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वाह अखिलेश

वाह अखिलेश

मुलायम सिंह यादव गदगद हैं। उन्हें भरोसा हो गया है कि बेटे अखिलेश न केवल विनम्र, सहज दिखते हैं, बल्कि चतुर सुजान भी हैं। जिस तरीके से अखिलेश ने चचा शिवपाल को किनारे लगाकर पार्टी पर कब्जा जमाया, वह काबिले तारीफ हैं। वे अमर, बेनी, राम गोपाल को भी साधने में सफल रहे। सबसे बढ़कर तो यह कि  अखिलेश ने अपनी छवि भी चमकाकर रखी है।



मंद पड़ी माया


06-08-2016

बसपा सुप्रीमो मायावती कुछ महीने पहले तक यूपी में नंबर वन चल रही थीं। अब हेडकाउंट कर रही हैं। माया को उन चेहरों की समय से पहले तलाश है जो बसपा छोड़ कर जाने वाले हैं। बताते हैं जब से स्वामी प्रसाद मौर्य छोड़कर गए हैं, माया लगातार तंग हैं। उधर कुछ बसपाई भी मौका देखकर डराने में लग गए हैं। उन्हें भी लग रहा है कि आयरन लेडी का थोड़ा पिघलना जरूरी है।



अब तो सुषमा जी


06-08-2016

जब से स्मृति ईरानी के पीएम ने पर कतर दिये हैं, अचानक सुषमा जी का ग्राफ चढ़ गया है। वे अब न केवल सरकार और राजनीतिक मामलों का निर्णय लेने वाली कमेटियों में हैं, बल्कि उनका ओहदा भी बढ़ गया है। खबर  है कि मोदी जी भी उनसे ज्यादा सलाह लेने लगे हैं। वैसे भी सुषमा जी काफी अनुभवी हैं। भारत-पाक-नेपाल  समेत अन्य पड़ोसी देशों और विदेशी मसलों पर पीएम को ताकीद करती रही हैं। कहावत है, देर आयद, दुरुस्त आयद।



नया सिरदर्द


06-08-2016

रघुराम राजन सरकार के नए सिरदर्द बन गए हैं। सुब्रह्मण्यम स्वामी ने इतना भड़का दिया है कि राजन अपने कार्यकाल के कुछ बचे-खुचे दिनों में भड़काऊ बयान देते जा रहे हैं। सरकार का दर्द यह है कि वह संवैधानिक पद पर बैठे हैं। अत: कुछ कर भी नहीं सकती। उधर कांग्रेस एक बार फिर मानसून सत्र में राजन को मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है।



क्या स्मृति जी


06-08-2016

आजकल चित भी पट करने में लगी हैं। जब से एचआरडी से खाली हुई हैं, काफी खुश होने का दिखावा करने में लगी हैं। एक भाजपाई नेता टकरा गए तो उन्हें बताने लगी कि कितना काम करना पड़ता था। ऊपर से संघ और शाह की भी सुननी पड़ती थी।  अब तो वे अपने निजी जीवन के लिए भी समय निकाल पा रही हैं। लेकिन स्मृति जी मुस्कान में भी दर्द नहीं छिपा पा रही हैं।



आंटी नंबर-1


06-08-2016

कॉमनवेल्थ घोटाले से लेकर आरोप चाहे जितने लगे, लेकिन शीला आंटी नंबर-1 हैं। 15 साल की दिल्ली की सीएम को कांग्रेस ने यूपी में उतार दिया है। जब आंटी मैदान में हैं तो केजरी गुरु ने चुप्पी साध ली है। बताते हैं कि कांग्रेस को असली डर केजरी गुरु से ही था, लेकिन उनके निशाने पर केन्द्र सरकार के होने से कांग्रेस आलाकमान ने राहत की सांस ली है।



अच्छे दिन!


06-08-2016

18 जुलाई से शुरू हुए मानसून सत्र से पहले सरकार ने सबकुछ साध लिया है। जहां विवादित चेहरों को ढंक दिया, वहीं विवाद का कारण बनने वाले मंत्री भी साइडलाइन हैं। वेंकैया की जगह अनंत कुमार फ्लोर प्रबंधन में जुटा हैं। राज्यसभा में भी नंबर बढ़ गया। मानसून भी आ गया है। अब तो मोदी जी को उम्मीद है कि जल्द अच्छे दिन भी आ जाएंगे।



पीके की चल पड़ी


06-08-2016

कांग्रेस अब पीके का लोहा मानने लगी है। माने भी क्यों न। उत्तर प्रदेश में बेमानी हो चुकी कांग्रेस जो चर्चा में आ गई। चर्चा में ही नहीं आ गई, बल्कि जोरदार फाइट का दावा भी करने लगी है। और तो और, राहुल बाबा पर अटैक भी न के बराबर हो रहे हैं। वरना राजनीतिक नतीजा चाहे जो हो, निशाने पर बाबा ही रहते थे। बाकी जो भी है, सब जानते हैं।


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