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मथुरा को दर्द, कौन थे हमदर्द!

मथुरा को दर्द, कौन थे हमदर्द!

दो जून का दिन मथुरा को बड़ा दर्द दे गया। जहां पुलिस ने अपने दो होनहार अफसर खो दिये वहीं ये दिन 28 मौतों का गवाह बना। हर स्तर पर आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। 2 जून की शाम का कड़वा सच क्या है, उस शाम को हकीकत में क्या हुआ? 3 साल से रामवृक्ष मालामाल, सपा का शासनकाल! करोड़ों की उस जमीन पर कब्जा कर मारपीट से आतंक फैलाता रहा रामवृक्ष पुलिस मौन, सच क्या था बतायेगा कौन? अगर वहां 3 हजार लोग थे तो सिर्फ तीन सौ लोग ही कैसे पकड़ में आए, इनके जवाब मिलने बाकी हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने मथुराकान्ड पर शिवपाल सिंह यादव से इस्तीफा मांग कर पहली बार सपा से सीधे मुकाबले हेतु ताल ठोक दी है। सपा अन्दर से तिलमिलाने के बाद भी ज्यादा तूल नहीं दे रही है। कांग्रेस के विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर के निर्वाचन क्षेत्र की घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया से चूक जाना कांग्रेस का यूपी चुनाव की लडाई से बाहर रहने की तरह ही है।

जयगुरुदेव की विरासत की सियासत से पनपा वृक्ष अपने आगोश में यूपी की सत्ता को कुर्बान करता दिखा। सत्ता और राजनीति कितनी क्रूर होती है जो अपनो को अपनो के विरूद्ध खड़ा करने का षडयंत्र महाभारत काल से वर्तमान भारत तक हर जगह देखने को मिलता है। सरकारी उडऩ खटोले से आकर मथुरा में नये नौकरशाहो ने आकर पदभार ग्रहण किया और पुराने नेपथ्य में चुप है! कुछ नौकरशाहो में गुस्सा सिर चढ़ कर बोला। बचाव के लिए पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी पूर्नवास की चाह में चहूंओर देख रहे थे। चुप्पी खतरनाक होती है पर खामोशी को क्या कहे? इन सब के बीच जयगुरुदेव धर्म प्रचारक संस्थाए मथुरा के राष्ट्रीय महामन्त्री रामकृष्ण यादव ने एक विज्ञप्ति जारी करके कहा कि जवाहर बाग में अवैध कब्जा जमाए कथित सत्याग्रहियों का हमारी संस्था से कोई लेना-देना नहीं। उनका हमारी संस्था और आश्रम से दूर-दूर तक कोई रिश्ता नहीं। हमारे गुरु महाराज तोड़-फोड़, आन्दोलन, हड़ताल प्रदर्शन जैसे कार्यों को राष्ट्र की सम्पत्ति को नष्ट करने वाले कुकृत्य बताया करते थे। उनका कहना था कि इन विनाशात्मक हथियारों से देश की सम्पत्ति का नुकसान आम जनता को टैक्स के रूप में भरना पड़ता है। इसी कारण बाबा जयगुरुदेव के अनुयायी तोड़-फोड,़ आन्दोलन, हड़ताल आदि से सदैव दूर रहते हैं। मथुरा के जवाहर बाग में देसी बमों को चलाया गया ये एक खूनी खेल खेला सत्याग्रहीओं ने जिसमें दो पुलिस अधिकारीयों को शहीद होना पड़ा ।

अंतिम चरण में जवाहर बाग ऑपरेशन, आतंकी सत्याग्रही सरगना रामवृक्ष यादव की मृत्यु के साथ जवाहरबाग के मुक्त होने में 28 से अधिक जिन्दगीयों के बिखर जाने के साथ कई सवालों के जवाब अभी आना शेष है। जवाहर बाग पार्क के सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर हुये ख़ूनी संघर्ष में  एक एस.पी. व एक एस.ओ. स्तर के पुलिस अधिकारी की मौत इस बात को साबित करती है कि वर्तमान सरकार फेल हो गयी है बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष, सांसद (राज्यसभा) व पूर्व मुख्यमंत्री, मायावती का यह कथन पहली नजर में सही लगता है। एक जनवरी 2014 से मथुरा के उद्यान विभाग के बेशकीमती जवाहर बाग पर कब्जा जमाए बैठे कथित सत्याग्रहियों से बाग को खाली कराने को इतना इंतजार क्यों किया गया?

