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जीएसटी के मायने

जीएसटी के मायने

पिछले कई सालों का इंतजार आखिरकार खत्म होने की कगार पर आ ही गया। सालों से कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस की आपस में होती धींगामुश्ती के बीच अटका जीएसटी बिल आखिरकार राज्यसभा में पास हो ही गया।  संसद के मानसून सत्र में जीएसटी पास कराने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील रंग लाई है और सदन में 203 वोटों के साथ जीएसटी बिल को पास कर दिया गया है।  जीएसटी के लिए संविधान संशोधन बिल के खिलाफ एक भी वोट नहीं पड़ा यानी पूर्ण बहुमत से जीएसटी बिल को पास कर दिया गया है।  राज्यसभा में कांग्रेस का समर्थन मिलने के बाद जीएसटी यानी वस्तु और सेवा कर लागू करने के लिए जरूरी संविधान संशोधन विधेयक पर संसद की मुहर लगभग लग चुकी है। 1991 के उदारीकरण के बाद  यह अब तक सबसे कड़ा आर्थिक सुधार है, क्योंकि इससे पूरे देश में एक समान कर लगेगा। राज्यसभा से ये बिल पास हो जाने के बाद अब केंद्र सरकार को लोकसभा में सहमति जुटानी होगी। इस बिल के राज्यसभा  से पास होने के बाद भी कई तरह की विधायि प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी और नियमों में बदलाव करने होंगे तभी जा कर अगले साल 1 अप्रैल से जीएसटी लागू हो सकने की उम्मीद होगी।

क्या है जीएसटी

गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) एक अप्रत्यक्ष कर यानी इंडायरेक्ट टैक्स है। जीएसटी के तहत वस्तुओं और सेवाओं पर एक समान टैक्स लगाया जाता है। जहां  जीएसटी लागू नहीं होते हैं, वहां वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लगाए जाते हैं। सरकार अगर इस बिल को 2016 से लागू कर देती है तो हर सामान और हर सेवा पर सिर्फ एक टैक्स लगेगा यानी अलग-अलग टैक्स जैसे वैट, एक्साइज और सर्विस टैक्स की जगह सिर्फ एक ही टैक्स लगेगा।

कैसे काम करेगा जीएसटी

जीएसटी में तीन अंग होंगे — केंद्रीय जीएसटी, राज्य जीएसटी और इंटीग्रेटेड जीएसटी। केंद्रीय और इंटीग्रेटेड जीएसटी केंद्र लागू करेगा, जबकि राज्य जीएसटी राज्य सरकारें लागू करेंगी।

भारतीय संविधान के अनुसार  केंद्र और राज्य सरकारें अपने हिसाब से वस्तुओं और सेवाओं पर अलग-अलग टैक्स लगा सकती हैं। इसे ऐसे समझा जाए की अगर कोई कंपनी या कारखाना एक राज्य में अपने उत्पाद बनाकर दूसरे राज्य में बेचता है तो उसे अलग-अलग  तरह के टैक्स दोनों राज्यों को चुकाने पड़ते हैं जिससे उत्पाद की कीमत बढ़ जाती है। जाहिर तौर पर जीएसटी लागू होने से उत्पादों की कीमत कम होगी। अगर नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड रिसर्च की एक रिपोर्ट की माने तो  जीएसटी लागू होने से देश की जीडीपी में एक से पौने दो फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है।

14-08-2016

 किन उत्पादों पर लागू होगा जीएसटी

2014 में पास संविधान के 122वें संशोधन के मुताबिक जीएसटी सभी तरह की सेवाओं और वस्तुओं/उत्पादों पर लागू होगा। सिर्फ एल्कोहल यानी शराब इस टैक्स से बाहर होगी। पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और रसोई गैस को भी फिलहाल जीएसटी से बाहर रखने का फैसला किया गया है। मतलब केंद्र और राज्य सरकारें दोनों मिलकर उस पर टैक्स लगाती रहेंगी।

PAGE 24-25हालांकि, बहुत सारे लोगों के मन में यह कौतूहल भी है की अगर जीएसटी भी वैट की तरह है तो फिर एक नयी चीज की क्या जरुरत है? लेकिन गौरतलब यह है कि जीएसटी भी वैट जैसा ही टैक्स है, लेकिन इसके लागू होने से कई और तरह के टैक्स नहीं लगेंगे। इतना ही नहीं जीएसटी लागू होने से अभी लगने वाले वैट और सेनवेट दोनों खत्म हो जाएंगे। इस संवैधानिक संशोधन के लागू होने से सबसे बड़ा फायदा आम आदमी को होगा। पूरे देश में किसी भी सामान को खरीदने के लिए एक ही टैक्स चुकाना होगा। यानी पूरे देश में किसी भी सामान की कीमत एक ही रहेगी। इसके लागू होने से कोई भी सामान किसी भी राज्य में एक ही रेट पर मिलेगा।

