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”राष्ट्रीय दामाद’’ के कारनामे

”राष्ट्रीय दामाद’’ के कारनामे

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा के लंदन के महंगे ब्रायनस्टन स्क्वायर में 19 लाख पांउड की कीमत वाले एक अपार्टमेंट की खबरों से राष्ट्रीय राजनीति में फिर पारा चढ़ गया है। भाजपा फौरन आक्रामक हो उठी और उसने गांधी परिवार तथा कांग्रेस पार्टी दोनों पर हमले शुरू कर दिए।

इस पर कांग्रेस अध्यक्ष तथा रॉबर्ट वाड्रा की सास सोनिया गांधी ने भी फौरन आक्रामक मुद्रा अपना ली क्योंकि बचाव का यही सबसे बेहतर तरीका है। उन्होंने अपने वफादार कार्यकर्ताओं के सामने कहा, ”नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री हैं, कोई शहंशाह नहीं। निष्पक्ष जांच करा लीजिए, दूध का दूध निकल जाएगा, पानी का पानी रह जाएगा।’’ इस तरह सोनिया ने अपनी ही दलीलें कुछ कमजोर कर ली हैं।

हालांकि ऐसी साहसिक मुद्रा अपनाने की वजह है। सूत्रों के मुताबिक कथित अपार्टमेंट को 2 लाख पाउंड के मुनाफे पर दोबारा बेच दिया गया था। इससे, अगर अटकलों पर यकीन करें तो वाड्रा की संपत्ति तीन अरब से ज्यादा की हो गई है। इसलिए सोनिया जानती हैं कि ज्यादा कुछ नहीं किया जा सकता। वाड्रा के वकील भी दो-टुक कह सकते हैं कि उन्होंने ब्रायनस्टन स्क्वायर का अपार्टमेंट प्रत्यक्ष या परोक्ष तरीके से नहीं खरीदा है।

लेकिन, अगर यह सही है कि वाड्रा ने ब्रायनस्टन स्क्वायर में कोई जायदाद किसी ट्रस्ट या लंदन स्थित किसी शख्स, कथित तौर पर हथियार सौदागर संजय भंडारी के जरिए खरीदी, और अगर उसे बेच भी दिया गया तो भी वक्त बीतने से उन नियमों के उल्लंघन से नहीं बचा जा सकता, जो ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) और आईटी (आयकर) के जरिए तय किए गए हैं। वाड्रा ईडी, आईटी और दूसरी राजस्व एजेंसियों के शिकंजे में  घिर चुके हैं। ब्यौरे भले आधे-अधूरे हों लेकिन आयकर विभाग के अधिकारियों ने भंडारी के विभिन्न कार्यालयों और जायदाद पर छापा मारा तो पर वाड्रा और उनके स्टाफ के साथ संजय भंडारी के 200 ईमेल के आदान-प्रदान का पता चला है।

नियति भी अजीबोगरीब तरीके से घेरती है। वाड्रा के कथित सौदे से ही संजय भंडारी के साथ उनकी दोस्ती की हदों की जानकारी नहीं मिलती, दिल्ली की एक कंपनी के साथ एक डीलर के 116 करोड़ रु. की एक लेनदेन का पता चला है और यह सीधे संजय भंडारी से जुड़ी हुई है।

एनडीटीवी की एक रिपोर्ट में आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय के भंडारी के 18 ठिकानों पर छापे की शुरुआती रिपोर्ट के के हवाले से बताया गया, ” ईमेल कथित तौर पर रॉबर्ट वाड्रा और उनके सहयोगी मनोज अरोड़ा ने लंदन स्थित सुमित चड्ढा को भेजे हैं, जो  संजय भंडारी के रिश्तेदार हैं। इसकी सत्यता की पुष्टि नहीं की जा सकी है। हालांकि कथित तौर पर राबर्ट वाड्रा और उनके सहयोगी ने ईमेल में लंदन के घर (12 एल्लर्टन हाउस, ब्रायनस्टन स्क्वायर) के भुगतान और नए सिरे से मरम्मत का जिक्र किया है, जिसे 19 लाख ब्रिटिश पाउंड (करीब 19 करोड़ रुपए) में अक्टूबर 2009 में खरीदा गया और जून 2010 में बेच दिया गया।’’

