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अब अपनों के निशाने पर वसुंधरा सरकार

अब अपनों के निशाने पर वसुंधरा सरकार

राजस्थान की राजनीति अजीब करवट ले रही है, जिसके नतीजे भावी सत्ता समीकरण बदल सकते हैं। भाजपा की वसुंधरा राजे सरकार को विपक्ष के साथ-साथ अपनों के हमलों को झेलना मुश्किल हो रहा है। कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं की एकजुटता के प्रयासों के चलते एक तरफ  पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की खुली चेतावनी तो दूसरी तरफ भाजपा के कद्दावर नेता वरिष्ठ विधायक घनश्याम तिवाड़ी का सत्ता एवं संगठन के खिलाफ  आक्रामक रवैया तो वही सत्ता के संघर्ष में तीसरे विकल्प को नये परिप्रेक्ष्य में तलाशा जा रहा है। चौपट हो रही कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष के निशाने पर आयी सरकार के इकबाल पर भी सवालिया निशान लग रहे हैं। जब मंत्रियों को पार्टी कार्यकत्ताओं से यह फीडबैक मिलता है कि अधिकारी उनकी नहीं सुनते और तुर्रा यह कि जिलों के दौरे तथा गांवों में रात्रि विश्राम के संबंध में मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशे की जिला कलेक्टरों द्वारा परवाह नहीं करने की प्रवृति बढ़ रही है। वहीं सत्ता सुख में कार्यकर्ताओं की अपेक्षित सहभागिता के अभाव से उपजा असंतोष आग में घी बन रहा है।

कांग्रेस नेताओं को झूठे मुकदमों मे फंसाने का आरोप लगाते हुए गहलोत ने वसुंधरा मंत्रिमंडल के साथ प्रशासन व पुलिस अफसरों को सत्ता परिवर्तन पर अंजाम भुगतने की चेतावनी देकर अपनी मंशा जता दी है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर मीडिया से बातचीत में उन्होंने यहां तक कहा कि राजनीतिक रूप से विद्वेष की भावना से काम करने की परंपरा भाजपा नेताओं मुख्यमंत्री एवं मंत्रियों के साथ अधिकारियों के लिए घातक सिद्ध होगी। फिर सरकार बदलने पर पिछली सरकार के कार्यकाल के मुकदमें खोले जायेंगे। कानून को अपना काम करने देना चाहिए और किसी भी स्तर पर तफ्तीश में हस्तक्षेप नहीं होना चाहिए। गलती पर सजा से किसी को ऐतराज नहीं होगा। गहलोत की यह शिकायत है कि बदले की भावना से चुन-चुनकर कांग्रेस नेताओं को झूठे मुकदमों में फंसाया जा रहा है। इस संबंध में उन्होंने पूर्व मंत्री शांति धारीवाल बाड़मेर से विधायक मेवाराम जैन तथा जोधपुर विकास प्राधिकरण के पूर्व चेयरमैन राजेन्द्र सोलंकी का नाम गिनाया। जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जमीन के पट्टे जारी किए जाने के प्रकरण में पूर्व आईएएसजीएस संधु की गिरफ्तारी से पहले पूर्व मंत्री शांति धारीवाल से पूछताछ हो चुकी है। गहलोत के नजदीकी सोलंकी के खिलाफ वित्तीय अनियमितताओं तथा निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के मामले हैं। सोलंकी के कार्यकाल की गड़बडिय़ों पर पर्दा डालने संबंधी प्रकरण में जोधपुर के भाजपा नेताओं की कथित गुटबाजी में एक अधिकारी को बली का बकरा बनाने का प्रयास काफी चर्चित रहा। मुख्यमंत्री के स्तर पर मामला पहुंचने पर अधिकारी की बहाली संभव हो सकी। हालांकि गहलोत का दावा है कि प्रदेश के इतिहास में आज तक बदले की राजनीति की परंपरा नहीं रही। गौरतलब है कि दूसरी बार शासन सत्ता में आने पर खुद गहलोत ने वसुंधरा सरकार के खिलाफ माथुर में जांच आयोग बैठाई, लेकिन उच्चतम न्यायालय ने इस आयोग के गठन को गलत माना था।

