ब्रेकिंग न्यूज़ 

दिल्ली में भाजपा की उम्मीद की ‘किरण’

दिल्ली में भाजपा की उम्मीद की ‘किरण’

By सुधीर गहलोत

दिल्ली में फिर से चुनावी बिगुल बज चुका है। एक तरफ मोदी के लिए दिल्ली की गद्दी जहांं इज्जत की बात बन गई है, वहीं केजरीवाल अपने अस्तित्व को बचाये रखने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। कांग्रेस पहले से ही अपनी हार मानकर ‘आआपा’ के साथ गठबंधन करने का ऐलान कर चुकी है। इंद्रप्रस्थ में चुनावी महाभारत का परिणाम देखना बाकी है।

एक साल के इंतजार के बाद एक बार फिर दिल्ली चुनाव के दहलीज पर खड़ी है। महत्वकांक्षा से उपजी खाई को पाटने की प्रक्रिया के तहत चुनाव आयुक्त ने चुनाव की आगामी तिथि की घोषणा कर दी है। चुनाव आयोग के अनुसार दिल्ली में 7 फरवरी को मतदान होंगे, जबकि चुनावी नतीजों की घोषणा 10 तारीख को होगी। इस घोषणा के साथ ही दिल्ली की सल्तनत के ताज को हासिल करने की लड़ाई का शंखनाद हो गया है।

दिल्ली में आआपा और केजरीवाल के बीच होने वाले दिलचस्प चुनावी युद्ध में भाजपा ने किरण बेदी के रूप में ब्रहास्त्र चलाकर केजरीवाल को चित करने की रणनीति अपनाई है। जगदीश मुखी को मुख्यमंत्री के रूप में प्रचारित कर और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश उपाध्याय के ऊपर बिजली कंपनियों के साथ संठ-गांठ का आरोप लगाकर केजरीवाल ने भाजपा पर दबाव की राणनीति अपनाई है। पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान भी भाजपा की तरफ से विजय गोयल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार प्रचारित कर केजरीवाल ने उन्हें हाशिए पर ला दिया था। इसका मुकाबला करने के लिए भाजपा प्रधानमंत्री मोदी के नाम के साथ दिल्ली में एक बड़ा चेहरा सामने करना चाहती थी, जो केजरीवाल की जुझारू और ईमानदार छवि को चुनौती दे सके। केजरीवाल की पूर्व सहयोगी शाजिया इल्मी ने भी आआपा का पर्दाफाश करने की बात कही है। इसके साथ ही शाजिया के भाजपा में शामिल होने की चर्चा तेज हो गई है, जिसकी पुष्टि कहानी लिखे जाने तक नहीं हुई है।

पिछली बार की त्रिशंकु विधानसभा में मुद्दों की रस्साकशी के बाद अरविंद केजरीवाल ने मुख्यमंत्री पद की कुर्सी इस आधार पर छोड़ दी थी कि उनकी सरकार द्वारा लाए जाने वाले जनलोकपाल विधेयक के विरोध में उनकी सहयोगी पार्टी कांग्रेस और विपक्षी दल भाजपा एक साथ खड़ी हो गई थी। हालांकि कुछ विशेषज्ञ इस्तीफे के लिए कुछ और ही कारण बताते हैं। राजनीति पर पैनी नजर रखने वाले आलोक कुमार का मानना है कि विधानसभा में अत्प्रयाशित सफलता को देखकर 2014 के लोकसभा चुनावों में भी इसी जीत की उम्मीद लगाकर अरविंद केजरीवाल ने इस्तीफा दिया था और इस्तीफे का ठीकरा जनलोकपाल के नाम पर कांग्रेस और भाजपा के सिर पर फोड़ा था।

