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‘गौवध रोकने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है’

‘गौवध रोकने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है’

हाल ही में विज्ञान भवन में पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन मंंत्रालय और पशुपालन, डेयरी मंत्रालय द्वारा गौवंश और गौशाला पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ पर्यावरण, वन, जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, कृषि और किसान कल्याण मंत्री राधामोहन सिंह, भाजपा विंग के प्रभारी हृदायनाथ सिंह समेत कई अन्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलित कर किया गया।

इस दौरान पर्यावरण एवं वनमंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने भारतीय दृष्टिकोण में गौवंश का क्या महत्व है उसका उल्लेख किया, साथ ही उन्होंने चारागाह भूमि के उपयोग और घास के भंडार समेत अभयारण के विकास की भी बात कही। तो वहीं कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने 44 प्रकार की स्वदेशी गायों और उनके वंश के संरक्षण और विकास के लिए उनके मंत्रालय द्वारा उठाये गये कदमों के विषय में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ”प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में गाय के आर्थिक, सामाजिक और आध्यात्मिक महत्व को बढ़ाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध हैं।’’ उन्होंने कहा कि ”राजग सरकार ने पिछले साल ‘राष्ट्रीय गोकुल मिशन’ और ‘गोकुल ग्राम योजना’ के लिए 500 करोड़ रूपये की पेशकश की है। आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश में स्वदेशी नस्ल के अनुवांशिक सुधार के लिए दो राष्ट्रीय केन्द्र खोले गये हैं। इसके साथ ही स्वदेशी गाय की नस्ल को बढ़ावा देने के लिए 14 अन्य ‘बुल मदर फार्म’ भी विकसित किये जा रहे हैं। राधा मोहन सिंह ने एक बार फिर दोहराया कि वह गौवध को रोकने के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है’’ साथ ही गाय की बांग्ला देश से हो रही तस्करी पर भी उठाये गये कदमों के विषय में चर्चा की। उद्घाटन सत्र के बाद कई विभिन्न विशेषज्ञों ने दूध की उत्पादकता को बढ़ावा देने के लिए और अच्छी गुणवत्ता के सांडों के माध्यम से नस्लों में सुधार की बात की। चारा संरक्षण, चारागाह भूमि का विकास और खिलाने-पिलाने के तौर-तरीकों पर जोर दिया। कृषि और पशुपालन केन्द्र के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्र को विकास की ओर बढ़ाना और पंचगव्य (गाय का दूध, दही, घी, मूत्र, गोबर) का इस्तेमाल करके उसे आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया।

गौसेवा और गौचर विकास बोर्ड, गुजरात, के चैयरमेन और भारत सरकार के पूर्व मंत्री डॉ.वल्लभभाई कथीरिया को मुख्य रूप से इस आयोजन में निमंत्रण दिया गया। डॉ. कथीरिया ने कार्यक्रम के सभी सत्रों के समापन तक बहुत ही प्रभावशाली ढंग से संभाला। डॉ.कथीरिया ने गौसेवा से संबंधित विभिन्न महत्वपूर्ण बिंदुओं का वर्णन करते हुए कहा: ”गौरक्षा हमारे लिए सर्वप्रथम है अत: कोई भी गाय किसी भी कीमत पर गौवध के लिये नहीं दी जानी चाहिए।’’ साथ  ही विभिन्न राजनीतिक पार्टियों और कथाकिथत छद्म धर्मनिरपेक्षवदियों पर दबाब डालने की बात भी उन्होंने कही, ताकि सभी पार्टियां और सांसद गाय और उसके वंश के वध पर पूर्णरूप से निषेधात्मक बिल के लिये संसद में अपनी आवाज उठायें। साथ ही उन्होंने ‘अभियान’ कार्यक्रम के जरिये लोगों को जागरूक करने पर भी बल दिया।

