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जप लो हरि का नाम

जप लो हरि का नाम

एक कीचड़ से भरे हुए बर्तन में हम दूध डालते हैं तो कीचड़ की स्थिति में कुछ फर्क नहीं पड़ता और दूध दिखाई भी नहीं देता, परन्तु अगर उस बर्तन में लगातार दूध डाला जाये तो, एक स्थिति ऐसी आती है जब बर्तन में कीचड़ का नामोनिशान नहीं रहता और सर्वत्र दूध-ही-दूध दिखाई देता है।

ठीक उसी प्रकार से हमारे मन रूपी पात्र में जो संसारी कीचड़ भरा हुआ है, उसे निकालने के लिए निरंतर हरि, गुरू के सुमिरन रूपी दूध को यदि हम मनरूपी पात्र में डालेंगे तो हरिनाम हमारे हृदय से काम, क्रोध, लोभ, मोह और ईष्र्या रूपी कीचड़ को बाहर निकाल फेंकता है और एक स्थिति ऐसी आती है कि हरिनाम का प्रभाव हमारे जीवन और आचरण में स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगता है और हरिनाम की निरन्तरता आने के पश्चात हमारे जीवन से हमें पंचक्लेश, पंचकौष, त्रितापों से मुक्ति मिल जाती है और फिर सदा के लिए प्रभु के लोक में वास मिल जाता है, जहां हर समय के लिए हम आनन्दमय अवस्था में ही वास मिल जाता है, जहां हर समय के लिए हम आनन्दमय अवस्था में ही वास करते हैं।

फिर सभी प्रकार के क्लेशों से सदा के लिए छुट्टी मिल जाती है। आओ इसी जीवन में हरिनाम का सुमिरन कर इन संसारी क्लेशों से मुक्ति पा कर हरि लोक में निरन्तर वास कर हरि सुमिरन कर आनन्दमय अवस्था में वास करें।

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