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बैरिस्टर से बापू तक क्या आप जानते हैं?

बैरिस्टर से बापू तक  क्या आप जानते हैं?
  • गांधीजी अपनी आत्मकथा में लिखते हैं कि, ‘मैं बचपन में बहुत शर्मीला था और स्कूल से छुट्टी होते ही सबसे पहले दौड़ कर घर जाता था, ताकि रास्ते में मुझसे कोई बात करके मेरा मजाक न उड़ाए।’
  • गांधीजी बहुत जोश और उत्साह से चलते थे। वह चलने के बारे में कहते हैं कि, ‘चलना व्यायाम का सर्वोत्तम तरीका है।’ उन्होंने हाई स्कूल के दौरान आयोजित हुए दौड़-भाग वाले खेलों में बहुत बार भाग लिया। लंदन में एक छात्र के तौर पर वह रोज 12 से 15 किलोमीटर पैदल चलकर पैसे बचाते थे। इससे उनको इंग्लैंड में अच्छी सेहत बनाए रखने और फिट रहने में बहुत सहायता मिलती थी। इसके इलावा उन्होंने अपना हर आंदोलन भी चलकर ही किया। 1930 में वह अपने आश्रम से 387 किलोमीटर चले थे, जिसे दांडी मार्च के रूप में याद किया जाता है।
  • एक बार साउथ अफ्रीका में रेलयात्रा के दौरान एक अंग्रेज ने गांधीजी को ट्रेन से बाहर निकल जाने के लिए कहा तो गांधीजी ने कहा कि उनके पास भी वैसा ही टिकट है जैसा कि उनके पास है। मगर उस अंग्रेज और रेलवे अधिकारी ने उन्हें गाड़ी से बाहर धक्का दे दिया। किसी अंग्रेज के साथ गांधीजी का यह सबसे कड़वा अनुभव था।
  • जब गांधीजी 1931 मे इंग्लैंड में थे तो उन्होंने रेडियो प्रसारण द्वारा अमरीका वासियों को संदेश दिया था। अमरीका वासियों ने सबसे पहले जो उनके शब्द सुने थे वह यह थे, Do i have to speak into this thing?’ (क्या मुझे इस चीज में बोलना है)
  • गांधीजी दूसरों की सहायता करने में बहुत आनंद लेते थे। एक बार वह ट्रेन में थे। अचानक ट्रेन चली और उनका एक जूता नीचे ट्रैक पर गिर गया। उन्होंने तुरंत ही अपना दूसरा जूता उसके पास फेंक दिया ताकि वह जोड़ा जिसे मिले उस के काम आ सके।
  • गांधीजी समय के बहुत पाबंद थे। वह अपनी डॉलर घड़ी हमेशा पास रखते थे। पर 30 जनवरी 1948 को जिस दिन उनकी हत्या हुई थी, वह प्रार्थना के लिए मीटिंग की वजह से 10 मिनट लेट हो गए थे।
  • टाइम मैगजीन ने उनको 1930 के लिए Man of the year चुना था। इसके आलावा टाइम मैगजीन ने आइंस्टाइन को ‘सदी का पुरूष’ चुना था और गांधीजी को दूसरे नंबर पर रखा था। मगर आइंस्टाइन गांधीजी को बहुत मानते थे। 1930 में दोनों के मध्य पत्रों द्वारा संवाद भी हुआ था और गांधीजी ने आइंस्टाइन को भारत आने का न्योता भी दिया था। मगर काम की व्यस्तता और नाजी गतिविधियों के कारण वह भारत न आ सके।

भारत की स्वंत्रता प्राप्ति के पश्चात कुछ पत्रकार गांधीजी के पास आए और उनसे अंग्रेजी में बात करने लगे। मगर गांधीजी ने सभी को रोका और कहा कि, ‘मेरा देश अब आजाद हो गया है, अब मैं हमारी हिन्दी भाषा ही बोलूंगा। गुजराती होने के बावजूद भी गांधीजी हिन्दी ही बोलते थे, राष्ट्रभाषा के विषय में उनका एक विचार है, ‘कोई भी देश तब तक उन्नति नहीं कर सकता, जब तक कि वह अपनी भाषा में नही बोलता।’