प्रदेश में ऐतिहासिक बहुमत से दूसरी बार शासन सत्ता की बागडोर संभालने वाली मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का इस बार भाजपा के कद्दावर नेता घनश्याम तिवाड़ी से छत्तीस का आकड़ा यथावत है। सत्ता एवं संगठन से अलग-थलग तिवाड़ी ने विधानसभा के भीतर तथा बाहर सरकार को कठघरे में खड़ा करने का कोई मौका नहीं गवाया। सामाजिक समरसत्ता सहित वंचित वर्ग को आरक्षण देकर न्याय दिलाने की मुहिम में जुटे तिवाड़ी ने भाजपा से अलग-थलग किए जा रहे मूल कार्यकत्र्ताओं को दीनदयाल वाहिनी के बैनर पर संगठित किया है। जनसंघ के संस्थापक श्यामाप्रसाद मुखर्जी के जन्म दिन पर 6 जुलाई को वाहिनी के प्रथम पदाधिकारी सम्मेलन के बहाने उन्होंने शक्ति प्रदर्शन के साथ अपने भावी इरादे जताकर सत्ता एवं संगठन को सकते में डाल दिया। भाजपा के अनेक पूर्व जिलाध्याक्षों, अन्य पदाधिकारियों, पूर्व विधायकों, जनप्रतिनिधियों और प्रमुख कार्यकत्र्ताओं का मंच पर परिचय कराया गया। तीस जिलों और लगभग 125 विधानसभा क्षेत्रों के लिए दीनदयाल वाहिनी की जिला एवं मंडल कार्यकारिणी की घोषणा की गई। सम्मेलन का माहौल देखते ही बनता था। आजादी एवं आपातकाल के संघर्ष और भाजपा के उदय की चर्चा करते हुए जयपुर इकाई के अध्यक्ष विमल अग्रवाल ने आरोप लगाया कि भाजपा के निष्ठावान तथा स्वाभिमानी कार्यकत्र्ताओं को चुन-चुनकर किनारे किया जा रहा है। भ्रष्टाचार एवं तानाशाही के खिलाफ दीनदयाल वाहिनी ने अपनी आवाज बुलंद की है। इस पर खचाखच भरे बिड़ला सभागार में जोशीले कार्यकत्ताओं ने तिवाड़ी जैसे मुख्यमंत्री के नारे लगाये।