एक ईमेल में रॉबर्ट वाड्रा ने कथित तौर पर चड्ढा को जवाब दिया कि ”वे इस मुद्दे पर गौर करेंगे।’  और उनके ”सचिव’’ मनोज अरोड़ा ”संपर्क में’’ रहेंगे। और इसके बाद से, चैनल के मुताबिक, अरोड़ा  ”एक्जिम रियल एस्टेट’’ नाम की ईमेल आईडी से चड्ढा के संपर्क में रहने लगे।

एनडीटीवी को रॉबर्ट वाड्रा के वकील ने बताया कि वाड्रा प्रत्यक्ष या परोक्ष किसी भी प्रकार से किसी ऐसे घर के मालिक नहीं हैं जिसे आपने 12, एल्लर्टन हाउस, ब्रायनस्टन स्क्वायर, लंदन बताया है और यह भी कि वाड्रा और उनके सहयोगी ”संजय भंडारी से किसी भी प्रकार की वित्तीय लेन-देन से जुड़े नहीं हैं। वे यह भी नहीं जानते हैं कि संजय भंडारी किसी भी प्रकार के रक्षा सौदे से जुड़े रहे हैं।’’

इंडियन एक्सप्रेस और एनडीटीवी के मुताबिक भंडारी ने अपनी कंपनी ऑफसेट इंडिया सॉल्यूशन (ओआईएस) 2008 में बनाई थी, जिसका कारोबार तेजी से बढ़कर करोड़ों रुपए का हो गया. हालांकि 2014 में इसका कारोबार रुक गया (सत्ता में नई सरकार के आने के बाद)। हालांकि ओआईएस को हाल ही में 38 लड़ाकू विमान के पाट्र्स की आपूर्ति का सौदा मिला है है जिसे भारत डसॉल्ट एविएशन से खरीद रहा है। एनडीटीवी के मुताबिक 2009-2014 के बीच भंडारी की संदिग्ध कंपनियों के जरिए कथित वित्तीय लेनदेन में गैर-कानूनी पहलुओं की जांच चल रही है।

19-06-2016हालांकि कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने एनडीटीवी की रिपोर्ट को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, ”हमें वाड्रा की ओर से एक प्रारंभिक ईमेल मिला है जिसमें कहा गया है कि इनमें एक भी आरोप सही नहीं है। उन्हें ईडी या आईटी किसी की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है। यह रिपोर्ट गलत सूचना पर आधारित है। यह सरकार के दुष्प्रचार का ही एक नया शोशा है जो जानबूझकर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करता है इसलिये हम सरकार के ऐसे प्रयासों की निंदा करते हैं।’’

चाहे वाड्रा मामले में दोषी पाये जाएं या नहीं लेकिन, एक पुरानी कहावत है कि आदमी का चरित्र उसके संगी-साथियों से जाना जाता है। इस बात में वाकई दम है। रॉबर्ट वाड्रा कानून का पालन करने वाले स्वच्छ और ईमानदार व्यक्तियों की सूची में काफी नीचे की ओर ही जगह पाएंगे। आयकर विभाग की जांच में पता चला है कि रॉबर्ट वाड्रा लंदन निवासी संजय भंडारी के साथ दोस्ताना संबंध रखते हैं जो हथियार सौदगरों की दुनिया से जुड़ा है।

वाड्रा को सावधान रहना चाहिए और भंडारी जैसों से संबंध बनाने से बचना चाहिए। आखिर उनकी शादी ऐसे परिवार में हुई जिसमें कई प्रधानमंत्री हो चुके हैं। उन्हें इससे सिर्फ विशेषाधिकार ही नहीं, कुछ दायित्व भी हासिल हुए हैं, जिसे उन्हें पूरा करना चाहिए।

