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चुनावी बिसात का मोहरा बना कैराना

चुनावी बिसात का मोहरा बना कैराना

उत्तर प्रदेश में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। हर पार्टी सबसे बड़ी आबादी वाले इस प्रदेश के तख्त पर अपने दावे के साथ चुनाव अभियान शुरू कर चुकी है। पूरे प्रदेश में हर रंग का झंडा लहराने लगा है। हर तरफ नारेबाजी शुरू हो गई है क्योंकि इस प्रदेश के चुनाव से देश की दिशा तय होती है। हर पार्टी अपने-अपने ढंग से उत्तर प्रदेश के किले पर अपना झंडा फहराने की कोशिश में लगी हुई है। संगम की भूमि उत्तर प्रदेश में अनेक रंग, जाति, धर्म, भाषा और समुदाय बसते हैं। ये सब जब तक एक साथ रहते हैं, तब तक विकास का झंडा ही सबसे ऊंचा होता है। लेकिन, जब ये अलग-अलग ध्रुवों में बंट जाते हैं, तो फिर दंगा, मातम, भ्रष्टाचार और अपराध का साम्राज्य बनता है। ऐसे में प्रदेश में शामली के कैराना से हिन्दुओं के पलायन को लेकर सियासत गरमा गई है। दरअसल कथित रूप से पिछले कुछ दिनों में यहां से हिन्दुओं  के तेजी से पलायन की खबरें आनी शुरू हो गईं। इसके बाद इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश शुरू हो गई। भाजपा का कहना है कि समाजवादी पार्टी के एक नेता की यहां के एक वर्ग के लोगों को खास शह मिली हुई है और दूसरे वर्गों को परेशान किया जा रहा है। हिंदू परिवारों के पलायन का मुद्दा एक बार फिर अखिलेश सरकार और उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। कैराना में कथित रूप से बढ़ते अपराध के चलते 346 हिंदू परिवारों ने गांव से पलायन किया। पलायन के पीछे का सच जानने के लिए कांग्रेस भी जांच की बात कर रही है। हालांकि, कांग्रेस का मानना है कि इसके जरिए भाजपा हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश में है, ताकि अगले वर्ष उत्तर प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव में फायदा उठाया जा सके।

मामला आगे बढ़ते देख राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक को दखल देना पड़ा। मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को नोटिस भेजकर चार हफ्ते के अंदर जवाब की मांग की है। दूसरी तरफ, भाजपा ने 9 सदस्यीय जांच समिति बनाकर सियासी गरमाहट और बढ़ा दी है। गौरतलब है की भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने हाल ही में दावा किया है कि, उन्होंने कैराना से पलायन करने वाले हर घर का सत्यापन किया है। सिंह ने एक सूची जारी करते हुए कैराना में बढ़ते अपराध, गुंडागर्दी, धमकी और लूटपाट का हवाला दिया है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार के कार्यकाल में पलायन करने वालों की संख्या में इजाफा हुआ है। भाजपा की टीम ने अपनी जांच की रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के राज्यपाल को सैंपते हुए हुकुम सिंह के दावों को सही माना है, लेकिन वहीं हुकुम सिंह ने बाद में यह सफाई भी दी कि शायद मामला सांप्रदायिक न हो कर केवल आपराधिक हो। हालांकि, राज्य सरकार पूरे मुद्दे को तथ्यहीन करार देकर इस मुद्दे के पीछे की गंभीरता को साफ नकारती दिखती है।

हकीकत यह है कि कैराना में न तो कोई कानून-व्यवस्था है और न ही जीवन यापन के लिए कोई रोजगार। अगर कुछ बच गया है तो बस अपराध और भ्रष्टाचार का तंत्र। सरेआम हत्या और लूट यहां आम बात है। कारोबार के नाम पर यहां कुछ भी नहीं हो पाता। लोग आपराधिक घटनाओं से इस कदर परेशान हैं कि यहां अपने घर को छोड़कर पड़ोस के शहरों में जा कर बस रहे हैं और अपना गुजर-बसर कर रहे हैं। इन सब आरोप-प्रत्यारोपों के बीच हमें मामले की गंभीरता को समझना ही होगा, क्योंकि धार्मिक कारणों की बात को नाकार भी दिया जाए तो भी कैराना में बढ़ते अपराध की रोकथाम तो होनी ही चाहिए। लेकिन,राज्य सरकार इस मामले में पूरी तरह नाकाम दिखाई दे रही है। कानून-व्यवस्था की जो भी स्थिति हो, लेकिन इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि उत्तर प्रदेश की सपाई सरकार अपने मुस्लिम तुष्टीकरण के एजेंडे पर बड़े बारीकी से काम कर रही है। गाहे-बगाहे उनके आला मंत्री हिन्दू विरोधी या यूं कहें देश विरोधी वक्तव्य दे कर जनता की भावनाओं को भड़काने का काम करते ही रहते हैं, जिससे स्थिति संभलने की जगह बिगड़ती ही है।

परजीवी और फर्जी सेक्युलरवादियों ने कहना शुरू कर दिया है कि कैराना की घटना को भाजपा अपने फायदे के लिए हवा दे रही  है। इस पर राजनैतिक रोटियां सेंक रही है। इनकी यह बात सही भी हो सकती है। राजनीति मे फायदे वाले मुद्दों पर हवा दी ही जाती है, उस पर रोटियां सेंकी ही जाती हैं, सत्ता में पहुंचने के लिए हथकंडे अपनाए ही जाते हैं। यह भारतीय राजनीति का आईना है। सिर्फ भारत ही क्यों, पूरी दुनिया के लोकतंत्रों में राजनीति का यह रंग-ढंग हावी है। लेकिन, भाजपा विरोधी राजनैतिक पार्टियां क्या करती हैं? यह भी किसी से छुुपा है क्या? क्या लालू, मुलायम, मायावती, करुणानिधि, कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियां मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति नहीं करती हैं? क्या ये सभी राजनैतिक पार्टियां चुनावी सत्ता हासिल करने के लिए अल्पसंख्यक कार्ड खेलकर चुनाव नहीं जीतती हैं? अभी-अभी पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और केरल में कम्युनिस्टों ने मुस्लिम कार्ड खेलकर विधानसभा चुनाव जीता है। कांग्रेस तो आजादी  के बाद से ही मुस्लिम तुष्टीकरण करती आई है। पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के पीछे उसका अत्याधिक मुस्लिम तुष्टीकरण ही था। इसलिए यह कहना कहीं से भी उपयुक्त नहीं है कि सिर्फ भाजपा ही हिन्दुओं के प्रश्न को हवा देकर चुनावी सफलता हासिल करती है।

यह दौर वैकल्पिक मीडिया का है। वैकल्पिक मीडिया के रूप में सोशल मीडिया एवं अन्य इंटरनेट माध्यम हैं। कैराना की घटना को सोशल मीडिया ने जिस मजबूती और गंभीरता से उठाया है उससे यह खबर देश के कोने-कोने तक पहुंच गई है। सोशल मीडिया में कैराना कांड पर प्रतिक्रिया भयानक है, मुस्लिम समुदाय के प्रति घृणा और आक्रामकता दिखती है। घृणा और आक्रामकता समाज के लोकतांत्रिक ताने-बाने को रक्तरंजित करती ही है। इसलिए समय रहते देश को कैराना में हुई घटना का सच पता करना ही होगा और वजह धार्मिक हो या आपराधिक, दोषियों को सजा देनी ही होगी और आगे ऐसी घटनाएं न हो इसकी कोशिश करनी होगी।

नीलाभ कृष्ण

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