बाबा जयगुरुदेव के मृत्यु प्रमाण पत्र की मांग को लेकर दो साल से जवाहर बाग पर कब्जा जमाए बैठे थे। कथित सत्याग्रहियों से बाग को खाली कराने को लेकर वार्ता करने पहुंचे पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को कथित सत्याग्रहियों ने चारों ओर से घेर लिया और अचानक आगजनी की घटना की अंजाम दे फायरिंग शुरु कर दी तथा धारदार हथियारों व लाठी डंडों से हमला बोल दिया जिससे एसएचओ फरह गोली लगने से मौके पर ही शहीद हो गए जबकि एसपी सिटी, सीओ सदर एवं सिटी मजिस्ट्रेट भी गोली लगने से गंभीर रुप से घायल हो गए तथा डीएम राजेश कुमार को भी छर्रे लगे।

19-06-2016

मायावती ने कहा कि मथुरा जिले के जवाहरबाग पार्क के सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे को लेकर हुये खूनी संघर्ष में खासकर एक एस.पी. व एक एस.ओ. स्तर के पुलिस अधिकारी की मौत इस बात को साबित करती है कि वर्तमान सपा की लचर नीतियों के कारण राज्य सरकार का कोई भी विभाग खासकर पुलिस महकमे में लोग अपनी कानूनी जिम्मेदारी निभाने में अपने आपको कितना ज्यादा असहाय, असमर्थ व मजबूर पा रहे हैं। सरकार का सबसे बड़ा दोष यह है कि पिछले दो वर्ष से वहां अवैध कब्जा होने दिया और कब्जाधारियों को इस हद तक छूट क्यों दी गई कि वे अवैध हथियार वहाँ जमा करते गये और यहां तक कि अवैध हथियार बनाने का कारखाना तक बना लिया, जिसके ही परिणामस्वरूप मथुरा के एस.पी. (शहर) श्री मुकुल द्विवेदी व साथ ही एक और पुलिस अधिकारी श्री संतोष यादव को भी अपना कर्तव्य निभाते हुये अपनी जान गवांनी पड़ी।

जवाहर बाग सरकारी पार्क में काफी बड़े पैमाने पर हथियारों का जखीरा मिलना व अवैध हथियार बनाने का कारखाना तक पाया जाना यह प्रमाणित करता है कि अवैध कब्जाधारियों को पूरा-पूरा संरक्षण प्राप्त था। सरकार अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन सही तरीके से करते हुये उचित समय पर अपना काम करती तो फिर माननीय न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप करने की जरूरत ही नहीं करनी पड़ती। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य ने जवाहर बाग में हुए घटनाक्रम पर राज्यपाल से मांग की है कि पूरे घटनाक्रम में मंत्री के दबाव में शासन व प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा हुआ था और अन्तत: पुलिस अधिकारियों की जान गई उन भू-माफियाओं को संरक्षण देने वाले श्री शिवपाल सिंह यादव को मंत्रिमंडल से तत्काल बर्खास्त किया जाये। पूरे घटनाक्रम की सी.बी.आई द्वारा जांच कराई जाये। प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मथुरा में हुई हिंसा की आयुक्त स्तरीय जांच कराने का आदेश दिया। मुख्यमंत्री ने स्वीकार किया है कि मामले से निपटने में चूक हुई है। उन्होंने कहा, ‘अतिक्रमणकारियों से बातचीत के कई बार प्रयास किए गए, उन्हें चेतावनी दी गई, लेकिन जमीन खाली नहीं कि  गयी। गलती यह रही कि पुलिस वहां पूरी तैयारी के साथ नहीं गई।

