल ने इसके साथ अंतर्राष्ट्रीय करार किया है जिसमें भारत की सामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए दान और पूंजीनिवेश के माध्यम से उपक्रम किये जायेंगे। विशेषत: दक्षिण पूर्व एशिया में स्थित प्रवासी भारतीयों को दान और पूंजीनिवेश के लिए प्रेरित किया जाएगा। भारत में सेवा और परोपकार के कार्यों में इस तरह के निवेश का अभी प्रचलन नहीं है। भारत के लिए यह पहला अवसर है जब एक सामाजिक क्राउडफंडिग मंच ने एक विदेशी निवेश क्राउडफंडिग मंच के साथ मिलकर करार किया है जिसमें वित्तीय समावेशन, स्वच्छ तकनीक, शिक्षा, पानी, स्वच्छता और स्वास्थ्य सहित विभिन्न सामाजिक जरूरतों से जुड़े क्षेत्रों में निवेश होगा। हार्वर्ड इनवेशन लैब के नवीन खोजकारी उद्यम एवं प्रोत्साहन कार्यक्रम से प्रेरणा एवं प्रशिक्षण पाने के पश्चात जैन सिंगापुर के पैक्ट सोशल इंटरप्राइज इनक्यूबेटर के साथ मिलकर भारत के लिए नवीन निवेश की संभावनाओं को तलाशेगे।

जैन हार्वर्ड और वॉर्टन जैसे अंतर्राष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों में उच्च एवं तकनीकी शिक्षा प्राप्त हैं। उन्होंने जेपी मॉर्गन, बोस्टन कंसल्टिंग गु्रप, अर्नस्ट एंड यंग जैसे अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक संगठनों में उच्च पद एवं उच्च वेतनमान के बावजूद स्टार्ट-अप के रूप में अपनी स्वतंत्र पहचान बनायी है। नौकरी करने वाले की बजाय वे नौकरी देने वाले बनकर देश को मजबूत करना चाहते हैं।

इम्पैक्ट गुरू इससे पहले भी अनेक गैर- मुनाफे के संगठनों के साथ जुड़कर अपनी सेवाएं दे चुका है जिनमें ऑक्सफेम, एसओएस बाल ग्राम, हैविडेट फॉर ह्यूमिनिटी, सीएसआर विभाग- टाटा, गोदरेज, वॉकहार्ट आदि हैं। वह डेलबर्ग और आशा इम्पैक्ट जैसे संगठनों की तरह ही अपना विस्तार करना चाहता है। जैन ने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि इम्पैक्ट गुरु के माध्यम से आगामी दो वर्षों में पचास करोड़ की सामाजिक सेवा एवं परोपकार के कार्य का लक्ष्य हासिल करेंगे, जो पूंजीनिवेश या दान के माध्यम से जुटाया जायेगा।

‘क्राउडफंडिग’ विदेशों में लगभग स्थापित हो चुकी है। भारत में इसको प्रचलित करने का श्रेय जैन को ही जाता है। उनके अनुसार तमाम सार्वजनिक योजनाओं, धार्मिक कार्यों, जनकल्याण उपक्रमों और व्यक्तिगत जरूरतों को पूरा करने के लिए लोग इसका सहारा ले रहे हैं। यह भारतीय चन्दे का आयात किया हुआ एक स्वरूप है, एक प्रक्रिया है।

इस समय दुनियाभर में क्राउडफंडिग दो तरह के मॉडल पर काम कर रही है। इसमें पहला है डोनेशन बेस्ड फंडिग। क्राउडफंडिग कॉन्सेप्ट का जन्म इसी मॉडल से हुआ है। इसमें लोग किसी अच्छे प्रोडक्ट या सर्विस के लिए पैसा दान करते हैं, ताकि बाद में उन्हें वह प्रोडक्ट मिल सके। क्राउडफंडिग का दूसरा मॉडल है इंवेस्टमेंट क्राउडफंडिग। यह आजकल सबसे अधिक चलन में है। इस तरह के मॉडल में पैसे देने वाला व्यक्ति उस कंपनी या प्रोडक्ट में हिस्सेदारी ले लेता है और बाद में उसे लाभ में हिस्सेदारी मिलती है।

भारत में ‘क्राउडफंडिग’ का चलन तेजी से बढ़ रहा है। जैन की भावी योजनाओं को देखते हुए कहा जा सकता है कि आने वाले समय में क्राउडफंडिग न केवल जीवन का हिस्सा बनेगा बल्कि, अनेक बहुआयामी योजनाओं को आकार देने का आधार भी यही होगा। केन्द्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने ही इम्पैक्ट गुरु का लोकार्पण किया। वे भी चाहती हैं कि सरकार के साथ-साथ गैर सरकारी संगठनों और आम नागरिकों को सेवा और जनकल्याण के कार्यों के लिये क्राउडफंडिग को बढ़ावा देना चाहिए।

22-05-2016

जैन भारत में क्राउडफंडिग के भविष्य को लेकर बहुत आशान्वित हैं। वे बताते हैं कि इम्पैक्ट गुरु भारत में जनकल्याण के विविध उपक्रमों के साथ-साथ बच्चों और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए गैर-लाभकारी संगठनों के साथ मिलकर कार्य करेगा।

विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार भारत में क्राउडफंडिग के लिए लोगों का आकर्षण बढ़ रहा है। वर्ष-2014 में 167 प्रतिशत इजाफे के साथ 16.2 करोड़ डॉलर रहा। वर्ष-2015 में यह 34.4 करोड़ डॉलर हो गया। जो पिछले वर्ष की तुलना में दुगुना है। इन आंकड़ों से उजागर होता है कि क्राउडफंडिग के प्रति दुनिया में न केवल बड़े दानदाताओं में बल्कि, मध्यमवर्ग में भी देने की प्रवृत्ति बढ़ रही है।