इसके लागू होने से अक्सर होने वाली कर विवादों से छुटकारा भी मिलेगा। साथ ही इससे अलग-अलग टैक्स देने के झंझट से भी मुक्ति मिल जायेगी और ट्रांसपेरेंसी को बढ़ावा मिलेगा। अक्सर देखा जाता है की कर की वसूली करते समय कर विभाग के अधिकारी हेरा-फेरी में लगे रहते है, इस संसोधन के लागू होने से इसकी संभावना भी जाति रहेगी। एक ही व्यक्ति या संस्था पर कई बार टैक्स लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, सिर्फ इसी टैक्स से सारे टैक्स वसूल कर लिए जाएंगे। इसके अलावा जहां कई राज्यों में राजस्व बढ़ेगा तो कई जगह कीमतों में कमी भी होगी।

साथ ही इसके लागू होने के बाद राज्यों को मिलने वाला वैट, मनोरंजन कर, लग्जरी टैक्स, लॉटरी टैक्स, एंट्री टैक्स आदि भी खत्म हो जाएंगे। फिलहाल जो सामान खरीदते समय लोगों को उस पर 30-35 प्रतिशत टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता है वो भी घटकर 20-25 प्रतिशत पर आ जाने की संभावना है। जीएसटी लागू होने पर कंपनियों और व्यापारियों को भी फायदा होगा। सामान एक जगह से दूसरी जगह ले जाने में कोई दिक्कत नहीं होगी। जब सामान बनाने की लागत घटेगी तो इससे सामान सस्ता भी होगा।

राज्यों का डर

जीएसटी लागू होने से केंद्र को तो फायदा होगा, लेकिन राज्यों को इस बात का डर था कि इससे उन्हें नुकसान होगा, क्योंकि इसके बाद वे तमाम तरह के टैक्स नहीं वसूल  पाएंगे जिससे उनकी कमाई कम हो जाएगी। ध्यान देने की बात है कि पेट्रोल व डीजल के करों से तो कई राज्यों का आधा बजट चलता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए केंद्र ने राज्यों को राहत देते हुए मंजूरी दे दी है कि वे इन वस्तुओं पर शुरुआती सालों में टैक्स लेते रहें। राज्यों का जो भी नुकसान होगा, केंद्र उसकी भरपाई पांच साल तक करेगा।

पूरी दुनिया में यह मानी हुई बात है की जब-जब किसी देश ने जीएसटी जैसे कानून लागू करने की कोशिश की है तब-तब  वहां महंगाई बढ़ी है और भारत में भी ऐसा होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।  एक ऐसे समय में जब सरकार के स्तर पर होने वाले हर बदलाव को सुधार का नाम दिया जाने लगा है, जीएसटी एक वास्तविक सुधार के रूप में दिखता है। यह आर्थिक सुधारों के लिए छटपटाती हमारी अर्थव्यवस्था के लिए मानो एक उम्मीद की किरण सरीखी है। इससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और क्षमता का विकास होगा। अगर उपलब्ध आंकड़ों की माने तो जीएसटी के लागू होने से हमारी जीडीपी में एक से दो प्रतिशत की वृद्धि के संकेत मिलते हैं। जीएसटी एक युगांतकारी सुधार है जो न सिर्फ सरकार के राजस्व में वृद्धि करेगा वरन छोटे और मंझोले कारोबारियों के लिए एक बड़ा बाजार तैयार करेगा, जिससे न सिर्फ इन कारोबारियों को बल्कि उपभोक्ताओं को भी फायदा मिलेगा।  कुछ लोग इस बिल में खामियां निकल सकते हैं, लेकिन यह भी सच्चाई है की एक कम अच्छा जीएसटी, जीएसटी न होने से तो बेहतर ही है। इस बिल के पास होने से इसके लागू होने की संभावनाएं बढ़ गयी हैं, जिससे देश में बदलाव की नयी बयार बहेगी और देश में एक सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेगा।

नीलाभ कृष्ण

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