ब्रेकिंग न्यूज़ 

दरवाजे पर दस्तक देता खतरा

दरवाजे पर दस्तक देता खतरा

पिछले कुछ दिन पूरी दुनिया को झकझोर गए। यूरोप से बांग्लादेश तक हर जगह आईएसआईएस ने लोगों की जिंदगियां छीन लीं। तुर्की के इस्तांबुल से लेकर इराक के बगदाद और बांग्लादेश के ढाका की दूरी काफी लंबी है लेकिन इस्लामी स्टेट की हिंसक विचारधारा के मामले में ये तीनों जैसे करीब से जुड़े हुए हैं।

तुर्की की अर्थव्यवस्था तथा क्षेत्रीय आकांक्षाओं के केंद्र तथा दुनिया में एक सबसे व्यस्त अतातुर्क हवाई अड्डे पर हाल में तिहरा फिदायीन हमला इस्लामिक स्टेट की करतूत मानी जाती है और ढाका में एक रेस्तरां में लोगों को बंधक बनाने की घटना की जिम्मेदारी खुद उसने ली है, जिसमें 20 लोग मारे गए। उसने बगदाद में हाल के हमलों में करीब 200 लोगों के मारे जाने की भी जिम्मेदारी ली है। इस तरह वह दुनिया भर में अपने आतंक का जाल फैला रहा है क्योंकि कथित तौर उसकी खिलाफत की जमीन सिकुड़ रही है। हाल में उसे इराकी फौज ने इराकी शहर फलूजा से बाहर निकाल दिया।

ढाका में 11 घंटे के बंधक संकट का अंत तब हुआ जब बांग्लादेशी फौज ने होली आर्टिजन बेकरी पर धावा बोल दिया और छह आतंकियों को मार गिराया और एक को जिंदा पकड़ लिया। इसमें आतंकियों के निशाने पर विदेशी थे और उन्होंने 20 लाोगों की बेरहमी से जान ले ली। आइएस ने फौरन इसकी जिम्मेदारी ले ली। आइएस से जुड़े एक न्यूज लिंक में दावा किया गया कि ”इस्लामिक स्टेट के कमांडो ने बांग्लादेश के ढाका में विदेशियों से भरे रहने वाले रेस्तरां पर हमला किया।’’ उसमें मारे गए विदेशियों की तस्वीरें भी जारी की गईं, जो रेस्तरां से भेजी गई थीं।

ओबामा ने अपने अंतिम स्टेट ऑफ यूनियन संबोधन में कहा था कि आईएसआईएस अमेरिका के लिए कोई खतरा नहीं है। यह बयान ऐसे वक्त में आया जब लगातार तीन हमले इस्तांबुल, ढाका और बगदाद में हुए। पिछले छह महीने में आइएसआइएस के हमले पेरिस और ब्रसेल्स में हुए। ये सभी इसी बात की गवाही दे रहे हैं कि यह संगठन गंभीर खतरा बना हुआ है। ऐसे में ओबामा का बयान हकीकत से परे लग सकता है।

ये तीन हमले गवाह हैं कि आईएसआईएस  अलकायदा का अधिक बड़ा और अत्याधुनिक संस्करण बनता जा रहा है, जिसके हमले की जद से कोई सीमा महफूज नहीं है। यह अलकायदा से बड़ा खतरा बन गया है। आईएसआईएस  के दुनिया भर में पंजे फैलाने की एक वजह यह है कि उसके साथ विदेशी लड़ाके बड़ी संख्या में जुड़ रहे हैं। संयुक्त राष्ट्र की मार्च 2015 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 100 देशों के 22,000 विदेशी लड़ाके आइएसआइएस के साथ लड़ रहे हैं।