इम्पैक्ट गुरु की कार्ययोजना को आकार देने के लिये गंभीरता से जुटे पीयूष जैन का मानना है कि क्राउडफंडिग भारत के लोगों में दान की परम्परा को एक नई शक्ल देगा। बड़े दानदाता ही नहीं बल्कि, छोटे-छोटे दान को प्रोत्साहन किया जा सकेगा। मध्यमवर्ग के लोगों में भी दान देने का प्रचलन बढ़ाना हमारा लक्ष्य है। विशेषत: युवकों में जनकल्याण एवं सामाजिक परिवर्तन के लिए दान की परम्परा के प्रति आकर्षण उत्पन्न किया जाएगा, जिसके माध्यम से सेवा और जनकल्याण के नये उपक्रम संचालित हो सकेंगे।

इम्पैक्ट गुरु मंच की कोशिश से भारत में 33 लाख गैर-लाभकारी संगठनों से जुड़ी समस्याओं को सुलझाया जा सकेगा। क्योंकि इन गैर-लाभकारी संगठनों के सम्मुख धन उगाने के परंपरागत तरीके बहुत खर्चीले हैं, जो कुल धन का खर्च 35 प्रतिशत तक है, जिसे नई तकनीक के अंतर्गत 5 प्रतिशत तक किया जाएगा। इससे एक बड़ी समस्या का समाधान इम्पैक्ट गुरु के द्वारा संभव हो सकेगा।

इम्पैक्ट गुरु कॉलेज और उच्च शैक्षणिक संस्थानों के साथ-साथ युवा प्रोफेशनल के बीच व्यापक पहुंच स्थापित कर उनमें क्राउडफंडिग की शक्ति के माध्यम से उन्हें सोशल मीडिया के लिए जागरूक किया जा रहा है।

स्टार्ट-अप के प्रणेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी क्राउडफंडिग के जरिये सार्वजनिक उपक्रमों को अधिक सशक्त बनाने के लिये उत्साहित दिखाई देते हैं। ऑनलाइन के इस युग में क्राउडफंडिग का भविष्य उज्ज्वल ही दिखाई दे रहा है। पीयूष जैन के इस कथन में सच्चाई है कि ‘सरकार हमारे तमाम मसले नहीं सुलझा सकती और जनता अपने बीच की समस्याओं के समाधान के लिये खुद ही आगे आना चाहती है। मध्य और उच्च वर्ग के लोग न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र बल्कि, जनकल्याण से जुड़ी अनेक योजनाओं के लिये दान करना चाहते हैं। लोग एक-दूसरे की मदद भी करना चाहते हैं। लगता है आने वाले समय में छोटे-छोटे दान बड़ी योजनाओं को आकार देने के माध्यम बनेंगे।

इसलिये पीयूष जैन भारत सरकार को क्राउडफंडिग के लिए नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हैं। उनका मानना है कि सरकार को क्राउडफंडिग के लिए योजना बनानी चाहिए। क्राउडफंडिग को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। लोग जिन्हें व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते उनके लिए दान करना नहीं चाहते हैं। इस स्थिति में लोगों को दान कराने के लिए राजी करना चुनौती भरा होता है। जब सरकार की ओर से इसको प्रोत्साहन मिलेगा और इसकी सुनियोजित योजना सामने आएगी तो लोगों का विश्वास जागेगा।

पीयूष जैन स्वीकारते हैं कि क्राउडफंडिग भारत में काफी सफल होगा। यहां अमीर-गरीब के बीच गहरी खाई है। यह उसे पाटने में अहम भूमिका निभा सकता है। इसके जरिए अमीर मिलकर गरीबों की मदद कर सकते हैं। इससे उन लोगों की जिंदगी में बदलाव आएगा, जो पैसों की कमी की वजह से बुनियादी जरूरतों से महरूम रह जाते हैं। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि तकनीक के मामले में भारत की दुनिया में अलग पहचान है। भारत के सुनहरे भविष्य के लिए क्राउडफंडिग अहम भूमिका निभा सकती है। क्योंकि, क्राउडफंडिग से भारत में दान का मतलब सिर्फ गरीबों और लाचारों की मदद करना समझते आ रहे हैं जो कि अब कला, विज्ञान और मनोरंजन  को समृद्ध करने की भी हो जायेगी। ऐसा होने से क्राउडफंडिग की उपयोगिता एवं महत्ता सहसा ही बहुगुणित होकर सामने आयेंगी। हम जहां रहते हैं वहां एक-दूसरे की मदद के बिना समाज नहीं चल सकता। अगर लोग इस तरह की मदद के लिए आगे नहीं आएंगे तो पैसों की कमी के चलते अनेक सामाजिक और सार्वजनिक इकाईयां मरणासन्न होकर रसातल में चली जायेगी।

पीयूष जैन जैसे चमकदार स्टार्ट-अप्स ने लोगों को भी अपनी सोच बदलने के लिए मजबूर किया है। पिछले कुछ वर्षों में भारत दुनियाभर में स्टार्ट-अप शुरू करने के लिए एक पसंदीदा जगह के तौर पर उभरा है। इस समय अमेरिका के कैलिफोर्निया की सिलिकॉन वैली के बाद अगर दुनिया के निवेशकों को सबसे ज्यादा कोई देश आकर्षित कर रहा है तो वह है भारत। बहुत सारे तथ्य इस बात को साबित करते हैं कि भारत एक उभरता हुआ स्टार्ट-अप केंद्र है।

ललित गर्ग

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