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अभ्यास

अभ्यास

आज के आधुनिक समाज में मनुष्य अपनी परिस्थितियों को बेहतरीन बनाने का प्रयास करता है। हम जितना सभ्य होते हैं, मन की शांति के लिये उतने अधिक कार्य करते हैं। कुछ कार्य ऐसे भी होते हैं जो करके मन में कुछ क्षण के लिये खुशी भी महसूस करते हैं। लेकिन यथा पूर्वम तथा परम, फिर मन भयक्रान्त हो जाता है। शान्ति को अधिक समय के लिए हम अपने जीवन में संभाल कर नहीं रख पाते हैं। शान्ति पाने के लिये हम कभी-कभी अनेक आध्यात्मिक मार्गों को अपनाते हैं, जैसे कि भजन करना, पूजा करना, पुराणों, ग्रंथों आदि का पठन करना। आध्यात्मिक दिशा अपनाना अपने आप में एक महान बात है। लेकिन आध्यात्मिक मार्ग को हम कितने अच्छे से समझते हैं, वह महत्व रखता है। जैसे विद्यार्थी अनेक प्रकार के होते हैं। हम अच्छे नम्बरों से पास होने वाले विद्यार्थियों की बात करें या उत्तम विद्यार्थियों की बात करें तो उत्तम विद्यार्थी भी एक जैसे नहीं होते हैं। कुछ विद्यार्थी एक ही बार में अपने विषयों को समझ लेते हैं। लेकिन कुछ विद्यार्थी उसी चीज को समझने में वक्त लगाते हैं। लेकिन बार-बार अध्ययन और अभ्यास करने से उन्हें चीजें समझ में आ जाती हैं और वह भी अच्छे अंकों से पास हो जाते हैं। हममें से कितने लोग होते हैं जो जीवन के ज्ञान को एक ही बार में समझ नहीं पाते हैं। लेकिन, अभ्यास के द्वारा ना केवल वह समझ सकते हैं बल्कि जीवन का आनन्द भी लेने लगते हैं।

हम जो भी प्रवचन और भजन सुनते हैं वह केवल हमारे लिये मनोरंजन मात्र बन कर रह जाते हैं। सुनने अथवा पढऩे के समय ही उसके विषय में सोचते हैं। लेकिन जब जीवन में लागू करने की बात आती हैं तो हम पीछे हट जाते हैं। ऐसा नहीं है कि हमारे जीवन में ऐसे मौके नहीं आते, लेकिन हम कोई भी बहाना बना कर दूसरा सहज रास्ता अपनाते हैं। कभी-कभी तो हम मुश्किल समय में कुछ नहीं करते बल्कि हताश होकर बैठ जाते हैं। जब तक हम प्रैक्टिकल नहीं होते, तब तक किसी भी विषय पर हम दक्षता हासिल नहीं कर पाते हैं। हमारे जीवन में आने वाली प्रतिकूल अवस्था से हमें जो ज्ञान मिलता है वह हमें बहुत कुछ सीखाता है। जिन अच्छे विचारों से हम ज्ञान लेते हैं, उन विचारों का अभ्यास करना जरूरी है। नियमित हमें कुछ विचारों के प्रयोग की आवश्यकता है, जैसे कि हम धैर्य का महत्व गीता में सुनते हैं। लेकिन जब हमारे जीवन में कोई भी ऐसी घटना घटित होती है जो हमारे प्रतिकूल होती है तो हम अपना धैर्य खो बैठते हैं। धैर्यहीन हो कर हम दुखी हो जाते हैं। सेवा एक महान गुण हैं, लेकिन किसी की सेवा करने से पहले हम अपनी सुविधा को ध्यान में रखते हैं। अपनी इच्छा से किसी के लिये करने वाले उपकार को हम सेवा नहीं कह सकते हैं। हमारे सामने आने वाले हर जरूरतमंद व्यक्ति की जरूरत को अपने सक्षम के अनुसार पूरा करने को हम सेवा कह सकते हैं। इसी प्रकार हमें प्रत्येक व्यक्ति कि आवश्यकता के वक्त उसकी मदद करके अपने अच्छे गुणों के अभ्यास को बनाये रखना चाहिए।

अभ्यास एक ऐसी चीज है जो किसी भी इंसान को किसी भी काम के लिये सक्ष्म बना सकती है। जादूगर का जादू हो या साधू का करिश्मा हो। खेल दिखाने वाले मदारी का खेल हो सब कुछ अभ्यास का ही फल है। तो क्या हम अपने आप को हर परिस्थितियों में खुश रखने का अभ्यास नहीं कर सकते?

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