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”कांग्रेस इतिहास से छेड़छाड़ की आदतन अपराधी’’

”कांग्रेस इतिहास से छेड़छाड़ की आदतन अपराधी’’

राजस्थान के शिक्षा मंत्री प्रो. वासुदेव देवनानी से विशेष बातचीत

हम मुख्यंमत्री वसुंधरा राजे के संकल्प के अनुरूप स्कूली शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए आवश्यक कदम उठाकर राजस्थान को शिक्षा की दृष्टि से देश के दस अग्रणी राज्यों की पंक्ति में लाने के उद्देश्य से काम कर रहे हैं। जहां तक पाठ्यक्रम में परिवर्तन का सवाल है तो कांग्रेस इतिहास से छेड़छाड़ की आदतन अपराधी है। उसे जब भी शासन में आने का मौका मिलता है तब पार्टी आलाकमान की नजरों में अपने नंबर बढ़ाने के लिए पाठ्यक्रम में बदलाव करती रही है। पिछले दशक में कांग्रेस शासन ने बदनीयती से पाठ्यक्रम में फेरबदल किया है। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से आदेश जारी करवाकर पाठ्यपुस्तकों से महापुरुषों के नाम काटे गये, किताबों के पन्ने फाड़े गये तथा उनपर काली स्याही पोती गई। हमने सामाजिक समरसता, पंथनिरपेक्षता एवं राजनैतिक बंधनों से मुक्त नवीन पाठ्यक्रम देने का विनम्र प्रयास किया है जो युगानुकूल एवं देशानुकूल है तथा संस्कृति, संस्कार और राष्ट्रीय भाव के समावेश पर बल देता है। महात्मा गांधी, पं. जवाहरलाल नेहरू को पाठ्यक्रम में रखते हुए हमने हटाया कुछ नहीं बल्कि जोड़ा है। यह पाठ्यक्रम राष्ट्रीय गौरव को बढ़ाने वाला, देश तथा प्रांत के वीर-वीरांगनाओं का सही इतिहास बताने, भारतीय संस्कृति पर गर्व की अनुभूति देने वाला है। भारतीय तरुणाई के प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद के दर्शन के अनुरूप पाठ्यक्रम में परिवर्तन शिक्षा के भारतीयकरण की दिशा मे प्रयास है जो हर विद्यार्थी को श्रेष्ठ नागरिक, सच्चा देशभक्त बनने की प्रेरणा देगा। वर्ष 2016-17 के शिक्षा सत्र के लिए पहली से नौवीं कक्षा तथा ग्यारहवीं कक्षा का पाठ्यक्रम बनाया गया है। अगले शिक्षण सत्र में दसवीं एवं ग्यारहवीं कक्षा का पाठ्यक्रम परिवर्तित किया जाएगा,’’ राजस्थान के शिक्षा राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रो. वासुदेव देवनानी ने उदय इंडिया से बातचीत में और भी बहुत कुछ विस्तार से बताया।

पाठ्यक्रम में फेरबदल के मामले में कांग्रेस के भगवाकरण के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि विद्यार्थी अपने गौरवशाली अतीत, लोकरंग एवं संस्कृति से जुडेंग़े। हमने पाठ्यक्रम में व्याप्त विसंगतियों को दूर करके इसे अद्यतन किया है। इसे भगवाकरण कहना अनुचित है। भगवा त्याग, समर्पण का प्रतीक है। हमारी अवधारणा स्पष्ट है-सकंल्प भारतीय विचार का। सुनहरे कल और सुराज का। वर्षों तक उदयपुर में एक प्रमुख शिक्षण संस्थान के प्राचार्य रहे प्रो. वासुदेव देवनानी ने दो वर्षो में राज्य के शिक्षा जगत में अर्जित ठोस उपलब्धियों की विवेचना करते हुए दावा किया है कि सरकारी विद्यालयों में पढ़ाई का वातावरण बना है तथा अभिभावकों का विश्वास लौटने लगा है। शिक्षकों के सहयोग से गुणात्मक शिक्षा की दिशा में कदम बढ़ाने से परीक्षा परिणाम में वृद्धि हुई है तथा सरकारी स्कूलों के परीक्षार्थी माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान की मेरिट सूची में आये हैं।