19-06-2016

इसमें पहले, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मथुरा में खूनी खेल खेलने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने नई दिल्ली स्थित पार्टी मुख्यालय में कहा, ‘उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है। मथुरा केवल एक छोटा सा शहर नहीं है। यह क्षेत्र का एक केंद्र है, जहां भारी मात्रा में हथियार तथा विस्फोटकों को इकट्ठा किया गया। स्थानीय प्रशासन को कैसे इसकी भनक नहीं लगी? इस तरह की गलती कैसे हो सकती है।’ भाजपा सचिव श्रीकांत शर्मा ने स्थिति नियंत्रण से बाहर जाने देने के लिए अखिलेश सरकार को जिम्मेदार ठहराया। शहर के जवाहर बाग क्षेत्र में हुई घटना के बाद से शर्मा मथुरा में हैं। शर्मा ने एक न्यूज एजेंसी से कहा, ‘ये समाजवादी पार्टी के बदमाश थे, जिन्होंने तीन साल पहले जवाहर बाग इलाके में अतिक्रमण किया था और पुलिस को कार्रवाई की छूट नहीं दी गई थी। यह बिल्कुल लापरवाही का मामला है।’ शर्मा ने कहा, ‘हम इस मामले की सीबीआई जांच की मांग करते हैं।’ इससे पहले, शर्मा ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में मामले की न्यायिक जांच का मांग की थी। शर्मा स्वयं मथुरा के रहने वाले हैं। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में अखिलेश सरकार के गठन के बाद से ऐसी 900 घटनाएं हुई हैं, जिनमें पुलिस को निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि यह पहली घटना नहीं है। पहले आजमगढ़ और प्रतापगढ़ में भी इस तरह की घटनाएं हुई थीं। शर्मा ने कहा कि उत्तर प्रदेश में महाजंगलराज है, जहां बदमाश पुलिसकर्मियों पर गोलीबारी करने से नहीं हिचकते हैं। मथुरा की सांसद हेमा मालिनी ने भी घटना की सीबीआई जांच की मांग की है। वह मामला महज अतिक्रमण का नहीं था, बल्कि 15 हजार करोड़ रुपये से भी ज्यादा की संपत्ति का था। गौरतलब है कि रामवृक्ष यादव बाबा जयगुरुदेव का शिष्य रह चुका है। 18 मई 2012 को जय गुरुदेव के निधन के बाद उसकी विरासत के लिए तीन गुटों पंकज यादव, उमाकांत तिवारी और रामवृक्ष के बीच टकराव हुआ था, डाईवर पंकज यादव उत्तराधिकारी बना दिया गया।

 


शिवपाल यादव से तुरंत इस्तीफा लेना चाहिए’’


19-06-2016

उत्तर प्रदेश की बदतर कानून-व्यवस्था के लिए प्रदेश की अखिलेश सरकार पर करारा प्रहार करते हुए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं कि देश की सबसे खराब कानून-व्यवस्था उत्तर प्रदेश की है। मथुरा में हिंसा को लेकर उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार को आड़े हाथों लेते हुए श्री शाह ने कहा की सपा सरकार ने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को मजाक बना कर रख दिया है। उन्होंने कहा कि दिनदहाड़े दो पुलिस अधिकारियों की गोली मारकर हत्या कर दी जाती है और मंत्री सचिवालय में बैठ कर अधिकारियों को गोली चलाने का आदेश नहीं देते। सपा मुखिया श्री मुलायम सिंह यादव पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यदि नेताजी में थोड़ी-सी भी नैतिकता है तो शिवपाल यादव से तुरंत इस्तीफा ले लेना चाहिए।