प्राप्त जानकारी के आधार पर आईटी विभाग ने विदेशों में मौजूद सात संपत्तियों और बैंक ब्यौरे की जानकारी मांगी है। अगर यह रिपोर्ट वाड्रा के प्रतिकूल आती है तो वे लंबे पचड़े में फंस सकते हैं। संदिग्ध भूमि सौदों और डीएलएफ के साथ उनके कथित संबंधों की खबरों के बाद से वाड्रा की प्रतिष्ठा धुमिल हुई है लेकिन सोनिया गांधी के दामाद होने के नाते मीडिया और बुद्धिजीवी उन्हें बख्श देते हैं।

उन्हें प्राप्त यह संरक्षण कांग्रेसियों के उस बयान को बेमानी बना देता है कि वाड्रा एक निजी व्यक्ति हैं, जिनके क्रियाकलापों के लिये पार्टी जिम्मेदार नहीं है। विडंबना यह है कि वाड्रा को लेकर जब भी कोई नया घोटाला सामने आता है तो कांग्रेस के प्रवक्ता यही दलील देते हैं कि वे एक निजी व्यक्ति हैं। लेकिन नाराज सोनिया ने ब्रायनस्टन स्क्वायर के घोटाले को एक साजिश करार दे दिया है।  इस तरह सोनिया ने इस बात का एक तरह से खंडन कर दिया है कि वाड्रा एक निजी व्यक्ति र्है।

यानी वाड्रा इतने भी निजी नहीं हैं। वे जब चाहे राजनीति से जुड़ सकते हैं, और भारतीयों को पूरा हक है कि उनके अतीत, वर्तमान और शायद भविष्य को भी जानें। हो सकता है कि वह मुरादाबाद की गलियों में पीतल करोबारी के यहां जन्मे हों। लेकिन रॉबर्ट वाड्रा एक चतुर और चालाक व्यक्ति हैं, जो एक गरीब पिता के घर में जन्म लेने के  बाद भी जल्द ही अपने दुर्दिन से उबर गये। यह चुनना उनके हाथ में नहीं था कि वे किस परिवार में जन्म लें, हां लेकिन यह जरूर उनके हाथ में था कि वे एक धनी परिवार के दामाद बनने की कोशिश करें। वाड्रा अच्छी तरह से जानते थे कि वं क्या चाहते हैं और उसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं।  वरदानस्वरूप उन्हें एक ऐसी पत्नी मिली जो भारत की सबसे खूबसूरत औरतों में एक हैं और उन्हें विशेषाधिकार भी प्राप्त है। कुछ लाख को करोड़ में और करोड़ को अरबों में तबदिल करना उनके लिये कोई मुश्किल काम नहीं है, तो वे वाड्रा के लिये इतना तो कर ही सकती हैं। इसके लिये उन्हें केवल कुछ कुशल और चतुर दिमाग के कांग्रेसी मुख्यमंत्री और नौकरशाहों की जरूरत है।

खैर, रॉबर्ड वाड्रा एक सफल व्यवसायी बन गये हैं और निजी व्यक्ति भी हैं, इसलिये उनकी सास सोनिया गांधी के द्वारा नियंत्रित किये जा रहे लोग उन्हें और उनके व्यवसाय को छू भी नहीं सकते हैं। और अधिक कमाई करने के लिये पैसे वाले को पैसे वाले से प्यार करना पड़ता है। इसलिये वे चतुर व्यक्ति हैं, जो कहते हैं कि भारतीय हमें पसंद करते हैं। ऐसे मूर्ख लोगों पर वाड्रा की सास ‘बनाना रिपब्लिक’ (जहां कोई कानून मान्य न हो) में राज करती हैं। शायद इसीलिये उन्होंने बड़े रियल्टर को व्यापार के भागीदार के रूप में चुना है और डीएलएफ के साथ भी कुछ सौदों पर हस्ताक्षर किये हैं।