17-07-2016

गौरतलब है कि अलकायदा के पास इतने अंतरराष्ट्रीय लड़ाके नहीं थे। आईएसआईएस  का प्रचार और तकनीकी क्षमताएं इतनी कारगर हैं कि वह विदेशी लड़कों में जज्बा भरने में सक्षम है और वह बड़ा खतरा बना हुआ है। ये लड़ाके अपने देश में लौटकर और बड़ा खतरा बन सकते हैं। अगर खबरे सही हैं तो आईएसआईएस ने इन लड़ाकों को अपने देश भेजना शुरू कर दिया है। इराक और सीरिया में कई मोर्चों पर हार झेलने के बाद विदेशी लड़ाकों को उनके देश भेजा जाने लगा है। सीरिया और इराक में हार के बाद उसने अपनी दूसरी रणनीति पर काम करनाप शुरू कर दिया है। आईएसआईएस  विदेशी लड़कों को उनके देश भेजकर आतंक का फैलाव दुनिया भर में करना चाहता है। उसने उनको आदेश दिया है कि अपने देश में जाकर हफ्ते भर में आतंकी हमले को अंजाम दो। इसका सबसे अधिक असर यूरोप में हो सकता है। यह भांपकर यूरोपीय संघ, भारत, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया लौटकर आने वाले आतंकियों पर नजर रख रहे हैं।

हमारे दरवाजे पर दस्तक

सुरक्षा एजेंसियां इस सवाल पर शिद्दत से विचार कर रही हैं कि क्या भारत निकट भविष्य में ढाका जैसे हमले का शिकार बनेगा? खतरा वाास्तविक है। पिछले 6-7 महीने में रूड़की और हैदराबाद से तीन आइएस मॉड्यूल की गिरफ्तारी से भी इसके सबूत मिलते हैं। ढाका हमले से यह संकेत भी मिलता है कि ये गुमराह युवक सिर्फ सीरिया में खिलाफत से प्रेरित नहीं हैं, बल्कि कुछ देसी धर्म प्रचारक भी उन्हें प्रेरित कर रहे हैं।

अगर खबरों कि मानें तो सुरक्षा एजेंसियां देशभर में करीब 400-500 ऐसे युवाओं पर नजर रख रही हैं, जो देश में हमले की वजह बन सकते हैं। एक खबर के मुताबिक अलकायदा के भारतीय उपमहाद्वीप संगठन का सरगना आसिम उमर ने एक बयान जारी किया है कि ”मुसलमानो उठो और यूरोप में हमला करने वालों के नक्शेकदम पर चलो और भारत में प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों को मार गिराओ।’’ अमेरिका स्थित साइट खुफिया समूह ने भारतीय खुफिया एजेंसियों को इससे सावधान किया है। अलकायदा और आइएस दोनों भारत में हमले के लिए भारतीय युवाओं को बहला-फुसला रहे हैं। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों की कोशिशें कारगर साबित हुई हैं और संदिग्धों को पकड़ा जा सका है। अभी तक एनआइए और पुलिस 54 आइएस गुर्गों को योजना बनाते पकड़ चुकी है।

उधर, बांग्लादेश में आइएस का असर तेजी से फैल रहा है। स्थानीय आतंकी नेटवर्क जमातुल मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) से जुड़े हुए हैं। ये मोतिउर रहमान निजामी जैसे अपने नेताओं को फांसी दिए जाने से नाराज हैं और आइएस से जुड़ रहे हैं। हाल ही में आइएस के बांग्लादेश के सरगना शेख अबु इब्राहिम अल हनीफ ने इरादा जाहिर किया था कि भारत में गुरिल्ला हमलों के लिए बांग्लादेश और पाकिस्तान से लड़कों के साथ स्थानीय मुजाहिदीन का इस्तेमाल किया जाएगा। खुफिया एजेंसियां बंगाल और असम में जेएमबी के हमलों की आशंका जता रही हैं। इन दोनों राज्यों में इसके गोपनीय ठिकाने बताए जाते हैं। इससे जाहिर है, भारत आइएस के हमले की जद में है। पिछले कुछ हफ्तों की घटनाओं को देखने से स्पष्ट है कि आईएसआईएस देश के लिए बड़ा खतरा है। विदेशी लड़कों की मौजूदगी के कारण आइएस का दुनिया भर में फैलाव संभव हो चुका है। यानी आइएस की चुनौती से निपटने के लिए क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े कुछ कड़े फैसले जरूरी हो गए हैं।

नीलाभ कृष्ण   

никас отзывдать рекламу в гугле

Leave a Reply

Your email address will not be published.