श्री शाह ने उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की सरकार को गुंडागर्दी की सरकार बताते हुए उसपर जोरदार हमला करते हुए कहा कि सरकार में लॉ एंड आर्डर नाम की कोई चीज नहीं रह गयी है, इस सरकार में लॉ एंड आर्डर का मतलब है – लो और आर्डर दो। श्री शाह ने कहा कि ये सरकार चाचा-भतीजे की सरकार है। उन्होंने कहा कि बालू खनन पर इन्होंने पूरे बुंदेलखंड क्षेत्र को लूटा है। श्री शाह ने कहा कि यूपी की जनता सपा-बसपा, बसपा-सपा के खेल से तंग आ चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जब सपा सरकार आती है तो प्रदेश में गुंडागर्दी आती है और जब बसपा की सरकार आती है तो गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार दोनों आते है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की जनता का आह्वान करते हुए कहा कि राज्य की जनता सपा-बसपा के खेल से बाहर निकले और प्रदेश के विकास के लिए एवं राज्य की जनता की भलाई के लिए पूर्ण बहुमत की भाजपा सरकार बनाए।


 


गुजरात में कत्लेआम के जिक्वमेदारों की बातों को गंभीरता से न लिया जाय’’


19-06-2016

उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री और प्रवक्ता शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि जो लोग गुजरात में कत्लेआम के जिम्मेदार हों और दंगा कराने के आरोप में जेल हो आए हों उनकी बातों को गंभीरता से नही लिया जाना चाहिए। मथुरा काण्ड पर शिवपाल सिंह यादव से इस्तीफा मांगने वाले अमित शाह के बयान पर शिवपाल सिंह यादव ने कहा कि भाजपा घटिया राजनीति पर उतर आई है। लाशों पर राजनीति  की जा रही है।

उन्होंने कहा ”अखिलेश यादव से इस्तीफा मांगने वाले लोग बताएं कि गुजरात के कत्ले आम पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल जी के कहने के बाद भी गुजरात के मुख्यमंत्री ने इस्तीफा क्यों नहीं दिया था? भाजपा के नेता तथ्यहीन आरोप लगा रहे हैं। केंद्र सरकार के पास जनता को बताने के लिए 2 साल में कोई उपलब्धि नहीं है। इसलिए भाजपा नेता उत्तर प्रदेश को बदनाम करने में जुट गए हैं।’’ उत्तर प्रदेश की जनता इनका जवाब देगी। उन्होंने कहा कि भाजपा का नया नेतृत्व खुद  दागदार है। गुजरात दंगो में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह जेल हो आए हैं। प्रदेश अध्यक्ष केशव मौर्या पर एक दर्जन से ज्यादा मुकदमे दर्ज हैं। इन सब के सरगना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार जनता के लिये दो साल में कुछ नही कर पायी।

उन्होंने आगे कहा कि मुख्य्मंत्री अखिलेश यादव द्वारा उत्तर प्रदेश में कराये जा रहे विकास कार्यों से जनता का ध्यान हटाने के लिए सुनियोजित बयानबाजी हो रही है। उन्होंने कहा कि आगामी विधान सभा चुनाव में यूपी में भाजपा का हाल बिहार से भी ज्यादा बुरा होने वाला है। शिवपाल यादव ने कहा कि मथुरा की घटना प्रशासनिक चूक का नतीजा हैं। जांच हो रही है जो दोषी होगा उसे कड़ी सजा मिलेगी। उपद्रवियों पर सख्त कार्रवाई सरकार कर रही है। बसपा प्रमुख मायावती के आरोपों का जवाब देते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि वो घर में बैठ कर बयानबाजी कर रही हैं। कभी जनता के बीच जाएं तो उन्हें अपनी असलियत पता चलेगी। जनता आज भी मायावती का कार्यकाल याद कर कराह उठती है। उन्होंने कहा कि मायावती को जनता से क्या लेना देना वो तो पार्टी का टिकट बेच कर पैसे कमाने में लगी हैं। बसपा का टिकट खरीदने वालों का पैसा डूबना निश्चित है, क्योंकि बसपा यूपी में लड़ाई से बाहर है। लोकसभा में तो खाता भी नहीं खुला था। वही स्थिति विधानसभा चुनाव में होगी।


