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मैं भी हूं

मैं भी हूं

वरुण बाबा अपनी अहमियत बताने का रास्ता तलाश रहे हैं। काफी दिनों से ठंडे चल रहे हैं। मेनका को भी कहीं-न-कहीं महसूस हो रहा है कि वरुण के साथ ठीक नहीं चल रहा है। वरुण बाबू अमित शाह से भी मिल चुके हैं, लेकिन अभी दाल नहीं गल रही है। वैसे वरुण के करीबी भरोसा देने में जुट गए हैं कि इस बार मंत्रिमंडल फेरबदल और संगठन में जिम्मेदारी तय होने की स्थिति में वह फलक पर आएंगे, लेकिन इतना तय है अभी भाजपा उन्हें उ.प्र. का भावी सीएम तो नहीं घोषित करने वाली।



नेता जी का टंटा


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नेताजी यानी मुलायम सिंह अब अपने पुराने दर्जी अमर सिंह को राज्यसभा में भेजेंगे। जब से नेताजी ने यह पत्ता खोला है, प्रो. राम गोपाल, जया बच्चन, आजम खा के मुंह सूजे हुए हैं। दूसरी तरफ अमर, अखिलेश के चचा और शिवपाल के करीबी हैं। बेनी भी सिंह को देखकर चमकते हैं। वहीं रामगोपाल पार्टी के संसदीय दल के नेता, तो ताना मारने में अमर सिंह का भी जवाब नहीं है। देखना है अब आगे क्या होता है।



चौधरी भाई


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अपने चौधरी अजीत सिंह के दो लड्डू आए। मजा आ गया। चौधरी को लगा कि बाप-बेटे के दिन बहुरे। लेकिन, जैसे ही दोनों लड्डू बारी-बारी से खाने की कसरत शुरु की, लड्डू फूट गए। सारी बुंदियां गंदे में गिर गईं। न जद(यू) की राज्यसभा मिली, न भाजपा का दामन। अब कांग्रेस का भरोसा बचा है लेकिन, अहमद भाई खामोश हैं। क्योंकि उ.प्र में सब कुछ राहुल तय कर रहे हैं। वहीं चौधरी भाई हैं कि अब भी टटोल रहे हैं। क्या पता कुछ बुंदियां साफ जमीन पर पड़ी हों।



मानो या ना मानो


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मानो या ना मानो लेकिन, अब अपनी स्मृति ईरानी भाजपा की महिला नेता नंबर वन हैं। उनके बाएं उमा, नजमा, निर्मला नहीं दिखती तो दाएं सुषमा बीमार चल रहीं हैं। ईरानी जहां अपने दमखम पर इतरा रहीं हैं, वहीं भाजपाई अभी भी उनके भाग्य पर चमक रहे हैं। लेकिन, पीएम मोदी का एजेंडा साफ है। वह अगले 15 साल की भाजपा खड़ी कर रहे हैं। चाहे यूपी अध्यक्ष हों, ईरानी हों, सोनेवाल हों सब इसी का हिस्सा हैं। किसी की फुंक रही है तो अपनी बला से।



घर में नहीं है दाने अम्मा चली भुनाने


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वाह पीके वाह। पंजाब में फेल हुए तो उ.प्र. में जम गए हैं। खबर है कि पीके (प्रशांत किशोर) को पंजाब में कैप्टन कोई खास भाव नहीं दे रहे हैं। वह अब उ.प्र. में काफी समय दे रहे हैं। एक-एक तुर्रा छोड़ रहे हैं और वह बाऊंस बैक होकर आ रहा है। पर पीके हैं कि कलाबाजी से बाज नहीं आ रहे। उनका अब भी यह एक बड़ा तुर्रा है कि प्रियंका का चेहरा मिल गया तो यूपी में कांग्रेस की बमबम करा देंगे। अब भला कौन बताये कि जब घर में दाने ही नहीं हंै तो अम्मा भुनाकर ही क्या लाएंगी?