पाठ्यक्रम में परिवर्तन की आवश्यकता के संदर्भ में प्रो. देवनानी ने कहा कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने शैक्षणिक सत्र 2009-10 के मध्य सत्र में आदेश जारी कर पाठ्यक्रम में भारी फेरबदल किया। पाठ्यपुस्तकों से देश और प्रदेश की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक विविधता को तिरोहित कर दिया गया। तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री के एकांकी एजेंडे को लागू करने की नीयत से राजस्थान की आवश्यकताओं को समझे बिना सत्र 2010 से प्रदेश में एनसीईआरटी की पाठ्य-पुस्तकों को लागू कर दिया गया। इससे विद्यार्थी स्थानीय परिवेश, संस्कृति तथा वीर-वीरांगनाओं, संतों, महापुरुषों के जीवन से रू-ब-रू होने से वंचित रह गए। उनपर पाठ्यक्रम का अनावश्यक बोझ लाद दिया गया। माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान अजमेर के 6 नवंबर 2009 को जारी आदेश का खुलासा करते हुए शिक्षा मंत्री ने कहा कि सारा पाठ्यक्रम असंतुलित-सा हो गया और ऐसा लगने लगा कि पाठ्यक्रम एक परिवार की बिरदावली मात्र है। उदाहरण के तौर पर कक्षा सातवीं से ग्यारहवीं तक की पुस्तकों में प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू का पन्द्रह बार उदाहरण दिया गया है। हमने इसे युक्तिसंगत बनाया है। नये पाठ्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, चन्द्रशेखर, पी. वी. नरसिंह राव, इन्द्र कुमार गुजराल, एच.डी. देवेगौड़ा, अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी का नाम शामिल किया है। अकबर महान की तरह महाराणा प्रताप, महाराजा सूरजमल, दुर्गादास राठौड़, वीर सावरकर, हेमू कालानी सहित अनेक क्रांतिवीरों, आचार्य चाणक्य, महर्षि कणाद, आधुनिक युग के विद्वजनों, एकात्म मानववाद के प्रणेता पं. दीनदयाल उपध्याय, वैज्ञानिक  होमी जहांगीर भाभा, डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के विचारों का पाठ्यक्रम में समावेश किया गया है।

पाठ्यक्रम के मामले में तत्कालीन सरकार की जल्दबाजी तथा सोच का उदाहरण देखिए। पाठ्यक्रम एवं शिक्षा बोर्ड की पुस्तकों में परिवर्तन-संशोधन के लिए 30 अप्रैल 1999 को समिति गठित की गई। समिति ने 2 जून को अंतिरम रिपोर्ट दी तथा 4 जून 1999 को तत्कालीन शिक्षा मंत्री की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक में आननफानन पाठ्यक्रम तथा पुस्तकों में परिवर्तन संबंधी निर्णय लिए गए। इसके अनुसार कक्षा 11 की राजनीति विज्ञान की पुस्तक में पं. दीनदयाल उपाध्याय का संक्षिप्त परिचय, राजनीतिक विचार एवं योगदान को हटाकर पंडित जवाहर लाल नेहरू को जोड़े जाने का निर्देश दिया गया। रामायण के प्रमुख चरित्र राम-लक्ष्मण का उल्लेख भी सरकार को नहीं भाया। कक्षा 10 की संस्कृत पुस्तक के पृष्ठ क्रमांक 124 पर ”भ्राता-लक्ष्मण रामस्य भ्राता’’ के स्थान पर ”श्याम रामेशस्य भ्राता’’ शब्द लिखने का आदेश जारी किया गया। आश्चर्यजनक बात यह है कि तत्कालीन सरकार को संघ शब्द से इतनी चिढ़ थी कि वेद में लिखे वाक्य ”संघे शक्ति…को संगठने शक्ति…’’ के रूप में प्रयुक्त करने के आदेश दिए गए। कक्षा ग्यारह की राजनीतिक विज्ञान की पुस्तक में क्रांतिकारियों के अदम्य साहस को दर्शाती ”हम दिन चार न रहे …’’ पंक्तियों तथा वीर दामोदर सावरकर पाठ को विलोपित किया गया, जिस राष्ट्रभक्त को अंग्रेज सरकार ने काले पानी की सजा सुनाई। राजस्थान से गहरे संबंध रखने वाले प्रतिहार चौहान, चंदेल परमार, सोलंकी वंश के साथ मेवाड़ के गौरवपूर्ण अध्याय तक को हटाया गया। भरतपुर के खानवा में बाबर तथा राणा सांगा के युद्ध को भी इतिहास से हटाने में शासन ने संकोच नहीं किया।