अनार्की फैलानी है तो नक्सलियों के साथ जाओ – नरेन्द्र मोदी

31-01-2015हरियाणा में भी कांग्रेस की सरकार थी, दिल्ली में भी कांग्रेस की सरकार थी, लेकिन हरियाणा में कांग्रेस के नेता एक बयान देते थे और दिल्ली में कांग्रेस के नेता दूसरा बयान देते थे और दिल्ली की जनता बिना पानी के प्यासी रहती थी। बयानबाजी किए बिना दल के दो नेता मिलकर, समस्या के मूल में जाकर ऐसे रास्ते खोज सकते थे, जिससे हरियाणा के किसानों के साथ अन्याय न होता और न दिल्ली की जनता के साथ अन्याय होता। हरियाणा में नई सरकार बनते ही वहां के मुख्यमंत्री मनोहरलाल खट्टर को मैंने तुरंत दिल्ली बुलाया, मीटिंग की और एक सहमति के द्वारा हरियाणा के लिए चिंता की और दिल्ली के लिए पीने के लिए पानी की भी ङ्क्षचता की और समस्या के समाधान की दिशा में कदम उठाया।

बिजली के मामले में हम पहली बार क्रांतिकारी कदम उठाने वाले हैं। जैसे सिम कार्ड अपनी सुविधा के अनुसार लेते हैं, उसी तरह की व्यवस्था हम बिजली के लिए भी करने जा रहे हैं। मान लिजिए कि यहां दस कंपनियां बिजली बेच रही हैं और आप चाहते हैं कि हमें इससे बिजली नहीं लेनी है, सस्ती देने वाली दूसरी कंपनी से बिजली लेनी है तो आप ले सकते हैं। हिंदुस्तान में यह सुविधा सबसे पहले दिल्ली में मिलने वाली है। इससे बिजली बेचने वालों के बीच भी प्रतिस्पर्धा होने वाली है।

दिल्ली में झूठ की बहुत बड़ी फैक्ट्री चल रही है। जो झूठ बोलते हैं, उन्हें जनता पराजित कर देती है, हमें उसके लिए समय बर्बाद करने की जरूरत नहीं है। एक बहुत बड़ा झूठ बहुत चतुराई से दिल्ली में फैलाई गई कि दिल्ली में भाजपा की सरकार बनेगी तो सरकारी मुलाजिमों की रिटायरमेंट की उम्र 58 वर्ष कर दी जाएगी। सरकार ने ऐसा कभी सोचा नहीं, सरकार ने ऐसा कभी कहा नहीं, फिर भी इस तरह की झूठी बातें फैलाई जा रही हैं। आप दिल्लावासियों से अपील है कि हर रोज पैदा किए जाने वाले इन झूठों से भ्रमित न हों, क्योंकि यही उनकी राजनीति का तरीका है।

कुछ लोगों की कुछ काम में मास्टरी होती है। जिसमें जिनकी मास्टरी हो वही काम उन्हें देना चाहिए। जिन्हें गाड़ी चलाना आता है, उन्हें खाना पकाने की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती। गाड़ी चलाने वाला गाड़ी का काम अच्छा करेगा। इसलिए जिन्हें फुटपाथ पर बैठकर रास्ते रोकने में मास्टरी है, धरने देने में मास्टरी है, आए दिन आंदोलन करने में मास्टरी है, उन्हें वो काम दीजिए। हमारी मास्टरी अच्छी सरकार चलाने में है, हमें वो काम दीजिए। दिल्ली के लोग बुद्धिमान हैं। जो खुद कहे कि मैं अनार्किस्ट हूं, ऐसे भी राजनेता हैं। अगर आपको अनार्की फैलाना है तो जाकर जंगलों में नक्सलियों के साथ जुड़ जाओ। दिल्ली को सुशासन चाहिए, एक व्यवस्था चाहिए। दिल्ली को जवाबदेह लोग चाहिए, जवाबदेह सरकार चाहिए। अनार्की से दिल्ली का भला नहीं होगा और दुनिया में भारत की छवि बर्बाद होकर रह जाएगी। इसलिए दिल्ली को बचाने और आगे बढ़ाने की हमारी जिम्मेवारी है। मुझे उम्मीद है कि दिल्ली की जनता के सहयोग से दिल्ली में भाजपा की एक स्थिर और मजबूत सरकार बनेगी। ये मजबूत सरकार दिल्ली की एक साल की खाई को भी भरेगी और पिछले 15 सालों के जो सपने अधूरे हैं, उन अधूरे सपनों को भी पूरा करेगी।

