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कांग्रेस अब ‘परजीवी’

कांग्रेस अब ‘परजीवी’

भारतीय जनता पार्टी के पास सन् 2011 में इन पांच राज्यों (असम, पश्चिम बंगाल, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी) में मात्र छह सीटें थी। इन राज्यों में से एक में भी भाजपा की सरकार नहीं थी। लेकिन सन् 2016 में इन पांच राज्यों में हुए चुनावों में भाजपा को अब तक 64 सीटें मिली हैं। और साथ ही एक राज्य असम में आजादी के बाद पहली बार भाजपा गठबंधन की सरकार बनी है। अब भाजपा की 9 राज्यों में सरकारें हैं। वहीं कांग्रेस ने असम और केरल में अपनी सरकारें खो दी है। अब उनके पास मात्र छह छोटे राज्य हिमाचल, उत्तराखंड, मेघालय, मिजोरम, मणिपुर, पुडुचेरी और एक बड़े राज्य कर्नाटक में सरकार बची है। भाजपा देश के 36 प्रतिशत लोगों का समर्थन प्राप्त कर चुकी है। वहीं कांग्रेस को 10 प्रतिशत लोगों का समर्थन प्राप्त है। भाजपा के पास पंजाब, जम्मू-कश्मीर, अरुणाचल प्रदेश एवं आन्ध्र प्रदेश में गठबंधन की सरकार है। अगर यहां की जनता के समर्थन को जोड़ लें तो भाजपा-गठबंधन को लगभग 44 प्रतिशत नागरिकों का समर्थन मिल गया है।

भाजपा के राजनैतिक जीवनयात्रा का यह सुखद अवसर है। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को 282 सीटें मिली। भाजपा नीत एनडीए को कुल 306 सीटें मिली। सन् 1951 में 29 अक्टूबर को भारतीय जनसंघ की स्थापना हुई थी। उसके बाद भाजपा का गठन 6 अप्रैल 1980 को  हुआ था। इन दोनों की स्थापना से लेकर अब तक भाजपा को इतनी स्वीकार्यता पूर्व में कभी नहीं मिली।

सन् 2016 के मई में एक बात तो स्थापित हो गई कि भाजपा के देश में सर्वाधिक विधायक हैं। देश में सर्वाधिक सांसद भाजपा के हैं। देश में अनुसूचित जाति के सर्वाधिक सांसद भाजपा के हैं। देश में अनुसूचित जनजाति के सर्वाधिक सांसद भाजपा के हैं। देश में सर्वाधिक पिछड़ी जाति के सांसद भाजपा के हैं।

देश में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं जिनके नेतृत्व में भाजपा महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ अब असम में जीती हैं। केरल और पश्चिम बंगाल में भाजपा का पहली बार खाता खुला है। भाजपा नेता देश के प्रधानमंत्री ‘नरेन्द्र मोदी’ को देशव्यापी समर्थन और उनका सर्वस्पर्शी नीति जिसके तहत ‘सबका साथ सबका विकास’ हो रहा है का देश की जनता निरंतर समर्थन कर रही है।

भाजपा कार्यकर्ताओं पर बढ़ती जिम्मेदारी उन्हें सदैव विनम्र रहने का आग्रह करती है। भाजपा कार्यकर्ताओं को चाहिए कि वे अपनी केंद्र की सरकार के जनहित में लिए गए एतिहासिक निर्णयों को गांव-गांव तक ले जायें।

कांग्रेस अब देश में ‘परजीवी’ (पैरासाइट) पार्टी हो चुकी है। उसमें किसी भी राज्य में अकेले लडऩे की हिम्मत नहीं बची है। बिहार में जदयू के आगे कांग्रेस ने समर्पण किया। पश्चिम बंगाल में कांग्रेस ने अपने घोर विरोधी सीपीएम के सामने समर्पण किया। वहीं तमिलनाडु में डीएमके के सामने कांग्रेस ने समर्पण किया। कांग्रेस की पोल उस समय ही खुल गई जब वह पश्चिम बंगाल में सीपीएम के साथ गठबंधन करती है। वहीं केरल में सीपीएम के खिलाफ कांग्रेस लड़ती है। कांग्रेस का यह दोहरा चरित्र देश की जनता ने समझ लिया है।

कांग्रेस देश की जनता को नासमझ समझ रही है। भाजपा और कांग्रेस में मूल अंतर है कि भाजपा कार्यकर्ता आधारित पार्टी है, पर कांग्रेस सोनियाजी एवं राहुलजी आधारित पार्टी है। भाजपा जनजीवी संगठन है। कांग्रेस परजीवी (पैरासाइट) संगठन है।

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भाजपा के अच्छे दिन इसलिए आ रहे हैं क्योंकि भाजपा नीत केंद्र की नरेन्द्र मोदी की सरकार अब जनता के लिए अच्छे दिन ला रही है। आने वाले दिनों में कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए कोई भी पार्टी आगे नहीं आएगी।

इस चुनाव परिणाम से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी बहुत बड़ा झटका लगा है। पहली बात वह बिहार के आगे देश के 34 राज्यों में कहीं नहीं हैं। बिहार में भी उन्हें अपने घोर विरोधी लालूजी यादव और कांग्रेस का सहारा लेना पड़ा।

अब नीतीश कुमार को पुन: दूसरा झटका यह लगा कि वे संघमुक्त भारत बनाना चाहते थे। जो वे अब ना ही बोले तो अच्छा रहेगा। उन्हें लोग एक गंभीर मुख्यमंत्री मानते हैं। लेकिन जिस दिन उन्होंने कहा की मै संघमुक्त भारत चाहता हूं, उस दिन लोगो को लगा की वे प्रधानमंत्री की दौड़ में अपने को लाने के लिए इतनी हल्की बातें कर गए।

नीतीशजी को शायद यह पता नहीं की राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या है? संघ भारत की ‘आत्म प्रकृति’ है। भारत बिना संघ यानि संस्कृति के रह ही नहीं सकता। ‘संघ’ भारत की संस्कृति है और संस्कृति की रक्षा के लिए संघ सन् 1925 से लगातार भारत एवं भारतीयों की सेवा कर रहा है।

माननीय नीतीशजी संघमुक्त भारत इसलिए नही हो सकता क्योंकि संघ ‘भारत माता’ की प्रतिदिन आराधना करता है। ‘भारत माता’ का पूजन कर भारतीयों को संस्कारित करने का पुनीत कार्य संघ कर रहा है। अत: माननीय नीतीशजी को चाहिए की वह अपना यह निरर्थक शब्द वापिस लें।

             प्रभात झा

   (लेखक भाजपा के राज्यसभा सदस्य है)

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