शिक्षा मंत्री ने पिछले दो वर्षों में शिक्षा क्षेत्र में अर्जित उपलब्धियों का विस्तृत विवरण दिया। स्कूलों का एकीकरण करके एक ही ग्राम पंचायत में कक्षा एक से बारहवीं तक एक आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय तथा एक उत्कृष्ट प्रारम्भिक शिक्षा का विद्यालय बनाया गया है, जिसमें आधारभूत ढांचा, खेल मैदान, सम्पूर्ण स्टाफ, कम्प्यूटर सहित अन्य भौतिक सुविधायें उपलब्ध कराई गई है। कर्नाटक, महाराष्ट्र तथा मध्य प्रदेश आदि राज्यों में भी इसका अनुसरण हुआ है। स्टाफ पैटर्न के तहत विद्यार्थी-शिक्षकों के अनुपात में पदों का सृजन किया गया है। इससे सुदूर गांवों तक में शिक्षकों की कमी, विषयानुसार शिक्षक लगाने की व्यवस्था हुई है। इसी तरह सेट-अप परिवर्तन के तहत पंचायत विभाग से शिक्षा विभाग में काउंसिलिंग द्वारा शिक्षा विभाग को विषय के अनुरूप अध्यापक मिलने की व्यवस्था की गई है। यह मसला 17 वर्षों से लंबित था। इससे शिक्षा की गुणवता में सुधार होगा। अध्यापक अपने इच्छित स्थान पर शिक्षण करेंगे। सीबीएससी बोर्ड के अनुरूप विद्यालयों की समयावधि सर्दी-गर्मी में पांच या साढ़े पांच घंटों की जगह सवा छह घंटे की गई इससे बच्चों की अधिक पढ़ाई होगी। इसका विरोध करने वाले शिक्षकों से बातचीत की गई और पढ़ाई का सहज वातावरण बन गया। तत्कालीन केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री की योजना से आठवीं तक विद्यार्थियों को फेल नहीं करने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हुई। अब जिलास्तर पर पांचवीं तथा आठवीं कक्षा के स्तर पर बोर्ड बनाकर परीक्षा लेने की व्यवस्था की गई। पिछले आठ-दस वर्षों से पदोन्नति की आस लिए शिक्षकों की विभिन्न स्तरों पर पांच सौ से अधिक डीपीसी (विभागीय पदोन्नति समिति) की बैठकें आयोजित कर 65 हजार से अधिक शिक्षकों को पदोन्नति दी गई। गत दो वर्षों में सभी वर्गों की नौवीं कक्षा की लगभग साढ़े पांच लाख छात्राओं को नि:शुल्क साइकिल वितरित की गई। इस पर प्रतिवर्ष अस्सी करोड़ रुपये का खर्चा हुआ है। आठवीं, दसवीं तथा बारहवीं कक्षा में बोर्ड स्तर पर मेरिट में आने वाले लगभग 54 हजार छात्र-छात्राओं को लैपटॉप दिए गए। पहली बार विद्यालयों में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय का निर्माण कराया गया। इससे विशेषकर छात्राओं का दाखिला बढ़ा है। पिछले तीन वर्षों में दाखिले में चार लाख की कमी को पूरा करते हुए इस साल 8 लाख दाखिला बढ़ा है। बोर्ड की परीक्षाओं में सरकारी विद्यालयों के परीक्षा परिणाम में 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बारहवीं कक्षा कला वर्ग की योग्यता सूची में सरकारी विद्यालय के छात्रों ने प्रथम एवं तृतीय स्थान प्राप्त किया है। जिला स्तर पर 124 मेरिट आई है। कला वर्ग में निजी विद्यालयों के परीक्षा परिणाम 88.15 प्रतिशत की तुलना मे सरकारी विद्यालयों का परिणाम 88.24 प्रतिशत रहा है। विज्ञान वर्ग में परिणाम सात फीसदी बढ़ा है। वाणिज्य में मेरिट सूची में चौथा स्थान मिला है। प्रदेश में 186 मॉडल स्कूल बनाने हैं। इनमें 71 शुरू हो गये है तथा 63 के भवन निर्माणाधीन है।

शिक्षा मंत्री ने शिक्षकों से कहा कि शिक्षक समाज को बदल सकता है। शिक्षक समाज को दिशा देता है। आप जिस विद्यालय में कार्यरत है वहां मनसा बचा कर्मणा शैक्षिक गुणवत्ता के लिए काम करें। हम राजस्थान में ऐसी शिक्षा देंगे कि यहां पढऩे वाले बच्चे को, चाहे वह किसी भी जाति, धर्म, मजहब का हो, कोई उसे बहला-फुसला नहीं सकता। वह गर्व के साथ भारत माता की जय बोलेगा। यही शिक्षा का उद्देश्य भी है। हम बिलाशक राज्य को शिक्षा के क्षेत्र में अगली कतार होंगे।

जयपुर से गुलाब बत्रा  

journal of traffic and transportation engineeringдепутат лобановский

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