31-01-2015

बहरहाल, दिल्ली एक बार फिर से चुनावों की सरगर्मी से लबरेज है। इस बार भी आम आदमी पार्टी अपनी पुरानी रणनीति पर काम करते हुए घर-घर घूम रही है, जगह-जगह नुक्कड़ सभाएं कर रही है और लोगों को सत्ता छोडऩे की वजह बता रही है। आआपा के एक समर्थक अनूप कुमार का कहना है कि हम लोगों को बता रहे हैं कि आआपा ने जनता से पूछकर सरकार बनाई थी और इसके लिए 18 मुद्दे तय किए गए थे। उन 18 मुद्दों में बिजली-पानी पर सरकार ने तुरंत काम किया, लेकिन जनलोकपाल पर सहयोग नहीं मिलने के कारण आआपा ने सत्ता त्याग दी।

भगोड़ा कहे जाने पर अरविंद केजरीवाल पहले ही जनता से माफी मांग चुके हैं और एक बार फिर से उन्हें दिल्ली की सत्ता सौंपे जाने की अपील लोगों से कर चुके हैं। फिलहाल आआपा ने इसका अलग तरह का जवाब ढ़ूंढ़ निकाल है। अपनी जनसभाओं में आआपा के नेता कह रहे हैं कि दिल्ली की विधानसभा चुनावों में भाजपा ने सबसे अधिक 31 सीटें जीतीं थीं। इस नाते सरकार बनाने की जिम्मेवारी भाजपा की थी, लेकिन भाजपा ने अपनी जिम्मेवारी नहीं निभाई और जनता को दुबारा चुनाव के बोझ से बचाने के लिए आआपा ने कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी।

इस बार के होने वाले चुनावों में जो सबसे बड़ा डेवलपमेंट दिख रहा है, वह है हैदराबाद आधारित ऑल इंडिया इत्तेहादुल मजलिस-ए-मुसलमिन का दिल्ली में चुनाव लडऩे की मंशा जताना। अपने बयानों के लिए हमेशा विवादों में रहने वाले असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने महाराष्ट्र के हालिया विधानसभा चुनावों में 2 सीटें जीतीं हैं। इस जीत से उत्साहित होकर ओवैसी ने बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी अपने उम्मीदवार उतारने की बात कही है। दिल्ली चुनावों में पार्टी को स्थापित करने के लिए मटियामहल विधानसभा क्षेत्र के विधायक शोएब इकबाल से पर्दे के पीछे ओवैसी की बातचीत भी जारी है। शोएब इकबाल अपनी कट्टर सोच और विवादास्पद बयानों के लिए जाने जाते हैं और दिल्ली के मुसलमानों में उनका खासा प्रभाव भी माना जाता है। एआईएमआईएम भी अपनी कट्टर सोच और उन्मादी बयानों के लिए जानी जाती है।

पिछले विधानसभा चुनावों में मुसलमानों ने अपना समर्थन अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को दिया था, लेकिन मजलिस के दिल्ली में चुनाव लडऩे की स्थिति में आम आदमी पार्टी के लिए रास्ता मुश्किल हो सकता है। मोदी के विकास के मुद्दे के बाद लव जिहाद, घर वापसी जैसे मुद्दे सामने आने के बाद जो भी थोड़े बहुत मुस्लिम भाजपा से सहानुभूति रखते थे, वे भी दूरी बनाते प्रतीत हो रहे हैं। दिल्ली के चांदनी चौक में कपड़े की दुकान चलाने वाले अनवर हुसैन का कहना है – ”पिछले विधानसभा चुनावों में हमारे परिवार वालों ने आआपा को वोट दिया था। लेकिन केजरीवाल 49 दिनों में सत्ता छोड़कर भाग गए। उसके बाद हमलोगों ने भाजपा को वोट देने के बारे में सोचा था, लेकिन लव जिहाद और घर वापसी जैसे मुद्दे उठाने के कारण हम भाजपा को वोट नहीं देंगे। ओवैसी साहब मुसलमानों के हित के बारे में हमेशा बोलते रहते हैं। वे ही हमारे असली हमदर्द हैं।’’

