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आतंक का पर्याय आईएसआईएस

आतंक का पर्याय आईएसआईएस

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का अनुमान है कि आईएसआईएस के लड़ाकों की तादाद सीरिया और इराक में ही 20,000 से 30,000 के बीच है। अमेरिकी आतंक विरोधी एजेंसी के एक अधिकारी के मुताबिक तो जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब, ट्यूनिशिया और यमन में भी ऐसे सैकड़ों कट्टर समूह आईएसआईएस को समर्थन मुहैया करा रहे हैं। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विन्सेंट स्टेवॉर्ट ने फरवरी 2015 में अपने ताजा आकलन के आधार पर कहा कि आईएसआईएस की अंतर्राष्ट्रीय पहुंच व्यापक होती जा रही है।

कुछ साल ही हुए बेहद खूंखार इस्लामी आतंकी गुट ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक ऐंड सीरिया’ (आईएसआइएस) की पैदाइश हुई, लेकिन उसे खत्म करने की पश्चिमी दुनिया की कोशिशों के बावजूद वह लगातार मजबूत हो रहा है और फैलता जा रहा है। वह इराक और सीरिया के अपने ठिकाने से बाहर निकलकर अफगानिस्तान, अलजीरिया, मिस्र और लीबिया में अपना आतंकी तंत्र स्थापित कर चुका है और लगातार इसका विस्तार करता जा रहा है। अमेरिका की खुफिया एजेंसियों के अधिकारी आतंक के खिलाफ नई जंग की आशंका जाहिर करने लगे हैं।

अमेरिकी खुफिया अधिकारियों का अनुमान है कि आईएसआईएस के लड़ाकों की तादाद सीरिया और इराक में ही 20,000 से 30,000 के बीच है। अमेरिकी आतंक विरोधी एजेंसी के एक अधिकारी के मुताबिक तो जॉर्डन, लेबनान, सऊदी अरब, ट्यूनिशिया और यमन में भी ऐसे सैकड़ों कट्टर समूह आईएसआईएस को समर्थन मुहैया करा रहे हैं। अमेरिकी रक्षा खुफिया एजेंसी के निदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विन्सेंट स्टेवॉर्ट ने फरवरी 2015 में अपने ताजा आकलन के आधार पर कहा कि आईएसआईएस की अंतर्राष्ट्रीय पहुंच व्यापक होती जा रही है। हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस के सामने अपनी गवाही में नेशनल काउंटर टेररिज्म सेंटर के निदेशक निकोलस रासमुसेन ने भी स्टेवॉर्ट के आकलनों का तस्दीक किया।

इस तरह आईएसआईएस और उसके वफादार लड़ाकों के अचानक फैलाव से चिंतित अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति बराक ओबामा और उनके उत्तराधिकारी को इन गुटों के खिलाफ कार्रवाई करने को नए अधिकार देने को तैयार हुई। आईएसआईएस के जून 2014 में खिलाफत के गठन के ऐलान के बाद तमाम आतंकी गुट और व्यक्तिगत लड़ाके उसकी ओर आकर्षित होने लगे। आतंक विरोधी जानकारों का कहना है कि आईएसआईएस अपने अंतर्राष्ट्रीय प्रसार के लिए अल कायदा के फें्रचाइजी ढांचे का इस्तेमाल कर रहा है। आईएसआईएस के आकर्षण का सबूत पश्चिम में भी मिला। पेरिस में फ्रांसीसी व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो के एक हमलावर अमेदी कॉलीबली ने आईएसआईएस के प्रति अपनी आस्था प्रकट की। हाल में अफगानिस्तान में पूर्व तालिबान कमांडर मुल्ला अब्दुल रऊफ खादिम ने आईएसआईएस के प्रति अपनी आस्था का इजहार किया था।

हालांकि अभी ऐसा कोई संकेत नहीं है कि आईएसआईएस का अफगानिस्तान पर कब्जा है, लेकिन उसने अफगानिस्तान और पाकिस्तान में दिलचस्पी का इजहार किया है और कथित तौर पर वहां अपने दूत भी भेज चुका है।

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अमेरिकी सरकार को आईएसआईएस के खिलाफ जंग छेडऩे का अधिकार मिलने का मतलब यह हो सकता है कि मिस्र और लीबिया में उसकी दखलंदाजी बढ़े, जहां आईएसआईएस समर्थक गुट सक्रिय हैं।

