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धरती से कोई ताकत कांग्रेस को मिटा नहीं सकती: सिद्धरमैय्या

धरती से कोई ताकत कांग्रेस को मिटा नहीं सकती: सिद्धरमैय्या

चर्च स्ट्रीट बम ब्लास्ट की घटना के बाद भी राज्य निवेश और पर्यटकों के लिए एक सुरक्षित स्थान है, ऐसा कहना है सिद्धरमैय्या का एस. ए. हेमन्ता कुमार से। उनका ये भी कहना है कि नववर्ष की संध्या पर जो ब्लास्ट हुआ उसके बाद सरकार और पुलिस की कार्यवाही सटीक और पेशेवराना रही। उन्होंने कहा कि जिस तरह से नववर्ष न सिर्फ बंगलूरू में, बल्कि पूरे राज्य में बिना किसी अनहोनी के मनाया गया, इससे ये साबित होता है कि हमने ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाये हैं। 

आप पिछले 20 महीनों से सत्ता में हैं। आपकी सरकार की तीन उपलब्धियां क्या हैं?
किसी भी राज्य की उन्नति के लिए जिन चार पहलुओं को स्थिर करने की जरूरत होती है, वो राजनैतिक, सामाजिक, आर्थिक और कानून व्यवस्था है, जिन्हें सुधारने की पहले से ही आवश्यकता थी। कुछ स्कूलों में रेप की दुर्भाग्यपूर्ण घटनाओं के सिवाय राज्य में शांति रही है। चर्च स्ट्रीट ब्लास्ट के बाद पुलिस ने कड़े कदम उठाये हैं, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोकथाम लगाई जा सके। कुछ स्कूलों में दुष्कर्म के बाद शिक्षा और पुलिस विभाग ने कड़ाई बरती है।

राज्य की उन्नति के बारे में आप क्या कहेंगे?
हमने चावल योजना के तहत गरीबी रेखा के तहत आने वाले लोगों को प्रति किलोग्राम चावल 1 रुपये के हिसाब से उपलब्ध कराया है, जो कि अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। इसके साथ ही दुग्ध उत्पादन में लगी ग्रामीण महिलाओं को भी प्रोत्साहित किया गया, ताकि वो आर्थिक रूप से सशक्त हो सकें। समाज के कमजोर वर्ग से संबंधित निम्न जाति और जनजाति के लड़कों और लड़कियों के लिए हॉस्टल की व्यवस्था की है। इस तरह के कार्यों की संपूर्ण सूची उपलब्ध है हमारे पास।

बीजेपी की आलोचना में क्या कहेंगे?
बीजेपी के नेताओं पर भ्रष्टाचार में लिप्त होने के जो आरोप लगे हैं, उसके बाद उनकी कोई साख नहीं बची है। हमें बीजेपी से सीखने की जरूरत नहीं है, जिन्होंने सांप्रदायिक एजेंडे और आर्थिक अव्यवस्था के चलते राज्य को बर्बाद कर दिया है। गरीबी रेखा के नीचे आने वाले लोगों को 1 रुपये प्रति किलो के हिसाब से चावल वितरण की योजना के बाद भी हम राज्य की आर्थिक व्यवस्था को सुचारू ढंग से चलाने में सक्षम रहे हैं। इसीलिए हम इसे आर्थिक विवेक की नीति कहते हैं। बीजेपी की तरह लोकलुभावन योजनाओं पर अंधाधुंध खर्च नहीं किया है।

चर्च स्ट्रीट बम ब्लास्ट के बाद आपने पुलिस बल को आधुनिक और खुफिया तंत्र को मजबूत बनाने की बात कही है। इसके बारे में विस्तार से बताएंगे आप…
पुलिस आधुनिकीकरण करने से हमारा मतलब है कि पुलिस बल को आधुनिक हथियारों से लैस किया जाए, साथ ही ट्रेनिंग की व्यवस्था में सुधार लाया जाए। ये व्यवस्था आतंकी हमलों से निपटने में सहायक सिद्ध होंगी। किसी भी पुलिस बल को प्रभावित करने के लिए खुफिया तंत्र धारदार अस्त्र साबित होगा।