अबकी बारी दिल्ली हमारी : सतीश उपाध्याय

31-01-2015

देश के प्रधानमंत्री माननीय मोदीजी ने सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं बल्कि पूरे विश्व में दुबारा से भारत के गौरव को बढ़ाया है। उनके नेतृत्व में जिस तरह से पूरे भारत का विकास हो रहा है, उसके लिए हम उनका धन्यवाद करते हैं, अभिनंदन करते हैं। मोदीजी की कार्यशैली और उनके मंत्रिमंडल के मंत्रियों का अभिनंदन करते हैं, जिन्होंने लोकसभा चुनावों के समय जो वायदे दिल्ली के लिए किए थे, उसमें से अधिकांश वायदों को पूरा करके ये साबित कर दिया कि भाजपा अपना वायदा निभाने से पीछे नहीं हटती। अनाधिकृत झुग्गी-झोपडिय़ों के मामले में, स्पेशल प्रोविजन ऐक्ट के मामले में, लॉ ऐंड ऑर्डर के मामले में सारी समस्याओं का समाधान हो रहा है।

मजलिस के दिल्ली में चुनाव लडऩे के कारण भाजपा को उम्मीद है कि इसका फायदा उसे जरूर मिलेगा। भाजपा के एक प्रदेश स्तर के नेता ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि एआईएमआईएम और आआपा के बीच मुसलमानों के वोटों का बंटवारा होने और किरण बेदी जैसी बेदाग और सशक्त छवि की नेता मिलने का सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा। राजनीति के बदले तेवरों को देखकर अंदाजा लगाया जा है कि इस बार के चुनाव बेहद सावधानीपूर्वक चुने हुए मुद्दों पर आधारित होंगे। इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भाजपा पर सांप्रदायिक होने का आरोप लगाने वाली पार्टियों का पिछले लोकसभा चुनावों में लगभग सूपड़ा साफ हो चुका है। इसलिए पार्टियां उन मुद्दों को उठाने से परहेज कर सकती हैं, जो वोटों का ध्रुवीकरण करेंगी।

किरण बेदी ने दिल्लीवासियों से एक सशक्त, ईमानदार, अनुभवी और देशहित में सोचने वाली सरकार बनाने का आह्वान किया है। करोलबाग में कारों की खरीद-बिक्री के व्यवसाय से जुड़े अमरजीत का कहना है – ”दिल्ली में भाजपा के सिवाय किसी अन्य दल के पास स्पष्ट विचारधारा नहीं है। केन्द्र में भाजपा की सरकार है और दिल्ली में भी अगर भाजपा की सरकार बनती है तो विकास में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। विकास के लिए केन्द्र और राज्य के बीच समन्वय बेहद जरूरी है।’’

अरविंद केजरीवाल द्वारा सिर्फ 49 दिनों में सत्ता छोडऩे को लोग राजनीतिक अपरिपक्वता और अनुभव की कमी मानते हैं। लक्ष्मीनगर में रहने वाले सेवानिवृत शिक्षक राजेन्द्र मलिक का कहना है – ”राजनीति में परिपक्वता और अनुभव जरूरी है। इसके अभाव में विपरीत परिस्थितियों में निर्णय-क्षमता प्रभावित होती है। केजरीवाल को अभी जमीनी स्तर पर काम कर अनुभव हासिल करना चाहिए।’’ वहीं कांग्रेस की स्थिति पर उनका कहना है – ”कांग्रेस की बात पुरानी हो चुकी है। पुरानी बातों को दुहराने से कोई लाभ नहीं है।’’