कई उदाहरण देकर तिवाड़ी ने कहा कि जब राजनीतिक दलों में आंतरिक लोकतंत्र ठीक ढंग से काम नहीं करता और प्रदेशों में स्वाभाविक नेतृत्व की अनदेखी कर नेता थोपे जाते हैं तब पार्टियों में विखंडन होता है तथा क्षेत्रीय दल उभरते हैं और उनका प्रभाव बढ़ता है। भाजपा कांग्रेस की तुलना में आज भी क्षेत्रीय दलों का दबदबा है। धौलपुर तथा झालावाड़ जिले से आये कार्यकर्ताओ के परिचय के समय तिवाड़ी ने वसुंधरा राजे का नाम लिए बिना रोचक अंदाज में सरकार के कामकाज पर टिप्पणी की। आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उन्होंने कहा कि तब थर्ड फ्रंट बन पाएगा या नहीं,  लेकिन हमने फ्रंट खोला तो वह फस्ट फ्रंट ही होगा। तिवाड़ी ने सभी 200 विधानसभा क्षेत्रों के लिए युवा उम्मीदवार तैयार किए जाने की बात भी कही। उन्होंने भाजपा संगठन को भी नहीं बख्शा और कहा कि प्रदेश कार्यकारिणी अब तक गठित नहीं हो सकी तथा तीन माह में होने वाली बैठक साल दर साल टलती रही। पार्टी में विचारधारा को ताक पर रख दिया गया है तथा किसी के बोलने पर जुबान खींच ली जाती है। तिवाड़ी ने यह कहकर पार्टी नेतृत्व को किंकर्तव्यमूढ़ कर दिया कि जब भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ तथा विद्यार्थी परिषद सरकार का विरोध करते हैं तब हमारा विरोध कैसे जायज नहीं है। भाजपा संगठन तिवाड़ी के इस सम्मेलन पर चुप्पी साधे’ हुए है। सम्मेलन में ”आरक्षण- मेरी भूमिका’’ पर तिवाड़ी की पुस्तक का लोकार्पण किया गया। दिलचस्प तथ्य यह है कि घनश्याम तिवाड़ी तथा दीनदयाल वाहिनी का होर्डिंग लगाने पर भाजपा प्रदेश में जन सुनवाई करने आए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेन्द्र राठौड़ ने वाहिनी के प्रदेश सचिव तथा घनश्याम तिवाड़ी के पुत्र अखिलेश तिवाड़ी द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा सरकार पर लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर इतना ही कहा कि इस प्रकार के प्रकरण में टिप्पणी करना उचित नहीं है। अलबता अपनी बात रखना गलत नहीं हैं, लेकिन विचार प्रकट करने में संयमित होना जरूरी है।

प्रदेश की राजनीति में तिवाड़ी के नए तेवर की प्रतिक्रिया में भाजपा कांग्रेस के बाद अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने में अग्रणी बहुजन समाज पार्टी में सियासी हलचल शुरू हो गई है। पिछले विधानसभा चुनाव में बसपा के सभी 6 विधायकों ने कांग्रेस की अल्पमत सरकार को सत्तारूढ़ कराने में मदद की थी। इस बार बसपा के 3 विधायक चुने गए हैं। बसपा के प्रदेश अध्यक्ष भगवान सिंह बाबा के अनुसार वरिष्ठ पदाधिकारी विधानसभा क्षेत्रों का संघन दौरा कर संगठन को मजबूत करने के साथ चुनाव की योजनाबद्ध रणनीति बनाएंगे। इसके साथ निष्क्रिय सदस्यों एवं पदाधिकारियों की छटनी की जाएगी। अभी वामपंथी दलों का विधानसभा में प्रतिनिधित्व नहीं है। जमींदारा पार्टी की दो महिला विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में भाजपा का साथ दिया। केन्द्र में मोदी सरकार को समर्थन दे रही राजपा के चार विधायक डा. किरोड़ी लाल मीणा की अगुवाई में वसुंधरा सरकार के मुखर विरोधी हैं। सात निर्दलियों में भाजपा और कांग्रेस के आधे-आधे समर्थक है।

जुलाई के प्रथम सप्ताह में जयपुर में प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी की बैठक में ब्लॉक स्तर पर पार्टी की लगातार चार मीटिंगों में अनुपस्थित तथा निष्क्रिय पदाधिकारियों की छुट्टी किए जाने का अहम निर्णय लिया गया है। ऐसे पदाधिकारियों को चिन्हित कर कार्रवाई करने की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की होगी। इस पर अमल भी शुरू हो गया है। युवा कांग्रेस के ऐसे तेरह पदाधिकारियों को हटा दिया गया है। पार्टी संगठन को चुस्त दुरूस्त करने के लिए जिला कार्यकारिणी के गठन या बदलाव का कैलेंडर बनाया गया है। विधानसभा वार बूथ कमेटियों के गठन के साथ अग्रिम संगठनों के कार्यकत्र्ताओं के संभागीय सम्मेलन तथा प्रांतीय प्रशिक्षण शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। गुजरात की तर्ज पर विधानसभा चुनाव के साल भर पहले पार्टी प्रत्याशियों का चयन किया जाना है।