सुशासन बाबू


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सुशासन बाबू नीतीश कुमार बड़े असमंजस में हैं। राज्यसभा के लिए के.सी त्यागी मार मचाए हैं, चौधरी अजीत सिंह फिर अपना भविष्य कुरेद रहे हैं, लालू यादव की टीम रह-रहकर तंबू में छेद कर दे रही है। वहीं बिहार में अपराध का ग्राफ बढ़ रहा है। दूसरे राजनीति ने जिस तरह से करवट लिया है उसमें भावी पीएम बनने का कोई एजेंडा खड़ा ही नहीं हो पा रहा है। बताते हैं नीतीश बाबू अपनी तरफ से कुनबा खड़ा करने की पूरी कोशिश में हैं, लेकिन भाई लोग हैं कि उनकी हवा निकाल दे रहे हैं। सुना है जल्द ही वह नई रणनीति के साथ फिर फलक पर आने वाले हैं।



मोदी की गुगली


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पीएम मोदी जोर का झटका धीरे से देते हैं। पिछली कैबिनेट बैठकों में अपने पासवान जी गैर हाजिर रहे। पिछली बैठक में उपस्थित हो गए। पीएम मोदी ने जमकर रामविलास की तारीफ की। साफ कहा है कि अपने पासवान जी हैं, इनकी सरकार से लेकर राजनीतिक दलों में कोई आलोचना नहीं करता। यानी कोई दुश्मन नहीं है। पासवान इसे न तो उगल पा रहे थे और न ही निगल पा रहे थे। पासवान खेमे के लोग इसे भुनाने में लग गए तो बिहार से ही आने वाले एक मंत्री जी का भी तर्क सुन लीजिए। जनाब के अनुसार यह पासवान को मोदी का आईना था कि पासवान जी हर दल के नेताओं के संपर्क में रहते हैं और कहीं भी खिसक सकते हैं।



कटी पतंग


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कटी पतंग का जुमला खूब चल रहा है। चले भी क्यों न। असम में परचम, केरल में खाता और राजनीति की बिसात पर गोट ठीक पडऩे से पीएम मोदी और उनकी टीम बल्लियों उछल रही है। ऐसे में कलराज, राधा मोहन, नजमा समेत तमाम नेता सकते में हैं। कभी भी पीएम केन्द्रीय मंत्रिमंडल में बदलाव का निर्णय ले सकते हैं। आने वाले साल में पंजाब, उ.प्र. समेत अन्य राज्यों के चुनाव होने हैं। अब ऐसे में पीएम जाने किसे कटी पतंग बना दें। किसे संगठन में अहम जिम्मेदारी थमा दें।



राहुल बाबा पास


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कोई भले ही यह जुमला चलाए कि पप्पू फेल हो गया, लेकिन कांग्रेसियों ने ग्रेस मार्क के साथ राहुल बाबा को पास कर दिया है। राहुल मां सोनिया गांधी को सर्जन बताकर दिग्विजय सिंह ने पार्टी के भीतर ही सर्जरी की नई बहस छेड़ दी है। वहीं विरोधी कहने लगे हैं कि जब बड़ा पेड़ (मोदी) खड़ा होता है तो छोटे-मोटे पौधे (राहुल) उसकी छाया में दब जाते हैं। अब कांग्रेस है कि उसमें पौधे ही पौधे हैं, पेड़ बचा ही नहीं। बात जरा दूर की है।



अमित शाह करेंगे खेल


05-06-2016

भाजपाईयों को उम्मीद है कि पंजाब में फिजा बदलेगी। असम अपना रंग डालेगा, अमित शाह जल्द ही वहां बड़े खेल की तैयारी में हैं। खबर है कि इसके लिए भाजपा आलाकमान पांच-छह एजेंसियों की सेवाएं लेकर विभिन्न जानकारियों पर सर्वे करा रहा है। अकाली दल की हालत भाजपा से काफी पतली नजर आ रही है। बादल भी गरजना छोड़ दिए हैं और साधने में जुट गए हैं। ऐसे में पंजाब को लेकर संघ भी मंथन में जुटा है। कयास तो इसके भी हैं कि कहीं भाजपा अकालियों की पांत अलग न हो जाए।


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