वादा निभाने वाली पार्टी है भाजपा : अमित शाह

31-01-2015

भारतीय जनता पार्टी वादा निभाने वाली पार्टी है। हमने जनता से काफी वादे किए थे। मोदीजी के नेतृत्व में एनडीए की सरकार बनने के बाद हमने उन वादों पर काम करना शुरू किया है। कुछ मुद्दों पर तो काम समाप्त हो चुका है, कुछ पर शुरूआत हुई है। हमने कहा था कि जब एनडीए की सरकार आएगी, तब यूपीए की नीतियों से पैदा हुई महंगाई से हम हिंदुस्तान को मुक्त करेंगे। यूपीए के 10 साल के शासन में थोक महंगाई सूचकांक, जो 6.7 और 7 प्रतिशत के बीच रहा करती थी, वह भाजपा के छह महीने के शासन में ही शून्य के आसपास पहुंच चुकी है। यूपीए के दस सालों के शासन में डीजल और पेट्रोल के दाम कभी घटते नहीं थे, लेकिन इन 7 महीनों के अंदर दस बार डीजल और पेट्रोल के दाम घटाने का काम भाजपा की मोदी सरकार ने किया है। भाजपा की मोदी सरकार ने महंगाई को कम कर हर आय-वर्ग के लोगों के बजट में पंद्रह सौ से लेकर पैंतालीस सौ रूपए तक बचत करने का काम किया है।

मोदीजी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद लालकिले से जो पहला भाषण दिया, उसमें उन्होंने मेक इन इंडिया का नारा दिया। इस योजना से देश के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में उछाल आते ही देश में लाखों-करोड़ों रोजगार का सृजन होने वाला है, जो बेरोजगारी की समस्या को दूर करेगी। हमने चुनावों के दौरान स्किल डेवलपमेंट पर जोर देने की बात कही थी। इसके लिए सरकार ने एक अलग मंत्रालय बनाया है। मेक इन इंडिया और स्किल डेवलपमेंट का काम एक साथ हुआ तो देश के बेरोजगार युवाओं के लिए एक नई शुरूआत होगी। कालेधन के मुद्दे पर कार्रवाई करने के वादे को मोदी सरकार ने बखुबी निभाया है।  सरकार बनते ही सबसे पहले कालेधन पर सरकार ने एसआईटी का गठन किया। कालेधन को रखने वाले लगभग 700 अकाउंट, जो सरकार के पास पड़ी थी, उसे 2 महीने के अंदर ही मोदी सरकार ने उनके  डिटेल एसआईटी को दे दिए। अब एसआईटी उस पर कार्रवाही कर रही है। कालेधन का मामला एक जटिल मामला होता है। उसका निबटारा अकेले भारत की तरफ से नहीं हो सकता। कई अंतर्राष्ट्रीय समझौते, कई अंतर्राष्ट्रीय कानून उसके आड़े आते हैं। विश्व में जहां-जहां भी मोदीजी गए, मोदीजी ने उन वैश्विक फोरम में कालेधन पर आम सहमति बनाने का काम किया। कानूनी अड़चन दूर होते ही कालाधन रखने वालों को सरकार उचित दंड दिलाने में कामयाब होगी।

लोकसभा में भाजपा की बहुमत की सरकार है। विपक्ष को चाहिए था कि विकास के मुद्दे पर जनमत का सम्मान करे, लेकिन उन्होंने राज्यसभा को बाधित किया। जो विधेयक और कानून देश के विकास के जरूरी हैं, उन्हें विपक्ष रोक कर रखा है, लेकिन भाजपा की सरकार उससे रूकने वाली नहीं है।

दिल्ली की सड़कों पर पड़े बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे और विक्षिप्त लोगों की एक बड़ी आबादी है। इसके बारे में किसी भी राजनीतिक दल ने एक शब्द भी नहीं कहे। शायद यह वोटबैंक वाला वर्ग नहीं है। इनकी स्थिति को याद करते हुए बुझे मन से सज्जन सिंह कहते हैं – ”इन्हें इस हालात में देखकर दया आती है, लेकिन हम क्या कर सकते हैं? दिल्ली में इनकी बहुत बड़ी आबादी है, फिर भी सरकार और राजनीतिक दल इनकी अनदेखी करते हैं।  उम्मीद है हिंदुत्व और बुजुर्गों के सम्मान की बात कहने वाली भाजपा इनके लिए जरूर कुछ करेगी। किरण बेदी जैसी सशक्त पूर्व पुलिस अधिकारी के कारण शायद उनका कुछ कल्याण हो सके।’’

