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‘कंप्यूटर’ प्रयोगकर्ताओं के लिए अनुसंधान आधारित यौगिक सुझाव

‘कंप्यूटर’ प्रयोगकर्ताओं के लिए अनुसंधान आधारित यौगिक सुझाव

डॉ. शरली टेल्लस एवं डॉ. अभिषेक कुमार भारद्वाज पतंजलि रिसर्च फाउन्डेशन, हरिद्वार

कंप्यूटर व इंटरनेट का प्रयोग हमारे जीवन का अभिन्न अंग बन चुका है। वर्ष 2013 के आंकड़े के अनुसार भारत में 34.8 प्रतिशत लोग इंटरनेट का प्रयोग करते थे, आज पूरी दुनिया में लगभग 46 प्रतिशत लोग इसका प्रयोग करते हैं। इसके अत्यधिक उपयोग से लोगों में कंप्यूटर जन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ी हैं, जिससे हमारी उत्पादकता भी प्रभावित हो रही है। स्वास्थ्य संबंधी विभिन्न समस्याओं का सामना कर रहे अलग-अलग संस्थानों के कंप्यूटर प्रयोगकर्ताओं के विशेष निवेदन पर प्रस्तुत है योग आधारित समाधानपरक यह आलेख।

आज कलम-पेंसिल की जगह माउस व की-बोर्ड ने ले ली है, वहीं कॉपी-डायरी-किताब की जगह पर कंप्यूटर व इंटरनेट ने कब्जा कर रखा है। समय का दौर ही ऐसा है कि बिना कंप्यूटर के आप कोई कार्य नहीं कर सकते। ऑफिस, अध्ययन-अध्यापन आदि में ही नहीं, अपितु अब तो खरीददारी, खाने-पीने के ऑर्डर से लेकर अन्य तमाम कार्य भी हम कंप्यूटर-इंटरनेट के सहारे ही करने लगे हैं। निश्चित रूप से हमें इससे सुविधा तो मिली है, पर हमारी शारीरिक सक्रियता घटी है, जिसका खामियाजा भी हमें ही भुगतना पड़ रहा है। हममे से अधिकांश लोग चाहे शिक्षार्थी हो, व्यवसायी, शिक्षक, वैज्ञानिक, लेखक या चिकित्सक हों, सभी अब कंप्यूटर के माध्यम से अपना कार्य संपन्न करने के लिए दिन के कई घंटे इस पर बिताते हैं। अर्थात दिन में कई-कई घंटे कंप्यूटर पर बैठकर काम करने वाले 50-90 प्रतिशत कंप्यूटर वर्कस आंखों में तनाव व खिंचाव (Eye Strain) की शिकायत करते हैं। यही नहीं अनेक लोग ‘कंप्यूटर विजन सिंड्रोम’ के शिकार हो चुके हैं।

कंप्यूटर विजन सिंड्रोम?

सामान्यत: यह सिंड्रोम कई लक्षणों का समूह है, इसमें आंखों का तनाव जोकि लंबे समय तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठने की अनुचित स्थिति, नियमित अंतराल पर विश्राम का अभाव, कंप्यूटर से आंखों को उचित दूरी में कमी या स्क्रीन की अधिक तीव्र चमक आदि से होता है। इस सिंड्रोम के लक्षणों में प्रमुख हैं-आंखों में दर्द व तनाव, शुष्क आंखें, आंखों में जलन व थकान, दोहरी दृष्टि या धुंधली दृष्टि। हांलाकि ये लक्षण आमतौर पर अस्थायी होते हैं, अर्थात ये हमेशा बने नहीं रहते, पर इसके स्थायी उपचार के लिए आंखों की विशेष देखभाल आवश्यक है।

=विजन सिंड्रोम के अलावा अन्य लक्षण जो कम्प्यूटर प्रयोगकत्ताओं में आमतौर पर देखे जाते हैं, वे हैं-

=टआंखें लाल हो जाना, आंखों से पानी आना, आंखों में खुजलाहट आदि।

=टगर्दन, हाथ, कंधे, पीठ की मांसपेशियों में तनाव व दर्द।

=टसिर दर्द व कभी-कभी चक्कर आना।

=टकमर दर्द, गर्दन दर्द (जो बढ़कर सरवाईकल की समस्या बन जाती है)।

संभावति कारण

कुछ महत्वपूर्ण कारण हैं-

=घर या ऑफिस कार्य के साथ कंप्यूटर गेम खेलने या चैटिंग के दौरान लंबे समय तक कंप्यूटर स्क्रीन के सामने बैठना।