जैसा कि आपने कहा, खुफिया ढ़ाचे की व्यवस्था अलग से की जानी चाहिए। इससे आपका क्या अभिप्राय है?
खुफिया जानकारी जुटाना बहुत ही बोझिल काम है, जिसके लिए कड़ी मेहनत की जरूरत होती है। इसके लिए काम में निरंतरता और समन्वय की आवश्यकता होती है। जो लोग खुफिया तंत्र के लिए काम करते हैं, उन्हें अपने व्यक्तिगत संपर्कों को विकसित करने की जरूरत पड़ती है, ताकि सही सूचनाएं इकट्ठी कर उनका ठीक से विश्लेषण किया जा सके और ये सुनिश्चित हो सके कि मिली जानकारी कारवाई योग्य है या नहीं। कभी-कभी खुफिया विभाग के लोगों के ट्रांसफर के कारण भी खुफिया जानकारियां प्रभावित होती हैं। इसलिए मैं अपने अधिकारियों से कहना चाहूंगा कि खुफिया ढ़ाचे को विकसित करने कि संभावनाओं को तलाशें। वैकल्पिक तौर पर मैंने अपने अधिकारियों को ये भी कहा है कि एक निश्चित समय तक विंग में काम करने के लिए रिक्रूटमैंट रूल में बदलाव किया जाये, जो हर रैंक के अधिकारियों पर लागू हो। मैं इस विषय पर जल्द ही बैठक करूंगा। हालांकि  समाज विरोधी और आतंक विरोधी तत्वों को रोकने के लिए लोगों को जागरूक करने का काम राज्य सरकार का है।

ऐसा कहा जा रहा है कि अपको लेकर पार्टी में किसी तरह का कोई मतभेद नहीं है, लेकिन विपक्षी पार्टियां आप पर निशाना साध रही हैं। क्या कहेंगे इस बारे में?

प्रशासनिक व्यवस्था काफी बेहतर ढ़ंग से चल रही है। मैंने अपने सभी विधायकों को विश्वास में लेकर उनके निर्वाचन क्षेत्र की जरूरतों को सुना, साथ ही बोर्ड और निगमों की नामांकन प्रक्रिया हाईकमान के मार्गदर्शन में शुरू हो चुकी है। पार्टी के अंदरूनी मामले हाईकमान और केपीसीसी के अध्यक्ष के द्वारा निपटाए जा रहे हैं। मैं शासन की ओर अपना ध्यान दे रहा हूं। अगर पार्टी की बात करें  तो ऐसा कोई मतभेद नहीं है। सभी मंत्री मेरा साथ दे रहे हैं।

विरोध का कम होना कहीं पार्टी के हाईकमान का कमजोर होना तो नहीं है?
मैं आपकी बात से सहमत नहीं हूं। चुनाव के परिणाम क्या होंगे क्या नहीं, इस बात से कांग्रेस हाईकमान कमजोर नहीं पड़ सकती। पार्टी सुप्रीमो और केन्द्रीय नेता लगातार पार्टी के कार्यकत्ताओं पर अपना दबदबा बनाए रखेंगे। पार्टी की मूलभूत मजबूती बहुत खास है। इसलिए ये सवाल ही नहीं उठता कि पार्टी या पार्टी के हाईकमान चुनाव के नतीजों से कमजोर पड़ जाएंगे। अगर कोई ऐसा सोचता है तो ये उसकी बेवकूफी है। आप खुद देखेंगे कि पार्टी की वापसी का रास्ता साफ है और पार्टी नई ऊर्जा के साथ फिर सामने खड़ी नजर आयेगी।

आपके इस आत्मविश्वास का आधार क्या है?
पार्टी की आधारभूत मजबूती और काम करने का तरीका ही है, जिसके आधार पर मैं ये कह रहा हूं कि हम फिर से उड़ान भरेंगे और वापस आयेंगे, क्योंकि जनता बीजेपी के चुनावी दिखावे को समझ चुकी है और बीजेपी की लापरवाही सबके सामने आ चुकी है। जिन लोगों ने मोदी को जिताया है उनके चेहरे पर आज पश्चाताप नजर आ रहा है। मुझे इससे हैरानी भी नहीं है। अगर जनता का बीजेपी के खिलाफ अव्यक्त क्रोध खुलकर राष्ट्रव्यापी तौर पर निकल कर सामने आये तो बीजेपी के पास सिर छुपाने की पूरे देश में कहीं जगह नहीं रहेगी।

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह का बयान है कि कांग्रेसमुक्त कर्नाटक हो। इस पर आपकी क्या टिप्पणी है?
इस दुनिया की कोई ताकत कांग्रेस की सत्ता को मिटा नहीं सकती और हम अमित शाह जैसे लोगों की इस तरह की बातों को सुनना भी नहीं चाहते।

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