भाजपा को लेकर अभी भी लोगों में उम्मीद है। किरण बेदी के भाजपा में शामिल होने के बाद वह और भी बढ़ गई है। वहीं ओवैसी के आने की स्थिति में आआपा के माथे पर चिंता की रेखाएं दिखने लगी है। किरण बेदी ने भाजपा में शामिल होते ही कहा – ”नरेन्द्र मोदी जैसे विजनरी नेतृत्व ने मुझे राजनीति में आकर अपने 40 साल के पुलिस और प्रशासनिक अनुभवों के आधार पर दिल्ली की आम जनता के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित किया है और यह काम मैं दिल्ली की जनता के लिए, उसके सहयोग से निश्चित रूप से करूंगी।’’

पिछले विधानसभा चुनावों में 8 सीटों तक सिमटी कांग्रेस फिलहाल आराम की मुद्रा में दिख रही है, लेकिन चुनाव अभियान की कमान अजय माकन को थमाकर कांग्रेस इस भ्रम को तोडऩे का प्रयास कर रही है। माकन ने बिहार से पुराना नाता होने की बात कहकर पूर्वांचलवासियों को लुभाने का प्रयास किया है, लेकिन इस बयान का कोई खास असर दिखते नजर नहीं आ रहा। दूसरी तरफ दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस की दिग्गज नेता शीला दीक्षित ने यह कहकर कि आआपा कांग्रेस की स्वभाविक सहयोगी है, भावी राजनीति के संकेत दे दिए हैं। वहीं एक टीवी डिबेट में शीला दीक्षित के बयान को दरकिनार करते हुए प्रदेश कांग्रेस के नेता जयप्रकाश अग्रवाल ने यह कहकर लीपापोती करने की कोशिश की कि शीला दीक्षित उनकी नेता नहीं हैं। यह बयान उनका निजी बयान है।

31-01-2015

हालांकि किरण बेदी जैसा चेहरा मिलने के बावजूद नरेन्द्र मोदी भाजपा के  सबसे लोकप्रिय चेहरे हैं। उनके करिश्मे का कमाल हाल ही में हुए कई राज्यों के चुनावों में दिख चुका है। आरोप लगाकर सनसनी फैलाने की राजनीति करने वाले केजरीवाल पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए 10 जनवरी को दिल्ली के रामलीला मैदान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि जिन्हें जिस काम में मास्टरी हासिल है, उन्हें वही काम करना चाहिए। जो खुद को अनार्की कहते हैं, प्रदेश में अराजकता फैलाते हैं उनके लिए दिल्ली के सभ्य समाज में जगह नहीं है, बल्कि जंगल में नक्सलियों के साथ रहना चाहिए। ज्ञात हो कि छावनी परिषद के चुनावों में एक सीट पर आआपा को मिली जीत से उत्साहित उसके कार्यकत्र्ताओं द्वारा सड़कों पर नोट लूटाने और फायरिंग करने के बाद लोग दबी जुबान से यह चर्चा करने लगे हैं कि नरेन्द्र मोदी ने सही कहा है कि आआपा वाले अराजक हैं। उन्हें राजनीति के सभ्य तरीकों की जानकारी नहीं है।

इस जनसभा में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने केन्द्र सरकार की उपलब्धियों को गिनाया तो मोदी ने सरकार के इरादों को प्रदर्शित करते हुए दिल्ली को वैश्विक स्तर की राजधानी में शुमार करने की बात कही थी। फिलहाल केजरीवाल के आरोप की राजनीति और किरण बेदी के भाजपा में शामिल होने के बीच दिल्ली की राजनीति दिलचस्प हो गई है। फिजा में तैरती चुनावी मादकता में राजनीतिक दल अपने-अपने शाब्दिक तीरों को धार देने में लगे हैं।

пазли іграноутбук асус цены

Leave a Reply

Your email address will not be published.