खुफिया रिपोर्टों के मुताबिक, मिस्र के उग्र्रवादी गुट ‘अंसार बैत अल मकदिस’ ने, जिसका ठिकाना सिनॉय में है, पिछले साल आईएसआईएस से आर्थिक, हथियारों और रणनीतिक मदद के लिए अपना दूत सीरिया भेजा था। इस गुट ने आईएसआईएस के साथ मिलने के पहले ही दुश्मनों का सिर कलम करने जैसे मध्ययुगीन तरीके अपना लिए थे। नवंबर में सिनॉय प्रांत पर कब्जे के बाद इस गुट के ऑनलाइन वीडियो बयानों में आईएसआईएस से संबंधों का खुलकर इजहार किया जाने लगा।

पड़ोस के लीबिया में कम से कम तीन अलग-अलग गुटों ने आईएसआईएस से अपने जुड़ाव का ऐलान किया है। एक पूर्व के बर्गा में, दूसरा दक्षिण के रेगिस्तान फेजान में और तीसरा गुुट राजधानी के पास पश्चिम में त्रिपोलितानिया का है। दक्षिणी यूरोप के पूर्वी अधिकारियों को आशंका है कि लीबिया के ये तीनों प्रांत आईएसआईएस के लड़ाकों के अड्डे बन सकते हैं, जहां से वे मिस्र या उत्तरी अफ्रीका की ओर जा सकते हैं। पूर्वी लीबिया पहले ही जेहादियों के प्रशिक्षण का केंद्र बन चुका है, जहां से वे सीरिया या इराक में जाते हैं। यह मिस्र के लड़ाकों के लिए रेगिस्तान में हमले करने के बाद महफूज ठिकाना बन गया है।

आईएसआईएस का सबसे वहशियाना कारनामा लड़ाकू विमान के पायलट को जिंदा जलाकर मार डालना था, जो सीरिया में आईएसआईएस के कब्जे वाले इलाकों में बम गिराने के अभियान के दौरान पकड़ लिया गया था। उसे एक पिजड़े में रखा गया और उस पर गैसोलिन डालकर आग लगा दी गई। जॉर्डन के इस पायलट फस्र्ट लेफ्टिनेंट मोआज अल कस्बाह का विमान सीरिया के आईएसआईएस के कब्जे वाले इलाकों में बम गिराने के दौरान मार गिराया गया था। मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड और वहां की सरकार इस गुट की बर्बरता के खिलाफ एक हो गए हैं। काहिरा में हजार साल पुरानी संस्था के इमाम अहमद अल तयाब ने आईएसआईएस के आतंकियों को मार डालने, फांसी पर चढ़ा देने या हाथ-पैर काट देने का फरमान सुनाया।

जापान ने भी 1 फरवरी 2015 को अपने पत्रकार केंजी गोतो की आईएसआईएस द्वारा निर्मम हत्या का वीडियो सार्वजनिक करने के बाद गुस्से और क्षोभ में प्रतिक्रिया जाहिर की। प्रधानमंत्री शिंजो एबे ने 20 करोड़ डॉलर फिरौती की रकम देने से 20 जनवरी 2015 को इनकार कर दिया था। बाद में एबे ने कहा कि वे आतंकवादियों को कभी माफ नहीं करेंगे और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के साथ सहयोग करके आतंकवादियों को उनकी करनी की सजा जरूर देंगे। गोतो 47 वर्ष के वरिष्ठ पत्रकार थे। वे अक्टूबर 2014 के आखिरी दिनों में युकावा को आईएसआईएस के कब्जे से छुड़ाने के मकसद से सीरिया पहुंचे थे। युकावा को आईएसआईएस ने अगस्त 2014 में पकड़ा था। आईएसआईएस युकावा के बदले जॉर्डन महिला रिशावी को हासिल करने का मोलभाव कर रहा था, जिसे अम्मान के होटल में बम धमाकों के सिलसिले में सजा सुनाई गई थी। 2005 में इस धमाके में 57 लोग मारे गए थे।

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इस बीच आईएसआईएस लीबिया में अपना नया ठिकाना बनाने में कामयाब हो गया है। वहां उसने सबसे वहशियाना हत्याएं कीं। उसके लड़ाकों ने सिर्ते के पास 21 कॉप्टिक ईसाइयों को पकड़ा, उन्हें कतार में खड़ा किया और सबका सिर कलम कर दिया। उनका कसूर सिर्फ यही था कि वे ईसाई थे। मिस्र की वायुसेना विमान से आईएसआईएस के प्रशिक्षण शिविरों वाले इलाकों में बम बरसाए। लीबिया की वायुसेना के कमांडर सक्र-अल जौराबी ने मिस्र के टीवी चैनल को बताया कि दोनों देशों के साझा अभियान में आईएसआईएस के करीब 50 कैडर मारे गए। लीबिया वायुसेना ने पूर्वी शहर दरना में बम बरसाए, जिस पर पिछले साल आईएसआईएस ने कब्जा कर लिया था।

