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पहाड़ों की कहानी निशंक की जुबानी

पहाड़ों की कहानी निशंक की जुबानी

जीवन में घटित होने वाली घटनाएं अकसर हमारे जीवन में कुछ अच्छी या बुरी यादें छोड़ जाती हैं। इसी तरह की कहानियों का संग्रह है पुस्तक ‘कथाएं पहाड़ों की।’ यह पुस्तक उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा लिखी गई है। इस पुस्तक में लेखक ने पहाड़ों पर रहने वाले लोगों की जीवनशैली को छोटी-छोटी कथाओं के माध्यम से दर्शया है। पुस्तक में कथाओं के माध्यम से बताया गया है कि पहाड़ों पर रहने वालों का जीवन जितना सादा और सरल होता है, उतना ही कठिन परिस्थितियों से भी यहां के लोगों को दो-चार होना पड़ता है। ‘निशंक’ ने पार्वत्य प्रदेश के छोटे से गाव में जन्म लेकर और प्रकृति की सुकुमार गोद में पल-बढ़कर यहां के जन-जीवन की बारीकियों को बहुत आत्मीय एवं सचेत भाव से देखा है तथा जैसा कि एक संवेदनशील साहित्यशिल्पी कर सकता था, वैसे ही अपनी रचनाओं में, अत्यन्त प्रभावपूर्ण ढंग से इन परिस्थितियों को उकेरा है। यही कारण है कि उनकी सभी रचनाएं उत्तराखण्ड के जनजीवन, यहा के मनुष्य की पीड़ाओं, सुख-दु:ख और संघर्षों का जीवन्त दस्तावेज हैं। उनमें निरंतर क्षरित होते जा रहे जीवन-मूल्यों को बचाने की तीव्र इच्छा है। निशंक के उपन्यास पाठक को शुरू से अन्त तक अपने में बांधे रखते हैं। इसका कारण उनके लेखन में सहजता है, संवादों या कथोपकथनों की भरमार नहीं है, और न नाटकीयता। इसलिए कह सकते हैं कि ये उपन्यास डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के स्वयं के सरल-सहज, समर्पित और मानव-मूल्यों से आपूरित व्यक्तित्व का आईना हैं।28-08-2016

पुस्तक ‘कथाएं पहाड़ों की’ में लेखक ने पहाड़ों में रहने वाले लोगों के जीवन पर आधारित कुल पचास कहानियों का संग्रह प्रस्तुत किया है। इन्हें भी उन्होंने कुल चार हिस्सों में बांटा है। ‘एक और कहानी’, ‘मील का पत्थर’,  ‘मेरे संकल्प’, ‘टूटते दायरे’। पुस्तक की सभी कहानियां अपने आप में यह व्यक्त करती हैं कि लेखक ने कितनी निकटता से समस्त परिस्थितियों को भांपते हुए इन्हें कहानी का रूप दिया है। कहानियां हमारे जीवन संसार के इन्द्रधनुषी रंगों का सार-संकलन भर ही नहीं होतीं हैं, यह देखे गये, महसूस गिए गये और ताप-सन्ताप का जीवन्त दस्तावेज भी होती हैं। यह हमें सिर्फ गुदगुदाती, सहलाती ही नहीं हैं, बल्कि सीख और संदेश भी देती हैं। हमारा हौसला बढ़ाती हैं और गाहे-बगाहे नये रास्ते भी दिखाती हैं।

कथाएं पहाड़ों की

लेखक    : रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

प्रकाशक             : वाणी प्रकाशन

मूल्य      : ४९५ रु.

पृष्ठ        : २४७

निशंक की कहानियों का भी यही लक्ष्य और उद्देश्य है। निशंक ने कहानियों में साहित्य के इस धर्म को पूरी संवेदना और नैसर्गिकता से निभाने की भरसक कोशिश की है। ताकि उनकी हर रचना जनोन्मुखी व जनसरोकारी हो, और लोक-कल्याणकारी भी हों। इन कहानियों के जरिये निशंक ने आत्मीय, सामाजिक रिश्ते व दायरों से लेकर परिवेश के लिए संवेदना जगायी है। यही पीड़ा समय-समय पर निशंक की कहानियों में अभिव्यक्त भी होती आयी है।

लेखक की सभी कहानियां जहां सरल और सहज भाषाशैली में लिखी गई हैं, वहीं उनमें लोगों की संवेदना , दुख-सुख को भी प्रकट किया गया है। पहाड़ों से ही जुड़े होने के कारण लेखक ने यहां कि समस्त परिस्थितियों को बहुत करीब से समझा है। इसी वजह से उनके अंदर आम आदमी की व्यथा-कथा से जुडऩे की छटपटाहट और उसकी आवाज बनने की अकुलाहट पैदा हुई। इस वजह से उन्होंने आम आदमी की जिंदगी से जुड़े पहलूओं को कहानियों का रूप देते हुए इस संग्रह को पुस्तक का रूप देकर लोगों के सामने प्रस्तुत किया है।

 प्रीति ठाकुर

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