राष्ट्रीय दामाद होने के नाते वाड्रा को कांग्रेस अध्यक्ष और पूर्व के प्रधानमंत्रियों द्वारा सभी विशोषाधिकारों का आनंद उठाने का मौका प्राप्त हुआ। उन्होंने सभी तरह के भत्तों का और विशोषाधिकारों का आनंद तो लिया ही, साथ ही ज्यादा खुशी तो इस बात की है कि बिना किसी जिम्मेदारी के वे पैसा भी कमा रहे हैं और विशोषधिकारों का प्रयोग भी कर रहे हैं।

अब ताजा खुलासों के मुताबिक वाड्रा भी लंदन की अचल संपत्ति के कारोबार को बढ़ा रहे हैं। अब तो अफवाह यह भी फैली है कि वाड्रा ने अपने लंदन स्थित घर को 2 लाख पाउंड के लाभ के साथ बेच दिया है। अभी तक उन्होंने जो भी घोटाले किये हैं उससे बहुत से उल्लंघन हुए हैं। जिसकी जांच की शुरुआत विभिन्न एजेंसियों द्वारा हो चुकी है।

वैसे भी देश के हर दूसरे नेता का कहना है कि कानून अपना काम करेगा और सभी जानते हैं कि इस काम के निष्कर्ष तक पहुंचने में एक लंबा समय लग जायेगा। वास्तव में भारतीय न्यायपालिका में न्याय प्रणाली की जो मंद गति है वह बेहद भरोसेमंद पहलू है क्योंकि वह हमारे नेताओं पर आश्रित है। और नेहरू-गांधी परिवार है कि वह स्वतंत्र भारत का अनैतिकतापूर्ण पथप्रदर्शन करता है। यह अपराधियों को बेगुनाह साबित करने की कोशिश में नहीं रहता है, लेकिन दूसरे तरीकों से यही करता है। इस विसंगत तर्क पर बहस की वजह से बोफोर्स मामला फाइलों तक ही सीमित रह गया है। लेकिन जब घोंघे की गति से चलने वालों ने थोड़ी दूरी तय की तो कांग्रेस के पहले परिवार को सदमा जरूर लगा, जब उन्हें नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत में उपस्थित होने के लिये कहा गया। सोनिया तभी से गुस्से में है और अपने गूढ़ व्यक्तित्व को चुप्पी की तरह ही छोड़ दिया है।

जब अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला मामले में सोनिया गांधी को दोषी ठहराते हुए टिप्पणी की गई थी तो वे गरज उठी थीं और कहा कि इटली में एक जज के द्वारा की गई टिप्पणी से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता है। एक संसद सत्र में बाधा पडऩे के बाद उन्होंने अपनी कृपा का प्रदर्शन करते हुए सरकार को इस बात की इजाजत दी कि वे घोटले की जांच कर सकती है।

19-06-2016

यूपीए सरकार ने वेस्टलैंड पर आदेश को रद्द कर दिया। लेकिन एक बात से न तो सोनिया गांधी और न ही उनके ‘स्वच्छ’ रक्षा मंत्री इनकार कर सकते हैं कि आखिर रिश्वत का भुगतान किसके लिये  किया गया था? और किसको किया गया था? पूछताछ में सोनिया गरजते हुये बोलीं कि दो साल के लिये घोटाले को उजागर नहीं किया जा सकता। और ऐसा लग रहा है कि केन्द्र सरकार घोटाले की जांच करने में उनकी सलाह को  थोड़ी-बहुत गंभीरता से ले रही है। कहीं न कहीं अंधेरे में सच्चाई को सामने लाने के लिये कभी-कभी कुछ ऐसे सुराग मिल जाते हैं जिससे जांच की दिशा ही बदल जाती है।