31-01-2015

  • उन्होंने भारत और दक्षिणी अफ्रीका में एक संपादक के तौर पर हरिजन, Indian Opinion (दक्षिणी अफ्रीका) और युवा भारत सहित कई समाचार-पत्रों का हिन्दी, अंग्रेजी और गुजराती भाषा में संपादन किया।
  • गांधीजी की आत्मकथा का नाम है ‘सत्य के प्रयोग’। इसमें 1920 तक उनके जीवन का हर पहलू दिया है। यह 1927 में प्रकाशित हुई थी। 1999 में इस आत्मकथा को 20वीं सदी की 100 सबसे आध्यात्मिक किताबों में स्थान दिया गया था। यह किताब लगभग हर भाषा में छप चुकी है और विश्व की सबसे ज्यादा बिकने वाली पुस्तकों में से एक है।
  • 1948 में गांधीजी को शांति के नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया था, पर उनकी हत्या हो जाने पर नोबेल पुरस्कार कमेटी ने उस साल शांति का पुरस्कार किसी को भी नहीं देने का निर्णय लिया।
  • गांधीजी के दांत खराब होने के कारण उनके पास दांतों का एक बनावटी जोड़ा था जिसे वह अपनी कमर के कपड़े में रखते थे। वह उन्हें तभी अपने मुंह में लगाते जब वह खाना खाते। खाना खाने के बाद वह उसे वापस बाहर निकालते, धोते और फिर कमर के कपड़े में बांध कर रख लेते।
  • जब वह दक्षिणी अफ्रीका में थे तब उनकी पगार 1500 डॉलर प्रति वर्ष तक पहुंच गई थी जो उस समय ज्यादातर भारतीयों का सपना होता था। वह इस पगार का ज्यादातर हिस्सा दान कर दिया करते थे।
  • शांति में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पांच नेताओं मार्टिन लुथर किंग, दलाई लामा, आंग सान सुई, नेल्सन मंडेला और अर्जेंटीना के अडोल्फो यह सभी मानते थे कि वे गांधीजी के विचारों से प्रभावित थे।
  • गांधीजी फोटो खींचे जाने से बहुत चिढ़ते थे। मगर उस समय वही ऐसे थे जिनके सबसे ज्यादा फोटो खींचे जाते थे।
  • 1915 में एक बार गांधीजी शांति निकेतन जा रहे थे तो उन्हें रबीन्द्र नाथ टैगोर मिले। गांधीजी ने उन्हें ‘नमस्ते गुरूदेव’ कह कर संबोधन किया। इस पर टैगोरजी ने कहा, ‘अगर मैं गुरूदेव हूं तो आप महात्मा हैं।’ तब से टैगोरजी का प्यारा नाम ‘गुरूदेव’ पड़ा और गांधीजी के नाम के आगे ‘महात्मा’ लगने लगा।
  • गांधीजी ने कभी भी हवाई जहाज में सफर नहीं किया।
  • भारत की आजादी के लिए गांधीजी बहुत बार जेल गए जिसकी कुल अवधि 6 साल 5 महीने बनती है।
  • भारत के केवल तीन राष्ट्रीय पर्व हैं, 15 अगस्त, 26 जनवरी और गांधीजी की जयंती 2 अक्टूबर। इसके इलावा संयुक्त राष्ट्र ने 2 अक्टूबर को ‘अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस’ ऐलान किया है।
  • गांधीजी ने लंदन से वकालत की डिग्री प्राप्त की थी और लंम्बे समय तक वकालत का पेशा भी किया था मगर वह इसमें बिल्कुल भी सफल नहीं हुए, क्योंकि वह झूठ नहीं बोलते थे।

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