=अनुचित शारीरिक स्थिति, कंप्यूटर व आंखों के बीच अपर्याप्त दूरी, अत्यधिक चमक व प्रकाश।

=कंप्यूटर स्क्रीन को अपलक देखते रहना (बिना पलक झपके लंबे समय तक देखना)

=आंखों की उचित देखभाल व नियमित जांच का अभाव।

=पर्याप्त नींद का अभाव आदि।

समाधान हेतु अनुसंधान आधारित योग

योगाभ्यास उपरोक्त समस्याओं का प्रबंधन कर अच्छा स्वास्थ्य व मनोवैज्ञानिक प्रसन्नता प्रदान करने में सक्षम है। कुछ निम्नलिखित यौगिक प्रयोग दिये जा रहे हैं जिनका प्रयोग कर हर कंप्यूटर पर कार्य करने वाला बनायेगा अपने आप को निरोगी:

=पलक झपकने का अभ्यास (1 मिनट)।

=आंखों के विशेष व्यायाम (3 मिनट): इसमें सीधे बैठकर आंखों से दोनों ओर अधिकतम दूरी तक देखना (अंगूठे का सहारा लेकर यह अभ्यास किया जा सकता है)। इसमें केन्द्र में श्वास छोडऩा व पुन: केन्द्र में वापस आने पर श्वास लेना प्रमुख है।

=अंगूठे को वस्तु मानकर अधिकतम ऊपर व नीचे देखना। यह ऊपरी व निचली आईबॉल की मांसपेशियों में संतुलन बनाता है।

=चक्राकार देखने का अभ्यास (घड़ी की सुई की दिशा में तथा विपरीत दिशा में देखना)।

=हाथ, गर्दन, कंधे, कमर से संबधित सूक्ष्म व्यायाम करना (6 मिनट)

=आसन: 10-15 मिनट तक व्रजासन या पदमासन में सीधे बैठने के अभ्यास के साथ-साथ ताड़ासन, तिर्यक ताड़ासन, कटि चक्रासन, गौमुखासन, उष्ट्रासन, मत्स्येन्द्र्रासन, योगमुद्रा, शशकासन, भुंजगासन, मकरासन का अभ्यास करना।

=प्राणायाम: (10-15 मिनट तक) भस्त्रिका, कपालभाति (1 सेकेण्ड में 1 बार के अनुसार) व अनुलोम-विलोम, उद्गीथ का अभ्यास।

=त्राटक (3-5 मिनट) अंगूठे के सहारे या मोमबत्ती/दीपक की लौ को अपलक देखने का अभ्यास।

=शिशिलीकरण अभ्यास (10 मिनट) इसके अंतर्गत श्वासों पर ध्यान, शवासन, ऊं  का उच्चारण व इसके कंपन को प्रभावित अंगों में महसूस करने का अभ्यास करना।

अन्य विशेष यौगिक प्रयोग

=प्रत्येक कंप्यूटर प्रयोगकर्ता प्रतिदिन ऑफिस का काम समाप्त करके आंखों के व्यायाम, जोड़ों के लिए सूक्ष्म व्यायाम, भुजंगासान, मकरासन का अभ्यास कर सकते हैं।

=योगऋषि पूज्य स्वामी जी की डीवीडी के माध्यम से भी आप नई समस्याओं से निजात पा सकते हैं।

=काम करते वक्त एक नियमित अंतराल पर थोड़ा विराम लेना चाहिए, जिससे आंखों व अन्य मांसपेशियों का तनाव कम हो सके। कम से कम प्रत्येक 2 घंटे बाद 5 मिनट का विराम अवश्य लें।

=इस समय को टहलने या हरियाली देखने में लगाया जा सकता है। विजुअल काउंसिल ऑफ अमेरिका ने विराम के लिए 20-20-20 का नियम सुझाया है जिसका अर्थ है कि आप प्रत्येक 20 मिनट बाद 20 सेकेंड का विराम लें तथा उस समय में 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को देखें।

=कुछ लोग अपने कार्यों में इतना डूब जाते हैं कि वे कई बार लंबे समय तक पलक भी नहीं झपकाते, जबकि पलक झपकाना आंखों के स्वास्थ्य के लिए बहुत आवश्यक है। यह शुष्कता व जलन से आंखों की रक्षा करता है।