जिस तरह से जांच की दिशा बदली है जिस तरह से सबूतों को सामने रखा गया, उससे तो साफ जाहिर होता है कि हेलिकॉप्टर घोटाले में जिसकी जांच-पड़ताल की जा रही थी वही व्यक्ति राष्ट्रीय दामाद के साथ भी रियल स्टेट के व्यवसाय में लगा हुआ था। जाहिर है कि कुछ ई-मेल जांच एजेंसियों के कब्जे में आ गई जिससे इस बात का खुलासा हो सका।

एक बात तो पुख्ता हो जाती है कि इन सभी घोटालों के बाद किसी भी जोखिम के लिये कांग्रेस की प्रतिक्रिया तुरंत और स्पष्ट रूप से सामने आ जाती है जो कि पहले संभव नहीं होती थी। रॉबर्ट वाड्रा के वकील ने उन पर लगे इस आरोप से इनकार किया है कि लंदन में उनके पास कोई संपत्ति मौजूद थी। इस मामले के बिचौलिए ने वाड्रा के इस संपत्ति के स्वामित्व से इनकार नहीं किया है। लेकिन इस बात की पुष्टि करने से पहले दस्तावेजों को सत्यापित करना चाहता था। लेकिन ईमेल में उसने वाड्रा से इस संपत्ति के रख-रखाव के लिये शुल्क की मांग की है। इससे यह साबित नहीं होता कि उनके बीच मित्रवत रिश्ते नहीं हैं।

लेकिन एक बार फिर से अपने मौन से बाहर आकर  ‘सास’  गरजना करते हुए कहती हैं कि ‘कभी ऐसा नहीं देखा…वे प्रधानमंत्री ही हैं…शहंशाह नहीं।’

”रोज…रोज कांग्रेस मुक्त भारत के लिये नया मुद्दा उठाते हैं। रोज गलत इल्जाम लगाते हैं। अगर कुछ गलत है तो बिना भेद-भाव के जांच करो। दूध का दूध और पानी का पानी करो।’’

वे कहती हैं कि मोदी सिर्फ प्रधानमंत्री हैं शहंशाह नहीं, एक बार तो वे सही ही कह रही हैं। अगर वे रानी हैं तो कैसे मोदी के पास गद्दी खाली हो सकती है।

एक बात तो अद्भुत है कि पार्टी जोकरों की टोली के साथ जर्जर हालत में पहुंच चुकी है। बावजूद इसके सोनिया की तुलना में दूसरी कोई और शक्तिशाली नहीं है। हां, वो सोनिया ही हैं जो किसी भी उस चीज का बलिदान कर सकती हैं जो उनका नहीं है। लेकिन मौजूदा जांच में एक बात तो स्पष्ट हो जाती है कि कांग्रेस इस जांच से बुरी तरह से हिल गई है।

लेकिन कहा जा सकता है कि सच्चाई कल्पना से कोसो दूर है। यह कभी-कभी शर्मनाक क्षणों के रूप में उभर कर सामने आ जाती है। अभी हाल ही में जांच के दौरान एक दूसरी खबर सामने आ रही है कि राष्ट्रीय दामाद रॉबर्ट वाड्रा की बेनामी संपत्तियों में दुबई में मौजूद 24 करोड़ की एक संपत्ति भी  है।

यह समय है जब रानी साहिबा अपने दामाद को सलाह दे रही हैं कि चतुर व्यक्ति हर किसी को हमेशा के लिये बेवकूफ नहीं बना सकते हैं। शायद यही कारण है कि वाड्रा ने फास्ट ट्रैक पर ब्रिटेन के लिये पासपोर्ट के लिये आवेदन किया है। भूमध्य सागर के द्वीपों में आलीशान बंगला उनका इंतजार कर रहा है, जहां जैतून के पेड अपने फलों के वजन से झुके जा रहे हैं। गलत हरकतों के बोझ के साथ वाड्रा भी आराम से वहां रह सकते हैं।

विजय दत्त

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