अमेरिकी सरकार की प्रतिक्रिया
अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा ने संसद से आईएसआईएस के खिलाफ तीन साल के सैन्य अभियान की इजाजत मांगी, जिसमें बड़े पैमाने पर आईएसआईएस के इलाकों में घुसपैठ और कब्जे से तो बचा जाएगा, लेकिन हवाई हमलों के साथ-साथ आईएसआईएस के नेताओं की तलाश या अमेरिकी नागरिकों के बचाव में जमीनी कार्रवाई भी की जा सकती है। हालांकि अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि इराक और सीरिया में कोई जमीनी कार्रवाई नहीं होगी, अलबत्ता आईएसआईएस नेताओं की तलाश में विशेष अभियान या बचाव की छोटी जमीनी कार्रवाइयां हो सकती हैं। इस वैधानिक मसौदे में खासकर तीन अमेरिकी नागरिको,ं जेम्स फॉली, स्टीवन जे. सॉटलॉफ और पीटर कासिग का जिक्र है, जिन्हें आईएसआईएस ने बंधक बनाया था और फिर हत्या कर दी थी। अमेरिका आईएसआईएस के इराक और सीरिया के बाहर फैलते असर से भी चिंतित है। इसलिए हाल में अफगानिस्तान में अमेरिकी ड्रोन हमले में पूर्व तालिबान कमांडर मुल्ला अब्दुल रऊफ खादिम को मार डाला गया, जिसने आइएसआइएस के प्रति आस्था जताई थी और लड़ाकों की भर्ती कर रहा था।

जमीनी कार्रवाई
इराक और सीरिया की सीमा के इलाकों में गौर करने से हम जान पाते हैं कि आईएसआईएस कैसे अपना फैलाव कर रहा है। यही इसकी जन्मस्थली है। दरअसल इस इलाके में आईएसआईएस के गठन के वक्त से ही अमेरिका की अगुआई में पश्चिमी देश उस पर हवाई हमले ही करते रहे हैं। जमीन पर इराक में कुछ अमेरिकी फौज जरूर आईएसआईएस से जूझ रही है, लेकिन सवाल है कि क्या ऐसे खूंखार और बर्बर समूह को सिर्फ हवाई कार्रवाई से खत्म किया जा सकता है? यह सही है कि जमीन पर उतरने में अमेरिका और ब्रिटेन की हिचक समझी जा सकती है, क्योंकि ऐसे मध्ययुगीन मानसिकता वाले लड़ाकों से लडऩा है जो युद्ध का कोई कायदा नहीं मानते।

इसी संदर्भ में हमें तुर्की की सीमा के पास सीरिया के छोटे-से कुर्द बहुल कस्बे कोबेन में आईएसआईएस की एकमात्र हार पर गौर करना चाहिए। आईएसआईएस के लड़ाके शुरू में इस कस्बे में घुसे। इसी कस्बे को आईएसआईएस ने सबसे पहले कब्जा किया था, लेकिन आईएसआईएस लड़ाकों को कुर्दों से मुकाबला करना पड़ा। एकाध हफ्ते में कुर्दों ने तुर्की से भी मदद हासिल कर ली। कुर्द लड़ाकों ने अच्छी टक्कर दी। फिर, अमेरिका ने कोबेन में आईएसआईएस के ठिकानों पर हवाई हमले शुरू किए। तुर्की से भी कुर्द लड़ाके कोबेन पहुंचे। स्थानीय कुर्दों ने आईएसआईएस के ठिकानों के बारे में सटीक जानकारी दी और अमेरिकी विमानों ने वहीं बम बरसाए। अब कोबेन आईएसआईएस से खाली करा लिया गया है। हर सड़क पर कुर्द सिपाही पहरे दे रहे हैं। आखिरकार आईएसआईएस वहां से पीछे हटा तो आधा शहर बर्बाद हो चुका है। चारों तरफ खंडहर ही खंडहर दिख रहे हैं।

कोबेन के आजाद चौक के आसपास अमेरिकी बमबारी में इमारतें ढह गई हैं। लेकिन, आईएसआईएस को जमीन पर हराया जा सका है।

इसका सीधा-सा सबक है कि बिना जमीनी लड़ाई के आईएसआईएस को हराया नहीं जा सकता। कोबेन की तरह इराक, सीरिया, लीबिया और मिस्र में भी जमीनी कार्रवाई दोहराई जाए, तभी इस धरती से आईएसआईएस की खूंरेजी को मिटाया जा सकता है।

 ई.एन. राममोहन

(लेखक सीमा सुरक्षा बल के पूर्व महानिदेशक हैं)

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