19-06-2016

डॉ. कथीरिया अर्थिक उत्थान के लिए, ग्रामीण विकास, जैविक खेती के लिए, मिट्टी को उपजाऊ रखने के लिए, पंचगव्य चिकित्सा, जैव कीटनाशक, जैव उर्वरक, बायोगैस, सीएनजी और राष्ट्रीय ऊर्जा की आवश्यकता के लिए बिजली उत्पादन, प्रदूषण नियंत्रण, जलवायु परिवर्तन के संरक्षण के लिए नेताओं, वैज्ञानिकों, अर्थशास्त्रियों, युवा उद्यमियों के बीच बहस, जागरूकता कार्यक्रम, ग्रामीण मॉडल की स्थापना के साथ-साथ डीडी किसान चैनल, आदि के इस्तेमाल से होने पर बल दिया।

डॉ. कथीरिया ने गौपालन पर जोर देते हुए कहा ”स्वदेशी गायों में रोगप्रतिरोधक क्षमता होती है, जलवायु के अनुकूल रहने की क्षमता के साथ ही अनुवंशिक श्रेष्ठता भी होती है अत: उन्हें बढ़ावा देना चाहिए।’’

कार्यक्रम के अंत में उन्होंने अनुवर्ती कार्यक्रमों की योजना की घोषणा की। प्रस्तुत हैं उनके प्रमुख अंश:

  • संसद में जितनी जल्दी संभव हो सके गाय और उसके वंश के वध पर पूर्ण प्रतिबंध लागाते हुए बिल पास होना चाहिए।
  • ए2 दुग्ध पॉलिसी राष्ट्र स्तर पर लाई जाये।
  • गौचरण भूमि का संरक्षण- सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई गाईडलाइंस के मुताबिक गौचरण भूमि पर किये गये अतिक्रमण को हटाया जाना चाहिए।
  • पंचगव्य को औषधि के रूप में आयुष विभाग मे स्थान दिया जाना चाहिए।
  • आरक्षित भूमि के प्रावधान के तहत शहरी क्षेत्रों में गाय छात्रालयों की स्थापना की जानी चाहिए।
  • सैन्य डेरी फार्म क्षेत्र का उपयोग करते हुए 44 प्रकार की स्वदेशी गायों की नस्लों के संरक्षण को बढ़ावा देना चाहिए व जर्सी गायों के आयात पर रोक लगानी चाहिए।
  • स्कूल और कॉलेजों के पाठ्यक्रमों में गाय और उसके पंचगव्य ‘गौविज्ञान’ के महत्व पर अलग से अध्याय तैयार किये जाने चाहिए।
  • आईआईटी और आईआईएम की तरह ही विभिन्न राज्यों में कामधेनू विश्वविद्यालय की स्थापना की जानी चाहिए।
  • जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए जैव कीटनाशकों और जैव उर्वरकों के लिए भी पर्याप्त बजटीय प्रावधान रखा जाए।
  • बायो गैस सीएनजी और ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली पैदा करने के लिये विदेशी आयात को कम करने के लिये सब्सिडी का भी प्रावधान रखा जाए।

अंत में इन बिंदुओं पर सभी ने अपनी सहमति जताई। इस पर वन, पर्यारण, जलवायु परिवर्तन मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि ऊपर कही गई बातों का सभी को अनुसरण करना चाहिए। वन, पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन मंत्रलय और कृषि, पशुपालन मंत्रालय की ओर से किये गये इस सांझा कार्यक्रम के अंत में प्रकाश जावड़ेकर ने कार्यक्रम के सफलतापूर्वक समापन पर वहां उपस्थित लोगों का आभार व्यक्त किया। परिसर में मौजूद सभी लोगों ने पूरी आशा और खुद की वचनवद्धता के साथ परिसर को यह कहते हुए छोड़ा कि आगे आने वाले वक्त में वह खुद को गौमाता के सेवक के रूप में ऊभार कर सामने लायेंगे और गौआधारित समाजिक परिवर्तन की स्थापना से राष्ट्रीय कल्याण को बढ़ावा देंगे।

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