 

जयगुरुदेव की विरासत में जमीन के अलावा 100 करोड़ नकद और 150 करोड़ की 250 लक्जरी कारें शामिल थीं। यूपीएसआईडीसी-एएसआई के कई मामलों में नामजद साल 2000 में उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास निगम (यूपीएसआईडीसी) ने मथुरा की अलग-अलग अदालतों में गुरुदेव के आश्रम पर सैकड़ों एकड़ औद्योगिक जमीन हड़पने का आरोप लगाते हुए 16 दीवानी मामले दर्ज कराए। इसी साल पुरातत्व विभाग (एएसआई) ने भी गुरुदेव के चेलों पर प्राचीन कलाकृतियों की खोज करते हुए या फिर आश्रम बनाने के दौरान ऐतिहासिक महत्व के पुरातन टीलों को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। इन मामलों पर मथुरा के तत्कालीन जिलाधिकारी संजीव मित्तल ने कहा कि उन्हें गुरुदेव के आश्रम द्वारा किसानों की जमीन पर जबरन कब्जा करने संबंधी 23 शिकायतें मिली थीं। कोर्ट ने 50 हजार का जुर्माना लगाया था। मथुरा में 2014 से लेकर 2016 तक रामवृक्ष पर 16 से ज्यादा मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं। इसने मथुरा में सैंकड़ों की जमीन पर कब्जा जमाया हुआ था।

19-06-2016

इन मामलों में पुलिस अधिकारियों पर हमला, सरकारी संपत्ति पर अवैध कब्जा करना प्रमुख है। विजयपाल तोमर नामक एक याचिकाकर्ता ने कब्जे के मामले को कोर्ट तक पहुंचाया तब जाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसे खाली करने का आदेश दिया था। कोर्ट के इस आदेश के खिलाफ रामवृक्ष यादव भी कोर्ट पहुंचा, लेकिन उसकी याचिका खारिज करते हुए कोर्ट ने 50 हजार का जुर्माना उस पर लगाया। डील के नाम पर मिली थी जवाहर बाग की जमीन। कुछ जगहों पर चर्चा यह भी है कि मूलत: बकेबर (इटावा) के निवासी बाबा जय गुरुदेव की संपत्ति लगभग 12 हजार करोड़ की थी। उसके बाद सारे माल पर कब्जा उसके ड्राइवर पंकज ने कर लिया। जाहिर तौर पर यह ड्राइवर के कंधे पर रखकर बंदूक चलाने की बात में दम इसलिए नजर आने लगी कि प्रशासन मौन था।

प्रशासन के मौन होने से रामवृक्ष नाराज हो गया, उसने सबकुछ खत्म कर देने की चेतावनी दी तब डील के नाम पर जवाहर बाग की 300 एकड़ जमीन दी गयी थी। यह जमीन पाकर ही रामवृक्ष शांत हुआ था। वरना बाबा की मौत का सर्टिफिकेट मांग कर नाक में दम किए था। भारतीय जनता पार्टी ने प्रदेश भर में जवाहर बाग मथुरा का सच समाने लाये सरकार की मांग को लेकर राज्य भर में प्रदर्शन किया, राज्यपाल को सम्बोधित ज्ञापन दिया गया। राज्य के अधिकांश जिलों में बड़ी संख्या में प्रदर्शन कर मांग की गयी कि जवाहर बाग (मथुरा) के पूरे घटनाक्रम की सीबीआई जांच कराई जाये। चिंतन सभा के अध्यक्ष दीपक मिश्र ने कहा कि एक राष्ट्रीय दल के अध्यक्ष को बिना किसी प्रमाण व तथ्य के ऐसी हल्की बात सार्वजनिक रूप से नहीं कहनी चाहिए, इससे राजनीति की गरिमा व गुरुत्व का अवमूल्यन हुआ है।

सुरेन्द्र अग्निहोत्री

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