=अपनी कार्य अवधि में 2-3 बार आंखों को शीतल व स्वच्छ जल से धोएं, पर ध्यान रखें जल बर्बाद न हो। 3-4 बार दोनों हथेलियों को आपस में रगड़कर, उष्मा हथेलियों को कप जैसी आकृति बनाकर आंखों पर रखें। इस उष्मा से आंखों को ऊर्जा व शिथिलता मिलती है।

=अगर आंखों में जलन आदि की शिकायत रहती है, तो चिकित्सक की सलाह से पतंजलि आई ड्रॉप ‘दृष्टिÓ का प्रयोग भी लाभकारी होगा। यह आंखों की सफाई करता है तथा नेत्र ज्योति बढ़ाता है।

=आखों के आसपास जैसे दोंनों भौहों के मध्य में, आखों के दोनों किनारों पर कुछ महत्वपूर्ण बिन्दु हैं, जिन पर दबाव डालकर आंखों को आवश्यक तनाव से बचाया जा सकता है। इस हेतु कुशल एक्यूप्रेशर थेरेपिस्ट से सलाह लें। कंधे व गर्दन की मांसपेशियों में तनाव को कम करने में योग के साथ-साथ एक्यूप्रेशर व फिजियोथेरेपी भी लाभप्रद है।

=आप अपने आहार में हरी शाक-सब्जी, आंवला, आंजीर, बादाम शामिल कर सकते हैं।

=प्रतिदिन 8-10 ग्लास स्वच्छ जल का सेवन करें तथा 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लें।

विशेष सावधानियां:

=जिन्हें नेत्र, सिर या सर्वाइकल संबंधी चिरकालिक समस्या है, वे योग चिकित्सक की सलाह से उनके निर्देशन में ही योग अभ्यास करें।

=योग अभ्यास के अलावा कुछ अन्य महत्वपूर्ण सुझाव जिनका प्रत्येक कम्प्यूटर प्रयोगकर्ताओं को पालन करना चाहिए:

=जो लोग लंबे समय तक कम्प्यूटर, इंटरनेट का प्रयोग करते हैं या जिनका पेशा कम्प्यूटर  से संबंधित है, उन्हें चिकित्सक के परामर्श से ए.आर (एंटी रिफ्लेक्टिंग) ग्लास लगाना चाहिए या फिर कंप्यूटर की स्क्रीन को ऐसा बना देना चाहिए। इसके साथ ही आंखों की नियमित जांच (कम से कम वर्ष में 1 बार)किसी नेत्र विशेषज्ञ से करानी चााहिए।

=पुराने मॉडल के कंप्यूटर की जगह एलसीडी स्क्रीन का उपयोग आंखों के लिए बेहतर है।

=ऑफिस या घर जहां भी आप कार्य करते हैं, वहां की प्रकाश व्यवस्था समुचित होनी चाहिए, साथ ही कंप्यूटर की भी चमक उसी के अनुसार होनी चाहिए। तीव्र प्रकाश या सूर्य की तीव्र रोशनी में कार्य करना अहितकारी होगा।

=अपनी शारीरिक स्थिति को बीच-बीच में ठीक करें। कमर, गर्दन सीधी रखकर बैठें। अपनी कुर्सी को भी नियत ऊंचाई पर स्थित कर कार्य करें। टाइप का कार्य करने वाले कॉपी स्टैण्ड पर रखकर टाइप करें अन्यथा कुछ ही समय में आपकी आंखों को जल आदि की समस्या से रू-ब-रू होना पड़ सकता है।

=अपनी आंखों व कंप्यूटर के मध्य कम से कम 18-24 इंच की दूरी रखें। स्क्रीन पर कुछ पढऩा हो, तो शब्दों का आकार बढ़ाकर  पढ़ें, जिससे आंखों पर अनावश्यक बोझ नहीं होगा।

=कंप्यूटर स्क्रीन व अपने चश्मे की सफाई प्रतिदिन करें।

=अपनी आंखों की देखभाल के लिए लंबे समय तक चैटिंग या कंप्यूटर गेम का प्रयोग न करें। अपनी स्वास्थ्य रक्षा हेतु उपरोक्त सुझावों में से जितना संभव हो, उसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें क्योंकि इससे सबसे ज्यादा लाभन्वित आप ही होंगे।

                साभार: योग संदेश

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