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जीवन के दो पहलू

जीवन के दो पहलू

By नीलाभ कृष्ण

आजादी के आर्किटेक्ट

मोहनदास करमचंद गांधी भारत और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के एक प्रमुख राजनैतिक एवं आध्यात्मिक नेता थे। वे सत्याग्रह-व्यापक सविनय अवज्ञा के माध्यम से अत्याचार के प्रतिकार के अग्रणी नेता थे, उनकी इस अवधारणा की नींव संपूर्ण अहिंसा पर रखी गई थी, जिसने भारत को आजादी दिलाकर पूरी दुनिया में जनता के नागरिक अधिकारों एवं स्वतंत्रता के प्रति आंदोलन के लिए प्रेरित किया। सबसे पहले गांधी ने अहिंसक सविनय अवज्ञा का प्रयोग प्रवासी वकील के रूप में दक्षिण अफ्रीका में भारतीय समुदाय के लोगों के नागरिक अधिकारों के लिए संघर्ष हेतु किया। 1915 में अपनी वापसी के बाद उन्होंने भारत में किसानों, कृषि मजदूरों और शहरी श्रमिकों को अत्यधिक भूमि कर और भेदभाव के विरूद्ध आवाज उठाने के लिए एकजुट करने का प्रयास किया था। इसके बाद वह लगातार भारत की आजादी तक संघर्ष करते रहे। 1930 का दांडी मार्च हो या फिर 1942 अंग्रेजों के लिए भारत छोड़ो का नारा सभी ने भारतीयों को एक सूत्र में पिरोकर रख दिया।

खादी के पैरोकार
महात्मा गांधी ने जहां पूरी दुनिया में आजादी से जीने की अलख जगाई, वहीं वह अपनी परंपराओं से भी जुड़े रहे। खादी के प्रचार-प्रसार में उनका योगदान कम नहीं रहा है। उन्होंने चरखा चलाकर न सिर्फ खुद सूत काटा, बल्कि भारतवासियों को भी ऐसा करने की शिक्षा दी। बापू ने जहां भारतीयों को खादी पहनने की सलाह दी, वहीं विदेशी कपड़ों की होली भी जलवाई। इसी ही नतीजा था कि लोगों ने खादी को अपनाना शुरू कर दिया और खादी भी स्वतंत्रता संग्राम का हिस्सा बन गई। आज खादी बापू का पर्याय बन चुकी है।

महात्मा का खिताब
बेहद कम लोग यह बात जानते हैं कि गांधी को महात्मा का खिताब गुरुदेव रबिंद्रनाथ टैगोर ने दिया था। इसके बाद मोहनदास करमचंद गांधी को महात्मा गांधी के नाम से पूरी दुनिया ने जाना और समझा। बापू और गुरुदेव के बीच में कई बार मुलाकात हुई। एक बार गुरुदेव की हालत नाजुक होने पर वह उन्हें देखने शांति निकेतन भी गए थे।

सत्याग्रही
मार्च 1930 में नमक पर ‘कर’ लगाए जाने के विरोध में नया सत्याग्रह चलाया। उन्होंने 12 मार्च को दांडी मार्च शुरू किया और 6 अप्रैल को चार सौ कि.मी. की यात्रा कर उन्होंने गुजरात के तट पर नमक बनाया और अंग्रेजी हुकूमत का विरोध किया। इस यात्रा में हजारों की संख्या में भारतीयों ने भाग लिया। इसमें अंग्रेजों ने 80,000 से अधिक लोगों को पकड़कर जेल भेज दिया था।

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