06-08-2016

राजनीति से सन्यास की घोषणा तथा पार्टी हाईकमान से बातचीत के बाद पुन: लौटने के बीच के घटनाक्रम पर कार्यकारिणी की बैठक तथा मीडिया से बातचीत में गुरूदास कामत का दर्द भी झलक आया। सोशल मीडिया सहित नेताओं की बयानबाजी के संदर्भ में कामत का कहना था कि इस दौरान उन्होंने बहुत कुछ राजनीति सीखी। वह जिन लोगों को अपना समझते थे और अच्छी सोच रखते थे उनके बयान से कड़वी सच्चाई का पता चला। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस बारे में अपने बयान पर सफाई दी और कहा कि अजीत जोगी सहित जिन लोगों ने पार्टी छोड़ी उसी संदर्भ में उन्होंने भावना व्यक्त की थी और कामत ने तो सन्यास लेते समय पार्टी के खिलाफ कोई बात नहीं कही। गुजरात और राजस्थान में काम करने वाले कामत केन्द्रीय लीडरशिप की गुडबुक में हैं। बहरहाल अगले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता में लाने की खातिर कामत राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के समक्ष प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. सीपी जोशी के आपसी गिले शिकवे दूर कराने की फिराक में हैं। पाटी हाईकमान का यह मानना है कि तीन बार प्रदेश अध्यक्ष और दो बार मुख्यमंत्री रहे अशोक गहलोत की पार्टी कार्यकत्र्ताओं तथा जनता के बीच अनुभवी पकड़ सीपी जोशी की आक्रामक रणनीतियक्त शैली तथा युवा प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट की ऊर्जा के बलबूते सत्ता हासिल की जा सकती है। तीनों प्रमुख नेताओं के मेलजोल से कांग्रेसजनों में अच्छा संदेश जाएगा। कामत तथा कांग्रेस आलाकमान का यह सपना कैसे पूरा हो पाता है यह तो वक्त आने पर ही पता चलेगा।

एक तरफ  भाजपा संगठन में बूथ कमेटियों और मंडल इकाईयों की संख्या दुगनी कर संगठन को मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे है, वहीं प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा की अंदरूनी हालत भी बिल्कुल ठीक है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। आपसी खींचतान के चलते प्रदेश अध्यक्ष अशोक परनामी प्रदेश कार्यकारिणी के गठन की तारीख बढ़ाने को मजबूर है। सभी जिला इकाईयों का गठन भी नहीं हो पाया है। वहीं जनप्रतिनिधियों की आपसी गुटबाजी तथा झगड़े भी सरकार की सिरदर्दी बने हुए हैं। एक दर्जन से अधिक जिलों में संगठन तथा जनप्रतिनिधियों के बीच सार्वजनिक विवाद सुर्खियों में हैं। इतना ही नहीं मंत्रियों तथा विधायकों के बीच भी खींचतान गहराती जा रही है। राजधानी जयपुर से लेकर सभी संभाग मुख्यालय, शेखावाटी, हाड़ौती, अंचल, मेवाड़ तक के जिलों में विवाद इतना बढ़ गया है कि सभी नेताओं को एक जाजम पर बिठाना टेड़ी खीर बन गई है। उधर घनश्याम तिवाड़ी के ताल ठोकने से सत्ता व संगठन से खफा कई नेता उनके सम्पर्क में है।

अब लाख टके का सवाल यह है कि राज्य विधानसभा के 2018 में होने वाले चुनाव में सत्तारूढ़ भाजपा के नसीब में लगातार दूसरी जीत होगी या पांच-पांच साल के अन्तराल से कांग्रेस का हाथ कुर्सी थामेगा अथवा इन दोनों दलों को दरकिनार करते हुए तीसरा विकल्प शासन सत्ता पर काबिज होने में सफलता हासिल कर पाएगा। इसके लिए अभी लंबा इंतजार करना होगा।

जयपुर से गुलाब बत्रा

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